Thursday, 5 May 2016

ये मुलाक़ात एक बहाना है प्यार का सिलसिला पुराना है....


बाबा रामदेव के आगे लालू यादव का मयूरनृत्यासन कोई यूं ही नहीं था। कभी किसी ने मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी, मायावती आदि को इस तरह मयूरनृत्यासन करते देखा या सुना भी है ? अभी दो दिन पहले किसी राजनीतिक पंडित ने ऊटपटाँग घोषणा कर दी कि लालू यादव चाहते हैं कि नितीश कुमार के प्रधानमंत्री का ख्वाब देखें और इसी लिए उनके प्रधानमंत्री बनने के प्रकल्प का समर्थन किया था वो इसलिए बिहार पूरी तरह से उनके बेटों के लिए आरक्षित हो जाएगा। ये आकलन बेहद घटिया इसलिए है क्योकि एक तो बिहार लालू की बपौती नहीं है भाजपा 25% मत लेकर सशक्त भूमिका में है दूसरे नितीश प्रधानमंत्री बनने में असफल रहते हैं जिसकी संभावना 100% है तो बिहार लालू और नितीश दोनों खत्म भाजपा के लिए तो फिर खुला मैदान होगा जो किसी वाकओवर से कम नहीं होगा तीसरे नितीश यदि राष्ट्रीय फ़लक पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में जितना अधिक सफल होंगे बिहार में उतनी ही अच्छी पकड़ बनाते जाएंगे यहाँ तक मुख्यमंत्री भी अपनी मर्जी का बैठाने में सफल हो जाएंगे। तो क्या लालू यादव ये सब आसानी से होने देंगे ?


लालू यादव इतने मूर्ख नहीं हैं नितीश सीधे राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने दे कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार लेंगे। लालू यादव के लिए सबसे मुफीद होगा कि नितीश को प्रधानमंत्री के सपने के साथ बिहार में कैद करके घुट-घुट कर मरने दिया जाए। इससे लालू यादव न सिर्फ नितीश का वोट बैंक हथिया सकेंगे बल्कि नितीश के मुक़ाबले अपनी विश्वसनीयता को और बढ़ा सकेंगे वैसे भी चुनाव में ये तो स्थापित हो चुका है लालू यादव नितीश से कहीं अधिक विश्वसनीय हैं इसिलिए सीट भी नितीश से बहुत अधिक है। लालू यादव ये बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि नितीश के राष्ट्रीय स्तर पर जाने का सीधा मतलब ये भी होगा कि लालू यादव नितीश आधीनता स्वीकार करें जो किसी भी कीमत पर लालू यादव ये तो बिलकुल ही नहीं चाहेगे इससे भी उनकी विश्वसनीयता का भयावह नुकसान हपगा। लिहाजा वो भूल कर भी वो ऐसा नहीं करेंगे।


जिस तरह से जमानतशुदा देशद्रोही का स्वागत नितीश ने किया वो लालू यादव के लिए न सिर्फ बेहद चौकाने वाला था बल्कि उनको ये सब बेहद बचकाना और मूर्खतापूर्ण भी लगा लिहाजा बिहार सरकार की क्रेडिबिलिटी का जबरदस्त नुकसान हुआ जिसमे लालू यादव भागीदार हैं। इससे भाजपा के पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण भी हुआ। अब लालू यादव इस सरकारी नुकसान को नितीश का नुकसान बनाना चाहते हैं जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित स्वीकृत कट्टर राष्ट्रवादी नायक की महती जरूरत थी। तो इसके लिए बाबा रामदेव से बेहतर कौन हो सकता था। इसी कारण से मुलाक़ात में न तो नितीश थे और न ही उनका कोई नुमाईनदा। जो लोग ये मानते हैं बाबा स्वयं ही लालू यादव के पास गए थी वो सिरे से गलत हैं। स्वामी रामदेव को खुद लालू यादव ने खुद फोन करके बुलाया था। बिहार चुनाव के ठीक बाद ही मैंने अपने लेख में कहा था लालू यादव कभी नहीं चाहेंगे नितीश राष्ट्रीय फ़लक पर अपना थोड़ा भी प्रभाव छोड़ने में सफल हो पाएँ। हर हाल में वो नितीश को बिहार में सीमित कर देना चाहते हैं। हालांकि वो चाहते हैं नितीश प्रधानमंत्री का सपना देखें लेकिन उन्हें उसी सपने के साथ ही मारना भी चाहते हैं।


लालू यादव को ये भी भली प्रकार पता है कि मोदी की लोकप्रियता घटी नहीं बल्कि तेजी से बढ़ रही है कुछ सर्वेक्षण तो यही बताते हैं। आप ध्यान दीजिये लालू यादव ने अगस्टा वेस्टलैंड घूसकांड के मामले में सोनिया और कॉंग्रेस का बचाव नहीं किया है बाकी सभी सिक-उल्लू-रिश्तवे ऐसा कर चुके हैं नितीश और शरद यादव भी। ये भाजपा और कॉंग्रेस में अब तक की सबसे भयानक, हिंसक और सीधी टक्कर है जिसका परिणाम भी सबको पता है और पत्थर पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट भी है "कॉंग्रेस की मौत "। सोनिया गांधी द्वारा दी गई उपाधि को सही साबित करते हुए उन्हें लौटाने का सबसे सही अवसर।


इस इबारत को लालू यादव नहीं पढ़ पा रहे हैं ये कैसे संभव है, तो लालू यादव बाबा रामदेव के माध्यम से खुद के लिए न सही अपने बच्चों के लिए राजनीतिक जमीन तलाशने के मकसद से मोदी के निकट आने का एक गंभीर प्रयास है। उनको ये भी अच्छी तरह पता है कुछ भी हो जाए नितीश मोदी के निकट नहीं जाएंगे मतलाब लालू यादव "पहली आओ पहले पाओ" की रणनीति पर काम कर रहे हैं। तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य में यदि कोई सबसे तेजी से अपने आप को अनुकूल बनाने का गंभीर प्रयास रहा है तो वो लालू यादव। हर किसी में में कुछ अच्छाइयाँ भी होती हैं यदि लालू यादव केजरीवाल की तरह नौटंकी नहीं कर रहे हैं तो वाकई लालू यादव तारीफ के काबिल तो हैं ही।

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