दिल्ली में लालू, पियाज खाए अके...लू...
बक़राईद बीत जाने के बाद केजरीवाल से यही उम्मीद थी क्योंकि दिल्ली में भी नासिक के "चारा घोटाला" हो ही गया जो स्वाभाविक था ठीक लालू यादव के MY समीकरण की तर्ज पर। बावजूद इसके बेगानी आग से अपनी लुआठी लहका कर पहलवानी झाड़ना भी बहुत भाता है, लेकिन गाहे-बगाहे मुन्ना हज़ारे जैसे लोग अपनी टोपी की दुहाई देने पर उतारू हो जाते हैं तो केजरीवाल की इज्जत ही दांव पर लग जाती है। आज बड़े ताव मे आ कर मेरी ही पोस्ट के तीसरे पैरा की अंतिम चार पंक्तियों की नकल मार कर "मेक इन इंडिया" की तर्ज पर "मेक इंडिया" कर दिया जो मूल रूप से पूरी तरह से मेरी अवधारणा है। वैसे नकल मारना केजरीवाल की पुरानी आदत है। पिछले सितंबर से ही "मेक इन इंडिया" चल रहा है और मोदी की ये 29 वीं विदेश यात्रा थी अबतक उनको "मेक इंडिया" का विचार नहीं आया था। विचार तब आया जब मेरी पोस्ट 22 सितंबर को "हीन भावना बहुत बड़ी गंभीर समस्या" शीर्षक से आती है।आखिर केजरीवाल का दिमाग बकाराईद के बाद ही सक्रिय क्यों होता है? वैसे इस बार कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल मेरी अवधारणा की चोरी नहीं कर सकते क्योकि मेरी हर पोस्ट सबसे पहले मोदी जी के पास जाती है फिर वो मेरे और अन्य समूहों के वाल पर प्रकाशित होती है।
वैसे मेरे पास आ कर केजरीवाल अवधारणा के लिए गिड़गिड़ाए होते तो निश्चित रूप से उस तरीके से निराश बिलकुल नहीं होना पड़ता जिस तरीके से दिल्ली वाले निराश हैं हताश हैं। डेंगू से प्लेटलेट्स कम जरूर होते हैं लेकिन दिल्ली वालों का हौसला कम नहीं होता 15 साल काँग्रेस जैसे महामुसीबत को झेल सकते हैं तो केजरीवाल जो भले ही डेंगू से भी खतरनाक क्यों न हो दिल्ली वाले हँसते हुए झेल ही जाएंगे। वैसे केजरीवाल स्वराज्य भूल ही चुके हैं कारण साफ है यदि वो इसे लागू करते हैं तो उन्हें अपनी जेब से उसे भारी भरकम रायल्टी देनी पड़ेगी जिसके स्वराज के अवधारणा की चोरी केजरीवाल ने की है। मामला वैसे भी न्यायालय में विचाराधीन है।
वैसे जिसके मित्र सोमनाथ भारती, तोमर, कुमार विषवास, आशुतोष आदि आदि जैसे लोग हों उससे उम्मीद भी क्या की जा सकती है। इसीलिए दिल्ली वालों को अपने महफूजियत से ज्यादा खतरा तब बहुत बढ़ जाता है जब से वो लालू यादव का खुल कर समर्थन करने लगे। लालू ने चौपायों का चारा खाया और केजरीवाल आदमी का चारा खा गए हाँ हाँ वही चारा जो नासिक से आया था 18 रुपये किलो बिका था 40 रुपये किलो फिर भी केजरीवाल का पेट नहीं भरा तो उसपर भी 10 रुपये सबसिडी देकर उसे भी निगल गए और डकार तक नहीं ली।
बक़राईद बीत जाने के बाद केजरीवाल से यही उम्मीद थी क्योंकि दिल्ली में भी नासिक के "चारा घोटाला" हो ही गया जो स्वाभाविक था ठीक लालू यादव के MY समीकरण की तर्ज पर। बावजूद इसके बेगानी आग से अपनी लुआठी लहका कर पहलवानी झाड़ना भी बहुत भाता है, लेकिन गाहे-बगाहे मुन्ना हज़ारे जैसे लोग अपनी टोपी की दुहाई देने पर उतारू हो जाते हैं तो केजरीवाल की इज्जत ही दांव पर लग जाती है। आज बड़े ताव मे आ कर मेरी ही पोस्ट के तीसरे पैरा की अंतिम चार पंक्तियों की नकल मार कर "मेक इन इंडिया" की तर्ज पर "मेक इंडिया" कर दिया जो मूल रूप से पूरी तरह से मेरी अवधारणा है। वैसे नकल मारना केजरीवाल की पुरानी आदत है। पिछले सितंबर से ही "मेक इन इंडिया" चल रहा है और मोदी की ये 29 वीं विदेश यात्रा थी अबतक उनको "मेक इंडिया" का विचार नहीं आया था। विचार तब आया जब मेरी पोस्ट 22 सितंबर को "हीन भावना बहुत बड़ी गंभीर समस्या" शीर्षक से आती है।आखिर केजरीवाल का दिमाग बकाराईद के बाद ही सक्रिय क्यों होता है? वैसे इस बार कॉंग्रेस कुमार केजरीवाल मेरी अवधारणा की चोरी नहीं कर सकते क्योकि मेरी हर पोस्ट सबसे पहले मोदी जी के पास जाती है फिर वो मेरे और अन्य समूहों के वाल पर प्रकाशित होती है।
वैसे मेरे पास आ कर केजरीवाल अवधारणा के लिए गिड़गिड़ाए होते तो निश्चित रूप से उस तरीके से निराश बिलकुल नहीं होना पड़ता जिस तरीके से दिल्ली वाले निराश हैं हताश हैं। डेंगू से प्लेटलेट्स कम जरूर होते हैं लेकिन दिल्ली वालों का हौसला कम नहीं होता 15 साल काँग्रेस जैसे महामुसीबत को झेल सकते हैं तो केजरीवाल जो भले ही डेंगू से भी खतरनाक क्यों न हो दिल्ली वाले हँसते हुए झेल ही जाएंगे। वैसे केजरीवाल स्वराज्य भूल ही चुके हैं कारण साफ है यदि वो इसे लागू करते हैं तो उन्हें अपनी जेब से उसे भारी भरकम रायल्टी देनी पड़ेगी जिसके स्वराज के अवधारणा की चोरी केजरीवाल ने की है। मामला वैसे भी न्यायालय में विचाराधीन है।
वैसे जिसके मित्र सोमनाथ भारती, तोमर, कुमार विषवास, आशुतोष आदि आदि जैसे लोग हों उससे उम्मीद भी क्या की जा सकती है। इसीलिए दिल्ली वालों को अपने महफूजियत से ज्यादा खतरा तब बहुत बढ़ जाता है जब से वो लालू यादव का खुल कर समर्थन करने लगे। लालू ने चौपायों का चारा खाया और केजरीवाल आदमी का चारा खा गए हाँ हाँ वही चारा जो नासिक से आया था 18 रुपये किलो बिका था 40 रुपये किलो फिर भी केजरीवाल का पेट नहीं भरा तो उसपर भी 10 रुपये सबसिडी देकर उसे भी निगल गए और डकार तक नहीं ली।