Wednesday, 23 August 2017

खाँटी खटिया बीच में, पावे खोईंचा लाल...
खाँटी भाई खटमलों और सिक उल्लू रिश्तों को खून मिलना बंद, चिल्ला रहे हैं "..तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से गैरों को क्या मतलब...?" "...अरे काहें नहीं मतलब भाई..." मैंने जवाब में पूछ दिया तो खाँटी भाई खटमल सकते में आ गए बोले "..इसमे कौन पालिटिक्स है.बुर्के वालों का वोट मिलेगा क्या? " मैंने तपाक से एक जड़ते हुए कहा "...बड़ी चिंता हो रही है...?" खाँटी भी खटमल का चेहरा देखने लायक था रूआँसे हो कर बोले "...मुफ्त हुए बदनाम...शाहबानों युवराज के दादी जैसी थी..." मैंने फिर टांट कसते हुए कहा "...पप्पू युवराज के पप्पा ने शाहबानों को माँ के बजाय दायी मानते रहे और हँडिया ले के पलट दिया डंके की चोट पर ..." खाँटी भाई खटमल अफसोस जताते हुए बोले "...बुर्के वालों के लिए इतना बदनामी झेले फिर भी जो था चला गया..." मैंने कहा "...बुर्के वालों के लिए नहीं बुर्के वलियों के लिए करना चाहिए था..." खाँटी भाई खटमल अजीब पेशोपेश में थे लेकिन बोले "...जिसके लिए इतना किया..." मैंने फिर व्यंग्य कसते हुए कहा "...महराज नाग पंचमी बीत चुकी है..." खाँटी ये सुनते ही खाउरा गए वो गुस्से में बोले "...आपके कहने का मतलब क्या है...?" मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...दूध पी कर साँप जहर उगल चुका है..." खाँटी भाई से अब रहा नहीं गया बोले "...हामिद अंसारी ने जो कहा बिलकुल ठीक कहा..." मुझे हंसी आ गई "... उनकी बुर्के वाली अभी जबतक जिंदा है जाहिर है संघी नाचेंगे ही..." अब खाँटी भाई कनफ्यूज होने लगे थे "..आप देखियेगा ये नुददा गया..." मैंने कहा "...आप विश्वास और उम्मीद से समय का इंतज़ार कीजिये..." खाँटी भाई अब तैश दिखने के मूड में थे बोले "... कांग्रेस के सत्ता में आने पर तो फिर वही करना पड़ेगा..." मैंने उत्सुकता वश पूछा "...मतलब शाहबानों के सिर पर फिर से चंपी करेंगे...?" खाँटी भाई खटमल सफाई देते हुए बोले "...आखिर हमे भी तो जीने का अधिकार है..." मैंने जड़ते हुए कहा "...इसके लिए पर्सनल ला के एफ़िडेविट पर ही मुर्ग-मुसल्लम बनेगा..." खाँटी भाई अपना बचाव करते हुए बोले "...देखिये हम खून के प्यासे नहीं है..." मैंने रसीले अंदाज में टांट कसते हुए कहा "..हाँ आप लोग तो राजमा-ता को खून चढ़ाने वालों मे से हैं..." खाँटी भाई नाराज हो गए लेकिन बोले "...देखिये आप लोग गलत अर्थ मत निकालिए..." मैंने कहा "...आपसे अधिक सकते में 100 फीसदी वो हैं जो हलाला के नाम पर आम के आम गुठलियों के दाम वसूलने में थोड़ा भी गुरेज नहीं करते थे ..." खाँटी भाई खटमल अजीब सा मुंह बनाते हुए बोले "...आप जो कहना चाहते हैं न हम खूब समझते हैं..." मैंने कहा "...बस एक बात और समझ लीजिये कुरबानी देना सीखिये लेना नहीं..." खाँटी भाई खटमल तैश में आ कर पूछे "...नहीं तो ..." मैंने शांति से उत्तर दिया "...नहीं तो कबूतर की बीट भी जानलेवा होती है..."

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