मेरी मातृभाषा हिन्दी ने मुझे बहुत कुछ दिया है इतना कि मैं शोध कर सकूँ ...नई खोज कर सकूँ...दुनियाँ जीत सकूँ ...अपनी मानसिक क्षमता और दक्षता से हलचल उत्पन्न कर सकूँ ...उस हलचल को हजारों हजार लोगों ने प्रत्यक्ष अनुभव भी किया...मातृभाषाओं और हिन्दी के शत्रुओं का नाश कर सकूँ...शुभकामना नहीं... मेरा कोटि - कोटि नमन प्रिय मातृभाषा हिन्दी को...कोटिशः नमामि मातृभूमे, नमामि कोटिशः मातृभाषे..
No comments:
Post a Comment