Saturday, 27 February 2016

जुबान सलामत रख ...हजार जूंते  (JNUTA) मिलेंगे ...

जे एन यू के अधजल गोरू-बछरू अभी छलकना बंद नहीं किए हैं ...झोंटा या जूंता ( गलती से JNUTA भी कहा जाता है ) में लौकी लटका कर उपर से लात खाने के शौकीन इन अधजल गोरुओं को उनके बछरूओं के साथ उसी लौकी में बांध कर उनकी मार्केटिंग के लिए छोड़ देना चाहिए एक पैसे का भी फंड न दिया जाए और लेने भी न दिया जाए जिसके लिए वो नौटंकी छोड़िए दस-दस टंकी करने पर उतारू दिखते हैं। पिछले 7 साल से झोंटा में घोसला बनाए एक बछरू चीखते हुए बक  रहा था "...ये अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का हनन है ..."  मैंने उसे फटकारते हुए पूछा "...बछरू हो कर ऐसे हिनहिनाते हुए तुझे लाज नहीं आती ...?" बछरू ये सुनते ही और सनक गया बोला और धमकी देते हुए बोला "...देख जबान संभाल के बात कर ..." मैंने भी उसी टोन में जवाब देते हुए कहा "...इसकी जरूरत तुझे और तेरे अधजल गोरुओं को है ...वैसे एक कहावत भी है जबान सलामत रखो हजार जूते मिलेंगे ..." बछरू ये सुनते पूरा सनक गया बोला "...एक-एक जूते पर एक - एक अफजल पैदा होगा ..." मैंने कहा "...तमीज से बोल ...अफजल नहीं अधजल ..." मैंने आगे जोड़ते हुए पूछा "...वैसे पैदा कहाँ से होगा और कैसे करोगे ...जे एन यू प्रजनन केंद्र (सेंक्चुयरी) थोड़े ही है ...?" बछरू ने उसी सनक से जवाब दिया "...हम लोग ये-छुरी हमेशा साथ रखते हैं ...." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...माकपा - भकपा अभी तक गली क्यों नहीं हुई ...?" बछरू उसी सनक से चीखते हुए बोला "...ये-छुरी बहुत ताकतवर है कोई हमारे खिलाफ FIR तक नहीं कर सकता ...यहाँ करैत भी आते हैं कराते सीखते हैं ...फिर (Fir) कुछ भी हमारे खिलाफ कोई करता है ये-छुरी टुकड़े-टुकड़े करने के लिए काफी है ..." मैंने कहा "...फिलहाल झोंटा-जूंता (JNUTA) वाले अधजल गोरू और उनके बछरू अपने टुकड़ों की चिंता करें..." बछरू से रहा नहीं गया तुरंत एक और पोस्टर निकाल कर चस्पा कर दिया और बोला "... यकूब मेनन की भी हत्या की गई है ..." मैंने कहा "...मुंह तोप कर पोस्टर चस्पा करने की नौबत आ गई है तेरी हिम्मत है अपना बुर्का हटा के अपना चेहरा दिखा ..." मेरी चुनौती पाते वो अपना आपा खो बैठा और केजरीवाल के टोन में बोला "...देखो जी हम आजादी की बात नहीं स्वराज की बात कर रहे हैं ..." मैंने टांट कसते हुए पूछा "...ये-छुरी की धार और करैत का कराते गायब हो गया ...?" बछरू बोला "... हमारे कैंपस में बस एक बात नहीं होती ..." मैंने बीच में बात काटते हुए कहा "...हाँ सही काम..." बछरू चुप हो गया तो मैंने बात बढ़ाते हुए कहा "...जवाहर लाल तो चले ही थे उत्तर से दक्खिन ऊपर से कोढ़ में खाज वो सीफिलिस से मरे ...इसीलिए जेएनयू में अधजल गोरू - बछरू ही पैदा हो रहे हैं  ...?" बछरू ने जवाब नहीं दिया ...  

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