Friday, 26 May 2017

बुढ़ौती का नहान, जवानी बिहान....

कांग्रेस ने ब्रम्ह सेतु के उद्घाटन समारोह में मनमोहन सिंह के न बुलाए जाने पर आपत्ति की...रेनकोट पहन कर ब्रम्हपुत्र में कूद जाते तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी होती ?? वैसे भी अटल जी को पता था मनमोहन सिंह रेनकोट पहन कर ही नहाते हैं है इसीलिए उन्होने 2002 में ही इस सेतु का शिलान्यास कर दिया था...ठीक समझे बिलकुल ठीक समझे शुरू से ही कॉंग्रेस भी बखूबी जानती रही है कि मनमोहन सिंह रेनकोट के माहिर और शातिर खिलाड़ी इसलिए भी हैं क्योकि उनके ऊपर खिड़की के होने या न होने का कोई असर नहीं होता... कांग्रेस को डर था कि कहीं मनमोहन सिंह ब्रम्हपुत्र में छलांग न लगा दें...वैसे भी नहाने का भी बड़ा शौक है इनको... याद कीजिये जब सुब्रमणियन स्वामी ने इ-टल्ली युवराज केसरी की मम्मी को डंके की चोट पर प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया था तो यही मनमोहन सिंह हैं जो कांग्रेस के घड़ियाली आसुओं के ब्रम्हपुत्र में छलांग लगा-लगा कर रेनकोट पहन कर नहाए थे और मजे की बात ये कि रेनकोट बदल बदल कर नहाए कभी लाल, कभी नीला, कभी पीला लेकिन गमीनत ये रही कि इनहोने कभी गेरुआ मतलब भगवा रंग का रेनकोट कभी नहीं पहना और इसी कारण भगवा को बदनाम नहीं किया इसके लिए मनमोहन सिंह बधाई के पात्र हैं वो अलग बात है बाकी सभी खाँटी भाई खटमलवे उस समय नंगे थे और आज भी नंगे हैं आगे भी नंगे ही रहेंगे... NDA वाले बार-बार अनुरोध करते हैं बेटा पहिन लो कम से कम अंडवियर ही पहिन लो लेकिन ये कांग्रेसी हैं कि एकदम नंगे रहने और घूमने पर उतारू हैं...तो अब आप ही बताईए अटल जी के द्वारा शुरू किए गए सेतु पर मनमोहन सिंह को कैसे बुलाया जा सकता था ?

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