पाकत कटहर बीच बजार...
अब फिर उन्हें डर लगने लगा और गुस्सा भी आने लगा जिन्हें बीबी और अपनी बीवी में फर्क नहीं पता..जब फर्क करने की मजबूरी हो तो ये लोग सर नीचे करके और कमर कुछ ज्यादा ही उठा कर अपने आका से पूछते हैं..ऐसे ही आकाई कुकुड़ूद्दीन शाह से पूछा "...असली मुंह से पूछने के बजाय आप नकली मुंह का उपयोग क्यों करते हैं..." मेरी आवाज सुनते ही कुकुड़ूद्दीन शाह चौंक गए फिर सीधा होते हुए सबकुछ ठीक ठाक करते हुए बोले "...हा आप भी क्या बात करते हैं जनाब हा...?" मैंने कहा "..अपनी शराफत के कपड़े उतार कर कमर ऊंची करने की क्या जरूरत थी .?" कुकुड़ूद्दीन शाह बड़े बदतमीजी से तमीज दिखाते हुए बोले "..आपको पता है अपनी बेहूदगी साबित करने के लिए ही शराफत के कपड़े ओढ़ते हैं..." मैंने मज़ाक करते हुए पूछा "...गनीमत है लेकिन फिर भी कमर उठा के मुंह खोलने की क्या जरूरत...?" कुकुड़ूद्दीन शाह बोले "...हा हा मियां आप भी समझदार मालूम होते हैं..." "...लेकिन आप की तरह नहीं..." मैंने तपाक से बात काटते हुए कहा। कुकुड़ूद्दीन शाह बोले "...ये मुल्क मेरा भी है और मुझे भी जीने का हक है समझे आप..!" मैंने उसे टोन में उससे पूछ "...लेकिन अभी से धूल फाँकने क्या जरूरत है...?कुकुड़ूद्दीन शाह असहज हो गए और पूछे "...आपको क्या लगता है हम आत्महत्या करने जा रहे थे क्या..." मैंने आश्चर्य जताते हुए पूछा "...धूल अपनी कब्र खोदने के लिए ही फांक रहे हैं आप...क्यों ? कुकुड़ूद्दीन शाह भड़क गए और भड़के अंदाज में पूछने लगे "...अरे आप चाहते हैं हम खत्म हो जाएँ और आप राज करें..." मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा "...घबराईए मत आपका एक्सीडेंटल डेथ नहीं होगा..." कुकुड़ूद्दीन शाह को समझ में नहीं आया तो पूछ बैठे "...आपके कहने का मतलब मैं समझा नहीं..." मैंने उन्हें उत्तर देते हुए कहा "...कांग्रेस को हौले-हौले मारा जा रहा है..." ये सुनते ही कुकुड़ूद्दीन शाह फिर भड़क गए और उसी अंदाज में पूछे "...हम आपको कांग्रेसी लगते हैं क्या..." मैंने उसी टोन में जवाब दिया "...इसीलिए आपके बहुत जरूरी है बीबी और बीवी में फर्क करना..." कुकुड़ूद्दीन शाह का गुस्सा ठंडा नहीं हुआ "...नहीं तो क्या कर लेंगे आप...?" मैंने फिस्स से हँसते हुए कहा "...एक्सीडेंट..अब वास्तव में आपको डरना होगा...." कहते हुए मैंने नमस्कार किया