दस लतपथ, चितकबरम पाजी खयाल...
चितकबरम ने मान ही लिया कि हलफनामें को चितकबरा करने में उनका हाथ था लेकिन सवाल ये उठता है कि वो उसे आतंकी मानने में उनका हलक क्यों सूखा जा रहा था ? बजाय इसके वो बड़ी सहूलियत से आटंकी क्यों मान रहे थे। मैंने एक खाँटी भाई कांग्रेसी से पूछा "...हलफनामे को हलकनामा में क्यों बदल दिया गया ..." खाँटी भाई कांग्रेसी खऊरा कर बोले "...ऐसा कुछ नहीं था..." मैंने कहा "...ओवैसी की तरह किसने चितकबरम के गरदन पर छुरी रख दी खाँटी भाई...?" खाँटी भाई और खऊरा गए और चिल्लाते हुए बोले "...पॉलिटिकल विंडिक्टा पॉलिटिकल विंडिक्टा ..." मैंने थोड़ा हुरपेटने के अंदाज में कहा "...ये तो अधेड़ बकलोल युवराज की भाषा है ...?" खाँटी भाई मुझे धमकाते हुए बोले "...ये सरकार राहुल बाबा से डरती है ...." मैंने आश्चर्य से पूछा "...ओह ! तो आप डरा रहे हैं ..." खाँटी भाई बोले "...नहीं चेतावनी दे रहे हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...किसको सरकार को या आतंकवादियों को....?" मेरा सवाल सुनते ही खाँटी सनपात गए फिर थोड़ी देर बाद बोले "..देखिये ये सूट-बूट की सरकार जो कर रही है वो ठीक नहीं है ..." मैंने बड़े आराम से खाँटी भाई के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा "...हाँ जनता को ये सरकार सूट तो कर रही है लेकिन बूट कांग्रेसियों के पीठ पर पड़ रही है ..." खाँटी भाई जैसे उखड़ गए बड़े अटपटे मन से बोले "...चिदम्बरम साहब की तबीयत ठीक नहीं लगता है ..." मैंने सपाट उत्तर देते हुए स्पष्ट किया "....खाँटी महोदय ! वो तो अपनी किताब का संकट मोचन कर रहे थे मुंबई में ...!" खाँटी भाई बोले "...देखिये हम लोग किसी से डरते नहीं ..." इसपर मैंने कहा "...हाँ आतंकवादियों से भी नहीं ..." खाँटी भाई मुझे समझते हुए बोले "...देखिये आप गलत समझ रहे हैं हम लोग देश को महफूज रखने की भरपूर कोशिश की...." "...मतलब चितकबरम साहब कॉंग्रेस को चित करते हुए दस लतपथ को कबर में दफनाने पर आमादा हैं ...!" मैंने अपनी ओर से स्पष्ट करते हुए कहा तो खाँटी भाई मारे गुस्से में सफाई देते हुए बोले "..ये सरकार सबको ओवैसी समझने की गलती कर रही है..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...वो कैसे ...?" खाँटी भाई बोले "...हम किसी के दबाव में नहीं आने वाले ..." मैंने स्पष्ट करते हुए उनसे पूछा "...यदि दबाव में आ गए तो दस जनपथ लतपथ हो कर कबर में दफन हो जाएगा क्या ...?" ये सुनते ही खाँटी भाई जोर देकर बोले "...हमे कोई नहीं डरा सकता ..." मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा "...हाँ ऐसा इसलिए कि आप ही तो सबको डराने का ठेका आतंकवादियों को दे रखा हैं जवाहर के जहर से लेकर अधेड़ युवराज के अकलन्धेपन तक ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये कॉंग्रेस ने देश के लिए बहुत बलिदान दिया ..." मैंने आश्चर्य से पूछा जैसे "...आजादी की लड़ाई हमने लड़ी, इन्दिरा जी और राजीव जी ने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया ..." मैंने तपाक से कनटाप जड़ते हुए कहा "...अगर आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी तो किसी कांग्रेसी को फांसी क्यों नहीं हुई ? जेल में बिरयानी खाने-खिलाने आदत अभी तक कांग्रेस को क्यों है ? रही बात इन्दिरा और राजीव जी बलिदान की तो उन्होने ऐसा कुछ नहीं किया उनका 'वध' हुआ था क्योंकि वो दोनों सरकारी सुरक्षा घेरे थे ठीक अपना बचाव करने के लिए..." खाँटी भाई मेरा तर्क सुन कर सन्न रह गए बड़ी हिम्मत से बोले "...लेकिन..." मैंने बात काटते हुए कहा "...लेकिन निश्चित तौर पर 'वध' को बलिदान नहीं कहा जाता ...अगर ऐसा हुआ तो लाखों चिकन-मटन-लैम-आतंकी-इशरत-अफजल आदि कोंग्रेस छाप बलिदानी हो जाएंगे ... " खाँटी पता नहीं किसको फोन मिलने लगे तो मैंने कहा नमस्कार....
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