Saturday, 12 March 2016

किच-किच कुत्तारोची, ठन-ठन माल्या ठाँय..

अभी तक तो कुत्तारोची और अंदरसांड छाप विदेशी ही विदेशी काँग्रेस के इशारे पर उधम मचाने की हिमाकत करते थे । उसके पीछे ठोस कारण भी है जो सभी को वैसे ही पता है जैसे लोग जानते हैं कि बैलगाड़ी और तांगा आदि मोड़े तो जा सकते हैं लेकिन कभी बैक नहीं किए जा सकते चाहे कोई कितना भी नाक रगड़ ले। अंदरसांड और कुत्तरोची फिर भी आम खाँटी भाई कांग्रेसियों से ईमानदार ही रहे हैं लिहाजा खाँटी भाईयों के लिए ईमानदारी तमगा इन्हीं कुत्तारोची और अंदरसांड से ही मिलता रहा है। एक खाँटी भाई अपने आपिए-कापिये-सांपिए-बसांपिए साथियों के साथ बहक रहे थे "...विजय माल्या जी को भाजपा ने भागा दिया..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...हाँ अब तो विदेशी काँग्रेस की मेहरबानी से देसी कुत्तारोची भी पैदा होने लगे ..." खाँटी भाई मय उनके साथियों पर मेरे चुटकी लेने का असर शायद नहीं हुआ वो बोले "...माल्या जी के साथ सरकार की साँठ-गांठ है ..." मैंने अबकी बार तगडी चुटकी लेते हुए कहा "...आप ऐसे माल्या जी माल्या जी बोल रहे हैं जैसे दागी रज्जा ओसामा जी और हाफ़िज़ जी बोलते हैं ..." ये सुनते ही खाँटी भाई और उनके साथी सनपात गए बोले "...देखिये ये सत्य है माल्या जी को भाजपा ने ही भगाया है ..." मैंने आपकी बार जोरदार कनटाप जड़ने की कोशिश में मैंने पूछा "...माल्या को भागने की ताकत किसने दी ...ये जानते हुए भी कि पेट खराब है फिर भी घी पर घी किसने पिलाया...?" खाँटी भाई का एक साथी भाई आपिया चिल्लाने लगा "...भाजपा का माल्या जी के साथ साथ-गांठ है मिली भगत है ..." मैंने आपिए को जवाब देते हुए कहा कहा "...वैसे अंतिम सूचना तक मैडम केजरीवाल के नाम दो दारू की फैक्टरी थी ...आज दो दर्जन हो गई हों तो कोई आश्चर्य नहीं ..." ये सुनते ही आपिए की हवा खराब हो गई तो बाकी काँपिए, सांपिए और बसांपिए की हिम्मत ही नहीं हुई कुछ बोलने की फिर मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा "...वैसे माल्या तो पूरा देसी कुत्तारोची साबित हुआ लेकिन सरकारी साला - मामा नहीं ..." ये सुनते ही खाँटी भाई तमतमा गए और पूछने लगे "....आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने भी बड़ी शांति से जवाब देते हुए कहा ",,,ठीक वही मतलब है जो आपको समझ में आ रहा है ..." खाँटी भाई को कुछ सूझ नहीं रहा था तो मैंने ही कहा "....पिछले दस साल से कुत्तारोची की तर्ज पर माल्या सरकारी कोंग्रेसी मामा बने घूम-घूम कर देह बना रहा था उसी की बदौलत उसने पहलवनी दिखाई...." खाँटी कुछ बोले नहीं तो मैंने भी वहाँ फुदक लिया धन्यवाद ज्ञापित करते हुए...     

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