2019 का तूफान..
2019 लोकसभा चुनाव की स्थिति करीब-करीब एकदम स्पष्ट हो चुकी है जिसमें एनडीए 400 के निकट पहुँचने जा रहा है और भाजपा अकेले 350 के आंकड़े को या तो छू सकती है या फिर उसी के आस-पास रहने की उम्मीद है। पिछले लोकसभा चुनावों में तो कांग्रेस और अन्य दलों ने तो संघर्ष भी किया था लेकिन इस बार तो जैसे हथियार ही डाल दिये हैं। कांग्रेस की हालत ये है कि उसके पास कोई स्टार प्रचारक ही नहीं हैं राहुल गांधी क्या कर रहे हैं और क्या कह रहे हैं खुद उन्हीं को पता नहीं। बाकी दलों की भी स्थिति कमोबेश यही है।
2014 के लोकसभा चुनावों की तुलना इस बार स्थिति थोड़ी देर से स्पष्ट हुई है इसके पीछे कारण है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध जो गठबंधन बना उसमे बहुत अधिक अस्थिरता का होना है जो खुद गठबंधन के लिए बहुत घातक साबित होने जा रहा है। वैसे ये स्थिति न सिर्फ राजनीतिक वातावरण को धूमिल करती है राजनीतिक उग्रता को भी बढ़ाती है जो कि साफ-साफ दिख भी रहा है।
2014 में ऐसा नहीं था। उस समय भाजपा विरोधी चुपचाप एक कोने में जा कर बैठ गए थे। इसीलिए राजनीतिक स्थिति शुरू से स्पष्ट थी और पत्थर पर लिखी इबारत की तरह पढ़ा जा सकता था कि मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने जा रहा था। ये इबारत 2013 से ही साफ हो गई थी और मैंने 29 मई 2013 को ही बता दिया था कि भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलने जा है। हालांकि उस समय कोई भी मीडिया वाला किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं दे रहा। सिर्फ मैं अकेला था जिसने बताया था कि भाजपा को 280 से 320 सीटें मिल सकती हैं और मिली 282। लेकिन कांग्रेज़ को मैंने 33 सीटें दीं थीं लेकिन 44 मिल गईं थीं। 2015 दिल्ली विधान सभा चुनाव और 2016 के बिहार विधान सभा चुनाव में भी मैंने सटीकता से कहा था नतीजे चौकाने वाले होंगे और हुआ भी वही।
2017 में कोई मीडिया वाला भाजपा को बहुमत नहीं दे रहा था लेकिन मैंने जनवरी 17 में ही बता दिया था की भाजपा को 320 सीटें मिलने जा रही है जो किसी भी मीडिया के सर्वेक्षण की तुलना में सबसे सटीक था। लेकिन गुजरात,कर्नाटक, मणिपुर, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में मैंने अपना विश्लेषण के आधार पर कोई भी आकलन प्रस्तुत नहीं कर सका था।
2019 के लोकसभा चुनाव के मतदान का पहला चरण प्रारम्भ हो चुका है और पूरे देश की स्थिति लगभग स्पष्ट हो चुकी है। जैसा माहौल है उसके हिसाब से तो ये बिलकुल स्पष्ट दिख रहा है कि हवा पूरी तरह मोदीमय है। हिन्दी क्षेत्र गुजरात, महाराष्ट्र जिसमे लोकसभा की 289 सीटें हैं, में पूरा मोदी लहर है जिसे साफ-साफ महसूस भी किया जा सकता है यहाँ से एनडीए को 235 से 255 सीटें मिलने जा रही हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमांचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से एनडीए को 23 से 28 मिलती दिख रही हैं। दक्षिण तेलगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल से एनडीए को 45 से 52 सीटें मिल सकती हैं। अब बात करते हैं पूरब और पूर्वोत्तर की तो यहा एनडीए 42 से 48 सीटें जीतता दिख रहा है।
तो राष्ट्रीय परिदृश्य पर एनडीए की संख्या 333 से 387 के बीच रह सकती है । वही कांग्रेस और यूपीए के लिए स्थिति बाद से बदतर होती दिख रही है मतलब अकेले कांग्रेस के लिए 44 के आंकड़े को पार कर पाना बहुत मुश्किल दिख रहा है। कांग्रेस के इसी संख्या के आस पास रहने की उम्मीद है।
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