Tuesday, 18 August 2015

भारत की जबरदस्त कूटनीतिक जीत

भारत के लोकप्रिय और हम सबके चहेते प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने अपनी 16-17 अगस्त दो दिवसीय संयुक्त अरब अमीरात यात्रा कई मायनो बेहद महत्वपूर्ण रही और विश्व इतिहास में अबतक की सबसे सफल कूटनीतिक यात्रा है। ये यात्रा इस मायने मे भी बेहद महत्वपूर्ण है जब पाकिस्तान अपनी आतंकवाद नीति को न सिर्फ नए सिरे से परवान चढ़ा रहा है बल्कि इसके लिए उसे अब चीन का खुला समर्थन भी हासिल होने लगा था कारण एक तो भारत मे सबसे तेज और जबरदस्त आर्थिक विकास दूसरे चीन का कई मोर्चों पर भारत द्वारा सीधे पटखनी दे देना मसलन बांग्लादेश मे चीन का नौसेना बेस खत्म, हिन्दमहासागर में चीन का दबदबा खत्म होने के साथ दक्षिणी चीन सागर में भी भारत का सीधा और प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित और मंगोलिया को भी अपने पक्ष मे करने के कारण चीन एक तरह से भारत से बौखलाया गया था लिहाजा वो किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के माध्यम से भारत के माध्यम से अस्थिर करने की कोशिश कर रहा था। यूएई की सफल यात्रा ने पाकिस्तान के माध्यम से चीन नापाक मंसूबों को एक झटके में ध्वस्त करके रख दिया।

यूएई कई मायानों में भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है आप तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार की बात छोड़ दीजिये ये तो प्रत्यक्ष तथ्य है। व्यापारिक साझीदारदार होने बावजूद यूएई भारत के लिए एक समस्या भी रहा है इसीलिए भारत का कोई प्रधानमंत्री आधिकारिक तौर पर यहाँ के यात्रा करने से बचता रहा है लिहाजा अप्रत्यक्ष समस्यापरक तथ्य ये है कि भ्रष्टाचारी दुबई को काला धन संग्रह हेतु मार्ग का इस्तेमाल करते थे और हवाला का ऑपरेशन भी यहीं से होता था कहने की जरूरत नहीं कि इसमे दाऊद के कितना बड़ा योगदान था। हवाला का ऑपरेशन भी मोदी जी की यात्रा के बाद ये सब बंद हो गया। हवाला ऑपरेशन बंद होने का मतलब बेहद महत्वपूर्ण इसलिए है कि इसी के माध्यम से भारत विरोधी आतंकवादी और गैरआतंकवादी शैक्षणिक, राजनीतिक, सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए भी इसी माध्यम से बहुत बड़े स्तर पर आर्थिक मदद तो होती ही थी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा यूएई से ही पूरा होता था ठीक भारत विरोधी आतंकवाद के संचालन के नाम पर। ऐसा नहीं है कि हवाला का उपयोग केवल गलत लोग ही करते थे सही लोग भी कर चोरी के लिए इस रैकेट का उपयोग करते थे जिससे राजस्व का भारी नुकसान होता था वो सब अब बंद हो गया लिहाजा भारत विरोधी काम करने वाली संस्थाएं एनजीओ, सामाजिक - राजनीतिक संगठन, शैक्षणिक संगठन, कुछ मीडिया समूह आदि के लिए अब अच्छी ख़ासी मुसीबत होने वाली है।

बहुत कम लोगों को पता है कि दुबई मे आईएसआई की तूती बोलती थी इसीलिए दाऊद पाकिस्तान से अधिक सक्रिय दुबई मे रहता था कहा ये भी जाता है कि दुबई ही दाऊद का घर हुआ करता था और वही से अपने काले कारोबार को संचालित भी करता था। जिस तरीके से कल संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ उससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आईएसआई, दाऊद और पाकिस्तान के लिए कितना बड़ा झटका है। वस्तुतः ये समस्याएँ ऐसी थीं कि भारत को एक प्रकार से दीमक की तरह चाट रही थीं हर स्तर पर इस यात्रा से उस दीमक को मौत के घाट उतार दिया गया है।

यूएई मंदिर के लिए भूमि आवंटित करने को तैयार हो गया है विश्व इतिहास मे ऐसी जीत संभवतः खोजने से भी न मिले। यूएई के पश्चिम मे ISIS का नंगा नाच चल रहा है वही ISIS ने 2020 तक लक्ष्य तय किया भारत के खिलाफ। यूएई मे मंदिर का बनने का प्रस्ताव ISIS के मुंह पर जोरदार तमाचा है। ये स्पष्ट संकेत उनके लिए भी है जो भारत मे समय-समय पर भारत के खिलाफ जहर उगलते रहते है ओवैसी जैसे लोग यदि थोड़ा भी समझदार होंगे तो इशारा समझ जाएंगे।

नेपाल का हिंदूराष्ट्र की ओर बढ़ना और यूएई मे मंदिर बनना आगामी विधानसभा चुनावों पर इनका जबरदस्त असर देखने को मिलने पूरे आसार हैं। कहा तो ये भी जा रहा है कि अगर भाजपा यदि बिहार का चुनाव जीत जाती है है तो देश बहुत बड़े बदलाव की ओर अग्रसर हो जाएगा जिसे किसी भी तरीके से रोक पाना राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए असंभव हो जाएगा। संकेत भी पूरी तरह स्पष्ट हैं।         

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