घीव जियावे गोईठा, पहलवान लंदन बाम
बकलोल बबुआ के आदेश पर खाँटी भाई कोंग्रेसीयों ने खूब गोईठा पर घी चुआया इतना चुआया कि गोईठा भी घी पी कर मस्त हो गया। ऐसा गोईठा देख कर बकलोल बबुआ और राजमा-ता दोनों फूल कर तुम्बा हो गए, ये देखकर एक खाँटी भाई ने कहा मज़ाक मे ही सही "...लगता है राहुल जी का भी सीना 56 इंच का हो गया है,,," लेकिन खाँटी भाईयों ने इसे सत्य मान कर सती होने व्रत ले लिया। लेकिन समस्या ये खड़ी हो गई थी कि सती होने के लिए विधवा होना जरूरी है लेकिन कमाल हैं खाँटी भाईयों ने इसका भी हल खोज निकाला पूरी की पूरी कॉंग्रेस को ललित मोदी को भगोड़ा घोषित कर कॉंग्रेस को विधवा बना डाला जिससे बकलोल बबुआ और राजमा-ता के इशारे पर कॉंग्रेस को सती होने का सौभाग्य मिल गया। लेकिन सती प्रथा भारत मे प्रतिबंधित है इसका पता चलते ही खाँटी भाईयों को तो मानो साँप ही सूंघ गया लिहाजा बहस के लिए तैयार हो गए। बहुत से खाँटी भाई कोंग्रेसी बेहोश होते - होते इसलिए बचे क्योकि उन्हे बताया गया "...साँप ने सूंघा ही है डँसा नहीं ..."। खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग अब बकलोल बबुआ और राजमा-ता को घेर कर सती होने से पूर्व का कालबेलिया (म्लेच्छ बोली अंगरेजी मे नागिन डांस) करने के लिए बिलकुल तैयार थे। मैंने खाँटी भाई से पूछा "...बकलोल बबुआ और राजमा-ता को बचाने क्या तुक...?" खाँटी भाई बोले "..आखिर सती होने के बाद घी पिया गोईठा सुलगाने के लिए कोई जगह तो चाहिए ..." खाँटी भाई की बातों मे दम था आखिर मातम के दौर मे सुलगते गोईठे का धुआँ कई मायनों में बहुत बड़ा सहारा होता है जिसके आधार पर सती को वीरगति घोषित करके हमेशा लोगों को सिक-उल्लूवाद से जोड़कर उल्लू बनाया जा सके। मैंने खाँटी भाई से पूछा "...आखिर सती होने के लिए आपने पूरे सत्र का इंतजार किसलिए किया ...?" खाँटी भाई बोले "...शुरू मे सती होने पर सजा हो सकती थी हम अपराधी सिद्ध हो जाते लेकिन अंत में होने पर हमे वीरगति का दर्जा मिलने की उम्मीद थी ..." मैंने कहा "...लेकिन अंत में भी वही हुआ जिसके कारण आप शुरू में ही डर रहे थे..." खाँटी भाई उम्मीद भर कर विश्वास से बोले "... हम खुद को वीरगति साबित कर के रहेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन अब तो विधवा का भी खिताब कॉंग्रेस से छिनने जा रहा है ..." खाँटी भाई के पास उत्तर तैयार था बोले "...जिसको ये सरकार भारत ला रही है वो ललित मोदी नहीं उसका भूत है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...तो फिर कुत्तारोची, एंडरसाँड, अदिल ही काँग्रेस असली ललित मोदी थे ...?" ये सुनते खाँटी भाई सकपका गए और लगे गोईठा चमकाने मेरे बहुत कुछ पूछने पर वो कुछ नहीं बोल रहे थे ...
बकलोल बबुआ के आदेश पर खाँटी भाई कोंग्रेसीयों ने खूब गोईठा पर घी चुआया इतना चुआया कि गोईठा भी घी पी कर मस्त हो गया। ऐसा गोईठा देख कर बकलोल बबुआ और राजमा-ता दोनों फूल कर तुम्बा हो गए, ये देखकर एक खाँटी भाई ने कहा मज़ाक मे ही सही "...लगता है राहुल जी का भी सीना 56 इंच का हो गया है,,," लेकिन खाँटी भाईयों ने इसे सत्य मान कर सती होने व्रत ले लिया। लेकिन समस्या ये खड़ी हो गई थी कि सती होने के लिए विधवा होना जरूरी है लेकिन कमाल हैं खाँटी भाईयों ने इसका भी हल खोज निकाला पूरी की पूरी कॉंग्रेस को ललित मोदी को भगोड़ा घोषित कर कॉंग्रेस को विधवा बना डाला जिससे बकलोल बबुआ और राजमा-ता के इशारे पर कॉंग्रेस को सती होने का सौभाग्य मिल गया। लेकिन सती प्रथा भारत मे प्रतिबंधित है इसका पता चलते ही खाँटी भाईयों को तो मानो साँप ही सूंघ गया लिहाजा बहस के लिए तैयार हो गए। बहुत से खाँटी भाई कोंग्रेसी बेहोश होते - होते इसलिए बचे क्योकि उन्हे बताया गया "...साँप ने सूंघा ही है डँसा नहीं ..."। खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग अब बकलोल बबुआ और राजमा-ता को घेर कर सती होने से पूर्व का कालबेलिया (म्लेच्छ बोली अंगरेजी मे नागिन डांस) करने के लिए बिलकुल तैयार थे। मैंने खाँटी भाई से पूछा "...बकलोल बबुआ और राजमा-ता को बचाने क्या तुक...?" खाँटी भाई बोले "..आखिर सती होने के बाद घी पिया गोईठा सुलगाने के लिए कोई जगह तो चाहिए ..." खाँटी भाई की बातों मे दम था आखिर मातम के दौर मे सुलगते गोईठे का धुआँ कई मायनों में बहुत बड़ा सहारा होता है जिसके आधार पर सती को वीरगति घोषित करके हमेशा लोगों को सिक-उल्लूवाद से जोड़कर उल्लू बनाया जा सके। मैंने खाँटी भाई से पूछा "...आखिर सती होने के लिए आपने पूरे सत्र का इंतजार किसलिए किया ...?" खाँटी भाई बोले "...शुरू मे सती होने पर सजा हो सकती थी हम अपराधी सिद्ध हो जाते लेकिन अंत में होने पर हमे वीरगति का दर्जा मिलने की उम्मीद थी ..." मैंने कहा "...लेकिन अंत में भी वही हुआ जिसके कारण आप शुरू में ही डर रहे थे..." खाँटी भाई उम्मीद भर कर विश्वास से बोले "... हम खुद को वीरगति साबित कर के रहेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन अब तो विधवा का भी खिताब कॉंग्रेस से छिनने जा रहा है ..." खाँटी भाई के पास उत्तर तैयार था बोले "...जिसको ये सरकार भारत ला रही है वो ललित मोदी नहीं उसका भूत है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...तो फिर कुत्तारोची, एंडरसाँड, अदिल ही काँग्रेस असली ललित मोदी थे ...?" ये सुनते खाँटी भाई सकपका गए और लगे गोईठा चमकाने मेरे बहुत कुछ पूछने पर वो कुछ नहीं बोल रहे थे ...
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