Wednesday, 27 April 2016

हाय रे ! मायका मलाई माहुर ...?

अबकी बार कुत्तारोची का बकलोल भांजा जो युवराज के नाम से बदनाम भी है, नपने से बच गया तो खाँटी भाई कोंग्रेसी लोगों को बहुत खुशी हुई थी लेकिन सारी खुशी हवा तब हो गई जब मैडम तुसाद के म्यूजियम में ईमानदारी की मूर्ति लगाने के लिए खुद को ही आवेदन किए हुए थे। मनमोहन सिंह की योग्यता और ईमानदारी अस मशहूर थी कि टाइम मैगजीन ने बकायदे अंडरएचीवर कह कर तारीफ की थी, आस्कर फर्नांडीज़ का ढिंढोरा तो ऐसे पीटा जाता था मानो उनको ईमानदारी का आस्कर पुरस्कार मिल गया हो, ए के एंटनी की ईमानदारी कितने टन की थी उसका भी खुलासा हो गया तभी अपने ईमानदार तन को लेकर भहरा के गिरे थे वो भला हो हमारे वीर सैनिकों का जिनके राष्ट्रभक्त खून से ईमानदारी के टनो वजनी एंटनी साहब अपने पैरों पर खड़े हो पाए। एस पी त्यागी का त्याग के बारे में क्या कहें लोग बता रहे हैं अगर इनको भी सप्तऋषि मिल गए होते तो आज नजारा ही कुछ और होता, आज इनका घर भर उल्टा लटक कर फंस गया तो इसमे सप्तऋषि के न मोलने क्या दोष ?

कुत्तारोची की दीदी का चार - चार बार गला दबाया है उनके मायके वालों ने फिर भी हिमाकत देखिये खाँटी भैवे उल्टा कोतवाल को डांटते अपने ई-टल्ली राजमाता के सुर में सुर मिलाते हुए पूछ रहे हैं अगर कोई सुबूत था तो अब तक चुप क्यों थे ? अब पता नहीं क्यों खाँटी भाई लोग ये बताना चाह रहे हैं कि ई-टल्ली राजमाता को मायके से भी जमानत मिल गई जबकि वास्तविकता ठीक इसके उलट है। असत्यव्रत छाप एक खाँटी भाई चीख रहे थे कोई भी सुबूत ले कर आइए राजमाता हर पद से इस्तीफा दे देंगी ...मने अब जमानत भी अब सुबूत नहीं रहा ...बगल में खड़े एक सज्जन ने कहा जब ऐसे तथ्यों को भी सुबूत नहीं मानेगे तो तो ताबूत तो हमेशा तैयार रहेगा ही।    यों को ये भी बताना पड़ेगा क्या।

पता नहीं कहाँ से IBN7 वाले किसको पकड़ लाये थे बता रहे थे सप्रेम कोर्ट का व-कील है उसे तो बाहर के कचहरी कचहरी ही नहीं लगती उसका बस चले तो हेडली को ही महात्मा घोषित करके "जी" की उपाधि दे दे। उसके तर्क के आधार पर तो जो अपराधी भारत में अपराध नहीं किए हैं वो अपराधी हो ही नहीं सकते। मेरे कहने के अर्थ को भावनात्मक स्तर पर मत सोचिए तार्किक और संवैधानिक स्तर पर सोचिए। ऐसे सप्रेम कोर्ट के व-कीलों का बस चले तो रेड-कार्नर नोटिस, इन्टरपोल आदि जैसी चिड़िया का गुलेल से बिना जीपीएस की सहायता से शिकार कर लें।

क्या वाकई ये रोम से भी रामराज्य की मुनादी है ...
   

Friday, 22 April 2016

पहुना पूंछ बिरादरी, लुआठी लहसुन खऊर....

जानवरों की खास अदा है वो कभी मूंछ पर ताव नहीं मारते लेकिन पूंछ की हिफाजत ऐसे करते हैं कि किसी को भी लग सकता है वो पूंछ पर ताव मारने की खास अदा है ... एक अपोला मुझसे तर्क करने लगा बोला "...पूंछ जानवरों की शान होती है ..." मैंने कहा "... हाँ तभी वो झूठ नहीं बोलते ..." अपोला जैसे आपसेट हो गया बोला "...लेकिन इन्सानो की मूंछ तो होती है पूंछ नहीं..." मैंने पलट कर पूछा "...तो तुम्हारे कहने मतलब है इन्सानो की मूंछ पर भी कम दारोमदार नहीं होता..." अपोला अपने सर्र जी के हवाले से कहा "...हम लोगों ने भी दिल्ली में बहुत काम किया है ..." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...अच्छा...! तो फिर हिमाकत करने की धमकी पूछ से है या मूंछ से ...?" ये सुनते ही अपोला बेहद असहज हो गया "...देखिए वो सब हम नहीं जानते हम तो सिर्फ जनता की सेवा करना जानते हैं जी ..." मैंने कहा "... जब सेवा ठीक से हो रही है तो फिर काहें लुआठी पर लहसुन फूँक रहे हैं ..." अपोला अब आपे से बाहर हो रहा था गुस्से में बोला "...लुआठी पर लहसुन फूंकने का क्या मतलब है ..." मैंने कहा "...मय 'अधिकारियो' को आपके सर्र जी 'अधिका' साबित करने पर उतारू दिख रहे हैं उसमे से 'री' ही डिलीट करने पर उतारू हो गए हैं..." अपोला तार्किक अंदाज में मुझसे गुस्सा झाड़ते हुए बोला "...इससे ये कहाँ साबित होता है कि सर्र जी लुआठी पर लहसुन फूँक रहे हैं ..." मैंने कहा "...क्यों नहीं ! उसी लुआठी से घर फूँकने की कोशिश कर रहे हैं बेचारे निरीह अधिकारियों के और जब कोशिश नाकाम हो रही है तो लुआठी में लहसुन चुआ रहे हैं ..." अपोला अपना गुस्सा कंट्रोल करते हुए बोला "...देखिये वो नसीहत दे रहे थे ..." मैंने तपाक से टांट कसते हुए पूछा "...नसीहत इस आधार पर कि 2020 में फिर योगेंदर यादव और शांत-प्रशांत भूषण फिर बादशाह सलामत की हुंकार भरने आपके सर्र जी के पास अंग विशेष पर लात खाने चले आएंगे ...?" अपोला फिर से  खुद को संभालते हुए बोला "...देखिये पार्टी में अब उनकी कोई जरूरत नहीं ..." मैंने कहा ",,,फिर किस आधार पर आपके सर्र जी 10-15 साल सचिवालय में गोईठा पाथने का ख्वाब देख रहे हैं ...?" अपोला फिर आपे से बाहर हो गया और चीखते हुए बोला "...वो गोईठा नहीं पाथ रहे..." मैंने तर्क करते हुए पूछा "...ठाले-निठल्ले तो याही काम बड़े चाव से करते हैं ..."अपोला बोला "...उनके पोर्टफोलियो न लेने के पीछे ठोस कारण है ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है गोईठा पाथना और लुआठी पर लहसुन फूंकना...." ये सुनकर अपोला बेचैन हो गया और धमकी देते हुए बोला "... हम कम से कम 10 साल तो राज करेंगे ही दिल्ली में ...." मैंने टांट कसते हुए कहा "...तुम्हारे सर्र जी की मूंछ तो ऐसी नहीं है कि उसपर ताव मार पाएँ ..." अपोला उसी अंदाज में बोला "...हम मूंछ पर ताव नहीं मारते ..." मैंने कहा "...तब तो एक ही रास्ता है आपके सर्र जी सहित अपोले अपनी पूंछ पर ताव मारें और शुरू करें नाक में पूंछ ..." बात पूरी होने से पहले ही आपोला भागने लगा .... 

Sunday, 3 April 2016

चवन्नी का दम बने एकन्नी में भुर्ता ...

एक हाथ में फटवा एक हाथ में फट्ठा लेकर घूमते थे...चीख - चीख कर बताते थे मुसलमीन सही है ,,,लेकिन किसी खैरमकदम वाले ने ज़ोर से कहा "...जनाब ये फतवा नहीं फटवा है ..." ये सुनते ही जनाबेआली जहां फट्ठा भाँजने के आदी हो चुके थी उसी से खोईच लगा गया तो बहते खून को रोकते हुए बोलने लगे "...मियां हर्ज ही क्या है ..." और ज़ोर से उसी खैरमकदम वाले ने पूछा "...जब हर्ज ही नहीं था तो ये फटवा लेकर क्यों अपनी फजीहत करवाए जा रहे हैं ...? आपका फट्ठा भी खुद्द आपकी ही फाहीहत किए जा रहा है ..." जनाबेआली कनफ़्यूजन में बोले "...समझ में नहीं आता वो मोहतरमा सही हैं या ये मोहतरम ...?" खैरमकदमी ने कहा "...तो अब क्या होगा जनाबेआली वो मोहतरमा तो इज्जत का कोरमा बना के खा गईं...?" जनाबेआली अफसोस जताते हुए पूछा "...किसी ने रोका क्यों नहीं ...?" खैरमकदमी बोले "...जिसे जितना रोकना था रोक चुका उनका बस चले तो कौम के लड़कों की शादी तक दुश्वार हो जाए ..." जनाबेआली आपे से बाहर हुए जा रहे थे "...आखिर सऊदी अरेबिया में तो सख्त कानून है कि कोई विदेशी जलसा नहीं कर सकता, किस ग्रुप को एड्रैस नहीं कर सकता फिर ये सब कैसे ...?" खैरमकदमी बोले "...जनाबेआली ओबामा तक जलसा नहीं कर पाए हैं लेकिन मोदी के लिए कानून बादल दिया गया अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं..." जनाबेआली के पेशानी पर बल पड़ने लगे थे और खुद को संभालते हुए बोले "...सवाल तो ये है फटवे अब चीख - चीख कर फड़वाए जा रहे हैं वो भी हजरते जमीन से ..." खैरमकदमी बोले "...ये तो सीधे आग लगने वाली बात हो गई बुर्के से ...?" जनाबेआली बोले "...सवाल ये है बरखुरदार अब तो टोपी से सियासत भी मुमकिन नहीं रही ..." खैरमकदम वाले बोले "...आग तो तारिक फतेह भी लगा रहे हैं मुंबई या दिल्ली में बसने की दिलचस्पी कल ही उन्होने जाहिर कर दी ..." जनाबेआली चिंता में दुखी हो कर बोले "...जब सियासत नहीं होगी तो हमारी सुनेगा कौन ...?" खैरमकदमी बोले "...सुनने वाले फिर भी बहुत से हैं लेकिन उसका क्या होगा जो पैसा हजरते जमीन से आता है सुना है अब तो वो भी शायद न आवे फिर तो ....?" जनाबेआली और खैरमकदमी गले मिल गए एक दूसरे को सांत्वना देने के लिए ...