Friday, 4 March 2016

स्वतंत्र भारत की राजनीति का सबसे शानदार पहलू

कन्हैया के भाषण के बाद सिकउल्लूरिस्ट दलों के शीर्ष के एक दो नेता तो खुश हैं कि उसका इस्तेमाल आगामी चुनावों मे सरलता से सिर्फ और सिर्फ मोदी के खिलाफ हो सकता है लेकिन छुटभैये नेता,  खाँटी बकलोल युवराज और केजरीवाल मने  गोरू और चेला दोनों की नींद हराम हो गई है। ये तो तय है कन्हैया अगर कुछ भी नहीं करेगा तो भी केजरीवाल को तो झटके में ही खत्म कर देगा। वो कन्हैया जिससे दिल्ली को घिन आती है।

ये तय है कन्हैया वामपंथ छोड़ेगा नहीं और जिस तरीके कांग्रेस ने जेएनयू को कम्युनिस्टों का अड्डा बनाने के लिये बनाया अब वही अड्डा बड़ी आसनी से कॉंग्रेस-केजरीवाल सहित सभी सिकउल्लूरिस्ट दलों को खत्म कर दिया जाएगा। जेएनयू के कन्हैया कांड से एक बात तो पूरे स्पष्ट तौर पर स्थापित हो गई कि देश मे सिर्फ दो ही विचारधाराएं है एक देशभक्ति का दूसरे देशद्रोह का।  

सिकउल्लूरिस्टो की मजबूरी ये भी है कि वो कन्हैया का समर्थन करे ही नहीं तो सीधे आरएसएस समर्थक यानी मोदी समर्थक कहलाएँगे मजे की बात ये भी है लगे हाथ इशरतजहां का मामला भी उठ गया या जानबूझ कर उठा दिया गया नतीजा कन्हैया, कम्यूनिष्ट, अफजल गुरु,  इशरत जहां, लशकर-ए-तोईबा, केजरीवाल, कॉंग्रेस, लालू, मुलायम, याक़ूब, नितीश, दाऊद, मकबूल बट्ट आदि सभी आतंकवादी सेकुलरिस्ट एक ही खेमे नजर आने लगे हैं। उन्हें इशरत मामले में मोदी का विरोध करना ही है, मोदी-विरोध के लिए कन्हैया का समर्थन करने का भी सीधा मतलब है आप देश तोड़ने की मंशा रखने वालों के पक्ष में खड़े हैं जो किसी मुसीबत से कम नहीं।

राजनीतिक हलक़ों में इस बात की चर्चा है जैसी अभी तक ऐसी प्रचंड राजनीति कभी भी विपक्ष ने नहीं देखा था। सभी घटनाक्रम को एक कड़ी के रूप में जोड़ने पर एक खास पैटर्न दिखता है परीक्षण से लेकर ठोस निष्कर्ष तक। इसका आगाज हिन्दी पखवाड़े से ही हो गया था जब कुछ खास किस्म के साहित्यकार प्रजाति को भोपाल में आमंत्रित ही नहीं किया गया था। आज नतीजा सबके सामने है बड़ी आसानी से सेकुलर शब्द अब देशद्रोह को परिभाषित करने लगा है लिहाजा इस विषय पर जिस प्रकार का ध्रुवीकरण हुआ वो सभी सेकुलरों के लिए हैरान - परेशान करने के लिए काफी है। ये भाजपा-आरएसएस और दक्षिणपंथ की स्वतंत्र भारत मे बहुत बड़ी जीत है। विचारधारा के स्तर पर ऐसी जीत अभी तक किसी दल ने हासिल करना तो दूर सपने में भी नहीं सोचा था।

यूं ही नहीं मोदी को दुनिया सर्वश्रेष्ठ राजनीतिज्ञ कहा जाता है।    

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