Tuesday, 10 May 2016



कुत्तारोची सर्र जी, AP धुआँ उड़ाय...

सर्र जी अब ई-टल्ली राजमाता के वो राज भी जानने का दावा करने लगे हैं जो अभी तक स्व कुत्तारोची, अहमद पटेल, स्व माधवराव सिंधिया आदि आदि लोग ही जानते थे। खाँटी भाई लोग बताते हैं कि कुछ राज जो स्व कुत्तारोची, अहमद पटेल, स्व माधवराव सिंधिया आदि जानते थे वो स्व राजीव गांधी भी नहीं जानते थे। राजदारों की श्रेणी में शामिल होने के लिए सर्र जी ने अपना दावा कायदे से ठोंका है। अपोलाटल्ली और कुछ खाँटी भाई कोंग्रेसी सर्र जी को नया राजदार होने पर बधाई दे रहे थे। बधाई कार्यक्रम खत्म होने के बाद मैंने अपोले से पूछा "...गर्मी तो ठीक ठाक है सचिवालय में गोईठा सूखने में तो कोई दिक्कत नहीं होने चाहिए ..." अपोला खुशी के मूड में था बोला "...कोई दिक्कत नहीं है ..." फिर मैंने पूछा "...फिर चिपरी-गोईठा पाथना छोडकर ये राज़दारी का कारोबार शुरू करने क्या जरूरत थी ...?" अपोला थोड़ा असहज हो गया बोला "... देखिये बात ये नहीं है..." मैंने तपाक से पूछा "...तो बात क्या है ...?" अपोला बोला "...मोदी जी हिम्मत नहीं दिखा रहे हैं ..." मैंने पूछा "...मोदी जी से आप किस हिम्मत आशा कर रहे हैं ..?" अपोला बोला "...हेलीकाप्टर घोटाले में मोदी सिगनोरा गांधी को गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं ..." मैंने चुटकी लेने वाले अंदाज में पूछा "...आपको क्या लगता है ..? अपोला उत्तर देते हुए बोला "...मोदी जी ऐसा नहीं करेंगे..." मैंने स्पष्टीकरण की आशा में पूछा "...मोदी जी भला ऐसा क्यों नहीं करेंगे ...?" अपोला भी चुटकी लेने के अंदाज में बोला "...क्योकि सिगनोरा गांधी मोदी जी के कई राज जानती हैं .." मैंने अपोले से "...क्या ये सारे राज बेहद गोपनीय हैं ...? अपोला मारे वाहवाही में उत्तर देते हुए बोला "...इतने गोपनीय कि केवल कुछ लोग ही जानते हैं ..." मैंने भी जोड़ते हुए कहा "...उन कुछ लोगों में अब सर्र जी भी शामिल हो गए हैं ..." अपोला खुशी से सीना चौड़ा करते हुए बोला "...हाँ बिलकुल ..." मैंने अब कटाक्ष करते हुए पूछा "... तो इसका मतलब सर्र जी भी इतने शक्तिशाली हो चुके हैं जितना स्व कुत्तरोची था ..." ये सुनते ही अपोला भड़क गया मारे गुस्से से बोला "...आप सर्र जी पर आरोप लगा रहे हैं ..." मैंने शांति से उत्तर दिया "...अपोला भाई ! ये आरोप नहीं स्वयं सिद्ध तथ्य है ..." अपोले कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...वो कैसे..." मैंने कहा "सिगनोरा को छोड़ कर चार कुत्तरोचियों का नाम आया है बाकी तो बिन चड्ढा लोग है..." अपोला कुछ बोला नहीं तो मैंने ही अंतिम वाक्य कहा "...अब सर्र जी बिन लादेन सारी बिन चड्ढा तो बनेंगे नहीं क्योकि वो ताकत नहीं थी उसके पास असली ताकतवर तो कुत्तरोची था तो सर्र जी कमजोर तो बनेंगे नहीं भले ही कामचोर हों ..." अपोले का मुंह देखने लायक था ...

Monday, 9 May 2016

उंघटापैची सर्र जी फर्जी, पर लूटे थूक बिलाय ...

सर्र जी की एक खासियत है वो किसी भी चीज का बहुआयामी उपयोग करने का रास्ता खोजते रहते हैं मसलन टेम्पू में बैठ कर चाँद पर भी जाने की योजना को अंजाम देने से नहीं चूकते। काम तो उनका सचिवालय में चिपरी, गोईठा पाथना है लेकिन खुद को ऐसे पेश करते मानो वो सही में दिल्ली के प्रधानमंत्री हों लिहाजा अपने खटारा टेम्पू में बैठ कर चाँद पर थूकने का उपक्रम कर डाला। .एक अपोले से मैंने पूछा "...आपके सर्र जी को क्या हो गया है टेम्पू में बैठ कर चाँद पर थूक रहे हैं..." ये सुनते ही अपोला उखड़ गया और उल्टे चीखते हुए मुझसे पूछा "...आपका मतलब केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं...?" मैंने उत्तर में प्रतिप्रश्न किया "...कब से कुत्ते आगे से भौकने की बजाय पीछे से भौकने लगे...?" अपोला फिर उसी गुस्से में बोला "...आप कुत्ते से तुलना नहीं कर सकते ...." मैंने कहा "...बिलकुल सर्र जी की तुलना कुत्ते से बिलकुल नहीं हो सकती ... कुत्ते का ये अपमान भला मुझसे कैसे हो सकता है ..." अपोला और भड़क गया बोला "...आपने अपने प्रोफ़ाइल में क्या पंच लिखा है ..." मैंने बड़े आराम से उत्तर दिया "...जानवर झूठ नहीं बोलते ..." अपोला बोला "...तो इसका मतलब आपको पता है न ..." मैंने कहा "...आपके सर्र जी पर मेरी पंच लाइन तब लागू होती जब आपके सर्र जी भौकने के लिए अपने मुखारविंद का प्रयोग करते ..." अपोले को मेरी बात समझ में नहीं आई पूछा  "...आपके कहने का मतलब क्या है...?  मैंने कठोरता से उत्तर दिया "...सर्रजी आगे के बजाय पीछे से भौंक रहे हैं ..." ये सुनते ही अपोला आपे से बाहर हो गया बोला "...आपको डिग्री के बारे कोई जानकारी नहीं है ..." मैंने कहा "...हाँ तो जरा ये भी बता दो कि तुम्हारे सर्र जी IIT में AIR क्या थी ...?"   अपोला चुप हो गया तो मैंने कहा "...आपके सर्र जी ने तो IIT का एण्ट्रेंस दिया ही नहीं था... वो असंवैधानिक विवेकाधीन कोटे से IIT में घुसे थे जैसे फालतू कुत्ते किसी समारोह में घुस जाते हैं ..." ये सुनते ही अपोला अपनी सफाई देने का जुगाड़ करने लगा बोला "...आखिर वो इसके लिए योग्य रहे होंगे तभी तो कोटे से प्रवेश मिला ..." मैंने कहा "...वो कोटा स्टाफ और टीचर के बच्चों के लिए आरक्षित था चार साल के लिए और सर्र जी के पिता जी भ्रष्टाचारी जिंदाल सारी जिंदल के कारखाने में मुलाजिम थे ये भी पता नहीं कि वो इतने ऊंचे ओहदे पर पर पहुंचे कैसे ...?" अब अपोले को जैसे साँप सूंघ गया हो बोला "...ये सब बकवास है ..." मैंने कहा "... सर्र जी के पिता जी तो IIT के स्टाफ नहीं थे तो बकवास कैसे हो गया ...?" अपोला चुप हो गया फिर मैंने उस चुनौती देते हुए कहा "...हिम्मत हो तो जरा बकलोल युवराज राल विंसी,बियंका वादरा और ई-टल्ली मम्मी की डिग्री दिखाएँ ..." मैंने थोड़ी रियायत देते हुए कहा "...खैर छोड़ अपोले जरा राबर्ट बढेरा की डिग्री दिखा चल ..." अपोला भागने लगा ...  

Thursday, 5 May 2016

ये मुलाक़ात एक बहाना है प्यार का सिलसिला पुराना है....


बाबा रामदेव के आगे लालू यादव का मयूरनृत्यासन कोई यूं ही नहीं था। कभी किसी ने मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी, मायावती आदि को इस तरह मयूरनृत्यासन करते देखा या सुना भी है ? अभी दो दिन पहले किसी राजनीतिक पंडित ने ऊटपटाँग घोषणा कर दी कि लालू यादव चाहते हैं कि नितीश कुमार के प्रधानमंत्री का ख्वाब देखें और इसी लिए उनके प्रधानमंत्री बनने के प्रकल्प का समर्थन किया था वो इसलिए बिहार पूरी तरह से उनके बेटों के लिए आरक्षित हो जाएगा। ये आकलन बेहद घटिया इसलिए है क्योकि एक तो बिहार लालू की बपौती नहीं है भाजपा 25% मत लेकर सशक्त भूमिका में है दूसरे नितीश प्रधानमंत्री बनने में असफल रहते हैं जिसकी संभावना 100% है तो बिहार लालू और नितीश दोनों खत्म भाजपा के लिए तो फिर खुला मैदान होगा जो किसी वाकओवर से कम नहीं होगा तीसरे नितीश यदि राष्ट्रीय फ़लक पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में जितना अधिक सफल होंगे बिहार में उतनी ही अच्छी पकड़ बनाते जाएंगे यहाँ तक मुख्यमंत्री भी अपनी मर्जी का बैठाने में सफल हो जाएंगे। तो क्या लालू यादव ये सब आसानी से होने देंगे ?


लालू यादव इतने मूर्ख नहीं हैं नितीश सीधे राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने दे कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार लेंगे। लालू यादव के लिए सबसे मुफीद होगा कि नितीश को प्रधानमंत्री के सपने के साथ बिहार में कैद करके घुट-घुट कर मरने दिया जाए। इससे लालू यादव न सिर्फ नितीश का वोट बैंक हथिया सकेंगे बल्कि नितीश के मुक़ाबले अपनी विश्वसनीयता को और बढ़ा सकेंगे वैसे भी चुनाव में ये तो स्थापित हो चुका है लालू यादव नितीश से कहीं अधिक विश्वसनीय हैं इसिलिए सीट भी नितीश से बहुत अधिक है। लालू यादव ये बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि नितीश के राष्ट्रीय स्तर पर जाने का सीधा मतलब ये भी होगा कि लालू यादव नितीश आधीनता स्वीकार करें जो किसी भी कीमत पर लालू यादव ये तो बिलकुल ही नहीं चाहेगे इससे भी उनकी विश्वसनीयता का भयावह नुकसान हपगा। लिहाजा वो भूल कर भी वो ऐसा नहीं करेंगे।


जिस तरह से जमानतशुदा देशद्रोही का स्वागत नितीश ने किया वो लालू यादव के लिए न सिर्फ बेहद चौकाने वाला था बल्कि उनको ये सब बेहद बचकाना और मूर्खतापूर्ण भी लगा लिहाजा बिहार सरकार की क्रेडिबिलिटी का जबरदस्त नुकसान हुआ जिसमे लालू यादव भागीदार हैं। इससे भाजपा के पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण भी हुआ। अब लालू यादव इस सरकारी नुकसान को नितीश का नुकसान बनाना चाहते हैं जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित स्वीकृत कट्टर राष्ट्रवादी नायक की महती जरूरत थी। तो इसके लिए बाबा रामदेव से बेहतर कौन हो सकता था। इसी कारण से मुलाक़ात में न तो नितीश थे और न ही उनका कोई नुमाईनदा। जो लोग ये मानते हैं बाबा स्वयं ही लालू यादव के पास गए थी वो सिरे से गलत हैं। स्वामी रामदेव को खुद लालू यादव ने खुद फोन करके बुलाया था। बिहार चुनाव के ठीक बाद ही मैंने अपने लेख में कहा था लालू यादव कभी नहीं चाहेंगे नितीश राष्ट्रीय फ़लक पर अपना थोड़ा भी प्रभाव छोड़ने में सफल हो पाएँ। हर हाल में वो नितीश को बिहार में सीमित कर देना चाहते हैं। हालांकि वो चाहते हैं नितीश प्रधानमंत्री का सपना देखें लेकिन उन्हें उसी सपने के साथ ही मारना भी चाहते हैं।


लालू यादव को ये भी भली प्रकार पता है कि मोदी की लोकप्रियता घटी नहीं बल्कि तेजी से बढ़ रही है कुछ सर्वेक्षण तो यही बताते हैं। आप ध्यान दीजिये लालू यादव ने अगस्टा वेस्टलैंड घूसकांड के मामले में सोनिया और कॉंग्रेस का बचाव नहीं किया है बाकी सभी सिक-उल्लू-रिश्तवे ऐसा कर चुके हैं नितीश और शरद यादव भी। ये भाजपा और कॉंग्रेस में अब तक की सबसे भयानक, हिंसक और सीधी टक्कर है जिसका परिणाम भी सबको पता है और पत्थर पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट भी है "कॉंग्रेस की मौत "। सोनिया गांधी द्वारा दी गई उपाधि को सही साबित करते हुए उन्हें लौटाने का सबसे सही अवसर।


इस इबारत को लालू यादव नहीं पढ़ पा रहे हैं ये कैसे संभव है, तो लालू यादव बाबा रामदेव के माध्यम से खुद के लिए न सही अपने बच्चों के लिए राजनीतिक जमीन तलाशने के मकसद से मोदी के निकट आने का एक गंभीर प्रयास है। उनको ये भी अच्छी तरह पता है कुछ भी हो जाए नितीश मोदी के निकट नहीं जाएंगे मतलाब लालू यादव "पहली आओ पहले पाओ" की रणनीति पर काम कर रहे हैं। तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य में यदि कोई सबसे तेजी से अपने आप को अनुकूल बनाने का गंभीर प्रयास रहा है तो वो लालू यादव। हर किसी में में कुछ अच्छाइयाँ भी होती हैं यदि लालू यादव केजरीवाल की तरह नौटंकी नहीं कर रहे हैं तो वाकई लालू यादव तारीफ के काबिल तो हैं ही।

Monday, 2 May 2016



सर-सर सर-सर सर्र जी, बकलोल दिया घुमाय ...

खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग लगता है मज़ाक के मूड में हैं अपने युवराज को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने की चर्चा करने से कतरा रहे हैं वो भी उत्तर प्रदेश का। मैडम तुसाद के म्यूजियम में जब से मोदी की प्रतिमा लगी है विश्व के लोग मोदी बड़े अदब से देखने लगे हैं लगे हाथ केजरीवाल भी मैडम तुसाद का गोड़ छान लिए तो मैडम को दया आ गई लिहाजा नाप ओप लेने का नाटक कर दिया लेकिन अभी सर्र जी प्रतिमा नहीं बनी है और न बनेगी। मनो "जईसन देवता ऊईसन पूजा" नौटंकी का जवाब दसटंकी मैडम तुसाद की ओर से।


लेकिन "यथा युवराज तथा कविराज" वाली कहावत पर चलते हुए खाँटी भाई लोगों ने मान ही लिया था कि यदि सर्र जी प्रतिमा म्यूजियम में लग गई तो "बकलोल युवराज" बकलोले रह जाएगा लिहाजा मुख्यमंत्री के नाम पर कतराना उनको ठीक लागने लगा। हमारे एक फेसबुक मित्र बता रहे थे कि कुछ लोग एक प्रस्ताव पर ताव ठोंक रहे थे कि "युवराज" की कुछ प्रतिमाएँ डिज्नीलैंड लगनी चाहिए। बस क्या था बच्चे मारे खुशी से उछल पड़े। पता नहीं वो प्रस्ताव का कुछ हुआ या नहीं लेकिन डोनाल्ड डक, मिनी मऊस, गोफ़ी मल्लू भालू आदि जरूर प्रतीक्षा में हैं। पता नहीं हमारे मित्र की सूचना सही है या नहीं लेकिन इतना जरूर है कि खाँटी भाई लोगों को पूरा विशवास है कि मैडम तुसाद "युवराज" को सर्र जी तरह धोखा नहीं देंगी,यू पी का सीएम बनने के बाद।

आज कल एक निर्मल बाबा राजनीति घूम रहा है पीके (प्रशांत किशोर) ने नाम से। बिहार में तो इसने कमाल ही कर दिया सेवा दिया नितीश को जीता गए दुश्मन लालू "मौज मारे गाजी मियां धक्का सहे मुनव्वर" । यू पी में भी ज़ोर शोर से कृपा आने की शर्त का दावा कर रहा है "...ये बार-बार बढेरा बहू का चेहरा मेरे सामने क्यों आ रहा है ...कभी बढेरा बहू को आजमाया है..." खाँटी बोले "...बहुत पहले केवल रायबरेली और अमेठी में..." निर्मल बाबा पीके बोले "...उसकी कुछ बढ़िया फोटो गरीबों में बाँट कर उस दांव खेल लो कृपा आने शुरू हो जाएगी..दर असल कृपा वही रुकी हुई है..." खाँटी भैवे खुश हो गए लेकिन एक सवाल परेशान किए हुए है "...ये बढ़िया फोटो क्या होता है ..." ये सवाल पूछने की हिम्मत किसी खाँटी में नहीं है।

बिहार की तर्ज पर पीके निर्मल बाबा की इस घोषणा के बाद जीतेगा तो खाँटी भाईयों का दुश्मन ही लिहाजा परिणाम तो एक तरह से तय ही हो गया है औपचारिकता मात्र बाकी है फिर भी देखने वाली बात होगी कि आखिर "बकलोल युवराज" से दुश्मनी गाठने मे कौन आगे निकल पाता है।