Monday, 29 February 2016

तोताराम ये-छुरी

एक खास समुदाय में तोता इसलिए पवित्र और पूजनीय माना जाता है क्योकि उसका रंग हरा होता है मतलब पाकिस्तान के झंडे से मिलता-जुलता। उस खास समुदाय के प्रकांड विद्वानो का मत है कि मात्र वही एक ऐसा पक्षी है जो खुदा (संस्कृत के खद्योत का अपभ्रंश जिसका अर्थ सूर्य होता है ) तक सीधे संदेशवाहक का काम करता है। मैंने एक विद्वान से पूछा "...तोता के अलावा कोई और पक्षी सिर्फ इसलिए संदेशवाहक नहीं हो सकता क्योकि वो हरे नहीं होते ...?" विद्वान कुछ सोच कर बोले "...देखिये जो भी उड़ने वाली हैं वो ये काम कर सकते हैं ..." मैंने फिर प्रश्न किया "...फिर तोता ही पूजनीय क्यों होता है ..." विद्वान बोले "...क्योकि खुदा ने खास तौर पर बनाया है ..." मैंने उनके उत्तर पर सहमति परक तथ्य रखते हुए कहा "...ओSSSS ! शायद इसीलिए समुदाय की महिलाओं को केले से दूर रहने के लिए सख्त फतवा जारी कर दिया जाता है ..." विद्वान अपनी उलझन को छिपाते हुए बोले "...देखिये वो एक ठोस नजरिया तो है ही जो तथ्य पर आधारित है जिसको माना जाना चाहिए ..."  मैंने कहा "...फिर आप लोग अमेरिका की खिलाफत क्यों करते हैं ...?" विद्वान ने बड़े अदब से मुझसे पूछा "...आपके प्रश्न का आशय क्या है ...?" मैंने उन्हें समझाते हुए कहा "...नासा तो तोता से कहीं बहुत हजारों गुना ऊपर गहरे अन्तरिक्ष में खुदा की गोद तक उड़ान भरता है ...!" विद्वान असहज होने लगे थे बड़ी मुश्किल से बोले "...अमरीका अन्तरिक्ष में जाता तो है लेकिन ..." उनके चुप होते ही मैंने पूछा "...लेकिन क्या ...?" विद्वान मुझे डांटते हुए बोले "...देख तेरी जुबान बहुत तेज चल रही है इतनी तेज जुबान ठीक नहीं ..." मैंने बड़े अदब से निवेदन करते हुए कहा "...इसमे जुबान की बात कहाँ से आती है मैंने सिर्फ इतना निवेदन किया था कि अमेरिका खुदा का तोता से बढ़िया खुदा का संदेशवाहक हो सकता है ..." विद्वान गुस्से से बोले "...जो सही है वो सही है बस ..." मैंने भी तैश थोड़ा टाईट किया पूछा "....जे एन यू से उठी आवाज खुदा तक कैसे पहुँचती है ...?" विद्वान बोले "...वो खुदा से सच्चे बंदे हैं .." मैंने प्रतिप्रश्न किया "...लेकिन वो छुरी लेकर घूम रहे हैं टुकड़े-टुकड़े करने के लिए तो क्या सभी तोते छुरीदार हो चुके हैं ...?" विद्वान बोले "...वो सभी अल्लाह (अल्ला; का अर्थ संस्कृत में देवी होता है )  मर-मिटने वाले बंदे हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...ये-छुरी वाले तो हरे रंग के बजाय लाल रंग के हैं ...?"  विद्वान की आँखों में चमक आ गई बोले "...तोते का चोंच भी लाल ही होता है जो ये-छुरी की तरह काम करती है ..." मैंने विद्वान की तारीफ करते हुए अंतिम वाक्य कहा "...वाकई आप प्रकांड विद्वान हैं नमस्कार ...."

Saturday, 27 February 2016

जुबान सलामत रख ...हजार जूंते  (JNUTA) मिलेंगे ...

जे एन यू के अधजल गोरू-बछरू अभी छलकना बंद नहीं किए हैं ...झोंटा या जूंता ( गलती से JNUTA भी कहा जाता है ) में लौकी लटका कर उपर से लात खाने के शौकीन इन अधजल गोरुओं को उनके बछरूओं के साथ उसी लौकी में बांध कर उनकी मार्केटिंग के लिए छोड़ देना चाहिए एक पैसे का भी फंड न दिया जाए और लेने भी न दिया जाए जिसके लिए वो नौटंकी छोड़िए दस-दस टंकी करने पर उतारू दिखते हैं। पिछले 7 साल से झोंटा में घोसला बनाए एक बछरू चीखते हुए बक  रहा था "...ये अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का हनन है ..."  मैंने उसे फटकारते हुए पूछा "...बछरू हो कर ऐसे हिनहिनाते हुए तुझे लाज नहीं आती ...?" बछरू ये सुनते ही और सनक गया बोला और धमकी देते हुए बोला "...देख जबान संभाल के बात कर ..." मैंने भी उसी टोन में जवाब देते हुए कहा "...इसकी जरूरत तुझे और तेरे अधजल गोरुओं को है ...वैसे एक कहावत भी है जबान सलामत रखो हजार जूते मिलेंगे ..." बछरू ये सुनते पूरा सनक गया बोला "...एक-एक जूते पर एक - एक अफजल पैदा होगा ..." मैंने कहा "...तमीज से बोल ...अफजल नहीं अधजल ..." मैंने आगे जोड़ते हुए पूछा "...वैसे पैदा कहाँ से होगा और कैसे करोगे ...जे एन यू प्रजनन केंद्र (सेंक्चुयरी) थोड़े ही है ...?" बछरू ने उसी सनक से जवाब दिया "...हम लोग ये-छुरी हमेशा साथ रखते हैं ...." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...माकपा - भकपा अभी तक गली क्यों नहीं हुई ...?" बछरू उसी सनक से चीखते हुए बोला "...ये-छुरी बहुत ताकतवर है कोई हमारे खिलाफ FIR तक नहीं कर सकता ...यहाँ करैत भी आते हैं कराते सीखते हैं ...फिर (Fir) कुछ भी हमारे खिलाफ कोई करता है ये-छुरी टुकड़े-टुकड़े करने के लिए काफी है ..." मैंने कहा "...फिलहाल झोंटा-जूंता (JNUTA) वाले अधजल गोरू और उनके बछरू अपने टुकड़ों की चिंता करें..." बछरू से रहा नहीं गया तुरंत एक और पोस्टर निकाल कर चस्पा कर दिया और बोला "... यकूब मेनन की भी हत्या की गई है ..." मैंने कहा "...मुंह तोप कर पोस्टर चस्पा करने की नौबत आ गई है तेरी हिम्मत है अपना बुर्का हटा के अपना चेहरा दिखा ..." मेरी चुनौती पाते वो अपना आपा खो बैठा और केजरीवाल के टोन में बोला "...देखो जी हम आजादी की बात नहीं स्वराज की बात कर रहे हैं ..." मैंने टांट कसते हुए पूछा "...ये-छुरी की धार और करैत का कराते गायब हो गया ...?" बछरू बोला "... हमारे कैंपस में बस एक बात नहीं होती ..." मैंने बीच में बात काटते हुए कहा "...हाँ सही काम..." बछरू चुप हो गया तो मैंने बात बढ़ाते हुए कहा "...जवाहर लाल तो चले ही थे उत्तर से दक्खिन ऊपर से कोढ़ में खाज वो सीफिलिस से मरे ...इसीलिए जेएनयू में अधजल गोरू - बछरू ही पैदा हो रहे हैं  ...?" बछरू ने जवाब नहीं दिया ...