Thursday, 23 March 2017

शेक्सपियर नहीं जेंडरपियर...

खाँटी भाई खटमलों को मंजनू छाप रोमियों पर इतना बड़ा प्यार आ रहा है कि जैसे योगी सरकार ने सीधे आतंकवाद पर प्रहार कर दिया हो...
एक खाँटी भाई कांग्रेसी चीख रहे थे "...ये सीधे-सीधे युवाओं पर अत्याचार है, उनके अधिकारों का हनन है..."
मैंने सीधे जोरदार प्रहार करते हुए पूछा "....आपके युवराज धरा गए क्या...?"
खाँटी भाई खटमल ये सुनते ही चुप गए बड़े मुश्किल से खुद को संभालते हुए बोले '...वो बैंकक जाते हैं, लंदन जाते हैं लिहाजा उनको पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है..."
अब जवाब मेरे पास नहीं था फिर मैंने सोच कर पूछा "...वो तो डाउन है डॉन कब से बन कर घूमने लगे..?"
खाँटी भाई कांग्रेसी विषय बदलते हुए बोले "...देखिये उ प्र सरकार सांप्रदायिकता का जहर बो रही है..."
मैंने तपाक कहा "...इसलिए क्योकि मजनू मुसलमान था और रोमियो ईसाई..."
खाँटी भाई कांग्रेसी बोले "... योगी सरकार पढे-लिखे नौजवानो पर अत्याचार कर रही है..."
मैंने फिर कनटाप जड़ते हुए कहा "...शेक्सपियर के नाम का सदुपयोग ये नौजवान ही कर रहे हैं...इस नाम पर सेंसर बोर्ड की कैंची क्यों नहीं चलनी चाहिए..इसकी आड़ मे जो अश्लीलता फैल रही है..."
खाँटी भाई कांग्रेसी मुझे फटकारते हुए बोले "...आपको शर्म आनी चाहिए..."
मुझे हंसी आ गई तो मैंने हँसते हुए कहा "...शेक्सपियर के नाम बदल कर जेंडरपियर कर देना चाहिए..."
खाँटी भाई कांग्रेसी कंधे उचका कर पूछे "..क्यों...?"
मैंने कहा "...लव जेहाद के लिए जरूरी अकादमिक अश्लीलता रोकने के लिए...."
खाँटी भाई खटमल ये सुनते ही तमतमा गए बोले "...आपको क्या लगता है मजनू और रोमियों आतंकवादी थे...?"
मैंने मज़ाक करते हुए कहा "...नहीं जैसे आप लफंगों का समर्थन कर रहे हैं उससे तो यही सिद्ध होता है कि योगी सरकार सीधे आतंकवाद पर प्रहार कर रही है..."
ये सुनते ही खाँटी भाई खटमल अपना कपार खजुआने लगे...केजरीवाल को भी फोन लगाया लेकिन वो कवरेज क्षेत्र के बाहर बताने लगा तो मैंने कहा नमस्कार

No comments:

Post a Comment