पावहिं देख गरज सौभागी...तर्क कलह वितर्क बैरागी
हमसे कह रहे थे प्लीज़ हामिद अंसारी को बीच में घसीटिए तो मैंने उनको सफाई देते हुए उनसे पूछा ",,,वैसे तो मैंने ऐसा किया नहीं लेकिन आप क्यों कह रहे हैं ...?" वो बोले "...वो औरंगजेब के खानदानी नहीं हैं ..." मैंने उनसे कहा "...खानदानी नहीं हैं तो क्या देश अगड़ रहा है और सिर्फ मुसलमान की पिछड़ रहा है ...?" उन्होने उत्तर दिया "...वो इस देश के उपराष्ट्रपति हैं ..." मैंने इसपर उनसे कहा "...तो फिर उनको साबित करना चाहिए कि वास्तव में वो हैं..." ये सुनते ही वो उखड़ गए और लगभग चीखते हुए बोले "...देखिये वो हैं और उनकी चिंता लजामी है ..." मैंने इस पर उनसे पूछा "...उनकी चिंता का जस्टीफ़िकेशन औरंगजेब से होगा या डॉ कलाम से ...वैसे उनकी चिंता उसी समय क्यों हुई जब सड़क काम बदला गया ...?" वो तो जैसे निरुत्तर ही हो गए बहुत सोचने के बाद बोले "...औरंगजेब ने दिल्ली पर राज किया था लिहाजा उसकी भी चिंता लजामी हैं ..." मैंने उनसे तर्क करते हुए कहा "...इसका मतलब ये हुआ कि जिस घर मे डकैती पड़े उस घर के मालिक डकैतों की चिंता करे उनके नाम पर अपने घर का नाम रख ले...?" वो ये सुन के परेशान हो गए लिहाजा वो सफाई मे बोले "...औरंगजेब डकैत नहीं था ..." मैंने कहा "...हाँ मैंने थोड़ा लिहाज करते हुए डकैत कहा वो लुटेरा था, हत्यारा था और न जाने क्या क्या था ..." ये सुन कर वो फिर सफाई मे बोले "...लेकिन मुग़लों ने भारत को बहुत कुछ दिया है ..." मैंने कहा "...भारत को ही नहीं विश्व को दिया है और जो दिया है ठीक वही नमूना ISIS वाले प्रस्तुत कर रहे हैं ..." वो बहुत मजबूत तर्क देने की कोशिश मे बोले "....मुग़लों ने भारत को बहुत कुछ दिया लालकिला दिया, ताजमहल, कुतुबमीनार दिया बहुत कुछ दिया .." मैंने इसके प्रतिउत्तर मे कहा "...बड़ा अजीब लगता है एक लुटेरा जब किसी भवन में लूट-पाट करने जाता है तो उस भवन को सजाता है, सवांरता और विश्व प्रसिद्ध बनाने का प्रयास करता है और लूट-पाट भी करता है ..." ये सुनते ही वो उखड़ गए और तैश मे बोले "...आपका मतलब ये सब मुग़लों ने नहीं बनवाया ...इतिहास मे लिखा है कि ताजमहल बनाने के लिए बुखारा (उज्बेकिस्तान) से मिस्त्री और बलूचिस्तान से करीगर बुलाए गए थे ..." मैंने उनके जवाब मे कहा "...इतिहास को तार्किक और प्रामाणिक होना चाहिए मनगढ़ंत नहीं ..." ये सुन कर वो चौंक गए बोले "...ये कैसे दावा कर सकते हैं इतिहास मे लिखा है वो तार्किक और प्रामाणिक नहीं है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...कायदे से एक्सपर्ट मिस्त्री वही से आते हैं जहां पर वो अपनी विशेषज्ञता साबित कर चुके होते हैं तो जरा हमको ये बताईए कि बुखारा या पूरे उज्बेकिस्तान मे ताजमहल या उसके जैसी कितनी इमारतें थीं उस समय ...जवाब है एक भी नहीं ....बलूचिस्तान से करीगर बुलाए गए थे तो बलूचिस्तान मे कितने स्मारक हैं इस प्रकार के ... उत्तर है एक भी नहीं ...तब बताईए जब वहाँ इस प्रकार का कुछ था ही नहीं तो ऐसी विलक्षण इमारतों के लिए विशेषज्ञ कहाँ से पैदा हो गए ...ताजमहल निर्माण बारे मे तार्किक बातें सभी इमारतों पर समान रूप से लागू होते जिन्हें मुग़ल कहा जाता है ..." मेरा तर्क सुन कर वो सन्न रह गए फिर भी बोले "...लेकिन हामिद अंसारी की चिंता तार्किक है ..." मैंने साफ साफ कहा "...हो सकता है लेकिन व्यावहारिक नहीं ...नमस्कार "
हमसे कह रहे थे प्लीज़ हामिद अंसारी को बीच में घसीटिए तो मैंने उनको सफाई देते हुए उनसे पूछा ",,,वैसे तो मैंने ऐसा किया नहीं लेकिन आप क्यों कह रहे हैं ...?" वो बोले "...वो औरंगजेब के खानदानी नहीं हैं ..." मैंने उनसे कहा "...खानदानी नहीं हैं तो क्या देश अगड़ रहा है और सिर्फ मुसलमान की पिछड़ रहा है ...?" उन्होने उत्तर दिया "...वो इस देश के उपराष्ट्रपति हैं ..." मैंने इसपर उनसे कहा "...तो फिर उनको साबित करना चाहिए कि वास्तव में वो हैं..." ये सुनते ही वो उखड़ गए और लगभग चीखते हुए बोले "...देखिये वो हैं और उनकी चिंता लजामी है ..." मैंने इस पर उनसे पूछा "...उनकी चिंता का जस्टीफ़िकेशन औरंगजेब से होगा या डॉ कलाम से ...वैसे उनकी चिंता उसी समय क्यों हुई जब सड़क काम बदला गया ...?" वो तो जैसे निरुत्तर ही हो गए बहुत सोचने के बाद बोले "...औरंगजेब ने दिल्ली पर राज किया था लिहाजा उसकी भी चिंता लजामी हैं ..." मैंने उनसे तर्क करते हुए कहा "...इसका मतलब ये हुआ कि जिस घर मे डकैती पड़े उस घर के मालिक डकैतों की चिंता करे उनके नाम पर अपने घर का नाम रख ले...?" वो ये सुन के परेशान हो गए लिहाजा वो सफाई मे बोले "...औरंगजेब डकैत नहीं था ..." मैंने कहा "...हाँ मैंने थोड़ा लिहाज करते हुए डकैत कहा वो लुटेरा था, हत्यारा था और न जाने क्या क्या था ..." ये सुन कर वो फिर सफाई मे बोले "...लेकिन मुग़लों ने भारत को बहुत कुछ दिया है ..." मैंने कहा "...भारत को ही नहीं विश्व को दिया है और जो दिया है ठीक वही नमूना ISIS वाले प्रस्तुत कर रहे हैं ..." वो बहुत मजबूत तर्क देने की कोशिश मे बोले "....मुग़लों ने भारत को बहुत कुछ दिया लालकिला दिया, ताजमहल, कुतुबमीनार दिया बहुत कुछ दिया .." मैंने इसके प्रतिउत्तर मे कहा "...बड़ा अजीब लगता है एक लुटेरा जब किसी भवन में लूट-पाट करने जाता है तो उस भवन को सजाता है, सवांरता और विश्व प्रसिद्ध बनाने का प्रयास करता है और लूट-पाट भी करता है ..." ये सुनते ही वो उखड़ गए और तैश मे बोले "...आपका मतलब ये सब मुग़लों ने नहीं बनवाया ...इतिहास मे लिखा है कि ताजमहल बनाने के लिए बुखारा (उज्बेकिस्तान) से मिस्त्री और बलूचिस्तान से करीगर बुलाए गए थे ..." मैंने उनके जवाब मे कहा "...इतिहास को तार्किक और प्रामाणिक होना चाहिए मनगढ़ंत नहीं ..." ये सुन कर वो चौंक गए बोले "...ये कैसे दावा कर सकते हैं इतिहास मे लिखा है वो तार्किक और प्रामाणिक नहीं है ..." मैंने उत्तर देते हुए कहा "...कायदे से एक्सपर्ट मिस्त्री वही से आते हैं जहां पर वो अपनी विशेषज्ञता साबित कर चुके होते हैं तो जरा हमको ये बताईए कि बुखारा या पूरे उज्बेकिस्तान मे ताजमहल या उसके जैसी कितनी इमारतें थीं उस समय ...जवाब है एक भी नहीं ....बलूचिस्तान से करीगर बुलाए गए थे तो बलूचिस्तान मे कितने स्मारक हैं इस प्रकार के ... उत्तर है एक भी नहीं ...तब बताईए जब वहाँ इस प्रकार का कुछ था ही नहीं तो ऐसी विलक्षण इमारतों के लिए विशेषज्ञ कहाँ से पैदा हो गए ...ताजमहल निर्माण बारे मे तार्किक बातें सभी इमारतों पर समान रूप से लागू होते जिन्हें मुग़ल कहा जाता है ..." मेरा तर्क सुन कर वो सन्न रह गए फिर भी बोले "...लेकिन हामिद अंसारी की चिंता तार्किक है ..." मैंने साफ साफ कहा "...हो सकता है लेकिन व्यावहारिक नहीं ...नमस्कार "
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