Tuesday, 24 November 2015

बड़कू त बड़कू ...छोटकू काहें बड़कू ....?
अभी भी मीडिया के कमेडिया राजनीतिक सूरमा ये महसूसे नहीं कर पाए हैं कि लालू ने छोटकू को डिप्टी सीएम और बड़कू को केवल केबिनेट मंत्री ही क्यों बनाया ? बड़े - बड़े मीडिया घरानो मे राजनीतिक सूरमाओं के लिए विश्लेषण करना बड़े दूर की बात है। ये राजनीतिक सूरमा ऐसे हैं कि इनके आँख पर सर्च लाईट का फोकस मारो तब भी इनके लिए घुप्प अंधेरा ही होता है। लालू यादव तो सर्च लाईट मर रहे हैं लेकिन अभी तक किसी अखबार या टीवी में किसी कमेडिया राजनीतिक सूरमा के कान पर किसी जूँ ने रेंगने की जहमत नहीं उठाई है।
इसका सीधा और सरल अर्थ ये है कि लालू यादव को किसी अपने से अपना विरोध बर्दाश्त नहीं होता, वो उसे आस्तीन का साँप समझते हैं कहने की जरूरत नहीं जब लालू यादव सक्षम होते हैं तो "आस्तीन के साँपों" से कैसे निबटा जाता है बखूबी जानते हैं। साधू यादव, पप्पू यादव, राम कृपाल यादव जैसे ने तो कभी भी "लालू यादव मुर्दाबाद" जैसे आत्मा को छलनी कर देने वाले नारे कभी नहीं नहीं लगवाए फिर भी भनक तक लगते ही लालू यादव उन्हें ठिकाने लगाने में देर नहीं की जबकि ये लोग लालू यादव के बेहद खास हुआ करते थे। राम कृपाल यादव तो लालू यादव के दाहिने हाथ तक थे किसी जमाने में।
नितीश बाबू ने तो वो जघन्य अपराध किया है कि यकीन मानिए लालू यादव नितीश कुमार को माफ कर देंगे ऐसा संभव इसलिए नहीं कि मामला तंत्र - मंत्र का भी है जिस पर लालू यादव अगाध आस्था भी है और उस आस्था द्वारा "लालू मुर्दाबाद" का नारा लगना वो भी नितीश के इशारे पर और नितीश कुमार का मंद - मंद मुसकाना। आप सोच सकते हैं कितना मर्म भेदी दृश्य है ये लालू यादव के लिए और फिर अपराधी लालू चुंगल में हो तो आप कल्पना कर सकते हैं कि दृश्य कितना भयावह होगा।
लालू यादव ने छोटकू को डिप्टी सीएम बना कर ये सीधा और चीखने वाला संकेत दे दिया है नितीश बाबू आपकी औकात तो मेरे छोटू जितनी ही है और फिर बड़कू को केबिनेट मंत्री तक ही सीमित करना अजीब सा नहीं लगता ? जी बिलकुल अजीब है कयदे से तो बड़कू को तो सीएम होना चाहिए छोटकू को डिप्टीसीएम... क्यों होना चाहिए न ...जी आप बिलकुल ठीक समझे लालू यादव का स्पष्ट संकेत नितीश कुमार को है और नितीश कुमार इसे बखूबी समझते भी हैं लेकिन वो अपमानित महसूस कर रहे हैं या नहीं मुझे नहीं पता।
तो इंतजार कीजिये बड़कू के CM बनने का और छोटकू के DCM बने रहने का ..विश्वास रखिए इंतजार की घड़िया उम्मीद से बहुत जल्द खत्म होने वाली है ...खास समीकरण पर सारी तैयारी हो चुकी है ...

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