Thursday, 18 May 2017

लोटा में लुआठी, तसरीफ़ देखावे लाल, हुआ बवाल - मचा बवाल...
उ प्र चुनाव परिणाम के ठीक बाद ही मैंने भविष्यवाणी की थी कि दो पड़ोसी राज्यों (दिल्ली और बिहार) में तूफान आने वाला है वो आया और कायदे से आया। अपोले, कंपोले, राजगपोले एक सुर में इसे बदले की कारवाही बता रहे हैं...सही बता रहे है इन रैनसम मालवेयरों ने भारतीय राजनीति को एनक्रिप्ट करके बहुत माल बनाया लिहाजा एंटीवायरस जब सक्रिय होकर जब मालवेयरों को नष्ट कर रहा हो तो जाहिर सी बात बात है बदले की ही करवाही है...अब इंटरनेट भी सेक्योर हो चले हैं जैसे कोई मालवेयर या वाइरस सिस्टम या टमटम का खून पीना शुरू करता है तो इंटरनेट ही उसका गला दबा कर खत्म कर देता है लेकिन अफसोस यही है कंपोले और राजगपोले के समय इंटरनेट था ही नहीं जिससे इन मालवेयरों को सक्रिय होने से पहले ही खत्म किया जा सके लेकिन अपोले के समय ये सुविधा उपलब्ध थी लिहाजा रास्ते में ही केजरीवाल जैसे बेहदखतरनाक रैनसम मालवेयर के खात्मे की प्रक्रिया चालू है।

जवानी में जरबन हिलाने से काम चल जाता न तो फिर लालू रैनसमवेयर के लिए ‘नदिया के पार’ वाला गाना बड़ा मुफीद होता ‘कौन दिसा में लेके चला रे बटोहिया...’ लेकिन देसी एंटीवायरस ने पूरा का पूरा खेल बिगाड़ के रख दिया... लूट का माल लोटा में रख कर लोटने वाले लालू रैनसमवेयर ये मान कर चलते थे कि जिस लोटे में लूट का माल रखे हैं उसी लोटे को लोटे-लोटे लूट कर दिखा देंगे...लेकिन रेनसमवेयर जिसने जिंदगी दी उसी ने जीती-जागती जिंदगी पर लोटा भर पानी फेर दिया...

जिस लुआठी से रास्ता खोजने बजाय अपनी ही तशरीफ़ लाल करके लोगों को सीधे हड़का कर अपनी कीर्ति फैला रहे थे वही अब चारो खाने चिद... हो गए और मुंह से बकार ऐसे नहीं निकल जैसे मानो घूस देने के बाद गलती का एहसास होने पर देने वाला घूस का पूरा पैसा वापस लेने पर उतारू हो जाए ...ज्यादा कुछ नहीं कीर्ति के नाम पर अम्बर में तमंचा का अंबार लहराने वाले खाँटी भाई खटमल जिसे लोग बहुत दिनो तक लोटा में टेलिस्कोप लगा कर सेते रहे अब उससे निकलने वाले केजरीवाल छाप दुर्गंध को दबाने की कोशिश होने लगी तो लुआठी शब्द की मात्राओं में हेर-फेर करने पर उतारू हो गए लेकिन गनीमत है अभी लालू का उल्टा नहीं हुआ वरना युवराज के नाम पर देश में आग लगा देते जैसे बड़ा पेड़ गिरने पर धरती हिलती है... अब हिलाने की बारी खटमलों की है जेल में जाओ खूब हिलाओ अपना भी हिलाओ औरों का भी हिलाओ...हो सके तो खुद भी हिलो और हिलाते रहो...



आजादी के बाद का सबसे स्मार्ट रैनसमवेयर केजरीवाल के लिए तो किसी समार्ट हावर्ड छाप एंटीवायरस की भी जरूरत नहीं...बनारस वाला हार्डवर्क तो बहुत बड़ी चीज है...भैवा इंटरनेट खुद ही सिक्योर हो चला है लिहाजा अपियों का सिस्टम भी सिक्योर था जो इन आपियों को पता ही नहीं था...मैं बार – बार चेतावनी देता था “...यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख और केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है...” लेकिन क्या करिएगा चेतावनी सुनने और समझने के लिए भी थोड़ा तो दिमाग चाहिए ही...नहीं समझे तो भुगतो... अपियों का ही अपना एंटीवयरस पूरी क्षमता से सक्रिय है... लेकिन महामूर्ख केजरीवाल इसे ‘लोटा में दतुअन’ साबित करने पर उतारू है... क्या करिएगा थोड़ी भी बुद्धि तो अन्ना-मुन्ना की जरूरत ही नहीं पड़ती ...

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