आली जनाब 'पैजामा हाजिर है"
हजरते कुफ्र आज सीधे पैजामा टाईट करके हुक्म भौकने निकले तो बीवी ने टोक दिया "...मियां आप तो पहले से ही गुलामी के खुद्दार हैं फिर पैजामा टाईट करने के क्या जरूरत थी...?" बड़े इत्मिनान से हजरते कुफ्र ने जवाब दिया "...बेगम हम तलाक पर रिवायाते फिदा न हो पाये थे..." हजरते कुफ्र की बीवी की त्योरी चढ़ गई "...आपकी खुद्दारी पर अब हमे शक होने लगा है..." हजरते कुफ्र पुचकारते हुए बोले "...बेगम पैजामे का नाड़ा बांग्लादेश से मंगाया था आपको याद है न मरकजे बर्बाद से..."
हजरते कुफ्र की बीवी तुनकते हुए बोली "...जाओ जी हम ही परवाने हैं और शमां भी हमी आपको क्या..." हजरते कुफ्र रोमांटिक अंदाज़ सफाई देते हुए बोले "...बेगम आपको तो मेरे पैजामा टाईट करने पर खुश होना चाहिए वैसे दिवाली की गिफ्ट तो कैंसल करनी पड़ेगी ..." बीवी अब सीधे मिर्ची सूंघते हुए तुंकमिजाजी से पूछी "...हमने कब आपसे दिवाली पे बड़ा गिफ्ट मांगा था...?" हजरते कुफ्र बैकफूट पर आ गए "...आपको क्या लगता है बेगम कि हम आपकी छोटी-मोटी फरमाईशे पूरी नहीं कर सकते क्या...?" कुफ्र की बीवी बोली "...करवा चौथ बीता है अभी तो इसका क्या मतलब दिवाली मनहूसियत से मनाएङ्गे...?" हजरते कुफ्र सांत्वना देते हुए बोले "... बेगम ज़रा सोचा करो सेकुलर हैं हम कुछ तो फर्ज निभाने दो..." बीवी ताना मरते हुए बोली "...ये मत सोचो मियां कि लोटा में बम फोड़ने से आवाज नहीं होती..." हजरते कुफ्र त्योरी की तरह पैजामा उपार चढ़ाते हुए सीना फुला कर बोले "....बेगाम आखिर हमने भी खुद को प्रूफ कर दिया की सेकुलर हैं आखिर हम भी..." बेगम भी अब थोड़ी और बड़ी मिर्ची लेकर चबाते हुए दुआएं देते हुए बोली "...जल्लाद आपके पैजामे को हमेशा ऊपर रखे .... "
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