हाहाकार पुतरू हुआं-हुआं...नामुमकिन हश्र नमकीन
मैंने एक पखवाड़ा पहले ही अपने 31 जुलाई 2015 की " बिलार मारे खोईचा...सियार सीकर मंसा..." शीर्षक पोस्ट में पोस्ट मे दाऊद के हश्र का स्पष्ट उल्लेख कर दिया था। जैसे दाऊद के गुर्गे की फांसी पर जैसे सिक-उल्लूरिस्टों के सीने पर साँप लोट रहा था और मातम मना रहे थे उससे भी भयानक स्थिति अब होने वाली है सिक-उल्लूरिस्ट नेता-नूती सहित कमीडिया घरानो के पुतरूहाहाकारों का मातम तो अब देखने लायक होगा। मीडिया अब पूरे अपने फार्म मे होगी उसके पुतरूहाहाकारों का वास्तविक हाहाकार अब वास्तव मे देखने लायक होगा। एक कॉंग्रेसी दाऊद द्वारा घोषित देश के नामी कमीडिया हाऊस के पुतरूहाहाकार मुझे बता रहे थे "...मोदी ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली ..." मैंने उनसे पलट कर पूछा "...तो हाहाकार आप इसलिए मचाए हैं...?" कमीडिया विशेषज्ञ बोले "...हम पुतरूहाहाकार नहीं पत्रकार हैं समझे ...!." मैंने भी उनको उसी टोन मे जवाब देते हुए प्रश्न दाग दिया "...दाऊद के हश्र का गुस्सा मेरे ऊपर क्यों उतार रहे हैं ... वैसे कुल्हाड़ी आप ही लेकर गए थे क्या वहाँ...?" कमीडिया विशेषज्ञ बोले "...ये ठीक नहीं है..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...अब डाऊन को पकड़ना मुश्किल नहीं नमकीन है ..." कमीडिया विशेषज्ञ असहज हो गए सुधार करते हुए बोले "...वो डाऊन नहीं डान है, नमकीन नहीं नामुमकिन..." मैंने कहा "...प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद डान डाऊन बन चुका है और नामुमकिन तो बस अब नमकीन है जब चाहो खा लो चटखारे ले कर..." सिक-उल्लूरिस्ट पुतरूहाहाकार मुझे चेताते हुए बोले "...ये देश के लिए ठीक नहीं बिहार चुनाव के बाद ये करते तो ठीक होता ..." मैंने कहा "...इसीलिए आप पत्रकार नहीं पुतरूहाहाकार हैं वो तो अभी होना ही था क्योकि मैंने वो 31 जुलाई का लेख भी प्रधानमंत्री को भेज दिया था ..." पुतरूहाहाकार बोले "...वो हमारी बात नहीं सुनते आपकी बात क्यों सुन रहे रहे हैं ...?" मैंने सहजता से उत्तर दिया "...क्योकि मैं पुतरूहाहाकार नहीं हूँ ..." कमीडिया विशेषज्ञ बोले "...हर किसी को डाऊन करने से देश नहीं चलेगा ..." मैंने कहा "...कुछ लोगों को डाऊन नहीं किया गया था इसीलिए देश विकास नहीं कर रहा था ...जैसे सिक-उल्लूरिस्ट आप-कोंग्रेस-कम्युनिस्ट डान ...कमीडिया आन ...." पुतरूहाहाकार कमीडिया विशेषज्ञ ये सुन कर दहल गए कमरे मे कुर्सी से उठकर तेजी से इधर-उधर टहलने लगे ऐसे चिंतमग्न हो गए जैसे किसी का आर्थिक श्रोत बंद हो जाता है ....मैंने उनसे कहा "...अब तो हवाला कारोबार भी ख़त्म ...पैसा हजम ...कमीडिया खेल खत्म ..." कमीडिया विशेषज्ञ परेशान हो कर अंदर कमरे मे भाग गए....
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