Monday, 5 June 2017

पार्किंसन कारण और कारगर निदान
एलोपैथी न्यूरो और न्यूरो साईकियाट्रि पार्किंसन जैसी बीमारी के बारे में कहती है ये लाईलाज है फिर भी न्यूरो और साईकियाट्रि के चिकित्सक इसका इलाज करते हैं और जैसे-जैसे इलाज बढ़ता जाता है बीमारी ठीक होने के बजाय और गंभीर होती जाती है क्योकि जो दवाएं (ट्रंकलाईजर्स) इसमे दी जाती हैं उससे संवेदी तन्तु (नसें) सूखने लगतीं हैं फिर मस्तिष्क से हाथों सहित अन्य अंगों का संबध खत्म होने लगता है। एलोपैथिक मेडिकल साईन्स अभी तक पार्किंसन का कारण तक नहीं खोज सकी है फिर भी इसका इलाज किया जाता है क्यों किया जाता है सबको पता है।
पार्किंसन पूरी तरह तनाव और भ्रम का विषय है न कि न्यूरो का। "इमोशनल इंजीनियरिंग और योग" को मिला दिया जाए तो नतीजे चौकाने वाले हो सकते हैं और बिना किसी दवा के मरीज 4 से 7 महीने में बिलकुल ठीक हो सकता है। पहले तो आप ये समझिए कि पार्किंसन का कारण क्या है और ये होता क्यों है ये पूरी तरह तनाव, भ्रम और मस्तिष्क द्वारा उन तनाव को पूरी तरह शरीर क्रिया द्वारा पूरी तरह परिलक्षित न कर पाने के कारण होता है तभी व्यक्ति के हाथ कांपते हैं। भ्रम के कारण ही तनाव पूरी तरह से परिभाषित, स्पष्ट और शरीर में उसका कियान्वयन भ्रम के कारण नहीं हो पाता तो रीफ्लैक्स एक्शन के कारण हाथ काँपते हैं क्योकि हाथ से ही मस्तिष्क और शरीर के बीच समंजस्य स्थापित होता है जो भ्रम के कारण के कारण सम्पन्न नहीं हो पाता। वस्तुतः इमोशनल इंजीनियरिंग में हाथों के रीफ्लैक्स एक्शन का ही इस्तेमाल कर के मस्तिष्क अधिगम और नवीन सूचना के लिए विकसित किया जाता है।जैसे ही भ्रम हटता है और तनाव स्पष्ट हो जाता है अनावश्यक रीफ्लैक्स एक्शन रुक जाता है और हाथों का कांपना बंद हो जाता है।
हर व्यक्ति का इमोशनल मैकेनिज़्म अलग-अलग होता है लिहाजा पहले तनाव भ्रम और उसके माइकेनिज़्म को समझना पड़ेगा फिर उसे व्यक्तित्व के अनुसार प्रबंधित कर मस्तिष्क को सामान्य स्तर पर लाना पड़ता है ...फिर शरीर और मस्तिस्क के बीच सहसंबंध को ठीक करने के लिए कुछ विशेष योग का सहारा लेना पड़ता है।

4-7 महीने मेन से इससे पार्किंसन पूरी तरह ठीक हो सकता है बिना किसी दवा के।

Narendra Modi Amit Shah J.P.Nadda

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