Wednesday, 27 March 2019


स्वाहाविक प्रवृत्ति और आरोप
'इमोशनल इंजीनियरिंग" के सैद्धान्तिक पक्ष व व्यवहारवाद के कुछ शाश्वत तथ्यों पर एक दृष्टिपात करते हैं -

1 एक आदमी जो जीवन में कभी भी गाली नहीं सुना होगा वो कभी भी किसी को गाली नहीं देगा,
2 व्यक्ति दूसरों को सिर्फ अपने मस्तिष्क और नेत्रों से देखता है लिहाजा उसकी दृष्टि वही होगी जो उसका मस्तिष्क विश्लेषण करके बताएगा,
3 सामान्य अवस्था में आदमी वही उल्टी करता है जो वो उसने खाया होता है,
4 गंदा आदमी दूसरे साफ सुथरे आदमी के बारे में यही सोचता है कि वो आदमी गंदा क्यों नहीं है, वो ये भी नहीं सोच पाता कि वो आदमी इतना साफ-सुथरा कैसे है। वहीं अच्छा आदमी गंदे आदमी के बारे में यही सोचता है आखिर वो साफ-सुथरा क्यों नहीं है, क्या कारण है कि वो इतना गंदा है।

राहुल गांधी मोदी जी पर आरोप लगाते हैं -
1 विजय माल्या, ललित मोदी, मेहुल चौकसी और नीरव मोदी को भगा दिया गया
क्योकि राजीव गांधी ने भोपाल गैस कांड के मुख्य आरोपी एंडरसन को उस समय के भोपाल के तत्कालीन जिलाधिकारी नजीब जंग की मदद से भगाया, कांग्रेस ने बोफोर्स मामले में कुत्ता रोची को सिर्फ भगाया बल्कि उसका खाता भी खुलवा दिया, बहुत लोगों को ये भी पता है कि आतंकवादी दाऊद इब्राहीम भी कांग्रेस के सहयोग से भागा था ऐसे दर्जनों अपराधियों को भगाने के दर्जनों मामले हैं।
2 कि वो विदेश घूमते हैं, 10 लाख का सूट पहनते हैं, उद्योगपतियों के लोन माफ करते हैं आदि आदि
नरेंद्र मोदी सरकारी यात्रा पर होते हैं और वो अपना कर्तव्य निभा रहे होते हैं वो भी इन कांग्रेसियों और उसके पिद्दियों को नहीं पचा कारण एक तो कांग्रेसी युवराज विदेश यात्रा किस लिए करते हैं स्पष्ट है वो किसी सरकारी यात्रा पर नहीं होते, इसके पहले जैसी करतूतें कांग्रेसी प्रधानमंत्री कर चुके हैं वो जगजाहिर है..वैसे भी ये मुद्दे सेकुलर मीडिया की ओर से अधिक उछाले जाते हैं क्योकि हराम की विदेश यात्राएं अब नहीं होतीं...सेकुलर इतने गिर चुके हैं कि प्रधानमंत्री के खाने और कपड़े पर भी बेहूदे आरोप लगाते हुए भी शर्म नहीं आई।
3 जिस तरह से जनेऊ धरण करते हैं तो उन्हें लगता है मामला बन गया लेकिन पता नहीं किस के दिमाग से कांग्रेसी ऐसा सोच भी लेते हैं। श्रीमती बढेरा के लखनऊ प्रदर्शन में भीड़ 100-150 लोगों की भी नहीं थी कुछ तो बता रहे हैं कि उसमे उचकके बहुत अधिक थे और करीब 70 लोगों के मोबाइल चोरी हो गए। ऐसा इसलिए लगता है इनके पूर्वज ऐसी धोखेबाजी करके ही सत्ता पर काबिज हुए। वो गायसुद्दीन गाजी इसका प्रमाण है। गुजरात विधान सभा चुनाव में जो कुछ भी घटा वो जनेऊ के कारण नहीं था।
4 कांग्रेस के सिर्फ लालबहादुर शास्त्री ही इमानदारी की प्रतिमूर्ति थे बाकी सब भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए तो वही सोच रहे हैं।
जवाहर लाल नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक कोई भी ईमानदार कांग्रेसी प्रधानमंत्री नहीं हुआ लिहाजा ईमानदारी में भी इनको भ्रष्टाचार दिखना स्वाभाविक है। एक चोर किसी को भी इममानदार मान ही नहीं सकता। हर जगह से मात खाने के बाद भी यदि राफेल में भ्रष्टाचार कांग्रेस सूंघ रही है तो भ्रष्टाचार उसकी प्रवृत्ति है यहाँ कांग्रेस वही उल्टी कर रही है जो उसने खाया है।
राफेल मामले में चोर को चोरी करने का मौका चौकीदार चोर है का नारा लगवाते हैं मतलब "मैं चोर तो तू भी चोर" वाली कहावत राहुल गांधी अक्षरशः चरितार्थ करते हुए सिर्फ "चोर मचाए शोर" की तर्ज पर शोर मचा रहे हैं। एक गंदा आदमी दूसरे साफ आदमी साफ नहीं कह सकता और यदि वो साफ है तो मौका मिलते ही उसके ऊपर वो कीचड़ जरूर उछालेगा।
अब तो खैर चुनाव का समय शुरू हो चुका है कांग्रेस का "चौकीदार चोर है" "मैं भी चौकीदार" से भोथरा हो गया और राहुल गांधी व श्रेमती बढेरा के भ्रष्टाचार उजागर होने लगे तो ठीक उसके दो दिन बाद 72000 रुपये सालाना देने का शिगूफ़ा छोड़ दिया गया। ये सब कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के बजाय उसका बहुत भारी नुकसान कर सकते हैं ... ।

Tuesday, 12 March 2019

क्या पाकिस्तान के परमाणु बम हैं ? 2

क्या पाकिस्तान के परमाणु बम हैं - 2

 
 

गतांक से आगे
जब 30 मई 1998 के बाद PTV पर डॉ समर मुबारिक ने होस्ट तनवीर इकबाल द्वारा लिए गए साक्षात्कार में कहा “…हमने तो एक बम फोड़े थे लेकिन अल्लाह ने दो के होने के सुबूत दिये…” एक नभकीय वैज्ञानिक द्वारा ऐसा बयान वो भी टीवी पर आश्चर्य होता है। मतलब साफ है डॉ समर मुबारीक को न तो परमाणु बम के बारे में गहराई से पता था और न ही उसके परीक्षण के बारे में। पूरे साक्षात्कार देखने से ये भी लगता है कि जिसने भी वो तथ्य डॉ समीर को दिये शायद उसे भी वो समझ नहीं पाया।
 इसके उलट भारत ने पोखरण 2 में जो भी परीक्षण किए उसका लगभग पूरा आवश्यक विवरण जनसंज्ञान में उपलब्ध है। लेकिन पाकिस्तान कोई विवरण नहीं इसका कारण उस समय पाकिस्तान सरकार द्वारा जनता की संवेदनशीलता बताया गया था। याद कीजिये उस समय भी इसी सुबूत गैंग ने वाजपेयी सरकार द्वारा किए गए परीक्षण को ‘पटाखा फोड़ने” की संज्ञा देते हुए परीक्षण के सुबूत मांग लिए थे।
 पाकिस्तान और भारत का सेकुलर गैंग दोनों भारत के उस शक्तिशाली वर्ग से मनोग्रस्त हैं जिसे किसी भी कीमत पर आत्मसम्मान और शक्ति से भरपूर नहीं देखना चाहते। दरअसल सेकुलर गैंग को इसके लिए कहाँ से और कैसे फायदा होता है ये जानना बहुत मुश्किल नहीं लेकिन 1971 के समय जुल्फ़ीकार आली भुट्टो भारत के नभकीय कार्यक्रम और शक्ति दोनों मनोग्रस्त थे। इसीलिए उन्होने भारत 1000 साल तक लड़ाई लड़ने की इच्छा जाहिर कर दी थी जो अभी भी अनवरत चल रहा है।
 पाकिस्तान ने भरसक कोशिश की कि परमाणु परीक्षण का पाकिस्तानी मूल के भौतिकी के नोबल पुरस्कार विजेता ‘अब्दुस सलाम’ को समर्पित किया जाए और उसने करने की कोशिश भी की जिससे ये स्थापित हो सके कि पाकिस्तान ने वास्तव अपना पमनु बम विकसित किया है। हालांकि प्रो॰ सलाम की मृत्यु 1996 में ही हो गई थी हालांकि उनका बहुत बड़ा योगदान पाकिस्तानी अन्तरिक्ष कार्यक्रम और पीएईसी की स्थापना में भी था लेकिन कभी भी प्रो॰ सलाम परमणु बम के बारे में स्पष्ट बयान नहीं दिया जिससे ये लगे पाकिस्तान परमाणु बनाने की क्षमता रखता है, यदि ऐसा होता तो कम से कम स्पष्टता तो जरूर होती जैसा कि भारतीय वैज्ञानिक हमेशा रखते रहे हैं।
 मात्र 15 दिन में एक पहाड़ पर 700 से 1000 फीट का गड्ढा खोदना ही असंभव है। अगर पाकिस्तान पहले से ऐसी तैयारी करता तो पकड़ में आ जाता जिससे बचने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने ताजमहल, कुंभकर्ण पृथ्वीराज नाम आदि तक रखने पड़े।
 एक तथ्य को यहाँ बल मिलता है कि चीनी परमाणु परीक्षण साईट “लोप नॉर” जो मंगोलिया और रूस की सीमा के पास है, एक तरफ ठीक वैसी ही है जैसी कि पाकिस्तान की चगाई की पहाड़ियाँ हैं। बहुत मुमकिन है पाकिस्तान के लोग फोटो सेशन के लिए लोप नॉर गए हों। चीन ने परीक्षण संबंधी कुछ तथ्य दे दिये हों जिसे प्रकाशित कर दिया गया। अगर पाकिस्तान के पास परमाणु बम है तो तो बहुत हद तक मुमकिन है चीन से खरीदा गया हो। वैसे चीन ऐसा सिर्फ भारत पर धौंस जमाने के लिए कर सकता है..क्योकि डर तो उसे भी है कहीं उसे खिलाफ न इस्तेमाल हो जाए

Saturday, 9 March 2019

पाकिस्तान के परमाणु बम है ?


जरा याद कीजिये भारत ने जब पाकिस्तान पर 26 फरवरी को बालाकोट शिविर भेदा था उसके पहले पकिस्तानी हुक्मरान प्रतिदिन भारत को धमकी देते थे कि वो परमाणु शक्ति देश हैं उन्होने परमाणु बम ड्राईङ्ग रूम में सजाने के लिए नहीं बनाए हैं बल्कि भारत के खिलाफ इस्तेमाल के लिए बनाए हैं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से बालाकोट ध्वस्त होने के बाद अभी तक एक भी ऐसी कोई धमकी पाकिस्तानी हुकमरानों की ओर से नहीं आयी है।
ये ऐसी घटना है जब संदेह विश्वास जैसा होने लगता है कि आखिर पाकिस्तान के पास कौन सी ऐसी जादुई छड़ी आ गई कि 1972 के पोखरण 1 के चार साल बाद ही पाकिस्तान में परमाणु इंजीनियर पैदा हो गए और 1976 में पाकिस्तान एटामिक एनर्जी कमीशन (PAEC) का गठन हो जाता है और नाभिकीय कार्यक्रम शुरू हो जाता है। फिर पाकिस्तान के नाभिकीय कार्यक्रम की क्या प्रगति है इसकी लेशमात्र की भी कोई जानकारी 1998 तक न तो पाकिस्तान में आती है और न ही CIA, FBI, पेंटागन आदि के माध्यम से पाकिस्तान और दुनिया के सामने आती है जैसाकि आजकल अक्सर देखा और पढ़ा जाता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ तो परमाणु युद्ध हो सकता है, इतने-उतने फलाने-ढेकाने का नुकसान हो जाएगा आदि आदि।
पोखरण-2 11 और 13 मई 1998 को हुआ था जिसके लिए भारत के महान वैज्ञानिकों ने वर्षों परिश्रम किया था और समय-समय पर BARC की प्रगति और उपलब्धियां भी मीडिया के माध्यम जनसंज्ञान में आती रहती थीं, आज भी आती रहती हैं। लेकिन पाकिस्तान के संदर्भ में ऐसा कुछ भी नहीं है मिसाल के तौर 1995 में बेनज़ीर भुट्टो ने कहा था कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम 1971 के पहले शांति के लिए था। फिर भी आश्चर्यजनक रूप से जादू की छड़ी से महज 15 दिनो बाद ही 28 और 30 मई 1998 को परमाणु परीक्षण कर लेता है। ध्यान देने वाली बात ये है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चश्मा शहर में कहुटा में चीन के सहयोग से  न्यूक्लियर पवार प्लांट है तो आप समझ सकते हैं सारा खेल। वैसे जहां भी सूचना उपलब्ध है कहीं भी इसका विशिष्ट उल्लेख नहीं है आखिर उस बम में क्या इस्तेमाल किया गया था युरेनियम था, थोरीयम था, प्लूटोनियम था क्या था आखिर। वैसे कहीं मैंने पढ़ा था कि पाकिस्तान का दावा है कि उसने प्लुटोनियम का इस्तेमाल किया था जो कि संभव नहीं लगता। उपलब्ध सूचना के मुताबिक ये भी स्पष्ट नहीं है कि उसका परीक्षण फ्यूजन था फिशन था। इसमे से एक परमाणु बम है और दूसरा हाईड्रोजन बम है। पाकिस्तान का दावा है कि बलूचिस्तान के डेरा गाजी खान में वो स्थानीय पिचब्लेन्ड से 10,000 पाउंड यूरेनियम का प्रतिदिन उत्पादन करता है। मजा देखिये पूरी दुनियाँ में ये तत्व सिर्फ 3 देश कजाखस्तान, कनाडा और आस्ट्रेलिया मिलकर मात्र 1000 टन प्रतवर्ष उत्पादन करते हैं और दुनियाँ को बेचते हैं।
NPT (Non Proliferation Treaty) 1968 में जेनेवा में पेश हुआ जिसे अमेरिका व अन्य परमाणु सम्पन्न देश भी काफी आग्रही रहे हैं। उसी दौरान PAEC के डॉ अब्दुल कादिर खान परमाणु टेक्नोलोजी और मैगनेट की चोरी यूरोप और अमेरिका के प्रिंसटन व अन्य जगहों से कर रहे हैं तो फिर डॉ खान सुरक्षित कैसे बने रहे और तब तक चोरी करते रहे जब तक पाकिस्तान परमाणु परीक्षण नहीं कर लिया? बात गले से नीचे उतर नहीं रही। ये तब है जब अमेरिका व अन्य देश अपने वादे के प्रति इमानदार हों तब। नहीं तो आप समझ ही सकते हैं।
वैसे भी पहाड़ पर परमाणु विस्फोट के लायक मात्र 15 दिनो में गड्ढा खोद लेना भी संभव नहीं जिसके लिए भारत के अनुभवी वैज्ञानिकों को भी 3 महीने से ज्यादा परिश्रम करना पड़ा था वो भी रेतीले रेगिस्तान में। भारत ने अमेरिकी निगरानी उपग्रहों से बचने के लिए कितने जतन किए थे ये बाद में जारी तसवीरों में स्पष्ट दिखा लेकिन पाकिस्तान ने सीना तान कर खुले में किया था फिर भी उसकी तैयारी की तस्वीरें आज तक जारी नहीं हुईं।
बहुत हद तक ये कहा जा सकता है कि पाकिस्तान का परमाणु परीक्षण पूरा नाटक था एक डर उत्पन्न करने के लिए जिसमे चीन, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी, सीपीआई(एम) के साथ  अमेरिका भी शामिल है। क्रमशः