Wednesday, 16 March 2016

दस लतपथ, चितकबरम पाजी खयाल...

चितकबरम ने मान ही लिया कि हलफनामें को चितकबरा करने में उनका हाथ था लेकिन सवाल ये उठता है कि वो उसे आतंकी मानने में उनका हलक क्यों सूखा जा रहा था ? बजाय इसके वो बड़ी सहूलियत से आटंकी क्यों मान रहे थे। मैंने एक खाँटी भाई कांग्रेसी से पूछा "...हलफनामे को हलकनामा में क्यों बदल दिया गया ..." खाँटी भाई कांग्रेसी खऊरा कर बोले "...ऐसा कुछ नहीं था..." मैंने कहा "...ओवैसी की तरह किसने चितकबरम के गरदन पर छुरी रख दी खाँटी भाई...?" खाँटी भाई और खऊरा गए और चिल्लाते हुए बोले "...पॉलिटिकल विंडिक्टा पॉलिटिकल विंडिक्टा ..." मैंने थोड़ा हुरपेटने के अंदाज में कहा "...ये तो अधेड़ बकलोल युवराज की भाषा है ...?" खाँटी भाई मुझे धमकाते हुए बोले "...ये सरकार राहुल बाबा से डरती है ...." मैंने आश्चर्य से पूछा "...ओह ! तो आप डरा रहे हैं ..." खाँटी भाई बोले "...नहीं चेतावनी दे रहे हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...किसको सरकार को या आतंकवादियों को....?" मेरा सवाल सुनते ही खाँटी सनपात गए फिर थोड़ी देर बाद बोले "..देखिये ये सूट-बूट की सरकार जो कर रही है वो ठीक नहीं है ..." मैंने बड़े आराम से खाँटी भाई के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा "...हाँ जनता को ये सरकार सूट तो कर रही है लेकिन बूट कांग्रेसियों के पीठ पर पड़ रही है ..." खाँटी भाई जैसे उखड़ गए बड़े अटपटे मन से बोले "...चिदम्बरम साहब की तबीयत ठीक नहीं लगता है ..." मैंने सपाट उत्तर देते हुए स्पष्ट किया "....खाँटी महोदय ! वो तो अपनी किताब का संकट मोचन कर रहे थे मुंबई में ...!" खाँटी भाई बोले "...देखिये हम लोग किसी से डरते नहीं ..." इसपर मैंने कहा "...हाँ आतंकवादियों से भी नहीं ..." खाँटी भाई मुझे समझते हुए बोले "...देखिये आप गलत समझ रहे हैं हम लोग देश को महफूज रखने की भरपूर कोशिश की...." "...मतलब चितकबरम साहब कॉंग्रेस को चित करते हुए दस लतपथ को कबर में दफनाने पर आमादा हैं ...!" मैंने अपनी ओर से स्पष्ट करते हुए कहा तो खाँटी भाई मारे गुस्से में सफाई देते हुए बोले "..ये सरकार सबको ओवैसी समझने की गलती कर रही है..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...वो कैसे ...?" खाँटी भाई बोले "...हम किसी के दबाव में नहीं आने वाले ..." मैंने स्पष्ट करते हुए उनसे पूछा "...यदि दबाव में आ गए तो दस जनपथ लतपथ हो कर कबर में दफन हो जाएगा क्या ...?" ये सुनते ही खाँटी भाई जोर देकर बोले "...हमे कोई नहीं डरा सकता ..." मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा "...हाँ ऐसा इसलिए कि आप ही तो सबको डराने का ठेका आतंकवादियों को दे रखा हैं जवाहर के जहर से लेकर अधेड़ युवराज के अकलन्धेपन तक ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये कॉंग्रेस ने देश के लिए बहुत बलिदान दिया ..." मैंने आश्चर्य से पूछा जैसे "...आजादी की लड़ाई हमने लड़ी, इन्दिरा जी और राजीव जी ने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया ..." मैंने तपाक से कनटाप जड़ते हुए कहा "...अगर आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी तो किसी कांग्रेसी को फांसी क्यों नहीं हुई ? जेल में बिरयानी खाने-खिलाने आदत अभी तक कांग्रेस को क्यों है ? रही बात इन्दिरा और राजीव जी बलिदान की तो उन्होने ऐसा कुछ नहीं किया उनका 'वध' हुआ था क्योंकि वो दोनों सरकारी सुरक्षा घेरे थे ठीक अपना बचाव करने के लिए..." खाँटी भाई मेरा तर्क सुन कर सन्न रह गए बड़ी हिम्मत से बोले "...लेकिन..." मैंने बात काटते हुए कहा "...लेकिन निश्चित तौर पर 'वध' को बलिदान नहीं कहा जाता ...अगर ऐसा हुआ तो लाखों चिकन-मटन-लैम-आतंकी-इशरत-अफजल  आदि कोंग्रेस छाप बलिदानी हो जाएंगे ... " खाँटी पता नहीं किसको फोन मिलने लगे तो मैंने कहा नमस्कार....    

Sunday, 13 March 2016

ISIS चोखा रंग, JNU-खाँटी अंग ...

खाँटी भाई गुलाम साहब ISIS के बारे में बहुत अच्छी तरह पता है। मैंने ऐसे ही अपना मत प्रस्तुत किया तो अधेड़ बकलोल युवराज को युवा आई-कान मनाने वाला खाँटी आजाद उछल कर पूछा "...कैसे...?" मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...तभी वो नकली ISIS के जलसे में असली ISIS के बारे में कायदे से इतना बता रहे थे जितना ISIS का सदस्य भी नहीं जनता होगा..." आजाद खाँटी बोला "...लेकिन वो तो तुलना कर रहे थे ..." मैंने तगड़ा जवाब दिया "...बकलोल दास तुलनात्मक स्थिति तब आती है जब आदमी उसमे रच-बस कर अंधा हो जाता है ..." आजाद खाँटी फिर चौंका "...लेकिन गुलाम साहब तो अंधे नहीं हैं ..." मैंने कहा "...अपने बकलोल युवराज को ISIS विपसना कराने के लिए यही ले जाते हैं और पकड़ कर लाते भी हैं ..." आजाद खाँटी बोला "...लेकिन ISIS विपसना नहीं करता वो तो लोगों को तड़पा - तड़पा कर मारता है..." मैंने आजाद खाँटी को समझाया "...ISIS जो करता है पूरी कांग्रेस उसे विपसना ही मानती है ..." आजाद खाँटी को फिर आश्चर्य हुआ पूछा "...वो कैसे ..." मैंने उसे संतुष्ट करने वाला उत्तर दिया "...इसीलिए राजमा-ता ने उर्दू में हस्ताक्षर वाला चिट्ठी पढ़वाया अपने गुलाम से जैसे ISIS के झंडे पर हस्ताक्षर है..." आजाद खाँटी चौंक गया बोला "..लगता है आपका कहना सही है..." "...लेकिन हमको तो पूरी और पक्की जानकारी थी कि दिग्गी राजा उनके गुरु हैं ..." उसने आगे जोड़ते हुए कहा तो मैंने स्पष्ट किया "... दाग्गी रज्जा तो अपनी शादी को सही साबित करने पर उतारू हैं ISIS की तर्ज पर ..." आजाद खाँटी फिर चौंका "...वो कैसे ...?" मैंने कहा "...गूगल पर 'यजीदी गर्ल्स' की वर्ड से सर्च करो दाग्गी रज्जा की कहानी के साथ - साथ 'JNU सेंक्चुयरी' की असलियत का पता चल जाएगा तो हुआ न एक पंथ दो काज..." आजाद खाँटी ने मुझे स्पष्ट करते हुए कहा "...लेकिन सोनिया जी के हस्ताक्षर तो ISIS के झंडे पर नहीं है ..." मैंने उससे तार्किक सवाल किया "...तुझे उर्दू या अरबी-फारसी आती है ...?" आजाद खाँटी साफ़गोई से बोला "...नहीं मुझे नहीं आती ..." तो मैंने उससे कहा "...फिर तुम कैसे कह सकते ISIS के झंडे पर बकलोल अधेड़ की मम्मी का हस्ताक्षर नहीं है..." आजाद खाँटी ये सुनते ही सनपात कर चुपा गया तो फिर मैंने उसे समझाते हुए कहा "...जब वो चिट्ठी पर उर्दू में हस्ताक्षर कर सकती है तो अरबी-फारसी में ISIS के झंडे पर भी हस्ताक्षर कर सकती है ...समझे..." बकलोल आजाद खाँटी को समझ में आ गया तो सर हिला सहमति जाता दी लेकिन थोड़ी देर बाद फिर मुझसे पूछा "...कांग्रेसी गुलामो को ISIS की सदस्यता लेने की क्या जरूरत थी ...?" मैंने उसे अनुत्तरित करने के उद्देश्य से कहा "...क्योकि बटला हाऊस, अफजल, कसाब, यकूब, इशरतजहां, आदि पर आँसू बहाना जरूरी है और ये तभी संभव है जब ISIS की सदस्यता हो ...." आजाद खाँटी जवाब सुन कर भागने लगा उसने सामान्य सामाजिक शिष्टाचार भी नहीं निभाया ...

Saturday, 12 March 2016

किच-किच कुत्तारोची, ठन-ठन माल्या ठाँय..

अभी तक तो कुत्तारोची और अंदरसांड छाप विदेशी ही विदेशी काँग्रेस के इशारे पर उधम मचाने की हिमाकत करते थे । उसके पीछे ठोस कारण भी है जो सभी को वैसे ही पता है जैसे लोग जानते हैं कि बैलगाड़ी और तांगा आदि मोड़े तो जा सकते हैं लेकिन कभी बैक नहीं किए जा सकते चाहे कोई कितना भी नाक रगड़ ले। अंदरसांड और कुत्तरोची फिर भी आम खाँटी भाई कांग्रेसियों से ईमानदार ही रहे हैं लिहाजा खाँटी भाईयों के लिए ईमानदारी तमगा इन्हीं कुत्तारोची और अंदरसांड से ही मिलता रहा है। एक खाँटी भाई अपने आपिए-कापिये-सांपिए-बसांपिए साथियों के साथ बहक रहे थे "...विजय माल्या जी को भाजपा ने भागा दिया..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...हाँ अब तो विदेशी काँग्रेस की मेहरबानी से देसी कुत्तारोची भी पैदा होने लगे ..." खाँटी भाई मय उनके साथियों पर मेरे चुटकी लेने का असर शायद नहीं हुआ वो बोले "...माल्या जी के साथ सरकार की साँठ-गांठ है ..." मैंने अबकी बार तगडी चुटकी लेते हुए कहा "...आप ऐसे माल्या जी माल्या जी बोल रहे हैं जैसे दागी रज्जा ओसामा जी और हाफ़िज़ जी बोलते हैं ..." ये सुनते ही खाँटी भाई और उनके साथी सनपात गए बोले "...देखिये ये सत्य है माल्या जी को भाजपा ने ही भगाया है ..." मैंने आपकी बार जोरदार कनटाप जड़ने की कोशिश में मैंने पूछा "...माल्या को भागने की ताकत किसने दी ...ये जानते हुए भी कि पेट खराब है फिर भी घी पर घी किसने पिलाया...?" खाँटी भाई का एक साथी भाई आपिया चिल्लाने लगा "...भाजपा का माल्या जी के साथ साथ-गांठ है मिली भगत है ..." मैंने आपिए को जवाब देते हुए कहा कहा "...वैसे अंतिम सूचना तक मैडम केजरीवाल के नाम दो दारू की फैक्टरी थी ...आज दो दर्जन हो गई हों तो कोई आश्चर्य नहीं ..." ये सुनते ही आपिए की हवा खराब हो गई तो बाकी काँपिए, सांपिए और बसांपिए की हिम्मत ही नहीं हुई कुछ बोलने की फिर मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा "...वैसे माल्या तो पूरा देसी कुत्तारोची साबित हुआ लेकिन सरकारी साला - मामा नहीं ..." ये सुनते ही खाँटी भाई तमतमा गए और पूछने लगे "....आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने भी बड़ी शांति से जवाब देते हुए कहा ",,,ठीक वही मतलब है जो आपको समझ में आ रहा है ..." खाँटी भाई को कुछ सूझ नहीं रहा था तो मैंने ही कहा "....पिछले दस साल से कुत्तारोची की तर्ज पर माल्या सरकारी कोंग्रेसी मामा बने घूम-घूम कर देह बना रहा था उसी की बदौलत उसने पहलवनी दिखाई...." खाँटी कुछ बोले नहीं तो मैंने भी वहाँ फुदक लिया धन्यवाद ज्ञापित करते हुए...     

Friday, 4 March 2016

स्वतंत्र भारत की राजनीति का सबसे शानदार पहलू

कन्हैया के भाषण के बाद सिकउल्लूरिस्ट दलों के शीर्ष के एक दो नेता तो खुश हैं कि उसका इस्तेमाल आगामी चुनावों मे सरलता से सिर्फ और सिर्फ मोदी के खिलाफ हो सकता है लेकिन छुटभैये नेता,  खाँटी बकलोल युवराज और केजरीवाल मने  गोरू और चेला दोनों की नींद हराम हो गई है। ये तो तय है कन्हैया अगर कुछ भी नहीं करेगा तो भी केजरीवाल को तो झटके में ही खत्म कर देगा। वो कन्हैया जिससे दिल्ली को घिन आती है।

ये तय है कन्हैया वामपंथ छोड़ेगा नहीं और जिस तरीके कांग्रेस ने जेएनयू को कम्युनिस्टों का अड्डा बनाने के लिये बनाया अब वही अड्डा बड़ी आसनी से कॉंग्रेस-केजरीवाल सहित सभी सिकउल्लूरिस्ट दलों को खत्म कर दिया जाएगा। जेएनयू के कन्हैया कांड से एक बात तो पूरे स्पष्ट तौर पर स्थापित हो गई कि देश मे सिर्फ दो ही विचारधाराएं है एक देशभक्ति का दूसरे देशद्रोह का।  

सिकउल्लूरिस्टो की मजबूरी ये भी है कि वो कन्हैया का समर्थन करे ही नहीं तो सीधे आरएसएस समर्थक यानी मोदी समर्थक कहलाएँगे मजे की बात ये भी है लगे हाथ इशरतजहां का मामला भी उठ गया या जानबूझ कर उठा दिया गया नतीजा कन्हैया, कम्यूनिष्ट, अफजल गुरु,  इशरत जहां, लशकर-ए-तोईबा, केजरीवाल, कॉंग्रेस, लालू, मुलायम, याक़ूब, नितीश, दाऊद, मकबूल बट्ट आदि सभी आतंकवादी सेकुलरिस्ट एक ही खेमे नजर आने लगे हैं। उन्हें इशरत मामले में मोदी का विरोध करना ही है, मोदी-विरोध के लिए कन्हैया का समर्थन करने का भी सीधा मतलब है आप देश तोड़ने की मंशा रखने वालों के पक्ष में खड़े हैं जो किसी मुसीबत से कम नहीं।

राजनीतिक हलक़ों में इस बात की चर्चा है जैसी अभी तक ऐसी प्रचंड राजनीति कभी भी विपक्ष ने नहीं देखा था। सभी घटनाक्रम को एक कड़ी के रूप में जोड़ने पर एक खास पैटर्न दिखता है परीक्षण से लेकर ठोस निष्कर्ष तक। इसका आगाज हिन्दी पखवाड़े से ही हो गया था जब कुछ खास किस्म के साहित्यकार प्रजाति को भोपाल में आमंत्रित ही नहीं किया गया था। आज नतीजा सबके सामने है बड़ी आसानी से सेकुलर शब्द अब देशद्रोह को परिभाषित करने लगा है लिहाजा इस विषय पर जिस प्रकार का ध्रुवीकरण हुआ वो सभी सेकुलरों के लिए हैरान - परेशान करने के लिए काफी है। ये भाजपा-आरएसएस और दक्षिणपंथ की स्वतंत्र भारत मे बहुत बड़ी जीत है। विचारधारा के स्तर पर ऐसी जीत अभी तक किसी दल ने हासिल करना तो दूर सपने में भी नहीं सोचा था।

यूं ही नहीं मोदी को दुनिया सर्वश्रेष्ठ राजनीतिज्ञ कहा जाता है।    

Thursday, 3 March 2016

बकलोल देखावे तेवर...खाँटी और खऊराय

खाँटी भाई कांग्रेसी के मस्ती का आलम ये है अपने बकलोल युवराज के "फेयर एंड लवली योजना" की घोषणा से अपनी "डेयर एंड ढपली" लेकर निकल चुके हैं। रास्ते में मैंने उनसे पूछा "...अब तो कांग्रेस का फेयर एंड (अंत) तय है..." खाँटी भाई ये सुनते ही उखड़ गए बोले "...आप भक्त लोग पता नहीं अपने आप को समझते हो ...? मैंने आपत्ति दर्ज की "...भक्त नहीं पूरा शब्द देशभक्त बोलिए ..." खाँटी भाई ये सुनते ही और तैश में आ गए बोले "...मोदी जी की फेयर एंड लवली योजना से कुछ होने वाला नहीं है ..." मैंने बड़ी शांति उनका उत्तर देते हुए कहा "...कुछ लवली हो या न हो लेकिन कांग्रेस का फेयर एंड तो तय है ..." खाँटी भाई से रहा नहीं गया बोले "...कांग्रेस के लवली दिन आएंगे ..." मैंने प्रतिप्रश्न किया "...हाँ 'मेरे करन अर्जुन की तरह' इसीलिए हिम्मत वाले काम के लिए डेयर ऐंड ढपली लेकर निकले है क्या..." खाँटी भाई बोले "...हमरे राहुल बाबा के तेवर देखिये ..." मैंने कहा "...कांग्रेसी नकली जेवर की पहचान कायदे से हो गई..." खाँटी शायद ठीक से सुन नहीं पाए तो उन्होने फिर मुझसे पूछा "...क्या कहा नकली जेवर ...? मैंने उन्हें उत्तर देते हुए कहा "...हाँ भाई इसीलिए तो यू पी चुनाव में बढेरा-बहू को उतारा जा रहा है..क्यों ?...."  खाँटी भाई थोड़ा अनमने मन से बोले "...आपको सही शब्द का उच्चारण भी नहीं आता क्या ..." मैंने पलट कर तपाक से पूछा "...बढेरा की बीवी कौन है...?" खाँटी भाई ललकारने के अंदाज में बोले "...हिम्मत है किसी में जो उनसे मुक़ाबला कर सके ...?" मैंने कहा "...हाँ आपके बकलोल बबुआ सहित पूरी कांग्रेस को तो लग ही रहा है फेयर एंड लवली का जमाना है ..." खाँटी भाई खिसिया गए मुद्दा बदलते हुए बोले "...मोदी जी ने राहुल बाबा का जवाब नहीं दिया ..." मैंने कहा "...दिया पूरा जवाब दिया लेकिन बकलोल बबुआ और उन्हीं छाप खाँटी भाई कांग्रेसियों को समझ में आवे तब न ..." खाँटी भाई पलट कर मुझसे पूछने लगे "...तो बताईए काला धन आ गया ...?" मैंने उत्तर दिया "...बकलोल बबुआ, राजमा-ता, मौनी बाबा सहित सभी खाँटी भाईयों ने आम जनता के लिए थोड़ा भी फेयर ऐंड लावली छोड़ा हीं नहीं मय पूरा क्रीम ही लगा डाले घोटाला करके ..." ये सुनते ही खाँटी भाई असहज हो गए बोले "...देखिये आप आरोप नहीं लगा सकते ..." मैंने कहा "...बकलोल बबुआ ने घोषित कर दिया कांग्रेस का एंड फेयर होगा ये लवली नहीं दुखद है ..." खाँटी की आंखो में चमक आ गई चहकते हुए बोले "...मुझे पता था आप एक दिन कांग्रेस का समर्थन जरूर करेंगे ..." मैंने कहा "...बकलोल बबुआ के उलट कांग्रेस का फेयर एंड (अंत) के बजाय फेरोसियस एंड हो तब लवली होगा ..." खाँटी भाई भागने लगे ....