Tuesday, 10 May 2016



कुत्तारोची सर्र जी, AP धुआँ उड़ाय...

सर्र जी अब ई-टल्ली राजमाता के वो राज भी जानने का दावा करने लगे हैं जो अभी तक स्व कुत्तारोची, अहमद पटेल, स्व माधवराव सिंधिया आदि आदि लोग ही जानते थे। खाँटी भाई लोग बताते हैं कि कुछ राज जो स्व कुत्तारोची, अहमद पटेल, स्व माधवराव सिंधिया आदि जानते थे वो स्व राजीव गांधी भी नहीं जानते थे। राजदारों की श्रेणी में शामिल होने के लिए सर्र जी ने अपना दावा कायदे से ठोंका है। अपोलाटल्ली और कुछ खाँटी भाई कोंग्रेसी सर्र जी को नया राजदार होने पर बधाई दे रहे थे। बधाई कार्यक्रम खत्म होने के बाद मैंने अपोले से पूछा "...गर्मी तो ठीक ठाक है सचिवालय में गोईठा सूखने में तो कोई दिक्कत नहीं होने चाहिए ..." अपोला खुशी के मूड में था बोला "...कोई दिक्कत नहीं है ..." फिर मैंने पूछा "...फिर चिपरी-गोईठा पाथना छोडकर ये राज़दारी का कारोबार शुरू करने क्या जरूरत थी ...?" अपोला थोड़ा असहज हो गया बोला "... देखिये बात ये नहीं है..." मैंने तपाक से पूछा "...तो बात क्या है ...?" अपोला बोला "...मोदी जी हिम्मत नहीं दिखा रहे हैं ..." मैंने पूछा "...मोदी जी से आप किस हिम्मत आशा कर रहे हैं ..?" अपोला बोला "...हेलीकाप्टर घोटाले में मोदी सिगनोरा गांधी को गिरफ्तार नहीं कर रहे हैं ..." मैंने चुटकी लेने वाले अंदाज में पूछा "...आपको क्या लगता है ..? अपोला उत्तर देते हुए बोला "...मोदी जी ऐसा नहीं करेंगे..." मैंने स्पष्टीकरण की आशा में पूछा "...मोदी जी भला ऐसा क्यों नहीं करेंगे ...?" अपोला भी चुटकी लेने के अंदाज में बोला "...क्योकि सिगनोरा गांधी मोदी जी के कई राज जानती हैं .." मैंने अपोले से "...क्या ये सारे राज बेहद गोपनीय हैं ...? अपोला मारे वाहवाही में उत्तर देते हुए बोला "...इतने गोपनीय कि केवल कुछ लोग ही जानते हैं ..." मैंने भी जोड़ते हुए कहा "...उन कुछ लोगों में अब सर्र जी भी शामिल हो गए हैं ..." अपोला खुशी से सीना चौड़ा करते हुए बोला "...हाँ बिलकुल ..." मैंने अब कटाक्ष करते हुए पूछा "... तो इसका मतलब सर्र जी भी इतने शक्तिशाली हो चुके हैं जितना स्व कुत्तरोची था ..." ये सुनते ही अपोला भड़क गया मारे गुस्से से बोला "...आप सर्र जी पर आरोप लगा रहे हैं ..." मैंने शांति से उत्तर दिया "...अपोला भाई ! ये आरोप नहीं स्वयं सिद्ध तथ्य है ..." अपोले कुछ समझ में नहीं आया तो पूछा "...वो कैसे..." मैंने कहा "सिगनोरा को छोड़ कर चार कुत्तरोचियों का नाम आया है बाकी तो बिन चड्ढा लोग है..." अपोला कुछ बोला नहीं तो मैंने ही अंतिम वाक्य कहा "...अब सर्र जी बिन लादेन सारी बिन चड्ढा तो बनेंगे नहीं क्योकि वो ताकत नहीं थी उसके पास असली ताकतवर तो कुत्तरोची था तो सर्र जी कमजोर तो बनेंगे नहीं भले ही कामचोर हों ..." अपोले का मुंह देखने लायक था ...

Monday, 9 May 2016

उंघटापैची सर्र जी फर्जी, पर लूटे थूक बिलाय ...

सर्र जी की एक खासियत है वो किसी भी चीज का बहुआयामी उपयोग करने का रास्ता खोजते रहते हैं मसलन टेम्पू में बैठ कर चाँद पर भी जाने की योजना को अंजाम देने से नहीं चूकते। काम तो उनका सचिवालय में चिपरी, गोईठा पाथना है लेकिन खुद को ऐसे पेश करते मानो वो सही में दिल्ली के प्रधानमंत्री हों लिहाजा अपने खटारा टेम्पू में बैठ कर चाँद पर थूकने का उपक्रम कर डाला। .एक अपोले से मैंने पूछा "...आपके सर्र जी को क्या हो गया है टेम्पू में बैठ कर चाँद पर थूक रहे हैं..." ये सुनते ही अपोला उखड़ गया और उल्टे चीखते हुए मुझसे पूछा "...आपका मतलब केजरीवाल झूठ बोल रहे हैं...?" मैंने उत्तर में प्रतिप्रश्न किया "...कब से कुत्ते आगे से भौकने की बजाय पीछे से भौकने लगे...?" अपोला फिर उसी गुस्से में बोला "...आप कुत्ते से तुलना नहीं कर सकते ...." मैंने कहा "...बिलकुल सर्र जी की तुलना कुत्ते से बिलकुल नहीं हो सकती ... कुत्ते का ये अपमान भला मुझसे कैसे हो सकता है ..." अपोला और भड़क गया बोला "...आपने अपने प्रोफ़ाइल में क्या पंच लिखा है ..." मैंने बड़े आराम से उत्तर दिया "...जानवर झूठ नहीं बोलते ..." अपोला बोला "...तो इसका मतलब आपको पता है न ..." मैंने कहा "...आपके सर्र जी पर मेरी पंच लाइन तब लागू होती जब आपके सर्र जी भौकने के लिए अपने मुखारविंद का प्रयोग करते ..." अपोले को मेरी बात समझ में नहीं आई पूछा  "...आपके कहने का मतलब क्या है...?  मैंने कठोरता से उत्तर दिया "...सर्रजी आगे के बजाय पीछे से भौंक रहे हैं ..." ये सुनते ही अपोला आपे से बाहर हो गया बोला "...आपको डिग्री के बारे कोई जानकारी नहीं है ..." मैंने कहा "...हाँ तो जरा ये भी बता दो कि तुम्हारे सर्र जी IIT में AIR क्या थी ...?"   अपोला चुप हो गया तो मैंने कहा "...आपके सर्र जी ने तो IIT का एण्ट्रेंस दिया ही नहीं था... वो असंवैधानिक विवेकाधीन कोटे से IIT में घुसे थे जैसे फालतू कुत्ते किसी समारोह में घुस जाते हैं ..." ये सुनते ही अपोला अपनी सफाई देने का जुगाड़ करने लगा बोला "...आखिर वो इसके लिए योग्य रहे होंगे तभी तो कोटे से प्रवेश मिला ..." मैंने कहा "...वो कोटा स्टाफ और टीचर के बच्चों के लिए आरक्षित था चार साल के लिए और सर्र जी के पिता जी भ्रष्टाचारी जिंदाल सारी जिंदल के कारखाने में मुलाजिम थे ये भी पता नहीं कि वो इतने ऊंचे ओहदे पर पर पहुंचे कैसे ...?" अब अपोले को जैसे साँप सूंघ गया हो बोला "...ये सब बकवास है ..." मैंने कहा "... सर्र जी के पिता जी तो IIT के स्टाफ नहीं थे तो बकवास कैसे हो गया ...?" अपोला चुप हो गया फिर मैंने उस चुनौती देते हुए कहा "...हिम्मत हो तो जरा बकलोल युवराज राल विंसी,बियंका वादरा और ई-टल्ली मम्मी की डिग्री दिखाएँ ..." मैंने थोड़ी रियायत देते हुए कहा "...खैर छोड़ अपोले जरा राबर्ट बढेरा की डिग्री दिखा चल ..." अपोला भागने लगा ...  

Thursday, 5 May 2016

ये मुलाक़ात एक बहाना है प्यार का सिलसिला पुराना है....


बाबा रामदेव के आगे लालू यादव का मयूरनृत्यासन कोई यूं ही नहीं था। कभी किसी ने मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी, मायावती आदि को इस तरह मयूरनृत्यासन करते देखा या सुना भी है ? अभी दो दिन पहले किसी राजनीतिक पंडित ने ऊटपटाँग घोषणा कर दी कि लालू यादव चाहते हैं कि नितीश कुमार के प्रधानमंत्री का ख्वाब देखें और इसी लिए उनके प्रधानमंत्री बनने के प्रकल्प का समर्थन किया था वो इसलिए बिहार पूरी तरह से उनके बेटों के लिए आरक्षित हो जाएगा। ये आकलन बेहद घटिया इसलिए है क्योकि एक तो बिहार लालू की बपौती नहीं है भाजपा 25% मत लेकर सशक्त भूमिका में है दूसरे नितीश प्रधानमंत्री बनने में असफल रहते हैं जिसकी संभावना 100% है तो बिहार लालू और नितीश दोनों खत्म भाजपा के लिए तो फिर खुला मैदान होगा जो किसी वाकओवर से कम नहीं होगा तीसरे नितीश यदि राष्ट्रीय फ़लक पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने में जितना अधिक सफल होंगे बिहार में उतनी ही अच्छी पकड़ बनाते जाएंगे यहाँ तक मुख्यमंत्री भी अपनी मर्जी का बैठाने में सफल हो जाएंगे। तो क्या लालू यादव ये सब आसानी से होने देंगे ?


लालू यादव इतने मूर्ख नहीं हैं नितीश सीधे राष्ट्रीय स्तर पर छा जाने दे कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार लेंगे। लालू यादव के लिए सबसे मुफीद होगा कि नितीश को प्रधानमंत्री के सपने के साथ बिहार में कैद करके घुट-घुट कर मरने दिया जाए। इससे लालू यादव न सिर्फ नितीश का वोट बैंक हथिया सकेंगे बल्कि नितीश के मुक़ाबले अपनी विश्वसनीयता को और बढ़ा सकेंगे वैसे भी चुनाव में ये तो स्थापित हो चुका है लालू यादव नितीश से कहीं अधिक विश्वसनीय हैं इसिलिए सीट भी नितीश से बहुत अधिक है। लालू यादव ये बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि नितीश के राष्ट्रीय स्तर पर जाने का सीधा मतलब ये भी होगा कि लालू यादव नितीश आधीनता स्वीकार करें जो किसी भी कीमत पर लालू यादव ये तो बिलकुल ही नहीं चाहेगे इससे भी उनकी विश्वसनीयता का भयावह नुकसान हपगा। लिहाजा वो भूल कर भी वो ऐसा नहीं करेंगे।


जिस तरह से जमानतशुदा देशद्रोही का स्वागत नितीश ने किया वो लालू यादव के लिए न सिर्फ बेहद चौकाने वाला था बल्कि उनको ये सब बेहद बचकाना और मूर्खतापूर्ण भी लगा लिहाजा बिहार सरकार की क्रेडिबिलिटी का जबरदस्त नुकसान हुआ जिसमे लालू यादव भागीदार हैं। इससे भाजपा के पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण भी हुआ। अब लालू यादव इस सरकारी नुकसान को नितीश का नुकसान बनाना चाहते हैं जिसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित स्वीकृत कट्टर राष्ट्रवादी नायक की महती जरूरत थी। तो इसके लिए बाबा रामदेव से बेहतर कौन हो सकता था। इसी कारण से मुलाक़ात में न तो नितीश थे और न ही उनका कोई नुमाईनदा। जो लोग ये मानते हैं बाबा स्वयं ही लालू यादव के पास गए थी वो सिरे से गलत हैं। स्वामी रामदेव को खुद लालू यादव ने खुद फोन करके बुलाया था। बिहार चुनाव के ठीक बाद ही मैंने अपने लेख में कहा था लालू यादव कभी नहीं चाहेंगे नितीश राष्ट्रीय फ़लक पर अपना थोड़ा भी प्रभाव छोड़ने में सफल हो पाएँ। हर हाल में वो नितीश को बिहार में सीमित कर देना चाहते हैं। हालांकि वो चाहते हैं नितीश प्रधानमंत्री का सपना देखें लेकिन उन्हें उसी सपने के साथ ही मारना भी चाहते हैं।


लालू यादव को ये भी भली प्रकार पता है कि मोदी की लोकप्रियता घटी नहीं बल्कि तेजी से बढ़ रही है कुछ सर्वेक्षण तो यही बताते हैं। आप ध्यान दीजिये लालू यादव ने अगस्टा वेस्टलैंड घूसकांड के मामले में सोनिया और कॉंग्रेस का बचाव नहीं किया है बाकी सभी सिक-उल्लू-रिश्तवे ऐसा कर चुके हैं नितीश और शरद यादव भी। ये भाजपा और कॉंग्रेस में अब तक की सबसे भयानक, हिंसक और सीधी टक्कर है जिसका परिणाम भी सबको पता है और पत्थर पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट भी है "कॉंग्रेस की मौत "। सोनिया गांधी द्वारा दी गई उपाधि को सही साबित करते हुए उन्हें लौटाने का सबसे सही अवसर।


इस इबारत को लालू यादव नहीं पढ़ पा रहे हैं ये कैसे संभव है, तो लालू यादव बाबा रामदेव के माध्यम से खुद के लिए न सही अपने बच्चों के लिए राजनीतिक जमीन तलाशने के मकसद से मोदी के निकट आने का एक गंभीर प्रयास है। उनको ये भी अच्छी तरह पता है कुछ भी हो जाए नितीश मोदी के निकट नहीं जाएंगे मतलाब लालू यादव "पहली आओ पहले पाओ" की रणनीति पर काम कर रहे हैं। तेजी से बदलते राजनीतिक परिदृश्य में यदि कोई सबसे तेजी से अपने आप को अनुकूल बनाने का गंभीर प्रयास रहा है तो वो लालू यादव। हर किसी में में कुछ अच्छाइयाँ भी होती हैं यदि लालू यादव केजरीवाल की तरह नौटंकी नहीं कर रहे हैं तो वाकई लालू यादव तारीफ के काबिल तो हैं ही।

Monday, 2 May 2016



सर-सर सर-सर सर्र जी, बकलोल दिया घुमाय ...

खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग लगता है मज़ाक के मूड में हैं अपने युवराज को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने की चर्चा करने से कतरा रहे हैं वो भी उत्तर प्रदेश का। मैडम तुसाद के म्यूजियम में जब से मोदी की प्रतिमा लगी है विश्व के लोग मोदी बड़े अदब से देखने लगे हैं लगे हाथ केजरीवाल भी मैडम तुसाद का गोड़ छान लिए तो मैडम को दया आ गई लिहाजा नाप ओप लेने का नाटक कर दिया लेकिन अभी सर्र जी प्रतिमा नहीं बनी है और न बनेगी। मनो "जईसन देवता ऊईसन पूजा" नौटंकी का जवाब दसटंकी मैडम तुसाद की ओर से।


लेकिन "यथा युवराज तथा कविराज" वाली कहावत पर चलते हुए खाँटी भाई लोगों ने मान ही लिया था कि यदि सर्र जी प्रतिमा म्यूजियम में लग गई तो "बकलोल युवराज" बकलोले रह जाएगा लिहाजा मुख्यमंत्री के नाम पर कतराना उनको ठीक लागने लगा। हमारे एक फेसबुक मित्र बता रहे थे कि कुछ लोग एक प्रस्ताव पर ताव ठोंक रहे थे कि "युवराज" की कुछ प्रतिमाएँ डिज्नीलैंड लगनी चाहिए। बस क्या था बच्चे मारे खुशी से उछल पड़े। पता नहीं वो प्रस्ताव का कुछ हुआ या नहीं लेकिन डोनाल्ड डक, मिनी मऊस, गोफ़ी मल्लू भालू आदि जरूर प्रतीक्षा में हैं। पता नहीं हमारे मित्र की सूचना सही है या नहीं लेकिन इतना जरूर है कि खाँटी भाई लोगों को पूरा विशवास है कि मैडम तुसाद "युवराज" को सर्र जी तरह धोखा नहीं देंगी,यू पी का सीएम बनने के बाद।

आज कल एक निर्मल बाबा राजनीति घूम रहा है पीके (प्रशांत किशोर) ने नाम से। बिहार में तो इसने कमाल ही कर दिया सेवा दिया नितीश को जीता गए दुश्मन लालू "मौज मारे गाजी मियां धक्का सहे मुनव्वर" । यू पी में भी ज़ोर शोर से कृपा आने की शर्त का दावा कर रहा है "...ये बार-बार बढेरा बहू का चेहरा मेरे सामने क्यों आ रहा है ...कभी बढेरा बहू को आजमाया है..." खाँटी बोले "...बहुत पहले केवल रायबरेली और अमेठी में..." निर्मल बाबा पीके बोले "...उसकी कुछ बढ़िया फोटो गरीबों में बाँट कर उस दांव खेल लो कृपा आने शुरू हो जाएगी..दर असल कृपा वही रुकी हुई है..." खाँटी भैवे खुश हो गए लेकिन एक सवाल परेशान किए हुए है "...ये बढ़िया फोटो क्या होता है ..." ये सवाल पूछने की हिम्मत किसी खाँटी में नहीं है।

बिहार की तर्ज पर पीके निर्मल बाबा की इस घोषणा के बाद जीतेगा तो खाँटी भाईयों का दुश्मन ही लिहाजा परिणाम तो एक तरह से तय ही हो गया है औपचारिकता मात्र बाकी है फिर भी देखने वाली बात होगी कि आखिर "बकलोल युवराज" से दुश्मनी गाठने मे कौन आगे निकल पाता है।

Wednesday, 27 April 2016

हाय रे ! मायका मलाई माहुर ...?

अबकी बार कुत्तारोची का बकलोल भांजा जो युवराज के नाम से बदनाम भी है, नपने से बच गया तो खाँटी भाई कोंग्रेसी लोगों को बहुत खुशी हुई थी लेकिन सारी खुशी हवा तब हो गई जब मैडम तुसाद के म्यूजियम में ईमानदारी की मूर्ति लगाने के लिए खुद को ही आवेदन किए हुए थे। मनमोहन सिंह की योग्यता और ईमानदारी अस मशहूर थी कि टाइम मैगजीन ने बकायदे अंडरएचीवर कह कर तारीफ की थी, आस्कर फर्नांडीज़ का ढिंढोरा तो ऐसे पीटा जाता था मानो उनको ईमानदारी का आस्कर पुरस्कार मिल गया हो, ए के एंटनी की ईमानदारी कितने टन की थी उसका भी खुलासा हो गया तभी अपने ईमानदार तन को लेकर भहरा के गिरे थे वो भला हो हमारे वीर सैनिकों का जिनके राष्ट्रभक्त खून से ईमानदारी के टनो वजनी एंटनी साहब अपने पैरों पर खड़े हो पाए। एस पी त्यागी का त्याग के बारे में क्या कहें लोग बता रहे हैं अगर इनको भी सप्तऋषि मिल गए होते तो आज नजारा ही कुछ और होता, आज इनका घर भर उल्टा लटक कर फंस गया तो इसमे सप्तऋषि के न मोलने क्या दोष ?

कुत्तारोची की दीदी का चार - चार बार गला दबाया है उनके मायके वालों ने फिर भी हिमाकत देखिये खाँटी भैवे उल्टा कोतवाल को डांटते अपने ई-टल्ली राजमाता के सुर में सुर मिलाते हुए पूछ रहे हैं अगर कोई सुबूत था तो अब तक चुप क्यों थे ? अब पता नहीं क्यों खाँटी भाई लोग ये बताना चाह रहे हैं कि ई-टल्ली राजमाता को मायके से भी जमानत मिल गई जबकि वास्तविकता ठीक इसके उलट है। असत्यव्रत छाप एक खाँटी भाई चीख रहे थे कोई भी सुबूत ले कर आइए राजमाता हर पद से इस्तीफा दे देंगी ...मने अब जमानत भी अब सुबूत नहीं रहा ...बगल में खड़े एक सज्जन ने कहा जब ऐसे तथ्यों को भी सुबूत नहीं मानेगे तो तो ताबूत तो हमेशा तैयार रहेगा ही।    यों को ये भी बताना पड़ेगा क्या।

पता नहीं कहाँ से IBN7 वाले किसको पकड़ लाये थे बता रहे थे सप्रेम कोर्ट का व-कील है उसे तो बाहर के कचहरी कचहरी ही नहीं लगती उसका बस चले तो हेडली को ही महात्मा घोषित करके "जी" की उपाधि दे दे। उसके तर्क के आधार पर तो जो अपराधी भारत में अपराध नहीं किए हैं वो अपराधी हो ही नहीं सकते। मेरे कहने के अर्थ को भावनात्मक स्तर पर मत सोचिए तार्किक और संवैधानिक स्तर पर सोचिए। ऐसे सप्रेम कोर्ट के व-कीलों का बस चले तो रेड-कार्नर नोटिस, इन्टरपोल आदि जैसी चिड़िया का गुलेल से बिना जीपीएस की सहायता से शिकार कर लें।

क्या वाकई ये रोम से भी रामराज्य की मुनादी है ...
   

Friday, 22 April 2016

पहुना पूंछ बिरादरी, लुआठी लहसुन खऊर....

जानवरों की खास अदा है वो कभी मूंछ पर ताव नहीं मारते लेकिन पूंछ की हिफाजत ऐसे करते हैं कि किसी को भी लग सकता है वो पूंछ पर ताव मारने की खास अदा है ... एक अपोला मुझसे तर्क करने लगा बोला "...पूंछ जानवरों की शान होती है ..." मैंने कहा "... हाँ तभी वो झूठ नहीं बोलते ..." अपोला जैसे आपसेट हो गया बोला "...लेकिन इन्सानो की मूंछ तो होती है पूंछ नहीं..." मैंने पलट कर पूछा "...तो तुम्हारे कहने मतलब है इन्सानो की मूंछ पर भी कम दारोमदार नहीं होता..." अपोला अपने सर्र जी के हवाले से कहा "...हम लोगों ने भी दिल्ली में बहुत काम किया है ..." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...अच्छा...! तो फिर हिमाकत करने की धमकी पूछ से है या मूंछ से ...?" ये सुनते ही अपोला बेहद असहज हो गया "...देखिए वो सब हम नहीं जानते हम तो सिर्फ जनता की सेवा करना जानते हैं जी ..." मैंने कहा "... जब सेवा ठीक से हो रही है तो फिर काहें लुआठी पर लहसुन फूँक रहे हैं ..." अपोला अब आपे से बाहर हो रहा था गुस्से में बोला "...लुआठी पर लहसुन फूंकने का क्या मतलब है ..." मैंने कहा "...मय 'अधिकारियो' को आपके सर्र जी 'अधिका' साबित करने पर उतारू दिख रहे हैं उसमे से 'री' ही डिलीट करने पर उतारू हो गए हैं..." अपोला तार्किक अंदाज में मुझसे गुस्सा झाड़ते हुए बोला "...इससे ये कहाँ साबित होता है कि सर्र जी लुआठी पर लहसुन फूँक रहे हैं ..." मैंने कहा "...क्यों नहीं ! उसी लुआठी से घर फूँकने की कोशिश कर रहे हैं बेचारे निरीह अधिकारियों के और जब कोशिश नाकाम हो रही है तो लुआठी में लहसुन चुआ रहे हैं ..." अपोला अपना गुस्सा कंट्रोल करते हुए बोला "...देखिये वो नसीहत दे रहे थे ..." मैंने तपाक से टांट कसते हुए पूछा "...नसीहत इस आधार पर कि 2020 में फिर योगेंदर यादव और शांत-प्रशांत भूषण फिर बादशाह सलामत की हुंकार भरने आपके सर्र जी के पास अंग विशेष पर लात खाने चले आएंगे ...?" अपोला फिर से  खुद को संभालते हुए बोला "...देखिये पार्टी में अब उनकी कोई जरूरत नहीं ..." मैंने कहा ",,,फिर किस आधार पर आपके सर्र जी 10-15 साल सचिवालय में गोईठा पाथने का ख्वाब देख रहे हैं ...?" अपोला फिर आपे से बाहर हो गया और चीखते हुए बोला "...वो गोईठा नहीं पाथ रहे..." मैंने तर्क करते हुए पूछा "...ठाले-निठल्ले तो याही काम बड़े चाव से करते हैं ..."अपोला बोला "...उनके पोर्टफोलियो न लेने के पीछे ठोस कारण है ..." मैंने कहा "...हाँ वो तो है गोईठा पाथना और लुआठी पर लहसुन फूंकना...." ये सुनकर अपोला बेचैन हो गया और धमकी देते हुए बोला "... हम कम से कम 10 साल तो राज करेंगे ही दिल्ली में ...." मैंने टांट कसते हुए कहा "...तुम्हारे सर्र जी की मूंछ तो ऐसी नहीं है कि उसपर ताव मार पाएँ ..." अपोला उसी अंदाज में बोला "...हम मूंछ पर ताव नहीं मारते ..." मैंने कहा "...तब तो एक ही रास्ता है आपके सर्र जी सहित अपोले अपनी पूंछ पर ताव मारें और शुरू करें नाक में पूंछ ..." बात पूरी होने से पहले ही आपोला भागने लगा .... 

Sunday, 3 April 2016

चवन्नी का दम बने एकन्नी में भुर्ता ...

एक हाथ में फटवा एक हाथ में फट्ठा लेकर घूमते थे...चीख - चीख कर बताते थे मुसलमीन सही है ,,,लेकिन किसी खैरमकदम वाले ने ज़ोर से कहा "...जनाब ये फतवा नहीं फटवा है ..." ये सुनते ही जनाबेआली जहां फट्ठा भाँजने के आदी हो चुके थी उसी से खोईच लगा गया तो बहते खून को रोकते हुए बोलने लगे "...मियां हर्ज ही क्या है ..." और ज़ोर से उसी खैरमकदम वाले ने पूछा "...जब हर्ज ही नहीं था तो ये फटवा लेकर क्यों अपनी फजीहत करवाए जा रहे हैं ...? आपका फट्ठा भी खुद्द आपकी ही फाहीहत किए जा रहा है ..." जनाबेआली कनफ़्यूजन में बोले "...समझ में नहीं आता वो मोहतरमा सही हैं या ये मोहतरम ...?" खैरमकदमी ने कहा "...तो अब क्या होगा जनाबेआली वो मोहतरमा तो इज्जत का कोरमा बना के खा गईं...?" जनाबेआली अफसोस जताते हुए पूछा "...किसी ने रोका क्यों नहीं ...?" खैरमकदमी बोले "...जिसे जितना रोकना था रोक चुका उनका बस चले तो कौम के लड़कों की शादी तक दुश्वार हो जाए ..." जनाबेआली आपे से बाहर हुए जा रहे थे "...आखिर सऊदी अरेबिया में तो सख्त कानून है कि कोई विदेशी जलसा नहीं कर सकता, किस ग्रुप को एड्रैस नहीं कर सकता फिर ये सब कैसे ...?" खैरमकदमी बोले "...जनाबेआली ओबामा तक जलसा नहीं कर पाए हैं लेकिन मोदी के लिए कानून बादल दिया गया अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं..." जनाबेआली के पेशानी पर बल पड़ने लगे थे और खुद को संभालते हुए बोले "...सवाल तो ये है फटवे अब चीख - चीख कर फड़वाए जा रहे हैं वो भी हजरते जमीन से ..." खैरमकदमी बोले "...ये तो सीधे आग लगने वाली बात हो गई बुर्के से ...?" जनाबेआली बोले "...सवाल ये है बरखुरदार अब तो टोपी से सियासत भी मुमकिन नहीं रही ..." खैरमकदम वाले बोले "...आग तो तारिक फतेह भी लगा रहे हैं मुंबई या दिल्ली में बसने की दिलचस्पी कल ही उन्होने जाहिर कर दी ..." जनाबेआली चिंता में दुखी हो कर बोले "...जब सियासत नहीं होगी तो हमारी सुनेगा कौन ...?" खैरमकदमी बोले "...सुनने वाले फिर भी बहुत से हैं लेकिन उसका क्या होगा जो पैसा हजरते जमीन से आता है सुना है अब तो वो भी शायद न आवे फिर तो ....?" जनाबेआली और खैरमकदमी गले मिल गए एक दूसरे को सांत्वना देने के लिए ...            

Wednesday, 16 March 2016

दस लतपथ, चितकबरम पाजी खयाल...

चितकबरम ने मान ही लिया कि हलफनामें को चितकबरा करने में उनका हाथ था लेकिन सवाल ये उठता है कि वो उसे आतंकी मानने में उनका हलक क्यों सूखा जा रहा था ? बजाय इसके वो बड़ी सहूलियत से आटंकी क्यों मान रहे थे। मैंने एक खाँटी भाई कांग्रेसी से पूछा "...हलफनामे को हलकनामा में क्यों बदल दिया गया ..." खाँटी भाई कांग्रेसी खऊरा कर बोले "...ऐसा कुछ नहीं था..." मैंने कहा "...ओवैसी की तरह किसने चितकबरम के गरदन पर छुरी रख दी खाँटी भाई...?" खाँटी भाई और खऊरा गए और चिल्लाते हुए बोले "...पॉलिटिकल विंडिक्टा पॉलिटिकल विंडिक्टा ..." मैंने थोड़ा हुरपेटने के अंदाज में कहा "...ये तो अधेड़ बकलोल युवराज की भाषा है ...?" खाँटी भाई मुझे धमकाते हुए बोले "...ये सरकार राहुल बाबा से डरती है ...." मैंने आश्चर्य से पूछा "...ओह ! तो आप डरा रहे हैं ..." खाँटी भाई बोले "...नहीं चेतावनी दे रहे हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...किसको सरकार को या आतंकवादियों को....?" मेरा सवाल सुनते ही खाँटी सनपात गए फिर थोड़ी देर बाद बोले "..देखिये ये सूट-बूट की सरकार जो कर रही है वो ठीक नहीं है ..." मैंने बड़े आराम से खाँटी भाई के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा "...हाँ जनता को ये सरकार सूट तो कर रही है लेकिन बूट कांग्रेसियों के पीठ पर पड़ रही है ..." खाँटी भाई जैसे उखड़ गए बड़े अटपटे मन से बोले "...चिदम्बरम साहब की तबीयत ठीक नहीं लगता है ..." मैंने सपाट उत्तर देते हुए स्पष्ट किया "....खाँटी महोदय ! वो तो अपनी किताब का संकट मोचन कर रहे थे मुंबई में ...!" खाँटी भाई बोले "...देखिये हम लोग किसी से डरते नहीं ..." इसपर मैंने कहा "...हाँ आतंकवादियों से भी नहीं ..." खाँटी भाई मुझे समझते हुए बोले "...देखिये आप गलत समझ रहे हैं हम लोग देश को महफूज रखने की भरपूर कोशिश की...." "...मतलब चितकबरम साहब कॉंग्रेस को चित करते हुए दस लतपथ को कबर में दफनाने पर आमादा हैं ...!" मैंने अपनी ओर से स्पष्ट करते हुए कहा तो खाँटी भाई मारे गुस्से में सफाई देते हुए बोले "..ये सरकार सबको ओवैसी समझने की गलती कर रही है..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...वो कैसे ...?" खाँटी भाई बोले "...हम किसी के दबाव में नहीं आने वाले ..." मैंने स्पष्ट करते हुए उनसे पूछा "...यदि दबाव में आ गए तो दस जनपथ लतपथ हो कर कबर में दफन हो जाएगा क्या ...?" ये सुनते ही खाँटी भाई जोर देकर बोले "...हमे कोई नहीं डरा सकता ..." मैंने भी चुटकी लेते हुए कहा "...हाँ ऐसा इसलिए कि आप ही तो सबको डराने का ठेका आतंकवादियों को दे रखा हैं जवाहर के जहर से लेकर अधेड़ युवराज के अकलन्धेपन तक ..." खाँटी भाई बोले "...देखिये कॉंग्रेस ने देश के लिए बहुत बलिदान दिया ..." मैंने आश्चर्य से पूछा जैसे "...आजादी की लड़ाई हमने लड़ी, इन्दिरा जी और राजीव जी ने अपने प्राणों का बलिदान कर दिया ..." मैंने तपाक से कनटाप जड़ते हुए कहा "...अगर आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी तो किसी कांग्रेसी को फांसी क्यों नहीं हुई ? जेल में बिरयानी खाने-खिलाने आदत अभी तक कांग्रेस को क्यों है ? रही बात इन्दिरा और राजीव जी बलिदान की तो उन्होने ऐसा कुछ नहीं किया उनका 'वध' हुआ था क्योंकि वो दोनों सरकारी सुरक्षा घेरे थे ठीक अपना बचाव करने के लिए..." खाँटी भाई मेरा तर्क सुन कर सन्न रह गए बड़ी हिम्मत से बोले "...लेकिन..." मैंने बात काटते हुए कहा "...लेकिन निश्चित तौर पर 'वध' को बलिदान नहीं कहा जाता ...अगर ऐसा हुआ तो लाखों चिकन-मटन-लैम-आतंकी-इशरत-अफजल  आदि कोंग्रेस छाप बलिदानी हो जाएंगे ... " खाँटी पता नहीं किसको फोन मिलने लगे तो मैंने कहा नमस्कार....    

Sunday, 13 March 2016

ISIS चोखा रंग, JNU-खाँटी अंग ...

खाँटी भाई गुलाम साहब ISIS के बारे में बहुत अच्छी तरह पता है। मैंने ऐसे ही अपना मत प्रस्तुत किया तो अधेड़ बकलोल युवराज को युवा आई-कान मनाने वाला खाँटी आजाद उछल कर पूछा "...कैसे...?" मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...तभी वो नकली ISIS के जलसे में असली ISIS के बारे में कायदे से इतना बता रहे थे जितना ISIS का सदस्य भी नहीं जनता होगा..." आजाद खाँटी बोला "...लेकिन वो तो तुलना कर रहे थे ..." मैंने तगड़ा जवाब दिया "...बकलोल दास तुलनात्मक स्थिति तब आती है जब आदमी उसमे रच-बस कर अंधा हो जाता है ..." आजाद खाँटी फिर चौंका "...लेकिन गुलाम साहब तो अंधे नहीं हैं ..." मैंने कहा "...अपने बकलोल युवराज को ISIS विपसना कराने के लिए यही ले जाते हैं और पकड़ कर लाते भी हैं ..." आजाद खाँटी बोला "...लेकिन ISIS विपसना नहीं करता वो तो लोगों को तड़पा - तड़पा कर मारता है..." मैंने आजाद खाँटी को समझाया "...ISIS जो करता है पूरी कांग्रेस उसे विपसना ही मानती है ..." आजाद खाँटी को फिर आश्चर्य हुआ पूछा "...वो कैसे ..." मैंने उसे संतुष्ट करने वाला उत्तर दिया "...इसीलिए राजमा-ता ने उर्दू में हस्ताक्षर वाला चिट्ठी पढ़वाया अपने गुलाम से जैसे ISIS के झंडे पर हस्ताक्षर है..." आजाद खाँटी चौंक गया बोला "..लगता है आपका कहना सही है..." "...लेकिन हमको तो पूरी और पक्की जानकारी थी कि दिग्गी राजा उनके गुरु हैं ..." उसने आगे जोड़ते हुए कहा तो मैंने स्पष्ट किया "... दाग्गी रज्जा तो अपनी शादी को सही साबित करने पर उतारू हैं ISIS की तर्ज पर ..." आजाद खाँटी फिर चौंका "...वो कैसे ...?" मैंने कहा "...गूगल पर 'यजीदी गर्ल्स' की वर्ड से सर्च करो दाग्गी रज्जा की कहानी के साथ - साथ 'JNU सेंक्चुयरी' की असलियत का पता चल जाएगा तो हुआ न एक पंथ दो काज..." आजाद खाँटी ने मुझे स्पष्ट करते हुए कहा "...लेकिन सोनिया जी के हस्ताक्षर तो ISIS के झंडे पर नहीं है ..." मैंने उससे तार्किक सवाल किया "...तुझे उर्दू या अरबी-फारसी आती है ...?" आजाद खाँटी साफ़गोई से बोला "...नहीं मुझे नहीं आती ..." तो मैंने उससे कहा "...फिर तुम कैसे कह सकते ISIS के झंडे पर बकलोल अधेड़ की मम्मी का हस्ताक्षर नहीं है..." आजाद खाँटी ये सुनते ही सनपात कर चुपा गया तो फिर मैंने उसे समझाते हुए कहा "...जब वो चिट्ठी पर उर्दू में हस्ताक्षर कर सकती है तो अरबी-फारसी में ISIS के झंडे पर भी हस्ताक्षर कर सकती है ...समझे..." बकलोल आजाद खाँटी को समझ में आ गया तो सर हिला सहमति जाता दी लेकिन थोड़ी देर बाद फिर मुझसे पूछा "...कांग्रेसी गुलामो को ISIS की सदस्यता लेने की क्या जरूरत थी ...?" मैंने उसे अनुत्तरित करने के उद्देश्य से कहा "...क्योकि बटला हाऊस, अफजल, कसाब, यकूब, इशरतजहां, आदि पर आँसू बहाना जरूरी है और ये तभी संभव है जब ISIS की सदस्यता हो ...." आजाद खाँटी जवाब सुन कर भागने लगा उसने सामान्य सामाजिक शिष्टाचार भी नहीं निभाया ...

Saturday, 12 March 2016

किच-किच कुत्तारोची, ठन-ठन माल्या ठाँय..

अभी तक तो कुत्तारोची और अंदरसांड छाप विदेशी ही विदेशी काँग्रेस के इशारे पर उधम मचाने की हिमाकत करते थे । उसके पीछे ठोस कारण भी है जो सभी को वैसे ही पता है जैसे लोग जानते हैं कि बैलगाड़ी और तांगा आदि मोड़े तो जा सकते हैं लेकिन कभी बैक नहीं किए जा सकते चाहे कोई कितना भी नाक रगड़ ले। अंदरसांड और कुत्तरोची फिर भी आम खाँटी भाई कांग्रेसियों से ईमानदार ही रहे हैं लिहाजा खाँटी भाईयों के लिए ईमानदारी तमगा इन्हीं कुत्तारोची और अंदरसांड से ही मिलता रहा है। एक खाँटी भाई अपने आपिए-कापिये-सांपिए-बसांपिए साथियों के साथ बहक रहे थे "...विजय माल्या जी को भाजपा ने भागा दिया..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...हाँ अब तो विदेशी काँग्रेस की मेहरबानी से देसी कुत्तारोची भी पैदा होने लगे ..." खाँटी भाई मय उनके साथियों पर मेरे चुटकी लेने का असर शायद नहीं हुआ वो बोले "...माल्या जी के साथ सरकार की साँठ-गांठ है ..." मैंने अबकी बार तगडी चुटकी लेते हुए कहा "...आप ऐसे माल्या जी माल्या जी बोल रहे हैं जैसे दागी रज्जा ओसामा जी और हाफ़िज़ जी बोलते हैं ..." ये सुनते ही खाँटी भाई और उनके साथी सनपात गए बोले "...देखिये ये सत्य है माल्या जी को भाजपा ने ही भगाया है ..." मैंने आपकी बार जोरदार कनटाप जड़ने की कोशिश में मैंने पूछा "...माल्या को भागने की ताकत किसने दी ...ये जानते हुए भी कि पेट खराब है फिर भी घी पर घी किसने पिलाया...?" खाँटी भाई का एक साथी भाई आपिया चिल्लाने लगा "...भाजपा का माल्या जी के साथ साथ-गांठ है मिली भगत है ..." मैंने आपिए को जवाब देते हुए कहा कहा "...वैसे अंतिम सूचना तक मैडम केजरीवाल के नाम दो दारू की फैक्टरी थी ...आज दो दर्जन हो गई हों तो कोई आश्चर्य नहीं ..." ये सुनते ही आपिए की हवा खराब हो गई तो बाकी काँपिए, सांपिए और बसांपिए की हिम्मत ही नहीं हुई कुछ बोलने की फिर मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा "...वैसे माल्या तो पूरा देसी कुत्तारोची साबित हुआ लेकिन सरकारी साला - मामा नहीं ..." ये सुनते ही खाँटी भाई तमतमा गए और पूछने लगे "....आपके कहने का मतलब क्या है ..." मैंने भी बड़ी शांति से जवाब देते हुए कहा ",,,ठीक वही मतलब है जो आपको समझ में आ रहा है ..." खाँटी भाई को कुछ सूझ नहीं रहा था तो मैंने ही कहा "....पिछले दस साल से कुत्तारोची की तर्ज पर माल्या सरकारी कोंग्रेसी मामा बने घूम-घूम कर देह बना रहा था उसी की बदौलत उसने पहलवनी दिखाई...." खाँटी कुछ बोले नहीं तो मैंने भी वहाँ फुदक लिया धन्यवाद ज्ञापित करते हुए...     

Friday, 4 March 2016

स्वतंत्र भारत की राजनीति का सबसे शानदार पहलू

कन्हैया के भाषण के बाद सिकउल्लूरिस्ट दलों के शीर्ष के एक दो नेता तो खुश हैं कि उसका इस्तेमाल आगामी चुनावों मे सरलता से सिर्फ और सिर्फ मोदी के खिलाफ हो सकता है लेकिन छुटभैये नेता,  खाँटी बकलोल युवराज और केजरीवाल मने  गोरू और चेला दोनों की नींद हराम हो गई है। ये तो तय है कन्हैया अगर कुछ भी नहीं करेगा तो भी केजरीवाल को तो झटके में ही खत्म कर देगा। वो कन्हैया जिससे दिल्ली को घिन आती है।

ये तय है कन्हैया वामपंथ छोड़ेगा नहीं और जिस तरीके कांग्रेस ने जेएनयू को कम्युनिस्टों का अड्डा बनाने के लिये बनाया अब वही अड्डा बड़ी आसनी से कॉंग्रेस-केजरीवाल सहित सभी सिकउल्लूरिस्ट दलों को खत्म कर दिया जाएगा। जेएनयू के कन्हैया कांड से एक बात तो पूरे स्पष्ट तौर पर स्थापित हो गई कि देश मे सिर्फ दो ही विचारधाराएं है एक देशभक्ति का दूसरे देशद्रोह का।  

सिकउल्लूरिस्टो की मजबूरी ये भी है कि वो कन्हैया का समर्थन करे ही नहीं तो सीधे आरएसएस समर्थक यानी मोदी समर्थक कहलाएँगे मजे की बात ये भी है लगे हाथ इशरतजहां का मामला भी उठ गया या जानबूझ कर उठा दिया गया नतीजा कन्हैया, कम्यूनिष्ट, अफजल गुरु,  इशरत जहां, लशकर-ए-तोईबा, केजरीवाल, कॉंग्रेस, लालू, मुलायम, याक़ूब, नितीश, दाऊद, मकबूल बट्ट आदि सभी आतंकवादी सेकुलरिस्ट एक ही खेमे नजर आने लगे हैं। उन्हें इशरत मामले में मोदी का विरोध करना ही है, मोदी-विरोध के लिए कन्हैया का समर्थन करने का भी सीधा मतलब है आप देश तोड़ने की मंशा रखने वालों के पक्ष में खड़े हैं जो किसी मुसीबत से कम नहीं।

राजनीतिक हलक़ों में इस बात की चर्चा है जैसी अभी तक ऐसी प्रचंड राजनीति कभी भी विपक्ष ने नहीं देखा था। सभी घटनाक्रम को एक कड़ी के रूप में जोड़ने पर एक खास पैटर्न दिखता है परीक्षण से लेकर ठोस निष्कर्ष तक। इसका आगाज हिन्दी पखवाड़े से ही हो गया था जब कुछ खास किस्म के साहित्यकार प्रजाति को भोपाल में आमंत्रित ही नहीं किया गया था। आज नतीजा सबके सामने है बड़ी आसानी से सेकुलर शब्द अब देशद्रोह को परिभाषित करने लगा है लिहाजा इस विषय पर जिस प्रकार का ध्रुवीकरण हुआ वो सभी सेकुलरों के लिए हैरान - परेशान करने के लिए काफी है। ये भाजपा-आरएसएस और दक्षिणपंथ की स्वतंत्र भारत मे बहुत बड़ी जीत है। विचारधारा के स्तर पर ऐसी जीत अभी तक किसी दल ने हासिल करना तो दूर सपने में भी नहीं सोचा था।

यूं ही नहीं मोदी को दुनिया सर्वश्रेष्ठ राजनीतिज्ञ कहा जाता है।    

Thursday, 3 March 2016

बकलोल देखावे तेवर...खाँटी और खऊराय

खाँटी भाई कांग्रेसी के मस्ती का आलम ये है अपने बकलोल युवराज के "फेयर एंड लवली योजना" की घोषणा से अपनी "डेयर एंड ढपली" लेकर निकल चुके हैं। रास्ते में मैंने उनसे पूछा "...अब तो कांग्रेस का फेयर एंड (अंत) तय है..." खाँटी भाई ये सुनते ही उखड़ गए बोले "...आप भक्त लोग पता नहीं अपने आप को समझते हो ...? मैंने आपत्ति दर्ज की "...भक्त नहीं पूरा शब्द देशभक्त बोलिए ..." खाँटी भाई ये सुनते ही और तैश में आ गए बोले "...मोदी जी की फेयर एंड लवली योजना से कुछ होने वाला नहीं है ..." मैंने बड़ी शांति उनका उत्तर देते हुए कहा "...कुछ लवली हो या न हो लेकिन कांग्रेस का फेयर एंड तो तय है ..." खाँटी भाई से रहा नहीं गया बोले "...कांग्रेस के लवली दिन आएंगे ..." मैंने प्रतिप्रश्न किया "...हाँ 'मेरे करन अर्जुन की तरह' इसीलिए हिम्मत वाले काम के लिए डेयर ऐंड ढपली लेकर निकले है क्या..." खाँटी भाई बोले "...हमरे राहुल बाबा के तेवर देखिये ..." मैंने कहा "...कांग्रेसी नकली जेवर की पहचान कायदे से हो गई..." खाँटी शायद ठीक से सुन नहीं पाए तो उन्होने फिर मुझसे पूछा "...क्या कहा नकली जेवर ...? मैंने उन्हें उत्तर देते हुए कहा "...हाँ भाई इसीलिए तो यू पी चुनाव में बढेरा-बहू को उतारा जा रहा है..क्यों ?...."  खाँटी भाई थोड़ा अनमने मन से बोले "...आपको सही शब्द का उच्चारण भी नहीं आता क्या ..." मैंने पलट कर तपाक से पूछा "...बढेरा की बीवी कौन है...?" खाँटी भाई ललकारने के अंदाज में बोले "...हिम्मत है किसी में जो उनसे मुक़ाबला कर सके ...?" मैंने कहा "...हाँ आपके बकलोल बबुआ सहित पूरी कांग्रेस को तो लग ही रहा है फेयर एंड लवली का जमाना है ..." खाँटी भाई खिसिया गए मुद्दा बदलते हुए बोले "...मोदी जी ने राहुल बाबा का जवाब नहीं दिया ..." मैंने कहा "...दिया पूरा जवाब दिया लेकिन बकलोल बबुआ और उन्हीं छाप खाँटी भाई कांग्रेसियों को समझ में आवे तब न ..." खाँटी भाई पलट कर मुझसे पूछने लगे "...तो बताईए काला धन आ गया ...?" मैंने उत्तर दिया "...बकलोल बबुआ, राजमा-ता, मौनी बाबा सहित सभी खाँटी भाईयों ने आम जनता के लिए थोड़ा भी फेयर ऐंड लावली छोड़ा हीं नहीं मय पूरा क्रीम ही लगा डाले घोटाला करके ..." ये सुनते ही खाँटी भाई असहज हो गए बोले "...देखिये आप आरोप नहीं लगा सकते ..." मैंने कहा "...बकलोल बबुआ ने घोषित कर दिया कांग्रेस का एंड फेयर होगा ये लवली नहीं दुखद है ..." खाँटी की आंखो में चमक आ गई चहकते हुए बोले "...मुझे पता था आप एक दिन कांग्रेस का समर्थन जरूर करेंगे ..." मैंने कहा "...बकलोल बबुआ के उलट कांग्रेस का फेयर एंड (अंत) के बजाय फेरोसियस एंड हो तब लवली होगा ..." खाँटी भाई भागने लगे ....

Monday, 29 February 2016

तोताराम ये-छुरी

एक खास समुदाय में तोता इसलिए पवित्र और पूजनीय माना जाता है क्योकि उसका रंग हरा होता है मतलब पाकिस्तान के झंडे से मिलता-जुलता। उस खास समुदाय के प्रकांड विद्वानो का मत है कि मात्र वही एक ऐसा पक्षी है जो खुदा (संस्कृत के खद्योत का अपभ्रंश जिसका अर्थ सूर्य होता है ) तक सीधे संदेशवाहक का काम करता है। मैंने एक विद्वान से पूछा "...तोता के अलावा कोई और पक्षी सिर्फ इसलिए संदेशवाहक नहीं हो सकता क्योकि वो हरे नहीं होते ...?" विद्वान कुछ सोच कर बोले "...देखिये जो भी उड़ने वाली हैं वो ये काम कर सकते हैं ..." मैंने फिर प्रश्न किया "...फिर तोता ही पूजनीय क्यों होता है ..." विद्वान बोले "...क्योकि खुदा ने खास तौर पर बनाया है ..." मैंने उनके उत्तर पर सहमति परक तथ्य रखते हुए कहा "...ओSSSS ! शायद इसीलिए समुदाय की महिलाओं को केले से दूर रहने के लिए सख्त फतवा जारी कर दिया जाता है ..." विद्वान अपनी उलझन को छिपाते हुए बोले "...देखिये वो एक ठोस नजरिया तो है ही जो तथ्य पर आधारित है जिसको माना जाना चाहिए ..."  मैंने कहा "...फिर आप लोग अमेरिका की खिलाफत क्यों करते हैं ...?" विद्वान ने बड़े अदब से मुझसे पूछा "...आपके प्रश्न का आशय क्या है ...?" मैंने उन्हें समझाते हुए कहा "...नासा तो तोता से कहीं बहुत हजारों गुना ऊपर गहरे अन्तरिक्ष में खुदा की गोद तक उड़ान भरता है ...!" विद्वान असहज होने लगे थे बड़ी मुश्किल से बोले "...अमरीका अन्तरिक्ष में जाता तो है लेकिन ..." उनके चुप होते ही मैंने पूछा "...लेकिन क्या ...?" विद्वान मुझे डांटते हुए बोले "...देख तेरी जुबान बहुत तेज चल रही है इतनी तेज जुबान ठीक नहीं ..." मैंने बड़े अदब से निवेदन करते हुए कहा "...इसमे जुबान की बात कहाँ से आती है मैंने सिर्फ इतना निवेदन किया था कि अमेरिका खुदा का तोता से बढ़िया खुदा का संदेशवाहक हो सकता है ..." विद्वान गुस्से से बोले "...जो सही है वो सही है बस ..." मैंने भी तैश थोड़ा टाईट किया पूछा "....जे एन यू से उठी आवाज खुदा तक कैसे पहुँचती है ...?" विद्वान बोले "...वो खुदा से सच्चे बंदे हैं .." मैंने प्रतिप्रश्न किया "...लेकिन वो छुरी लेकर घूम रहे हैं टुकड़े-टुकड़े करने के लिए तो क्या सभी तोते छुरीदार हो चुके हैं ...?" विद्वान बोले "...वो सभी अल्लाह (अल्ला; का अर्थ संस्कृत में देवी होता है )  मर-मिटने वाले बंदे हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...ये-छुरी वाले तो हरे रंग के बजाय लाल रंग के हैं ...?"  विद्वान की आँखों में चमक आ गई बोले "...तोते का चोंच भी लाल ही होता है जो ये-छुरी की तरह काम करती है ..." मैंने विद्वान की तारीफ करते हुए अंतिम वाक्य कहा "...वाकई आप प्रकांड विद्वान हैं नमस्कार ...."

Saturday, 27 February 2016

जुबान सलामत रख ...हजार जूंते  (JNUTA) मिलेंगे ...

जे एन यू के अधजल गोरू-बछरू अभी छलकना बंद नहीं किए हैं ...झोंटा या जूंता ( गलती से JNUTA भी कहा जाता है ) में लौकी लटका कर उपर से लात खाने के शौकीन इन अधजल गोरुओं को उनके बछरूओं के साथ उसी लौकी में बांध कर उनकी मार्केटिंग के लिए छोड़ देना चाहिए एक पैसे का भी फंड न दिया जाए और लेने भी न दिया जाए जिसके लिए वो नौटंकी छोड़िए दस-दस टंकी करने पर उतारू दिखते हैं। पिछले 7 साल से झोंटा में घोसला बनाए एक बछरू चीखते हुए बक  रहा था "...ये अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का हनन है ..."  मैंने उसे फटकारते हुए पूछा "...बछरू हो कर ऐसे हिनहिनाते हुए तुझे लाज नहीं आती ...?" बछरू ये सुनते ही और सनक गया बोला और धमकी देते हुए बोला "...देख जबान संभाल के बात कर ..." मैंने भी उसी टोन में जवाब देते हुए कहा "...इसकी जरूरत तुझे और तेरे अधजल गोरुओं को है ...वैसे एक कहावत भी है जबान सलामत रखो हजार जूते मिलेंगे ..." बछरू ये सुनते पूरा सनक गया बोला "...एक-एक जूते पर एक - एक अफजल पैदा होगा ..." मैंने कहा "...तमीज से बोल ...अफजल नहीं अधजल ..." मैंने आगे जोड़ते हुए पूछा "...वैसे पैदा कहाँ से होगा और कैसे करोगे ...जे एन यू प्रजनन केंद्र (सेंक्चुयरी) थोड़े ही है ...?" बछरू ने उसी सनक से जवाब दिया "...हम लोग ये-छुरी हमेशा साथ रखते हैं ...." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...माकपा - भकपा अभी तक गली क्यों नहीं हुई ...?" बछरू उसी सनक से चीखते हुए बोला "...ये-छुरी बहुत ताकतवर है कोई हमारे खिलाफ FIR तक नहीं कर सकता ...यहाँ करैत भी आते हैं कराते सीखते हैं ...फिर (Fir) कुछ भी हमारे खिलाफ कोई करता है ये-छुरी टुकड़े-टुकड़े करने के लिए काफी है ..." मैंने कहा "...फिलहाल झोंटा-जूंता (JNUTA) वाले अधजल गोरू और उनके बछरू अपने टुकड़ों की चिंता करें..." बछरू से रहा नहीं गया तुरंत एक और पोस्टर निकाल कर चस्पा कर दिया और बोला "... यकूब मेनन की भी हत्या की गई है ..." मैंने कहा "...मुंह तोप कर पोस्टर चस्पा करने की नौबत आ गई है तेरी हिम्मत है अपना बुर्का हटा के अपना चेहरा दिखा ..." मेरी चुनौती पाते वो अपना आपा खो बैठा और केजरीवाल के टोन में बोला "...देखो जी हम आजादी की बात नहीं स्वराज की बात कर रहे हैं ..." मैंने टांट कसते हुए पूछा "...ये-छुरी की धार और करैत का कराते गायब हो गया ...?" बछरू बोला "... हमारे कैंपस में बस एक बात नहीं होती ..." मैंने बीच में बात काटते हुए कहा "...हाँ सही काम..." बछरू चुप हो गया तो मैंने बात बढ़ाते हुए कहा "...जवाहर लाल तो चले ही थे उत्तर से दक्खिन ऊपर से कोढ़ में खाज वो सीफिलिस से मरे ...इसीलिए जेएनयू में अधजल गोरू - बछरू ही पैदा हो रहे हैं  ...?" बछरू ने जवाब नहीं दिया ...