Tuesday, 27 October 2015

ईनाम दियावे कुर्सी..जोकर भंईस पगुराय ..

नितीश बाबू को आप लोग बकलोल बूझते हैं। दिमाग ठिकाने लगा देने वाले नेता हैं। एक जद्दू नेता उनका कच्चा चिट्ठा खोलते हुए तारीफ कर रहे थे "...वो जब इंजीनियरिंग कालेज में पढ़ते थे तब्बे से शेरो-शायरी और अंत्याक्षरी खेलते थे ..." मैंने कहा "...मने वो पुराने खिलाड़ी हैं फिर भी साहित्य अकादमी पुरस्कार नहीं मिला ...?" जद्दू नेता बोले "...नितीश जी किसी पुरस्कार के भूखे नहीं हैं ..." मैंने तपाक से पूछा "...तब काहें आज कविता बाँच रहे थे ...?" जद्दू नेता बोले "...आपको तो समझ मे आ ही गया होगा ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...हाँ भाई समझ में आ गया ..." जद्दू नेता से नहीं रहा गया मारे उत्साह में उछल कर पूछे "...क्या ...?" मैंने कहा "...नितीश बाबू बहुत दूर की सोचते हैं और उसी हिसाब से योजना नाते हैं ..." जद्दू नेता तो मानो फूले नहीं समा रहा था मारे आनंद से पूछा "...आपके हिसाब से क्या योजना ..." मैंने कहा "....जैसे लेखन के दुर्भिक्षों को साहित्य अकादमी पुरस्कार थमा दिया गया बात वही है ..." जादू नेता को लगा जैसे मैंने उनके नेता की तारीफ की है बोले "...हाँ वो तो है ही ..." मैंने उनसे पूछा "...उनके थ्री ईडियट वाली कविता पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलेगा ...?" जाद्दू नेता बोले "...हाँ हाँ क्यों नहीं जरूर मिलेगा मिलना भी चाहिए ..." मैंने उनको संतुष्ट करते हुए कहा "...फिर नितीश बाबू उसी पुरस्कार को वापस करके मोदी का विरोध करेंगे ..." अब सिरे से उखड़ने के बारी थी जद्दू नेता की "...देखिये आप ऐसा कह के नितीश बाबू का अपमान कर रहे हैं ..." मैंने उनसे पुष्टि करने के अंदाज में पूछा "...आपको पूरा यकीन है कि कविता पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिल जाएगा ...?"  जद्दू नेता बोले "...जरूर मिलेगा आखिर नितीश बाबू भी ओबीसी मे आते हैं ..." मैंने कहा "...ठीक बिलकुल ठीक ...इस चुनाव में तो तो वो मोदी का प्रत्यक्ष विरोध कर नहीं पाएंगे तो पुरस्कार वापसी का ही एक रास्ता बचाता है सत्ता हथियाने का ..."  जद्दू नेता बोले "..नितीश बाबू इतने घटिया इंसान नहीं हैं जो मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाने के लिए पुरस्कार वापस करेंगे ..." मैंने उनको चुनौती देते कहा "...फिलहाल तो नितीश बाबू अपनी कविता पर साहित्य अकादमी पुरस्कार हथिया कर दिखाएँ ..." जद्दू नेता अपना सीना फुलाते हुए बोले "...देखिये केजरीवाल की तरह नितीश कुमार भी ईमानदार नेता हैं ..." मैंने कहा "..हाँ केजरीवाल अभी -अभी आदमी का चारा प्याज और चीनी फाँके हैं नितीश बाबू लालू को फांक रहे हैं ..." जद्दू नेता जैसे उखाड़ गए गुस्से में मुझसे पूछे "...आपके कहने क्या मतलब है ...?" मैंने उत्तरा देते हुए कहा "...विपक्ष में बैठे-बैठे कविता लिख कर साहित्य अकादमी पुरस्कार हथियाने की योजना बना रहे हैं ये उसी का पूर्वाभ्यास था ..." जद्दू नेता चुप हो गए ... 

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