Thursday, 12 October 2017

आली जनाब 'पैजामा हाजिर है"
हजरते कुफ्र आज सीधे पैजामा टाईट करके हुक्म भौकने निकले तो बीवी ने टोक दिया "...मियां आप तो पहले से ही गुलामी के खुद्दार हैं फिर पैजामा टाईट करने के क्या जरूरत थी...?" बड़े इत्मिनान से हजरते कुफ्र ने जवाब दिया "...बेगम हम तलाक पर रिवायाते फिदा न हो पाये थे..." हजरते कुफ्र की बीवी की त्योरी चढ़ गई "...आपकी खुद्दारी पर अब हमे शक होने लगा है..." हजरते कुफ्र पुचकारते हुए बोले "...बेगम पैजामे का नाड़ा बांग्लादेश से मंगाया था आपको याद है न मरकजे बर्बाद से..."
हजरते कुफ्र की बीवी तुनकते हुए बोली "...जाओ जी हम ही परवाने हैं और शमां भी हमी आपको क्या..." हजरते कुफ्र रोमांटिक अंदाज़ सफाई देते हुए बोले "...बेगम आपको तो मेरे पैजामा टाईट करने पर खुश होना चाहिए वैसे दिवाली की गिफ्ट तो कैंसल करनी पड़ेगी ..." बीवी अब सीधे मिर्ची सूंघते हुए तुंकमिजाजी से पूछी "...हमने कब आपसे दिवाली पे बड़ा गिफ्ट मांगा था...?" हजरते कुफ्र बैकफूट पर आ गए "...आपको क्या लगता है बेगम कि हम आपकी छोटी-मोटी फरमाईशे पूरी नहीं कर सकते क्या...?" कुफ्र की बीवी बोली "...करवा चौथ बीता है अभी तो इसका क्या मतलब दिवाली मनहूसियत से मनाएङ्गे...?" हजरते कुफ्र सांत्वना देते हुए बोले "... बेगम ज़रा सोचा करो सेकुलर हैं हम कुछ तो फर्ज निभाने दो..." बीवी ताना मरते हुए बोली "...ये मत सोचो मियां कि लोटा में बम फोड़ने से आवाज नहीं होती..." हजरते कुफ्र त्योरी की तरह पैजामा उपार चढ़ाते हुए सीना फुला कर बोले "....बेगाम आखिर हमने भी खुद को प्रूफ कर दिया की सेकुलर हैं आखिर हम भी..." बेगम भी अब थोड़ी और बड़ी मिर्ची लेकर चबाते हुए दुआएं देते हुए बोली "...जल्लाद आपके पैजामे को हमेशा ऊपर रखे .... "

Wednesday, 23 August 2017

खाँटी खटिया बीच में, पावे खोईंचा लाल...
खाँटी भाई खटमलों और सिक उल्लू रिश्तों को खून मिलना बंद, चिल्ला रहे हैं "..तीन तलाक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से गैरों को क्या मतलब...?" "...अरे काहें नहीं मतलब भाई..." मैंने जवाब में पूछ दिया तो खाँटी भाई खटमल सकते में आ गए बोले "..इसमे कौन पालिटिक्स है.बुर्के वालों का वोट मिलेगा क्या? " मैंने तपाक से एक जड़ते हुए कहा "...बड़ी चिंता हो रही है...?" खाँटी भी खटमल का चेहरा देखने लायक था रूआँसे हो कर बोले "...मुफ्त हुए बदनाम...शाहबानों युवराज के दादी जैसी थी..." मैंने फिर टांट कसते हुए कहा "...पप्पू युवराज के पप्पा ने शाहबानों को माँ के बजाय दायी मानते रहे और हँडिया ले के पलट दिया डंके की चोट पर ..." खाँटी भाई खटमल अफसोस जताते हुए बोले "...बुर्के वालों के लिए इतना बदनामी झेले फिर भी जो था चला गया..." मैंने कहा "...बुर्के वालों के लिए नहीं बुर्के वलियों के लिए करना चाहिए था..." खाँटी भाई खटमल अजीब पेशोपेश में थे लेकिन बोले "...जिसके लिए इतना किया..." मैंने फिर व्यंग्य कसते हुए कहा "...महराज नाग पंचमी बीत चुकी है..." खाँटी ये सुनते ही खाउरा गए वो गुस्से में बोले "...आपके कहने का मतलब क्या है...?" मैंने स्पष्ट करते हुए कहा "...दूध पी कर साँप जहर उगल चुका है..." खाँटी भाई से अब रहा नहीं गया बोले "...हामिद अंसारी ने जो कहा बिलकुल ठीक कहा..." मुझे हंसी आ गई "... उनकी बुर्के वाली अभी जबतक जिंदा है जाहिर है संघी नाचेंगे ही..." अब खाँटी भाई कनफ्यूज होने लगे थे "..आप देखियेगा ये नुददा गया..." मैंने कहा "...आप विश्वास और उम्मीद से समय का इंतज़ार कीजिये..." खाँटी भाई अब तैश दिखने के मूड में थे बोले "... कांग्रेस के सत्ता में आने पर तो फिर वही करना पड़ेगा..." मैंने उत्सुकता वश पूछा "...मतलब शाहबानों के सिर पर फिर से चंपी करेंगे...?" खाँटी भाई खटमल सफाई देते हुए बोले "...आखिर हमे भी तो जीने का अधिकार है..." मैंने जड़ते हुए कहा "...इसके लिए पर्सनल ला के एफ़िडेविट पर ही मुर्ग-मुसल्लम बनेगा..." खाँटी भाई अपना बचाव करते हुए बोले "...देखिये हम खून के प्यासे नहीं है..." मैंने रसीले अंदाज में टांट कसते हुए कहा "..हाँ आप लोग तो राजमा-ता को खून चढ़ाने वालों मे से हैं..." खाँटी भाई नाराज हो गए लेकिन बोले "...देखिये आप लोग गलत अर्थ मत निकालिए..." मैंने कहा "...आपसे अधिक सकते में 100 फीसदी वो हैं जो हलाला के नाम पर आम के आम गुठलियों के दाम वसूलने में थोड़ा भी गुरेज नहीं करते थे ..." खाँटी भाई खटमल अजीब सा मुंह बनाते हुए बोले "...आप जो कहना चाहते हैं न हम खूब समझते हैं..." मैंने कहा "...बस एक बात और समझ लीजिये कुरबानी देना सीखिये लेना नहीं..." खाँटी भाई खटमल तैश में आ कर पूछे "...नहीं तो ..." मैंने शांति से उत्तर दिया "...नहीं तो कबूतर की बीट भी जानलेवा होती है..."

Thursday, 3 August 2017

सियार छनौना केजरी, बानर बिगुल बजाय ...

कुक्कुर को भौकाता देख कर आजकल केजरीवाल सर्र जी खुश होए जा रहे हैं...कारण चलो कम से कम कुक्कुर तो मेरा समर्थन कर रहा है.. जिसकी भाषा न समझ में आवे वो समर्थक है...लेकिन पहले ऐसा नहीं था...उधार का दावा वही कर रहे थे रामलीला मैदान में "...इंसान से इंसान का भाईचारा..." लेकिन जमाना ये आ गया भाई लालू चारा तो खा ही गया अपने बच्चों को भी खिलाना शुरू किया... मैने पहले ही कह दिया था...यूपी विधानसभा चुनाव ठीक बाद...बिहार और दिल्ली जल्दी ही तूफानी खरमंडल शुरू होने वाला है...नतीजा सबके सामने है...तो केजरीवाल सर्र जी की असली सियासत वही हैं जिनके गले में जा कर लटकने की पुरजोर कोशिश की थी..अरे वो तो गनीमत थी लालू लटकाने केे बाद नशे में खुद को भोले नाथ नहीं बोले .कोई बता रहा था इसके पीछे भी राज है मैंने पूछा "...क्या राज है ?..." बकैत बताने लगे "... गले में पड़ने वाला साँप पूरा नाग होना चाहिए...केजरीवाल छाप पनियहवा साँप लटकाने से कोई भोले नाथ की उपाधि थोड़े न ले पाता है..." बकैत स्पष्ट करते हुए बोले "...गनीमत था उस समय सावन का पवित्र महीना नहीं था वरना लालू इसको कोबारा तो नहीं गेहअन साँप समझ कर जरूर फेक देते..." मेरा लेक्चर हो ही रहा था तभी एक अपोला मुझसे बोला "...आप गलत हैं..." मैंने बड़ी शांति से उत्तर दिया "...मुझे किसी चीज की लत नहीं है केजरीवाल सर्र जी की तरह अपोला बोला "...लालू यादव का केजरीवाल से कोई मतलब नहीं हैं..." मैंने बड़े आराम से कहा "...चीन भी पाकिस्तान के बारे में कहता है मुझे उससे कोई मतलब नहीं...ठीक यही बात पाकिस्तान आतंकवाद के बारे में कहता है..." ये सुनते ही अपोला भड़क गया और धमकी देते हुए बोला "...देखिये केजरीवाल भारत के नागरिक हैं ज़रा औकात में रहिए..." मैंने भी अपोले कनटाप जड़ते हुए कहा "...इसीलिए क्योंकि केजरीवाल जघन्य भष्ट निकला...?" अपोला ये सुनते ही चीखा "...केजरीवाल जैसा ईमानदार कोई नहीं है..." मैंने ठहाका लगते हुए कहा '...कुक्कुर को नून सुंघाते हुए भी बयान दे सकते थे लालू और कांग्रेस के भष्टाचार के खिलाफ..." अपोला ये सुनकर सकपका गया बोला "...कांग्रेस को भाजपा तोड़ रही है..." मैंने फिर टांट कसते हुए कहा "...तब फिर कुक्कुर का नून खुद सूंघने की क्या जरूरत है...?" अपोला लगा आयें बाएँ देखने थोड़ी देर बाद बोला "...देखिये भाजपा अपने विरोधियों को तोड़ रही है..." मैंने उत्तर देते हुए पूछा "...क्यों सर्र जी का खूंटा कमजोर पड़ गया क्या फॉरेस्ट रिसोर्ट वाला .एक ओर लालू की मिट्टी जंगल में, कांग्रेस की पलीद जंगल में..?" अपोला कुछ बोला नहीं तो मैंने कहा "...कल एक अजगर सियार निगल लिया... वो चाहे पोलिटिकल विनडिक्टा हो या उसे भूख लगी हो...सियार को अजगर के पास जाना ही नहीं चाहिए था..." ये सुनते ही अपोले में जान आ गई वो गुस्से में बोला "... कपिल मिश्रा भाजपा में होते तो आपको पता चल जाता...!" मैंने अपनी ठहाके वाली हंसी रोकते हुए कहा "..तब शायद केजरीवाल राष्ट्रीय जनता दल के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष होते...!" मैं ज़ोर-ज़ोर से ठहाके लगा कर हंसने लगा ... अपोले का मुंह देखने लायक था....

Thursday, 27 July 2017

नोचहिं मुंह तनि ठसकत नाहीं...
राजनीति के जमीन पर खटिया पटक कर जमीन कब्जियाने वाले लालू यादव ऐंड संस कुक्कुर की पूंछ में आग लगाने ही जा रहे थे चारो ओर हल्ला मच गया "...सोनम गुप्ता का पता चल गया...मालूम हो गया सोनम गुप्ता कौन है...पकड़ सं रे कहीं भागे मत...!!!!" मैंने राजदिये से पूछा "...ई कैसा हल्ला है...?" राजदिये ने बड़े आराम से उत्तर दिया "...देखिये धमकी देते हुए कहा "...देखिये हम लोग शुरू से ही जानते थे कि आखिर नोटबंदी का समर्थन करने वाली सोनम गुप्ता है कौन...?" मैंने फिर तर्क कराते हुए कहा "...उसी समय आपको शिकायत करना चाहिए था..." राजदिए जवाब देते हुए मुझपर टांट कसते हुए बोलेे "...हमको बकलोल बूझते हैं का आप आँय ! आपके बारे हम सब जानते हैं ..!" मुझे आश्चर्य हुआ सो मैंने पूछा "...क्या जानते हैं जी आप..." राजदिये आरोप लगाते हुए बोले "...आप ही का नु कार्टून था ...नितीश को साल भर पहले ही इस्तीफा देते दिखाए थे..." मैंने भी पलट कर कहा "...वही तोsss साल भर से हम चिल्ला चिल्ला के सोनम गुप्ता के बारे में बताते रहे नहीं सुने कार्टून भी बना डाले तब्बो नहीं सुने..." राजदिये बीच में ही बात काटते हुए बोले "...देखिये हम काम करने वाले लोग हैं काम में बीजी थे..." मैंने कनटाप जड़ते हुए कहा "...ई हम पहली बार सुन रहे हैं जे कि आप लोग कान में ठेकी डाल कर काम करते हैं..." राजदिए फिस्स से मुस्कुरा दिये थोड़ा रुकते हुए "...काम में मगन थी विकास करना हमारे खून में है ..." मैंने तपाक से पलट कर कहा "...भले ही खून बह जाए कोई फर्क नहीं पड़ता ..." ये सुनते ही राजदिये सकपका गए बोले "...देखिये तब की बात और है ..." मैं फिर तपाक से कहा " काहे और है इसलिए तब नितिश कुमार मुख्यमंत्री थे आपके ..इस बात पर कैसा ठेकी थोक लिए कान में...?" राजदिये बोले "...बिहार का पैकेज सुनते सुनते हमारा कान पाक गया था जी..." मैंने फिर टांट कसते हुए पूछा "...इसके लिए आपको रेडियो पाकिस्तान सुनना पड़ा ..?" इस पर राजदिये और खऊरा गए बोले "..राष्ट्रभाद पर मोदी जी का पेटेंट है ..." प्रतिउत्तर में मैंने कहा "... जब ऐसा है तो रायल्टी तो देनी पड़ेगी..." राजदिये और भड़क गए बोले "...ये रायल्टी नहीं जज़िया है..." मैंने भी उसी टोन में कहा "...वो जिसको आप कह रहे हैं वो बकलोल युवराज नहीं है..." राजदिए उसी गुस्से में पूछे "... तो का हैं ऊ सब ...? मैंने भी वैसे ही उत्तर दिया "...पक्का बनिया है दुन्नो के दुन्नो बुझाया कि नहीं आपको..." राजदिये खुन्नस में थे ही बोले "...नहीं बुझाया तो ..." मैंने सीधे समझाने के मूड में कहा "..सोनम गुप्ता को बावफा बना कर भी टैक्स वसूलने का जिगर रखते हैं..रांची से कारांची तब्बो बहुत दूर है..."

Monday, 5 June 2017

पार्किंसन कारण और कारगर निदान
एलोपैथी न्यूरो और न्यूरो साईकियाट्रि पार्किंसन जैसी बीमारी के बारे में कहती है ये लाईलाज है फिर भी न्यूरो और साईकियाट्रि के चिकित्सक इसका इलाज करते हैं और जैसे-जैसे इलाज बढ़ता जाता है बीमारी ठीक होने के बजाय और गंभीर होती जाती है क्योकि जो दवाएं (ट्रंकलाईजर्स) इसमे दी जाती हैं उससे संवेदी तन्तु (नसें) सूखने लगतीं हैं फिर मस्तिष्क से हाथों सहित अन्य अंगों का संबध खत्म होने लगता है। एलोपैथिक मेडिकल साईन्स अभी तक पार्किंसन का कारण तक नहीं खोज सकी है फिर भी इसका इलाज किया जाता है क्यों किया जाता है सबको पता है।
पार्किंसन पूरी तरह तनाव और भ्रम का विषय है न कि न्यूरो का। "इमोशनल इंजीनियरिंग और योग" को मिला दिया जाए तो नतीजे चौकाने वाले हो सकते हैं और बिना किसी दवा के मरीज 4 से 7 महीने में बिलकुल ठीक हो सकता है। पहले तो आप ये समझिए कि पार्किंसन का कारण क्या है और ये होता क्यों है ये पूरी तरह तनाव, भ्रम और मस्तिष्क द्वारा उन तनाव को पूरी तरह शरीर क्रिया द्वारा पूरी तरह परिलक्षित न कर पाने के कारण होता है तभी व्यक्ति के हाथ कांपते हैं। भ्रम के कारण ही तनाव पूरी तरह से परिभाषित, स्पष्ट और शरीर में उसका कियान्वयन भ्रम के कारण नहीं हो पाता तो रीफ्लैक्स एक्शन के कारण हाथ काँपते हैं क्योकि हाथ से ही मस्तिष्क और शरीर के बीच समंजस्य स्थापित होता है जो भ्रम के कारण के कारण सम्पन्न नहीं हो पाता। वस्तुतः इमोशनल इंजीनियरिंग में हाथों के रीफ्लैक्स एक्शन का ही इस्तेमाल कर के मस्तिष्क अधिगम और नवीन सूचना के लिए विकसित किया जाता है।जैसे ही भ्रम हटता है और तनाव स्पष्ट हो जाता है अनावश्यक रीफ्लैक्स एक्शन रुक जाता है और हाथों का कांपना बंद हो जाता है।
हर व्यक्ति का इमोशनल मैकेनिज़्म अलग-अलग होता है लिहाजा पहले तनाव भ्रम और उसके माइकेनिज़्म को समझना पड़ेगा फिर उसे व्यक्तित्व के अनुसार प्रबंधित कर मस्तिष्क को सामान्य स्तर पर लाना पड़ता है ...फिर शरीर और मस्तिस्क के बीच सहसंबंध को ठीक करने के लिए कुछ विशेष योग का सहारा लेना पड़ता है।

4-7 महीने मेन से इससे पार्किंसन पूरी तरह ठीक हो सकता है बिना किसी दवा के।

Narendra Modi Amit Shah J.P.Nadda

Friday, 26 May 2017

बुढ़ौती का नहान, जवानी बिहान....

कांग्रेस ने ब्रम्ह सेतु के उद्घाटन समारोह में मनमोहन सिंह के न बुलाए जाने पर आपत्ति की...रेनकोट पहन कर ब्रम्हपुत्र में कूद जाते तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी होती ?? वैसे भी अटल जी को पता था मनमोहन सिंह रेनकोट पहन कर ही नहाते हैं है इसीलिए उन्होने 2002 में ही इस सेतु का शिलान्यास कर दिया था...ठीक समझे बिलकुल ठीक समझे शुरू से ही कॉंग्रेस भी बखूबी जानती रही है कि मनमोहन सिंह रेनकोट के माहिर और शातिर खिलाड़ी इसलिए भी हैं क्योकि उनके ऊपर खिड़की के होने या न होने का कोई असर नहीं होता... कांग्रेस को डर था कि कहीं मनमोहन सिंह ब्रम्हपुत्र में छलांग न लगा दें...वैसे भी नहाने का भी बड़ा शौक है इनको... याद कीजिये जब सुब्रमणियन स्वामी ने इ-टल्ली युवराज केसरी की मम्मी को डंके की चोट पर प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया था तो यही मनमोहन सिंह हैं जो कांग्रेस के घड़ियाली आसुओं के ब्रम्हपुत्र में छलांग लगा-लगा कर रेनकोट पहन कर नहाए थे और मजे की बात ये कि रेनकोट बदल बदल कर नहाए कभी लाल, कभी नीला, कभी पीला लेकिन गमीनत ये रही कि इनहोने कभी गेरुआ मतलब भगवा रंग का रेनकोट कभी नहीं पहना और इसी कारण भगवा को बदनाम नहीं किया इसके लिए मनमोहन सिंह बधाई के पात्र हैं वो अलग बात है बाकी सभी खाँटी भाई खटमलवे उस समय नंगे थे और आज भी नंगे हैं आगे भी नंगे ही रहेंगे... NDA वाले बार-बार अनुरोध करते हैं बेटा पहिन लो कम से कम अंडवियर ही पहिन लो लेकिन ये कांग्रेसी हैं कि एकदम नंगे रहने और घूमने पर उतारू हैं...तो अब आप ही बताईए अटल जी के द्वारा शुरू किए गए सेतु पर मनमोहन सिंह को कैसे बुलाया जा सकता था ?

Tuesday, 23 May 2017

धन-धोबडों ने ले लीन्हा....

दिल्ली का तूफान एक, दो दिन, दो-तीन हफ्ते या कुछ महीनो का नहीं है ये तूफान आकार उसी समय लेना शुरू कर दिया जब केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी को केवल और केवल अपनी हवाला कंपनी बनाने लगे थे और बराबर का हिस्सा मांगने वालों को बागी घोषित करके हलाल करने में थोड़ा भी न तो पहले हिचकते नहीं थे और न ही अब हिचकते हैं। मुझे एक दिल्ली के ही कमीडिया विशेषज्ञ (स्वघोषित और स्वयंभू) ने बताया था कि इन सबके पीछे कुमार विश्वास का हाथ है और कपिल मिश्रा उनके गुट के ही हैं। मुझे उस क-मीडिया विशेषज्ञ की बात सुन कर बहुत हंसी आई थी लेकिन मैंने कुछ कहा नही।

जिन लोगों को ये लगता है कि कुमार विशवास जैसा आदमी इतनी हिम्मत कर सकता है तो वो सिरे से गलत हैं। भाई साहब इस आदमी के कारों के काफिले में 2 करोड़ की भी कार है और यदि आप ये भी समझते हैं कि ये कारों के काफिले ईमानदारी के काव्यपाठ की कमाई से खरीदी गई हैं तो आप बहुत भोले हैं। ये ‘कौआ छाप कवि’ हरवंश राय बच्चन का चपरासी भी बनने की योग्यता नहीं रखता जो अपनी कविता से एक 40 हजार का फिएट कार भी नहीं खरीद पाए जबकि दर्जनों किताबे लिख कर भी, जिस मात्र तीन साल में इसने जितनी कमाई की है उतनी कमाई करने के लिए चेतन भगत से पूछिए और मजे की बात ये कि इस कौए की केवल एक किताब है ‘कोई दीवाना कहता है’। ये कौआ छाप कवि दावा करता है कि इसने केवल और केवाल काव्य पाठ से इतनी रकम कमाई है। दुष्यंत कुमार, मुनव्वर राणा (पुरस्कार फेंकू) आदि आदि लोग ...मने अब तो कवि और शायर लोग तो बकलोल हैं...यदि इसके काव्य-प्रदर्शनों जो ये दावा करता है कि इनके आयोजन विदेशों सहित भारत सहित कुछ विशेष प्रोफेशनल कालेजों, विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थाओं में किये गए। आश्चर्यजनक रूप इन संस्थाओं ने इसे कौए को इतना पैसा दे दिया कि 2 करोड़ की कार भी इसके काफिले में आ गई। यदि ये सब जांच के दायरे आ जाएँ तो आश्चर्य मत कीजियेगा... मामला धन-धुलाई (मनी-लांड्रिङ्ग) का हो सकता है...ये भी मामूली धन-धोबड (जो काला सफ़ेद करे) नहीं लगता...

परतें धीरे-धीरे खुलने लगीं हैं बस कुछ दिनो में ये स्पष्ट हो जाएगा कि इन सबके पीछे कोई और नहीं प्रशांत भूषण, योगेंदर यादव और आनंद कुमार का हाथ है। कपिल मिश्रा ने जिस ईमेल को letscleanaap@gmail.com किया था उसे दरअसल प्रशांत भूषण और यीगेंदर यादव ही ऑपरेट कर रहे हैं। कपिल मिश्रा का आत्मविशवास से गवाह बनना, सीधे CBI, ACB आदि से समय लेकर सुबूत पेश करना किसी सामान्य व्यक्ति या नेता के बस की बात छोड़िए छोटे-मोटे सेसना कचहरी के वकील के बस की भी बात नहीं। ये वही कर सकता है जिसे हर कानूनी पक्ष की पूरी और गहराई से जानकारी हो लिहाजा प्रशांत भूषण ही है वैसे भी प्रशांत भूषण ने ही केजरीवाल के खिलाफ सारे सुबूत जुटाने में गंभीर मदद किया इसके लिए साम-दाम-दंड-भेद सबकुछ अपनाया गया। जिस दिन यीगेंदर यादव ने केजरीवाल का अप्रकृतिक बचाव करते हुए जब बयान दिया कि आर्थिक आरोप लगाने से पहले पुख्ता सुबूत होने चाहिए तभी शक यकीन में बदल गया था बस करो यही सब पर्दे के पीछे से खेल खेल रहे हैं। कपिल मिश्रा के पवार पॉइंट प्रस्तुति में जीतने तकनीकि शब्द हैं वो सभी कानूनी विशेषज्ञता की ओर इशारा करते है।

योगेंदर यादव, प्रशांत भूषण और कपिल मिश्रा की टीम केजरीवाल के करीबी आला दर्जे के हर तरीके से जघन्य भ्रष्ट कुमार विश्वास, मनीष सिसौदिया और अल्का लांबा सहित लगभग 3 दर्जन करीबियों को पार्टी में देखना ही नहीं चाहती क्योकि इन लोगों ने “आम आदमी पार्टी का दुपट्टा छीना है”, सरे आम वो सब किया जो अब तक का सबसे जघन्य और घोनौना था... दिक्कत ये भी है ये सभी बड़े शातिर हैं और इनके पास पैसा बहुत है जिसके बल पर ये सब कुछ भी कर सकते हैं इसीलिए ये सब इतनी सफाई से किया जा रहा है कि प्रथम दृष्ट्या मामला जघन्य अपराध दिखने लगे और केजरीवाल उसकी महाभ्रष्ट टीम सीधे कारागार में दिखे। मामला इतना गंभीर है केजरीवाल के कपिल मिश्रा के 2 करोड़ के घूस तक के बचाव तर्क और सुबूत नहीं लेकिन ये भी सही है बाहर सुबूत दे देने पर उसके साथ टेंपरिंग करना केजरीवाल और उसके छिछोरों के लिए कठिन नहीं।

ये पता होने के बावजूद कि कपिल मिश्रा प्रशांत भूषण के इशारे कूद रहे हैं, केजरीवाल या तो बेवजह भाजपा को बदनाम कर रहे हैं या फिर जानबूझ कर इसका हारे हुए युद्ध का श्रेय भाजपा दे रहे हैं जिसके पीछे सीधा सा तर्क है अहं के टकराव का। दिल्ली की कुर्सी पर भाजपा विराजमान हो जाए ये मंजूर कर सकते हैं लेकिन वो ये मंजूर कत्तई नहीं कर सकते कि उसपर प्रशांत भूषण या आनंद कुमार केजरीवाल को लात मार कर काबिज हो जाएँ।

Thursday, 18 May 2017

लोटा में लुआठी, तसरीफ़ देखावे लाल, हुआ बवाल - मचा बवाल...
उ प्र चुनाव परिणाम के ठीक बाद ही मैंने भविष्यवाणी की थी कि दो पड़ोसी राज्यों (दिल्ली और बिहार) में तूफान आने वाला है वो आया और कायदे से आया। अपोले, कंपोले, राजगपोले एक सुर में इसे बदले की कारवाही बता रहे हैं...सही बता रहे है इन रैनसम मालवेयरों ने भारतीय राजनीति को एनक्रिप्ट करके बहुत माल बनाया लिहाजा एंटीवायरस जब सक्रिय होकर जब मालवेयरों को नष्ट कर रहा हो तो जाहिर सी बात बात है बदले की ही करवाही है...अब इंटरनेट भी सेक्योर हो चले हैं जैसे कोई मालवेयर या वाइरस सिस्टम या टमटम का खून पीना शुरू करता है तो इंटरनेट ही उसका गला दबा कर खत्म कर देता है लेकिन अफसोस यही है कंपोले और राजगपोले के समय इंटरनेट था ही नहीं जिससे इन मालवेयरों को सक्रिय होने से पहले ही खत्म किया जा सके लेकिन अपोले के समय ये सुविधा उपलब्ध थी लिहाजा रास्ते में ही केजरीवाल जैसे बेहदखतरनाक रैनसम मालवेयर के खात्मे की प्रक्रिया चालू है।

जवानी में जरबन हिलाने से काम चल जाता न तो फिर लालू रैनसमवेयर के लिए ‘नदिया के पार’ वाला गाना बड़ा मुफीद होता ‘कौन दिसा में लेके चला रे बटोहिया...’ लेकिन देसी एंटीवायरस ने पूरा का पूरा खेल बिगाड़ के रख दिया... लूट का माल लोटा में रख कर लोटने वाले लालू रैनसमवेयर ये मान कर चलते थे कि जिस लोटे में लूट का माल रखे हैं उसी लोटे को लोटे-लोटे लूट कर दिखा देंगे...लेकिन रेनसमवेयर जिसने जिंदगी दी उसी ने जीती-जागती जिंदगी पर लोटा भर पानी फेर दिया...

जिस लुआठी से रास्ता खोजने बजाय अपनी ही तशरीफ़ लाल करके लोगों को सीधे हड़का कर अपनी कीर्ति फैला रहे थे वही अब चारो खाने चिद... हो गए और मुंह से बकार ऐसे नहीं निकल जैसे मानो घूस देने के बाद गलती का एहसास होने पर देने वाला घूस का पूरा पैसा वापस लेने पर उतारू हो जाए ...ज्यादा कुछ नहीं कीर्ति के नाम पर अम्बर में तमंचा का अंबार लहराने वाले खाँटी भाई खटमल जिसे लोग बहुत दिनो तक लोटा में टेलिस्कोप लगा कर सेते रहे अब उससे निकलने वाले केजरीवाल छाप दुर्गंध को दबाने की कोशिश होने लगी तो लुआठी शब्द की मात्राओं में हेर-फेर करने पर उतारू हो गए लेकिन गनीमत है अभी लालू का उल्टा नहीं हुआ वरना युवराज के नाम पर देश में आग लगा देते जैसे बड़ा पेड़ गिरने पर धरती हिलती है... अब हिलाने की बारी खटमलों की है जेल में जाओ खूब हिलाओ अपना भी हिलाओ औरों का भी हिलाओ...हो सके तो खुद भी हिलो और हिलाते रहो...



आजादी के बाद का सबसे स्मार्ट रैनसमवेयर केजरीवाल के लिए तो किसी समार्ट हावर्ड छाप एंटीवायरस की भी जरूरत नहीं...बनारस वाला हार्डवर्क तो बहुत बड़ी चीज है...भैवा इंटरनेट खुद ही सिक्योर हो चला है लिहाजा अपियों का सिस्टम भी सिक्योर था जो इन आपियों को पता ही नहीं था...मैं बार – बार चेतावनी देता था “...यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख और केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है...” लेकिन क्या करिएगा चेतावनी सुनने और समझने के लिए भी थोड़ा तो दिमाग चाहिए ही...नहीं समझे तो भुगतो... अपियों का ही अपना एंटीवयरस पूरी क्षमता से सक्रिय है... लेकिन महामूर्ख केजरीवाल इसे ‘लोटा में दतुअन’ साबित करने पर उतारू है... क्या करिएगा थोड़ी भी बुद्धि तो अन्ना-मुन्ना की जरूरत ही नहीं पड़ती ...

Wednesday, 10 May 2017


...यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख और केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है...

क्योंकि –
1 केजरीवाल ने साबित कर दिया कि कोठे पर बैठने वाली वेश्या नारी होती है लिहाजा हर नारी वेश्या है

2 विधान सभा में नकली EVM पर नौटंकी वो और उसका बकलोल इंजीनियर कर सकता है तो हर जगह यही हुआ

3 विधान सभा ये भी नोट छापने की विधि का प्रदर्शन करके ये साबित करेगा कि जिस किसी के पास नोट है उसने खुद छापा है न कि वो नोट सरकारी टकसाल में छपा है

4 इस बकलोल अपिया इंजीनियर ने EVM हैक के मामले में सीक्रेट कोड पर ज़ोर दिया जबकि इस बकलोल ये भी नहीं पता कि चुनाव आयोग के EVM का कोई ऐसा सीक्रेट कोड होता ही नहीं जैसा मूर्ख आपिया कर रहा है

5 ये और इसका मूर्ख इंजीनियर EVM हैक का दावा करने के बजाय 90 मिनट में मादरबोर्ड बदलने की बात कर रहा है...ये वैसा ही हुआ कि कोई कहे कि मेरी कार को छेड़े बिना नियंत्रण यानी हैक करके दिखाओ और मूर्ख आपिए महाशय उस गाड़ी का इंजन खोलकर उसमे गदहा जोत दे... इसीलिए...आपियों को मूर्ख .....

Sunday, 7 May 2017

अलिंग, बुलिंग और 'दारू पर दहाड़'...

'चाय पर चर्चा' करने के बजाय दो अपोले "दारू पर दहाड़ते" हुए आपस में बात कर रहे थे एक बोला "...झगड़े को सुलटाने में केजरीवाल का जवाब का दूसरा कोई जवाब नहीं..."
दूसरा बोला "...दिल्ली में केजरीवाल का कोई विकल्प नहीं अगला विधान सभा चुनाव भी हम ही जीतेंगे..."
पहला वाला ठहाका लगते हुए बोला "...इसीलिए कुमार विष-वास को ससुराल भेज दिया..."
इसपर पहला वाला और टांट कसते हुए बोला "...जो आदमी अपना मायका नहीं संभाल पाया और वहीं से तड़ीपार हो गया वो ससुराल क्या खाक ठीक करेगा..."
पहला बोला "...इसके पहले जो साजन दिल्ली में थे ये उनका मायका ही है ससुरी दिल्ली केजरीवाल को ही आँखें दिखाने लगी...मुआं दिल्ली में तो कविता के विषैले माहौल में सांस भी लेना भी मुश्किल था, इसके चमचों से मायके में ससुराली कविता भी घूस दे के सुनो फिर भी घूस दो फिर चाहे जो करो ..."
पहला वाला इसके आगे जोड़ते हुए बोला "...राशन वाला भी विष-वास का विषैला चेला था..हर चीज की लांड्रिंग रुपिया-पैसा, राशन कपड़ा लत्ता सबकी लांड्रिंग सिर्फ कविता से ..." ये सुनते ही दूसरा चौंक गया फिर फबती कसते हुए बोला "... हाँ अब पता नहीं ससुराल में राशन कार्ड बनवाने वाला कोई मिलेगा या नहीं..."
पहला वाला केजरीवाल की तारीफ करते हए कहा "..जो भी हो केजरीवाल का जवाब नहीं जो भ्रष्ट है उसे छोड़ेगा नहीं ..."
तभी मैंने दोनों की अनुमति से टोकते हुए ठोका "... वैसे केजरीवाल केजरीवाल कपिल देव की गेंद पर बजने वाले छकके को बाउंड्री पर लपकने के बजाय उसके मुंह पर कुल्ली करके बहरिया दिया..."
पहला अपोला बोला "...पानी मुफ्त था लेकिन टोटी से पानी नहीं दारू आ रहा है हजारों का दार ..."
मैंने फिर कान खिचाई करते हुए और टांट कसते हुए कहा "...इसीलिए MCD चुनाव में झाड़ू के बजाय कमाल का कमल हाथ में आ गया..."
ये सुनते ही केजरीवाल का चेला दारू का बीतल हाथ में उठा लिया और गाल पर घुमाते हुए बोला "...कपिल देव ने बालिंग करने के बजाय बुलिंग करने पर उतारू हो गया..."
मैंने चुटकी लेते हुए कहा पूछा "..फुलिंग, स्त्रीलिंग, अलिंग तो सुना था पर ये बुलिंग...?"
पहला अपोला बोला "...ये केजरीवाल के विरोधियों की USP है..."
मैंने पूछा "...जब विरोधी इस USP का इस्तेमाल करते हैं तो केजरीवाल किस लिंग का इस्तेमाल करते हैं..."
तब तक दोनों अपोलों बहुत चढ़ गई थी ... मैंने भी दोनों को ढ़केल गड़हे दिया और उसी में ढिमला गए ...

Monday, 27 March 2017

खोंखी खां खेजुरि...

आजम खां की भैंस दूध नहीं दे रही इसीलिए शाकाहारी बनने की धमकी दे रहे हैं...केजरीवाल छाप ज्ञानी ने आजाम खां को बताया कि दूध शाकाहारी भोजन है लेकिन बरखुरदार 'यूं ही नहीं अपोलों-अपोलियों को मूर्ख और केजरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है', उल्टे हाथ आजम खाँ ने एक कनटाप जडते हुए कहा "...आपको पता है जिस यूनिवर्सिटी में तुम्हारा दाखिला नहीं ही पाया था उसका मैं वाईस चांसलर नहीं चांसलर हूँ...चांस नहीं लेता मैं..." अभी भी अपोले ज्ञानी का हाथ उसके गाल पर ही था...उसके बाद आजम खां ने पूछा "...तो बकिए आप यहाँ तशरीफ क्यों लाये थे...?" अपोला ज्ञानी हिम्मत कर के बोला "...वो सब तो बाद में मैं बताऊंगा पहले आप ये बताईए कि दूध शाकाहारी भोजन क्यों नहीं है...?" आजम खां ने जवाब दिया "...बेहूदे बेवकूफ दूध में कार्बोहाइड्रेट नहीं होता..." अपोले ज्ञानी को समझ में नहीं आया तो फिर विषय लौटा बोला "...आप अपनी भैंस यानी बीफ दिल्ली में कटवा लीजिये..." आजम खां को ये न्योता बड़ा नागवार गुजारा बोले "...अमां अब हम इतने भी गिरे हुए और कमीने इन्सान नहीं हैं जो हारने के बाद म्यूनिस्पल कार्पोरेशन के चुनाव में वोटबैंक के लिए अपने बफैलो बीफ में कार्बोहाइड्रेट के हाइड्रोकार्बन से प्रदूषित करवा लें..." ज्ञानी अपोला बोला "...बूचड़खाना केजरीवाल का नहीं होगा..." इसपर आजम खां ने पूछा "...दिल्ली सचिवलाय में गोईठा पाथते थे बूचड़खाना का कारोबार भी शुरू कर लिया...?" ये सुनते ही अपोला ज्ञानी असहज हो गया बोला "...देखिये ऐसा कुछ भी नहीं है लेकिन आपके लिए हरित न्यायाधिकरण (ग्रीन ट्रिब्यूनल) की शर्तों का पालन किया जाएगा..." अब आजम खां तार्किक हो गए "...ये मुमकिन कैसे है..." अपोला ज्ञानी बोला "...कपिल सिब्बल का बूचड़खाना काफी मशहूर है..." ये सुनते ही आजम खां आपे से बाहर हो गए चीखने के अंदाज शांति से बोले "....मियां आपको पता है न कॉंग्रेस साथ हम भी हम गोश्त बन चुके हैं..." अपोला ज्ञानी चुटकी लेते हुए बोला "...घबराईए नहीं बीफ वाली भैंसें भी शाकाहारी होती हैं..." आजम खां गुस्से से लगातार घूरे जा रहे थे बहुत देर तक कुछ बोले नहीं तो फिर अपोला ज्ञानी बोला "...इससे पहले वो भैंसें मांसाहारी हो जाएँ आप दिल्ली आ कर अपना गोश्त तैयार करवा लें...मैं फिर फोन करूंगा...आदाब"

Sunday, 26 March 2017

खजुआवत गदहा नागरी, नाड़ा ज़ोर हिलाय...

गधे की पूंछ इतनी लंबी हो जाए कि उससे वो अपनी नाक भी साफ कर ले तो समझ लीजिये कि वो समय भी अब दूर नहीं जब केजरीवाल अपने पैजामे के नाड़े से फंसरी लगा कर और लंबे हो जाएंगे ... पता नहीं उन्होनेे इसकी तैयारी की है या नहीं या फिर कर रहे हैं तभी
मेरे पीछे खड़े एक अपोले ने चीखा "...हम गधे नहीं है..."
मैंने जवाबी कार्यवाही में कहा "...तबतो पैजमे के नाड़े से कान की सफाई में और खजुआने में भी कोई दिक्कत नहीं होती होगी...!"
अपोला बोला खुश हो कर अतिउत्साह में बोला "...जी बिलकुल दिक्कत नहीं होती जी ...लेकिन ?."
मैंने अपोले से पूछा "... लेकिन क्या ...?"
अपोला पंजाब की तरह पूरे आत्मविश्वास से बोला '...लेकिन भजपा ने यूपी में जो हाथ की सफाई दिखाई है वो ठीक नहीं है..."
मैंने उससे पूछा "...मायावती को बड़ी उम्मीद थी आपसे...?"
अपोला खुन्नस उतारते हुए हुए बोला "...हमको पता था जीतने के बाद उ प्र सरकार युवाओं पर अत्याचार करेगी..."
मुझे हंसी आ गई तो मैंने हंसी रोकते हुए कहा "....मैंने कब निवेदन किया कि केजरीवाल मिस यूपी को दुलत्ती मारें..."
ये सुनते ही अपोला असहज हो गया और गुस्से से बोला "...केजरीवाल ऐसे आदमी नहीं हैं..."
मैंने कहा "...मेरा भी तो वही निवेदन था कि केजरीवाल दो पैर वाले नहीं चार पैर वाले आदमी हैं..."
अपोला मुझे धमकी देते हुए बोला "....केजरीवाल को कम मत आँकिए..."
मैंने तार्किक होते कहा "...हाँ मुझे भी लगता है लालू यादव केजरीवाल की राह देखते ही रह गए लेकिन उनको गोदी उठाकर अस्पताल पहुँचाने के लिए केजरीवाल पटना नहीं गए ..."
अपोला चीखते हुए बोला "...उनका बेटा बिहार का उपमुख्य मंत्री है..."
मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...इसके बावजूद बड़े ताव में उनसे गले मिले थे..."
अपोला फिर असहज हो गया खुद को संभालते हुए बोला "...ईश्वर उनको लंबी उम्र दे..."
मैंने कहा "... उत्तर प्रदेश में तो कौआ हाक आए फिर दिल्ली में भी आएंगे क्या गदहा मारने...?"
अपोला चिढ़ कर बोला "...हम एमसीडी का चुनाव भारी बहुमत से जीतेंगे..."


मैंने कहा "...लालू के टूटे पैर को देखकर शायद कुछ सहानुभूति का वोट मिल जाए ..." ये सुनते ही अपोला चुप हो गया मैं भी खिसक लिया नमस्कार की क्या जरूरत थी...

Thursday, 23 March 2017

शेक्सपियर नहीं जेंडरपियर...

खाँटी भाई खटमलों को मंजनू छाप रोमियों पर इतना बड़ा प्यार आ रहा है कि जैसे योगी सरकार ने सीधे आतंकवाद पर प्रहार कर दिया हो...
एक खाँटी भाई कांग्रेसी चीख रहे थे "...ये सीधे-सीधे युवाओं पर अत्याचार है, उनके अधिकारों का हनन है..."
मैंने सीधे जोरदार प्रहार करते हुए पूछा "....आपके युवराज धरा गए क्या...?"
खाँटी भाई खटमल ये सुनते ही चुप गए बड़े मुश्किल से खुद को संभालते हुए बोले '...वो बैंकक जाते हैं, लंदन जाते हैं लिहाजा उनको पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है..."
अब जवाब मेरे पास नहीं था फिर मैंने सोच कर पूछा "...वो तो डाउन है डॉन कब से बन कर घूमने लगे..?"
खाँटी भाई कांग्रेसी विषय बदलते हुए बोले "...देखिये उ प्र सरकार सांप्रदायिकता का जहर बो रही है..."
मैंने तपाक कहा "...इसलिए क्योकि मजनू मुसलमान था और रोमियो ईसाई..."
खाँटी भाई कांग्रेसी बोले "... योगी सरकार पढे-लिखे नौजवानो पर अत्याचार कर रही है..."
मैंने फिर कनटाप जड़ते हुए कहा "...शेक्सपियर के नाम का सदुपयोग ये नौजवान ही कर रहे हैं...इस नाम पर सेंसर बोर्ड की कैंची क्यों नहीं चलनी चाहिए..इसकी आड़ मे जो अश्लीलता फैल रही है..."
खाँटी भाई कांग्रेसी मुझे फटकारते हुए बोले "...आपको शर्म आनी चाहिए..."
मुझे हंसी आ गई तो मैंने हँसते हुए कहा "...शेक्सपियर के नाम बदल कर जेंडरपियर कर देना चाहिए..."
खाँटी भाई कांग्रेसी कंधे उचका कर पूछे "..क्यों...?"
मैंने कहा "...लव जेहाद के लिए जरूरी अकादमिक अश्लीलता रोकने के लिए...."
खाँटी भाई खटमल ये सुनते ही तमतमा गए बोले "...आपको क्या लगता है मजनू और रोमियों आतंकवादी थे...?"
मैंने मज़ाक करते हुए कहा "...नहीं जैसे आप लफंगों का समर्थन कर रहे हैं उससे तो यही सिद्ध होता है कि योगी सरकार सीधे आतंकवाद पर प्रहार कर रही है..."
ये सुनते ही खाँटी भाई खटमल अपना कपार खजुआने लगे...केजरीवाल को भी फोन लगाया लेकिन वो कवरेज क्षेत्र के बाहर बताने लगा तो मैंने कहा नमस्कार

Saturday, 4 March 2017

फागुन के भंग में भौजी समाजवादी उमंग मे...

एह जबर फागुन में समाजवादी भौजी आखिर घोड़ी चढ़ ही गई...बड़े-बड़े लोग उम्मीद लगाए थे...बनारस में धूनी जमाए वो इसे फागुनी नजारे को देखने के लिए कई दिनो से धूनी रमाए कचौड़ी-जलेबी चाभ रहे हैं...खैर अरमान तो पूरे हुए लेकिन मोदी बाबा ने सारा गुड गोबर कर दिया...एक खाँटी भाई खटमल पनेरी का मगही पान झटकते हुए चिल्ला रहे थे "...ये सब बिना परमीशन था..."
मैंने कहा "...आमा छोड़िए भी समाजवादी भौजी आज कुछ ज्यादा ही गुलाबी दिख रही थी घोड़ी पर..."
खाँटी भाई खटमल नहीं माने और आरोप लगते हुए बोले "...आप वोट दे आए न ...अब आपकी नियत खराब ही रहेगी..."
मैंने आराम से कहा "...हम तो आराम से फागुन का असली मजा लेंगे सब नियत का खेल है का करें..."
खाँटी भाई खटमल कहे "... वैसे वो घोड़ी नहीं चढ़ी थी ..."
मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...तो क्या घोडा था...?"
खाँटी भाई खटमल खुन्नस निकालते हुए मुझसे पूछे "...आपको रथ नहीं दिख रहा था क्या...?"
मैंने भी उसी अंदाज में पूछा "...तो बताओ रथ में घोडा जुता था, घोड़ी जुती थी या विलुप्त प्रजापति का गदहा ...?"
ये सुनते ही खाँटी भाई खटमल असहज हो गए और गुस्से में मुझसे पूछे "...आप लोगों को घोडा-घोड़ी और गदहा के सिवा और भी कुछ दिख रहा क्या...?"
मैंने रसीले अंदाज में कहा "...दिख रहा है...घोडा और गदहा के बीच एक खूबसूरत समाजवादी भौजी..."
खाँटी भाई खटमल बाल नोचते हुए बोले "...आप कुछ नहीं कर पाईएगा..."
मैंने कहा "...जब सारी कैबिनेट कर रही है तो फिर सवाले खतम..."
खाँटी भाई खटमल चमक उठे बोले '...यही तो हालत खराब है इसीलिए..."
मैंने कहा "...माँ गंगा ने बुलाया हो या न बुलाया हो लेकिन समाजवादी भौजी ने फागुन मे जरूर बुलाया है..."
खाँटी भाई खटमल बोले "...भौजी के लिए पूरी कैबिनेट झोंकने की क्या जरूरत थी..."
मैंने कहा "...मोदी बाबा ने कहा है पाई पाई का हिसाब खुद दे कर आओ जनता को तो समाजवादी भौजी खुश हो जाएगी..."
खाँटी भाई खटमल बोले "...वो दिल्ली में रह कर भी दे सकते थे..."
मैंने कहा "... तो भौजी के साथ फगुआ कौन खेलता..हिसाब भी देंगे फगुआ भी खेलेंगे..."
खाँटी भाई खटमल चुपा गए तो मैंने फिर कहा "...पहिले तो कांग्रेसिए और समाजवादिए कमवे नहीं करते तो जवाब क्या देंगे और फगुआ केकरा से खेलेंगे..." खाँटी भाई खटमल बोले "...वैसे ये तो नाइंसाफी है..."
मैंने जवाब देते हुए कहा "...काहे भाई शेर शेर की तरह न लड़कर गीदड़ की तरह लड़े...आपकी सुविधा के लिए..."
खाँटी भाई को जवाब नहीं सूझ रहा था तो मैंने अंतिम वाक्य कहा "...भाई हम कुछ भी हों समाजवादी भौजी के साथ तो फगुआ हम देवर बन कर ही खेलेंगे...युवराज केसरी को अच्छा लगे या बुरा...वैसे भांग वाली ठनडई पीने के बाद बाबा के दरबार में केसरी को नहीं जाना चाहिए था..."
बोलो भाई हम ठीक कहे कि नहीं ? वैसे भी बुरा न मानो होली है ...

Thursday, 2 March 2017

मोजा मूज कोचियाई के, निकारे जूस हुड़दंग...

इसके खानदान में जो अब तक कोई नहीं कर पाया वो ये करके दिखाएगा...इसके नाना जो "चच्चा" के नाम से खुद को जबरदस्ती मशहूर किए वो भी नारियल का जूस नहीं निकाल पाये तो बाकियों की क्या औकात...लेकिन ये सबको जूस पिला के रहेगा...पिलाएगा ही नहीं बिलायत में बेचेगा भी...जहां इसके नाना उर्फ "चच्चा" का सूट सहित और कपड़ा धोआ के आता था...एक खाँटी भाई खटमल मेरा जोरदार विरोध करते हुए चीखे "...एक जंघिया ऐसा बता दीजिये जो धुलने के लिए लंदन गया हो ..." मैंने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया "...यही तो पता लगाना है कि 'चच्चा' जंघिया खरीदते क्यों नहीं थे..." खाँटी भाई खटमल ये सुनते ही अजीब सी हरकत करने लगे थोड़ी देर बाद आराम से बोले "...देखिये वो पढे-लिखे थे..." मैंने कटाक्ष करते हुए कहा "...मतलब मणिपुरी नारियल का जूस पिलाना और विलायत में बेचना अनपढ़-गवारों का काम है..." खाँटी भाई खटमल बोले "...उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया..." मैंने सीधा सा सवाल किया "...तो 'माणिपुरी नारियल के जूस' का सही मतलब बता दीजिये कौन रोका है आपको..." खाँटी भाई खटमल गुस्से में बोले "...बेवकूफ़ों को समझाना बेकार है..." मुझे हंसी आ गई तो मैं हँसते व्यंग्यात्मक अंदाज में बोला "...तो नारियल का जूस बहुत बुद्धिमान लोग ही निकाल सकते हैं..." खाँटी भाई खटमल असहज हो गए फिर मुश्किल से अपने आप को संभलते हुए बोले "...देखिये आप समझा कीजिये वो देश की समस्याओं के बारे में गंभीरता से सोचते हैं..." मैंने फिर टांट कसते हुए कहा "...हाँ तभी सभी फल और सब्जियों की फैक्ट्री लगा कर विकास करना चाहते हैं..." खाँटी भाई खटमल बोले "...आप उनके भावों को समझिए..." मैंने पूछा "...तो बताईए आलू की फैक्ट्री क्या भाव है...?" खाँटी भाई खटमल क्रोधयुक्त आश्चर्य जताते हुए बोले "...अजीब बात करते हैं आप ..." मैंने टांट कसते हुए कहा "...अगर मेड इन इंडिया का मुहर लगा हुए आम ओबामा खा लिए होते तो पक्का है हिलेरी क्लिंटन पक्का चुनाव जीत गई होती ..." खाँटी भाई खटमल सीधे तारीफ करते हुए बोले "...आपको पता भारत का इंटेलेक्चुयल क्लास नकली राष्ट्रवाद का विरोधी..." मैंने कहा "...हाँ चच्चा के नाम वाले उनवरसीटी के कुछ लोगों को जूस नहीं मिला तो पोस्टर लगा के ताव दिखा रहे हैं ..." खाँटी भाई खटमल सफाई देते हुए बोले "...हम उसका विरोध करते हैं...." मैंने कहा "...काहें गयासुद्दीन गाजी के पोते उर्फ चच्चा का नाम सुपुर्दे खाक कर रहे हैं ...?" खाँटी भाई खटमल कुछ बोले नहीं ...

Monday, 20 February 2017

श्मशान की शान, सिक-उल्लू रिष्ट परेशान...

श्मशान और कब्रिस्तान पर खाँटी भाई खटमलवे और उसके सिक उल्लू-रिश्तेदरवे ऐसे भड़के हैं जैसे मोदीजी श्मशान नहीं तो कब्रिस्तान भेज ही देंने वाले है...सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल चिल्ला रहा था "...ये सांप्रदायिकता है..." मैंने तपाक से पूछा "...मोदी जी ने कब कहा कि ये सांप्रदायिकता नहीं है...?" सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल उसी अंदाज में धमकी देते हुए बोला "...ये ध्रुवीकरण भाजपा को बहुत महंगा पड़ेगा..." मैंने कहा "...क्यों आपके वोटर लहंगा पहनने वाले हैं क्या...?" सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल खुन्नस निकालते हुए बोला "...आपको मज़ाक सूझता है शर्म नहीं आती..." मैंने हंसी को रोकते हुए कहा "...आती है पिछले पाँच सालों में गाँव के गाँव और नगर के नगर 200 बार श्मशान और कब्रिस्तान बनते देखकर..." सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल ये सुनते ही खऊरा गया बोला "...आपको क्या लगता ये दंगे हमने करवाए..." मैंने प्रति प्रश्न करते हुए जवाब दिया "...सरकार में तुम ही थे और उधर रेनकोट पहन कर नहाने वाला मल्लू था..." सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल बोले "...आप समझ नहीं रहे है ये देश के लिए खतरनाक है..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...आपकी नाक पर वास्तव में खतरा है ..." सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल और खऊरा कर बोले "...आपकी बार यूपी की जनता वो गलती नहीं करेगी जो उसने 2014 लोकसभा में किया था..." मैंने बड़े आराम से प्रश्न करते हुए कहा "...आपके हिसाब से यूपी वाले अबकी बार बाकी बचे सारे गाँव और शहर भी श्मशान और कब्रिस्तान में बदल देने के मूड में है में है...?" सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल अपना आपा खोने लगे थे बोले "...आखिर स्मार्ट सिटी और मंदिर के बजाय श्मशान का टेंडर क्यों निकाल दिया...?" मैंने कहा "...इसलिए कि अबकी बार आपकी नाक खतरे में है..." सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल तपाक से पूछा "...इसके पहले किसकी कटी है...?" मैंने कहा "... कमीडिया की फिरौती-दलाली बंद है, आपके बिरादर जेल में कब्रिस्तान खोजे रहे हैं ...हरि अनंत हरि कथा अनंता...." सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल मेरे पर फब्ती कसने के लिए एक सोशल मीडिया का सहारा लिया "...श्मशान की डगर पे भक्तों दिखाओ चल के ...." मैंने बीच में ही बात काटते हुए कहा "...बिलकुल सही पकड़े श्मशान की डगर पे ही 'राम नाम सत्य' होता है..." सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल तपाक से पूछा "...और कब्रिस्तान की डगर पे ...?" मैंने कहा "... उसकी तैयारी तो बकलोल युवराज केसरी और बबुआ कर ही चुके हैं बाउंड्री करा के ..." खाँटी सिक-उल्लू-रिष्ट खटमल चुप हो गए ....

Friday, 17 February 2017

सब सौ नंबर के फेर में...

"...मैं सबसे कम नस्लवादी..." ट्रम्प के खिलाफ सूते-सूते ही बोल देते "...मैं सबसे कम नकचढ़वादी मतलब नक्सलवादी..." तथ्य तो ये भी है कि 'माई के लाल जायकिसुन' दुनियाँ में नहीं रहे लेकिन जब तक जिये नाचते रहे नचाते रहे...हमारे यहाँ नस्लवाद चलता ही नहीं मुएं 'नकसलवाद' की नुमाईश ऐसे करते हैं जैसे माई के लाल जयकिसुन की तर्ज पर द्रोणाचार्य ट्रम्प ने अवतार ले लिया हो...
"...ओए जादा उम्मीद्द मत पालो..."
"...क्योंबे लोटे पर केवाप पंडी जी का अधिकार है का..."
"...पाकिस्तान ने 100 आतंकवादी मार गिराए...जरा न्यूज़ वैगरह भी पढ़ा करो..."
"...हाय तब का समझें यूपी के लौंडों का खेल खत्म...?"
"...ज्यादा उम्मीद पालने की जरूरत नहीं ..."
"...हाँ भाई माई के लाल जायकिसुन और द्रोणाचार्य ट्रम्प तो वही के हैं..."
"...रोना-रोहट मचा है..."
"...हाँ जब चुप होंगे तब्बे देखेंगे कि कॉंग्रेस की ईमानदारी और 100 आतंकवादी मुआने में क्या समानता है..."
"...है बहुत समानता है ...दमादम मस्त कलंदर..."
"...जीजी भी कल 100 जुएँ मुआं के हज पर रायबरेली आई थी तब्बे लगा कि पाकिस्तान 100 नंबर का इस्तेमाल करेगा..."
"...लेकिन जीजी तो 100 मे से एक जीरो घोंट कर 10से मिनट के लिए थी...?"
"...का करिएगा FIR हो गया न... प्रजापति से खतरा भले न हो प्रजा से तो है ही पति से भी है...ससुरी कहीं बोल न दे मैं सबसे कम नस्लवादी..."
"...ताबतों जीजी को जिया उल हक बनना पड़ेगा..."
"...असली द्रोणाचार्य तो हाईए है..."
"...मतलब ट्रम्प असली नहीं है का..?"
"...असली होता तो कहे कहता 'अबकी बार मोदी सरकार'..."
"...ट्रम्प सरकार ..."
"... मीन मेख निकालना बंद करो और देखो यूपी में 100 नक्सली मुए या फिर से जिंदा हो गए..."
"...का महराज मुद्दा ससुरा पाकिस्तान का है समझा कीजिये..."
"...अरे हमरा को आप का समझाईएगा जब हर जगह 100 नंबरी और 10 नंबरी चल रहा है..."
"...पाकिस्तान में 100 गो मुए ही न तो यूपी में भी खुछ तो होगा ही ..."
"...चलाओ रे एक ठो माई के लाल जायकिसुन का गाना...देखें ट्रम्प सबसे कम नस्लवादी है या सिक-उल्लू-रिश्तेदारवे सबसे कम नक्सलवादी ... ज़ोर से चलईहों...देखें तो जरा हम भी...डोनाल्ड ट्रम्प द्रोणाचार्य मोदी का कितना बड़ा चेला है...बजाओ तो "