Friday, 9 February 2018

जोखहिं जीभ ते उचकत माहू...

ज्यादा कुछ नहीं बस यही सत्य है हर निरामिष और कुछ आमिश में तड़का लगना जरूरी होता है वरना स्वाद ही नहीं मिलता..देसी तड़का विदेसी तड़का आदि जबतक लगता नहीं तबतक ताव चढ़ता ही नहीं...मूंछ पर हो..

एक खाँटी भाई कांग्रेसी से हम पूछे "...कांग्रेसी तड़का का उपयोग भाजपाई अपने लिए कर लिए तो क्या हो गया कहें इतना खऊराए जा रहे हो...?"
खाँटी भाई कांग्रेसी मुझे डांटने वाले अंदाज में बोले "...आप लोगों के पास संस्कार नाम की चीज नहीं है..."
मुझे हंसी आ गई उसी अंदाज़ में कहा "..का करें दिग्विजय सिंह भी हनीमून पर बिलायत नहीं गए लोकल ही मनाए थे...अभी भी हनीमून पर ही हैं..अभी तक लोटा लिए बैठे हैं... कुछ तो बता रहे हैं कि लोटे का पानी भी सूख गया होगा...."
इस पर खाँटी भाई कांग्रेसी तपाक से पूछ बैठे "...अब आप दिग्विजय सिंह को भी घसीटेंगे...?"
मैंने बड़े आराम से कहा "...हाँ क्यों नहीं उनको हमेशा तड़का की तलाश रहती है..."
खाँटी भाई कांग्रेसी मुझे समझाते हुए बोले "...देखिये किसी पर कीचड़ उछालना ठीक नहीं..."?
मैंने भी चुटकी लेते हुए तपाक से प्रश्न किया "...जब कोई खुद ही कीचड़ पर उछल रहा हो तो...?"
खाँटी भाई कांग्रेसी आरोप लगाते हुए बोले "...किसी की इज्जत से खेलना तो वो भाजपाईयों से सीखे..."
मैंने कहा "...क्यों भाई तड़का आप पालिए संस्कार कोई दूसरा सीखे ? हद है महराज..."
खाँटी भाई कांग्रेसी मायूस होकर बोले "...आप ताड़का कह रहे हैं कोई सुपर्णखा, कोई ताड़काऔर कोई कुछ कोई कुछ ..."
मैंने भी सहानुभूति जताते हुए कहा "...बड़ी उम्मीद थी कि कोई भीम उन्हें हिडिम्बा कह के पुकारे..."
ये सुनते ही खाँटी भाई क्कंग्रेसी भड़क गए "....अप आप भी चुटकी लेने लगे..."
मैंने कहा "...भाई घर वापसी का समय है ..हर पतली गली मे ही भीम मिलते हैं ऐसा सुना है...बस एक अट्टहास से पुकारने की जरूरत है... "
खाँटी भाई बिदक कर बोले "...आपके कहने का मतलब क्या है..."
मैंने बड़े शांति से कहा "...कांग्रेसी तड़का पूरी ताड़का बने उसके पहले नाक कट गई ... "
खाँटी भाई आपा खो बैठे "...जनता सब देख रही है ..."
मैंने टपक से पूछ लिया "...किसको कांग्रेसी तड़का यानी ताड़का या सुपर्णखा को ????"
खाँटी भाई कुछ बोले नहीं ...

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