Monday, 31 August 2015

तीतर के दो आगे तीतर, तीतर के दो पीछे तीतर ....

अरे भाई किसी को कोई खबर है कॉंग्रेस के नकली अध्यक्ष यानी उपाध्यक्ष कहाँ है ? अंतिम सूचना तक तो बकलोल बबुआ ढाई महीना पहले ही राजस्थान मे बिहार का चुनाव प्रचार कर काम खतम करके गायब हो गए अब पते नहीं चल रहा है वो है कहाँ। गधे के सर सींग गायब होते तो सुना था लेकिन कॉंग्रेस के सर से उपाध्यक्षवे गायब हो जाए ये पहली बार हो रहा है स्वतंत्र भारत के इतिहास में। मैंने एक खाँटी भाई कोंग्रेसी जो घनघोर बरसात में पता नहीं अपनी लंगोटी उबाल रहे थे, सुखा रहे थे या फूँक रहे थे, कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा था, मैंने उनसे पूछा "...आपके नकली अध्यक्ष का अता-पता नहीं चल रहा ...कहाँ हैं वो...?" खाँटी भाई प्रश्न सुन कर जैसे सनपात गए खुद को मुश्किल से संभालते हुए बोले "...देखिये वो अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही बिहार में चुनाव प्रचार करेंगे ..." मैंने आश्चर्य से कहा "...बिहार मे बांग-दंगल अपने चरम पर है और वो हैं कि पता नहीं किस चरम सुख की तलाश कहाँ लटक रहे हैं ...?" खाँटी भाई बोले "...जिस तरीके से बिहार मे DNA पर घमासान मचा है उससे वो दुखी हैं ..." मैंने उसी आश्चर्य से पूछा "...काहें भाई ...?" खाँटी भाई बोले "...सबका DNA सैंपल जांच के लिए भेजा जा रहा है ..." मेरा आश्चर्य कम नहीं हो रहा था सो मैंने पूछा "...तो इसमे भेजा खराब होने वाली कौन सी बात है ... उनका भी DNA लेकर जांच के लिए भेजने की योजना है क्या ...?" खाँटी भाई बोले "...ऐसा तो कोई प्रस्ताव नहीं है ..." मैंने प्रश्न दागा "...जब प्रस्ताव नहीं है तो फिर बिहार मे वो ताव क्यों दिखा नहीं रहे है ...?" खाँटी भाई बोले "...मामला DNA टेस्ट का नहीं लेकिन DNA का ही है ..." मुझे फिर आश्चर्य हुआ पूछा "...कैसे ..?" खाँटी भाई बड़े संजीदा हो कर बोले "...DNA बोलने से NDA का ही प्रचार होता है केवल D और N के स्थान मे फर्क है ..ये जनता परिवार के जोकर समझ नहीं रहे..." मैंने संतोष जताते हुए खाँटी भाई से कहा "...ओSS तो ये बात है मतलब कुश्ती मोदी के अखाड़े मे और मोदी के ही पैंतरे पर लड़ी जा रही है जिसके मोदी माहिर खिलाड़ी हैं..." खाँटी भाई आगे शायराना अंदाज  बोले "...कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी वरना यूं नहीं कोई बेवफा होता ..." मैंने सांत्वना देते हुए कहा "...इसीलिए गीली लंगोटी सूख नहीं रही या फुंक नहीं रही ..." खाँटी भाई बोले "...अब जो कॉंग्रेस के फायदे मे है केवल वही करना है..." मैंने कहा "...मतलब यदि बिहार के दंगल वो ताव दिखाते हैं तो NDA को बोनस मिल सकता है ..इसीलिए जनता परिवार के जोकर उन्हें बिहार आने नहीं दे रहे ..." मैंने खाँटी भाई को कहा नमस्कार... 

Sunday, 30 August 2015

मन चंगा तो पटना में दरभंगा...
पार्ट 2
बिहार की राजनीति लाठी से हट कर लुआठी पर आ गई है। सारे सिक-उल्लूरिस्टवे भरसक प्रयास कर रहे हैं कि उस लुआठी से सर की टोपी न फुंकाए। ईसीलिए उसमे बड़े-बड़े टल्ली जिसमे ई-कामर्स ई-गवर्नमेंट की तर्ज पर ई-टल्ली भी शामिल हैं। जब ई-टल्लियों को देखने-सुनने बिहार जनता गांधी मैदान नहीं पहुंची तो टोपी को दोष देने के बजाय जिसे कोसने लगे वो तो कोसों दूर था। मैंने एक राजद पहलवान से इस बारे मे पूछा तो गुस्से मे कहने लगे "...आप लोग समझते क्यों नहीं ये ऐतिहासिक रैली थी..." मैंने कहा "...हम तो समझबे करते हैं लेकिन जनता समझे तब न ..." राजद पहलवान का गुस्सा फिर कम नहीं हुआ बोले "...बिहार जनता स्वाभिमानी है वो किसी के बहकावे मे नहीं आने वाली ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...लेकिन आम-लीची का मौसम तो कबका चला गया कटहल भी पक कर पूरा बड़ा सा कटहर हो गया है ..." राजद पहलवान फिर तैश में आकर मुझसे पूछे "...आपका मतलब उसी कारण से जनता नहीं आई...?" मैंने फिस्स से हँसते हुए कहा "..आपे तो कह रहे हैं बिहार की जनता किसी के बहकावे मे नहीं आने वाली ..." ये सुन कर राजद पहलवान चौक गए फिर पूछा "...आपका मतलब क्या है ...?" मैंने फिस्स वाले हंसी के साथ उनसे पूछा "...बिहार की जनता का स्वाभिमान तो आमे-लीची है कटहलवो अब कटहर हो गया तो बचा ही क्या अब...?" तभी कहीं से टहलते हुए खाँटी भाई काँग्रेसी और जद्दू नेता भी आ धमके जद्दू नेता खुद को होशियार जताते हुए बोले "...बिहार की जनता का कोई अपमान करे ये जनता बर्दाश्त नहीं करेगी ..." मैंने जवाब देते हुए कहा "...हाँ इसीलिए तो कोआ खाने लोग आए नहीं ..." ये सुन कर जद्दू नेता खाऊरा गए उनको शांत करते हुए खाँटी भाई बोले "...देखिये बिहार की जनता का DNA का मुद्दा चुनावी नहीं होना चाहिए था ..." मैंने उनको याद दिलाते हुए कहा "...आपके आज के नकली अध्यक्ष यानी उपाध्यक्ष ने भारत के लोगों के DNA का मुद्दा उठाया था ...वैसे बिहार की जनता के DNA की बात नहीं बल्कि केवल ईटल्लियों के DNA का मुद्दा है ..." ये सुनते ही खाँटी भाई भी भड़क गए बोले "...हालांकि आपको इटली कहने का अधिकार नहीं इटली को ईटल्ली कहना आपकी हिमाकत है ..." मैंने भी खाँटी भाई को उसी टोन मे जवाब दिया कहा "...यहा पर जनता अब पाकल कटहर खाने नहीं आने वाली नजारा आपके सामने हैं.." ये सुन कर राजद पहलवान जैसे हिल गए लेकिन खुद को काबू करते हुए बोले "...देखिये बिहार मे हम सरकार बनाने जा रहे हैं ..." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...अच्छा लेकिन NDA को तो 140 से 180 के बीच सीटें मिलने जा रही है ...तो आप अल्पमत की सरकार बनाएँगे ...?" राजद पहलवान भड़क कर बोले "...हम ही सरकार बनाएँगे ...हम सीटें जीतेंगे ...हम ईमानदारी की वो मशाल हैं जो रास्ता दिखा दे ..." केजरीवाल छाप आदमी पीछे खड़ा था लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई कुछ बोलने की ... 

Wednesday, 26 August 2015

भारत के खिलाफ एक गहरी साजिश

अचानक ये क्या हो गया उधर नेपाल जो हिन्दू राष्ट्र की ओर फिर से बढ़ रहा है हिंसा की चपेट मे आ गया, इधर गुजरात जो सबसे अधिक शांत और प्रगतिशील है अचानक हिंसा की चपेट आ गया "पटेल आरक्षण" तो महज एक बहाना है। उधर नेपाल मे चीन और पाकिस्तान दोनों प्रत्यक्ष हस्तक्षेप बताया जा रहा है। अभी कुछ ही दिन पहले ये खबर मिली थी कि चीन तिब्बत मे अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए कुछ ठोस उपाय कर रहा है मसलन अभी कुछ दिन पहले ICT के माध्यम से ख़बर आती है कि चीन ने तिब्बत मे सैन्य गतिविधियों को तेज कर दिया है। गुजरात मे अचानक तीन-साढ़े तीन लाख की भीड़ जुटती है और दूसरे दिन ही हिंसा पर उतारू हो जाती है जिसे शांत करने के लिए सीआरपीएफ़ की तीस कंपनियाँ भेजी जाती हैं। ध्यान देने वाला तथ्य ये है कि ये सब प्रधानमंत्री के UAE की बेहद सफल यात्रा के बाद ये सब अचानक हो रहा है।

गुजरात हिंसा को प्रायोजित करने के लिए केजरीवाल के चेले हार्दिक पटेल को आगे किया जाता जिसकी उम्र मात्र 22 साल बताई जा रही है। आखिर इतनी सफल रैली को हिंसा पर उतारू होना पड़ा ये अपने आप मे आश्चर्य का विषय है। वियसे मामला ये गुजरात का ही है पटेल इतने समृद्ध है कि ये 80% हीरे के कारोबार में हैं। अहमद पटेल और अरविंद केजरीवाल के अतिरिक्त किसी भी किसी पटेल ने आरक्षण की मांग कभी नहीं की यहाँ तक कि "सरदार वल्लभ भाई पटेल" ने भी नहीं। जो दूसरों के लिए बैसाखी है वो कूद बैसाखी पर चलेगा ये बात व्यवहारिक और तार्किक स्तर पर हजम नहीं होती।

आखिर ये पटेल आरक्षण का विषय तो गुजरात का था तो फिर जनता भी गुजरात की ही होनी चाहिए तार्किक रूप से और यदि जनता गुजरात की थी तो फिर हार्दिक पटेल को हिन्दी मे भाषण क्यों देना पड़ा? और फिर यदि उनके अपने समुदाय के लिए आरक्षण की मांग करनी थी तो फिर नितीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू बीच मे कहाँ से आ गए ? मतलब जो तीन-साढ़े तीन लाख की भीड़ जुटी थी वो गुजरात की स्थानीय भीड़ नहीं थी यही नहीं वो भीड़ ऐसी थी जो अधिकांशतः गुजरती भाषा नहीं जानती थी लिहाजा केजरीवाल के चेले हार्दिक पटेल को हिन्दी मे भाषण देना पड़ा। एक स्थानीय नागरिक बता रहे थे कि भीड़ काफी हद तक तक अपरिचितों का समूह लग रहा था हालांकि ऐसे लोगों की भी कुछ संख्या थी जो जिज्ञासा वश रैली मे आए थे उनको आरक्षण से कोई लेना देना नहीं।

कुछ लोगो का मत है कि स्थानीय पटेल समुदाय अहमद पटेल, अरविंद केजरीवाल और उसके चेले हार्दिक पटेल का साथ देने को तैयार ही नहीं है लिहाजा उनको जबरदस्ती जोड़ने के लिए आज ही रैली के ठीक दूसरे दिन गुजरात बंद का आयोजन करना पड़ा। भाड़े की भीड़ से तोडफोड कारवाई गई जिससे पुलिस को स्थानीय लोगों पर कार्यवाही करनी पड़े और स्थानीय जनता मे सरकार के खिलाफ आक्रोश पैदा हो जिससे साथनीय पटेल समुदाय जबरदस्ती ही सही आंदोलन से जुड़े। पटेल समुदाय को भली भांति पता है कि उसे आरक्षण संभव नहीं लिहाजा उनके आंदोलन जुडने का सवाल ही नहीं उठता । जो कुछ भी अचानक हुआ वो निश्चित रूप से गहरी साजिश की ओर इशारा करती हैं।

नेपाल की हिंसात्मक अशांति, गुजरात नकली आरक्षण के मांग पर मे हिंसक आंदोलन,  तिब्बत मे चीन की सक्रियता, जम्मू-कश्मीर पाकिस्तानी घुसपैठ के प्रयासों मे अचानक तेजी, पाकिस्तान की ओर से एलओसी पर युद्ध विराम का उल्लंघन, यूएई से 31 मामलों पर सहयोग और सहमति पर हस्ताक्षर के बाद अचानक ये सब। ये सब अचानक उस समय जब भारत तेजी से आर्थिक विकास की विकास की ओर अग्रसर है।

Monday, 24 August 2015

नेनुआं पूजे बीन-बीन, कोआ हई मोटाय ...

बिहारी बाबू घर के चौखटवे पर नेनुआं पूजने से बाज नहीं आ रहे...सदी के महा-नाई भी किसी जमाने मे नेनुआं का टेम्पू हाई करने उतरे थे लेकिन जल्दी उनको औकात का पता चल गया और लग गया कि नचनियों-गवनियों की मानसिक हैसियत नेनुआं पर तेल चुआने से अधिक नहीं होती और ऐसे लोगों को प्रतिभाशाली मान कर जो लोग पूजते है उनकी बुद्धि तो दऊरी मे नेनुआं से अधिक नहीं। बिहारी बाबू जब अपने चौखट पर नेनुआं पूज रहे थे तभी किसी ने पीछे से कोई बहुत बड़ा सा कोआ फेक कर भाग गया। बिहारी बाबू के पीठ पर गद्द से लगा भी लेकिन वो ऐसे हैं कि इसे बुरा नहीं माना, भाई बड़े दिल वाले हैं। मैंने बिहारी बाबू से पूछा तो चीखते हुए बोले "...ओए! मैं बड़े दिल का नहीं, बहुत छोटे दिल का हूँ ..." वहीं एक जाफना से लौटा आदमी भी था उनकी आवाज का कायल रजनीकान्त इस्टाईल मे टिप्पणी करते हुए पूछा "...आईयो ! आपका दिल कबसे चोट्टा जी ...?" बिहारी बाबू चौंक गए असलियत सामने आ गई अनजाने ही सही "...ओए ! ...." अभी वो आगे कुछ कहते तभी मैंने एक डायलाग दाग दिया अपने इस्टाईल मे "...जली को बत्ती कहते हैं बुझी को लिट्टी कहते हैं ..." तभी जाफना बाबू बोल पड़े "...आईयो ! जिसका पेट उल्टा उसको कट्टी करते जी ..." बिहारी बाबू खऊरा कर चिल्लाए "...ओए ! हमारी पीठ पर कोआ गद्द से लगा फिर भी कोआ नहीं फूटा ..." मैंने बिहारी बाबू से पूछा "...तो..." बिहारी बाबू चिघ्घाड़ते हुए बोले "...ओए ! तो किसकी इतनी मजाल कोआ फूटा नहीं और हमको गद्दार कह दे ..." मैंने टांट कसते हुए कहा "...वो आपकी पीठ पर गद्द से लगा था न इसलिए ..." बिहारी बाबू चिल्लाए "...ओए ! कोआ पीठ पर गद्द से लगा जरूर लेकिन मैंने कोआ खाया तो नहीं..." मैंने कहा "...तो आप कोआ फेकने वाले पर खऊराए क्यों नहीं ..." तभी जाफना बाबू बोले "..आईयो ! कोआ खा के गद्दा पर नई सोना जी ..." बिहारी बाबू बोले "...ओए! तो क्या गद्दा पर सोना भी गद्दारी ...." जाफना बाबू बोले "...आईयो ! वो गद्द-गद्द करता इसलिए जी ...कोआ खा के गद्दा पर नई सोना जी ...पेट उल्टा जी ..." तभी जफना बाबू जयललिता के फिल्म का गाना गुनगुनाते हुए नेनुआं पूजने की प्रक्रिया शुरू करने लगे और बिहारी बाऊ पता नहीं किसको फोन लगाने लगे सबसे छिप कर ...मैंने जफना बाबू से कहा "...बिहारी जयललिता को पसंदे नहीं करते बेकार मे बिहारी बाऊ कोआ खाने के पीछे पड़े हैं ..." जफना बाबू जयललिता के फिल्म का गाना गुंनगुनाते रहे ....

Sunday, 23 August 2015

DNA झक चमाचम, RNA चमन घुमाय ...

संसद का मानसून सत्र कांग्रेसी आतंकवाद का शिकार हो गया। खाँटी भाई कांग्रेसी बता रहे थे कि उनके नकली अध्यक्ष यानी उपाध्यक्ष जब से विपष्णा से लौटे हैं तभी से आतंकवाद को सीने चिपकाए लोट रहे हैं। लेकिन कमाल देखिये किसी भी सिक-उल्लूरिस्ट आतंकवादी ने अभी तक मानहानि का दावा नहीं ठोका बकलोल बबुआ के खिलाफ । वैसे भी बकलोल बबुआ इस्केप वेलोसिटी से लेकर इण्डिया के जेनेटिक इंजीनियरिंग पर लंबा चौड़ा लेक्चर झाड़ चुके है कुछ लोग जो कॉंग्रेस मे दिलचस्पी रखते हैं, बताते हैं कि वो अभी भी झाड रहे हैं। वैसे तो कॉंग्रेस का आतंकवादियों से DNA मैचिंग का खुलासा तो 26.11 के समय ही हो गया था जब अजमल कसाब चंपाया था  लेकिन उसकी पुष्टि तब हुई जब नावेद पकड़ मे आया। ये DNA मैचिंग बिहार होता हुआ केजरीवाल तक पहुंच चुका है इसी रिश्तेदारी के कारण आतंकवादियों ने बकलोल बबुआ के खिलाफ मुक़द्दमा नहीं ठोंका। मैंने एक खाँटी भाई कोंग्रेसी से इस बारे मे पूछा तो चिल्लाते हुए कहने लगे "...नावेद से हमारी कोई रिश्तेदारी नहीं है ..." मैंने पलट कर पूछा "...लेकिन नावेद की हरकतें तो काँग्रेस सहित सभी सिक-उल्लूरिष्टों से पूरी तरह क्यों मिलती हैं ...? खाँटी भाई काँग्रेसी ये सुनते ही तिलमिला गए फिर उन्होने पलट कर मुझसे पूछा "...आपका ये निष्कर्ष किस आधार पर है ...?" मैंने कहा "...वो भी काँग्रेस सहित सभी सिक-उल्लूरिस्टों की तरह ही बहुत डरपोंक है ..." खाँटी भाई ने फिर मुझसे पूछा "...ये आपको कैसे पता ...?" मैंने उनको संतुष्ट करते हुए कहा "...चर्चा ऐसी है कि पुलिस के अधिकारी बाल ठीक करने करने के लिए भी हाथ उठाते हैं तो नावेद चिल्लाने लगता है मुझे मत मारो-मुझे मत मारो मैं सबकुछ सच-सच बताता हूँ ठीक वैसे ही जैसे मोदी जी को देखकर काँग्रेस सहित सभी सिक-उल्लूरिस्टवे चिल्लाने लगते हैं ..." खाँटी भाई ये सुनकर और तिलमिला गए बोले "...हम सब सेकुलरिस्ट एक है वो चाहे नितीश हों, लालू हों, केजरीवाल हों या फिर कम्युनिस्टवे..." इसपर मैंने तपाक से कहा "...सिक-उल्लूरिस्ट आतंकवादियों को क्यों छोड़ रहे हैं? वैसे भी संसद सरकार एक कागज भी उठाती थी काँग्रेस सहित सभी सिक-उल्लूरिस्टों को लगता था कि कोई खतरनाक बिल है और वो चिल्लाना शुरू कर देते थे ...राजमा-ता तो आत्महत्या करने के इरादे से कुएं मे कूद गईं थीं..." खाँटी भाई दार्शनिक अंदाज मे बोले "...आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता ..." मैंने कहा "...वही तो मेरा कहना है आतंकवादी भी सिक-उल्लूरिस्ट ही होते हैं ..." खाँटी भाई खऊरा कर बोले "...आपको इंडिया का DNA नहीं पता ..." मैंने उस पर कहा "...भारत का DNA तो बहुत शानदार और जानदार है लेकिन सारे सिक-उल्लूरिस्टों  ने मिलकर RNA ही गड़बड़ कर दिया है लिहाजा बकलोल बबुआ को जेनेटिक इंजीनियरिंग सहित इस्केप वेलोसिटी पर ऊंघटापैन्ची करना पड़ रहा है संसद मे आतंक मचा कर..." इसके बाद खाँटी भाई कुछ बोले नहीं ....

Friday, 21 August 2015

लीलै धोति गज़ब नूरानी, मारहिं लात पावहि अनजानी....?

लालू नितीश सहित भ्रष्टाचार का झण्डा बुलंद करने वाले जनता परिवार का DNA केजरीवाल मे इतनी सहजता से मिलेगा इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। मिलेगा ये तो सबको पता था लेकिन इतनी सहजता से, इसकी उम्मीद सिवाय मेरे किसी और को उम्मीद नहीं थी। इसीलिए मैंने 13 फरवरी 2015 को ही कह दिया था "...केजरीवाल स्वभाविक रूप से भ्रष्टाचारियों और भ्रष्टाचार का नेतृत्व करेंगे..."। इसके साथ-साथ सभी अपनी स्वभाविक वृत्ति के प्रदर्शन के लिए स्वभाविक हरकत भी करेंगे। केजरीवाल लोगों के पिछवाड़ा खोज कर बड़े आराम से और बिल्कुल सही जगह पर लात इतना ज़ोर से और कायदे से लात मारते हैं कि लात खाने वाला लतख़ोर के पास पलटवार करने का कोई उपाय नहीं होता और साथ ही जिंदगी भर केजरीवाल के लात को याद भी रखता है । पिछवाड़ा खोजने मे केजरीवाल माहिर हो चुके हैं जिसका प्रदर्शन अभी कुछ दिन पहले प्रशांत भूषण, योगेंदर यादव किसी जमाने मे बड़े ही अनन्य रहे प्रोफेसर साहब और भी बहुत से बेहद करीबी लोगों पर आजमाया और सफलतापूर्वक आजमाया। एक आपिया बहुतबुद्धिमान बता रहे थे "...करीबी लोगों का पिछवाड़ा हमेशा अपने पास रखना चाहिए..." मैंने उनसे आश्चर्य से स्पष्टीकरण लिया"...आप उसके अपवाद नहीं तो नहीं न "...आपिया बहुतबुद्धिमान ने उत्तर दिया "...जी हम और आपिया सुप्रीमो ठीक बराबर लेन-देन पर काम करते हैं..." मैंने कहा "...लेकिन कभी मुन्ना हज़ारे तो केजरीवाल को उनके पिछवाड़े लात मार पाए ..." आपिया बहुतबुद्धिमान हँसते हुए बोले "...लात मारने मे केजरीवाल माहिर हैं हज़ारे -खुजारे नहीं..." मैंने उनसे पूछा "..लेकिन इसके बावजूद आप-ने हज़ारे जी की टोपी झटक ली...?" आपिया बहुतबुद्धिमान बोले "...ये उनकी टोपी नहीं है ..." मैंने कहा "...अगर टोपी का क्लोन नहीं है तो निश्चित रूप से धोती फाड़ के ये आपिया टोपी बनी है ...?" मेरी बात सुन कर आपिया बहुतबुद्धिमान बिना असहज हुए बड़ी निर्लज्जता से बोले "...वो धोती ऐसी है कि उसके फटने इज्जत पर कोई असर नहीं होता ..." मैंने कहा "...मुन्ना हज़ारे को केजरीवाल जब लतियाए थे तब उतने एक्सपर्ट नहीं थे लेकिन ..." आपिया बहुतबुद्धिमान बीच मे बात काटते हुए बोले "...लेकिन क्या ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...लेकिन मुन्ना हज़ारे लात खाने मे माहिर निकले धोती फट कर टोपी बनने के बावजूद  ..." आपिया बहुतबुद्धिमान से रहा नहीं गया "...बहुत जल्द आप युक्त भारत होगा ..." मैंने टांट कसते हुए कहा "...केजरीवाल ने मुन्ना हज़ारे, योगेंदरादि, जन लोकपालादि को लात मार कर ठिकाने लगा दिया है उसके बाद नीतीश लालू की बारी है ..उसके बाद बिहार की जनता की बारी आएगी लात खाने की ...दिल्ली की जनता तो लात खा ही रही है ...." आपिया बहुतबुद्धिमान मुझे घूरने लगे तो मैंने वहाँ से भाग लेना बेहतर समझा ...   

Tuesday, 18 August 2015

भारत की जबरदस्त कूटनीतिक जीत

भारत के लोकप्रिय और हम सबके चहेते प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने अपनी 16-17 अगस्त दो दिवसीय संयुक्त अरब अमीरात यात्रा कई मायनो बेहद महत्वपूर्ण रही और विश्व इतिहास में अबतक की सबसे सफल कूटनीतिक यात्रा है। ये यात्रा इस मायने मे भी बेहद महत्वपूर्ण है जब पाकिस्तान अपनी आतंकवाद नीति को न सिर्फ नए सिरे से परवान चढ़ा रहा है बल्कि इसके लिए उसे अब चीन का खुला समर्थन भी हासिल होने लगा था कारण एक तो भारत मे सबसे तेज और जबरदस्त आर्थिक विकास दूसरे चीन का कई मोर्चों पर भारत द्वारा सीधे पटखनी दे देना मसलन बांग्लादेश मे चीन का नौसेना बेस खत्म, हिन्दमहासागर में चीन का दबदबा खत्म होने के साथ दक्षिणी चीन सागर में भी भारत का सीधा और प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित और मंगोलिया को भी अपने पक्ष मे करने के कारण चीन एक तरह से भारत से बौखलाया गया था लिहाजा वो किसी भी कीमत पर पाकिस्तान के माध्यम से भारत के माध्यम से अस्थिर करने की कोशिश कर रहा था। यूएई की सफल यात्रा ने पाकिस्तान के माध्यम से चीन नापाक मंसूबों को एक झटके में ध्वस्त करके रख दिया।

यूएई कई मायानों में भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है आप तीसरे सबसे बड़े व्यापारिक साझीदार की बात छोड़ दीजिये ये तो प्रत्यक्ष तथ्य है। व्यापारिक साझीदारदार होने बावजूद यूएई भारत के लिए एक समस्या भी रहा है इसीलिए भारत का कोई प्रधानमंत्री आधिकारिक तौर पर यहाँ के यात्रा करने से बचता रहा है लिहाजा अप्रत्यक्ष समस्यापरक तथ्य ये है कि भ्रष्टाचारी दुबई को काला धन संग्रह हेतु मार्ग का इस्तेमाल करते थे और हवाला का ऑपरेशन भी यहीं से होता था कहने की जरूरत नहीं कि इसमे दाऊद के कितना बड़ा योगदान था। हवाला का ऑपरेशन भी मोदी जी की यात्रा के बाद ये सब बंद हो गया। हवाला ऑपरेशन बंद होने का मतलब बेहद महत्वपूर्ण इसलिए है कि इसी के माध्यम से भारत विरोधी आतंकवादी और गैरआतंकवादी शैक्षणिक, राजनीतिक, सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए भी इसी माध्यम से बहुत बड़े स्तर पर आर्थिक मदद तो होती ही थी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा यूएई से ही पूरा होता था ठीक भारत विरोधी आतंकवाद के संचालन के नाम पर। ऐसा नहीं है कि हवाला का उपयोग केवल गलत लोग ही करते थे सही लोग भी कर चोरी के लिए इस रैकेट का उपयोग करते थे जिससे राजस्व का भारी नुकसान होता था वो सब अब बंद हो गया लिहाजा भारत विरोधी काम करने वाली संस्थाएं एनजीओ, सामाजिक - राजनीतिक संगठन, शैक्षणिक संगठन, कुछ मीडिया समूह आदि के लिए अब अच्छी ख़ासी मुसीबत होने वाली है।

बहुत कम लोगों को पता है कि दुबई मे आईएसआई की तूती बोलती थी इसीलिए दाऊद पाकिस्तान से अधिक सक्रिय दुबई मे रहता था कहा ये भी जाता है कि दुबई ही दाऊद का घर हुआ करता था और वही से अपने काले कारोबार को संचालित भी करता था। जिस तरीके से कल संयुक्त घोषणा पत्र जारी हुआ उससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आईएसआई, दाऊद और पाकिस्तान के लिए कितना बड़ा झटका है। वस्तुतः ये समस्याएँ ऐसी थीं कि भारत को एक प्रकार से दीमक की तरह चाट रही थीं हर स्तर पर इस यात्रा से उस दीमक को मौत के घाट उतार दिया गया है।

यूएई मंदिर के लिए भूमि आवंटित करने को तैयार हो गया है विश्व इतिहास मे ऐसी जीत संभवतः खोजने से भी न मिले। यूएई के पश्चिम मे ISIS का नंगा नाच चल रहा है वही ISIS ने 2020 तक लक्ष्य तय किया भारत के खिलाफ। यूएई मे मंदिर का बनने का प्रस्ताव ISIS के मुंह पर जोरदार तमाचा है। ये स्पष्ट संकेत उनके लिए भी है जो भारत मे समय-समय पर भारत के खिलाफ जहर उगलते रहते है ओवैसी जैसे लोग यदि थोड़ा भी समझदार होंगे तो इशारा समझ जाएंगे।

नेपाल का हिंदूराष्ट्र की ओर बढ़ना और यूएई मे मंदिर बनना आगामी विधानसभा चुनावों पर इनका जबरदस्त असर देखने को मिलने पूरे आसार हैं। कहा तो ये भी जा रहा है कि अगर भाजपा यदि बिहार का चुनाव जीत जाती है है तो देश बहुत बड़े बदलाव की ओर अग्रसर हो जाएगा जिसे किसी भी तरीके से रोक पाना राष्ट्रविरोधी तत्वों के लिए असंभव हो जाएगा। संकेत भी पूरी तरह स्पष्ट हैं।         

Monday, 17 August 2015

हाहाकार पुतरू हुआं-हुआं...नामुमकिन हश्र नमकीन 

मैंने एक पखवाड़ा पहले ही अपने 31 जुलाई 2015 की " बिलार मारे खोईचा...सियार सीकर मंसा..." शीर्षक पोस्ट में पोस्ट मे दाऊद के हश्र का स्पष्ट उल्लेख कर दिया था। जैसे दाऊद के गुर्गे की फांसी पर जैसे सिक-उल्लूरिस्टों के सीने पर साँप लोट रहा था और मातम मना रहे थे उससे भी भयानक स्थिति अब होने वाली है सिक-उल्लूरिस्ट नेता-नूती सहित कमीडिया घरानो के पुतरूहाहाकारों का मातम तो अब देखने लायक होगा। मीडिया अब पूरे अपने फार्म मे होगी उसके पुतरूहाहाकारों का वास्तविक हाहाकार अब वास्तव मे देखने लायक होगा। एक कॉंग्रेसी दाऊद द्वारा घोषित देश के नामी कमीडिया हाऊस के पुतरूहाहाकार मुझे बता रहे थे "...मोदी ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली ..." मैंने उनसे पलट कर पूछा "...तो हाहाकार आप इसलिए मचाए हैं...?" कमीडिया विशेषज्ञ बोले "...हम पुतरूहाहाकार नहीं पत्रकार हैं समझे ...!." मैंने भी उनको उसी टोन मे जवाब देते हुए प्रश्न दाग दिया "...दाऊद के हश्र का गुस्सा मेरे ऊपर क्यों उतार रहे हैं ... वैसे कुल्हाड़ी आप ही लेकर गए थे क्या वहाँ...?" कमीडिया विशेषज्ञ बोले "...ये ठीक नहीं है..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...अब डाऊन को पकड़ना मुश्किल नहीं नमकीन है ..." कमीडिया विशेषज्ञ असहज हो गए सुधार करते हुए बोले "...वो डाऊन नहीं डान है,  नमकीन नहीं नामुमकिन..." मैंने कहा "...प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद डान डाऊन बन चुका है और नामुमकिन तो बस अब नमकीन है जब चाहो खा लो चटखारे ले कर..." सिक-उल्लूरिस्ट पुतरूहाहाकार  मुझे चेताते हुए बोले "...ये देश के लिए ठीक नहीं बिहार चुनाव के बाद ये करते तो ठीक होता ..." मैंने कहा "...इसीलिए आप पत्रकार नहीं पुतरूहाहाकार हैं वो तो अभी होना ही था क्योकि मैंने वो 31 जुलाई का लेख भी प्रधानमंत्री को भेज दिया था ..." पुतरूहाहाकार बोले "...वो हमारी बात नहीं सुनते आपकी बात क्यों सुन रहे रहे हैं ...?" मैंने सहजता से उत्तर दिया "...क्योकि मैं पुतरूहाहाकार नहीं हूँ ..." कमीडिया विशेषज्ञ बोले "...हर किसी को डाऊन करने से देश नहीं चलेगा ..." मैंने कहा "...कुछ लोगों को डाऊन नहीं किया गया था इसीलिए देश विकास नहीं कर रहा था ...जैसे सिक-उल्लूरिस्ट आप-कोंग्रेस-कम्युनिस्ट डान ...कमीडिया आन ...." पुतरूहाहाकार कमीडिया विशेषज्ञ ये सुन कर दहल गए कमरे मे कुर्सी से उठकर तेजी से इधर-उधर टहलने लगे ऐसे चिंतमग्न हो गए जैसे किसी का आर्थिक श्रोत बंद हो जाता है ....मैंने उनसे कहा "...अब तो हवाला कारोबार भी ख़त्म ...पैसा हजम ...कमीडिया खेल खत्म ..." कमीडिया विशेषज्ञ परेशान हो कर अंदर कमरे मे भाग गए....

Thursday, 13 August 2015

घीव जियावे गोईठा, पहलवान लंदन बाम

बकलोल बबुआ के आदेश पर खाँटी भाई कोंग्रेसीयों ने खूब गोईठा पर घी चुआया इतना चुआया कि गोईठा भी घी पी कर मस्त हो गया। ऐसा गोईठा देख कर बकलोल बबुआ और राजमा-ता दोनों फूल कर तुम्बा हो गए, ये देखकर एक खाँटी भाई ने कहा मज़ाक मे ही सही "...लगता है राहुल जी का भी सीना 56 इंच का हो गया है,,," लेकिन खाँटी भाईयों ने इसे सत्य मान कर सती होने व्रत ले लिया। लेकिन समस्या ये खड़ी हो गई थी कि सती होने के लिए विधवा होना जरूरी है लेकिन कमाल हैं खाँटी भाईयों ने इसका भी हल खोज निकाला पूरी की पूरी कॉंग्रेस को ललित मोदी को भगोड़ा घोषित कर कॉंग्रेस को विधवा बना डाला जिससे बकलोल बबुआ और राजमा-ता के इशारे पर कॉंग्रेस को सती होने का सौभाग्य मिल गया। लेकिन सती प्रथा भारत मे प्रतिबंधित है इसका पता चलते ही खाँटी भाईयों को तो मानो साँप ही सूंघ गया लिहाजा बहस के लिए तैयार हो गए। बहुत से खाँटी भाई कोंग्रेसी बेहोश होते - होते इसलिए बचे क्योकि उन्हे बताया गया "...साँप ने सूंघा ही है डँसा नहीं ..."। खाँटी भाई कोंग्रेसी लोग अब बकलोल बबुआ और राजमा-ता को घेर कर सती होने से पूर्व का कालबेलिया (म्लेच्छ बोली अंगरेजी मे नागिन डांस) करने के लिए बिलकुल तैयार थे। मैंने खाँटी भाई से पूछा "...बकलोल बबुआ और राजमा-ता को बचाने क्या तुक...?" खाँटी भाई बोले "..आखिर सती होने के बाद घी पिया गोईठा सुलगाने के लिए कोई जगह तो चाहिए ..." खाँटी भाई की बातों मे दम था आखिर मातम के दौर मे सुलगते गोईठे का धुआँ कई मायनों में बहुत बड़ा सहारा होता है जिसके आधार पर सती को वीरगति घोषित करके हमेशा लोगों को सिक-उल्लूवाद से जोड़कर उल्लू बनाया जा सके। मैंने खाँटी भाई से पूछा "...आखिर सती होने के लिए आपने पूरे सत्र का इंतजार किसलिए किया ...?" खाँटी भाई बोले "...शुरू मे सती होने पर सजा हो सकती थी हम अपराधी सिद्ध हो जाते लेकिन अंत में होने पर हमे वीरगति का दर्जा मिलने की उम्मीद थी ..." मैंने कहा "...लेकिन अंत में भी वही हुआ जिसके कारण आप शुरू में ही डर रहे थे..." खाँटी भाई उम्मीद भर कर विश्वास से बोले "... हम खुद को वीरगति साबित कर के रहेंगे ..." मैंने कहा "...लेकिन अब तो विधवा का भी खिताब कॉंग्रेस से छिनने जा रहा है ..." खाँटी भाई के पास उत्तर तैयार था बोले "...जिसको ये सरकार भारत ला रही है वो ललित मोदी नहीं उसका भूत है ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...तो फिर कुत्तारोची, एंडरसाँड, अदिल ही काँग्रेस असली ललित मोदी थे ...?" ये सुनते खाँटी भाई सकपका गए और लगे गोईठा चमकाने मेरे बहुत कुछ पूछने पर वो कुछ नहीं बोल रहे थे ...     

Sunday, 9 August 2015

एक शाश्वत परिवर्तन बिहार की अगुवाई मे
बिहार ने हमेशा से ही देश की राजनीति को नई दिशा दी है। जून 1975 को गांधी मैदान से लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने गैर काँग्रेसवाद की शुरुआत की। ये आंदोलन इतना प्रचंड था की काँग्रेस की चूले हिल गईं और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोप दिया था। नतीजा आज काँग्रेस बिलकुल हाशिये पर है। राज्यों मे उसका क्या हश्र है सबके सामने है। मण्डल आंदोलन की पहली प्रयोगशाला भी बिहार बना, आडवाणी की रथयात्रा लालू प्रसाद यादव ने ही समस्तीपुर मे रोक लिया था नतीजा सेकुलरवाद आज सिक-उल्लूवाद नाम का एक घिनौना मज़ाक बन कर रह गया है और हिन्दुत्व एवं विकास भारतीय राजनीति मे अपनी पैठ करीब-करीब बना चुके हैं। आप यकीन मानिए लालू ने यदि आडवाणी जी की रथ यात्रा नहीं रोकी होती तो भाजपा को अभी बहुत मेहनत करनी पड़ती बहुमत की सरकार बनाने के लिए और आज की तारीख में कॉंग्रेस मात्र 44 सीटों पर तो कदापि नहीं सिमटती। आज जिस तरह से विकास और हिन्दुत्व साथ साथ चल रहे हैं उसमे बिहार विधान सभा का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण भूमिका मे आ चुका है।
ये पत्थर पर लिखी इबारत की तरह साफ है कि बिहार में भाजपा नीत राजग की पूर्ण बहुमत सरकार बनने जा रही है। और भाजपा की ये जीत यकीन मानैये ये तय करने वाली है कि उत्तर प्रदेश, और पश्चिम बंगाल में भी भाजपा को सरकार बनाने से कोई नहीं रोक पाएगा । तो क्या ये तीन विधान सभा चुनाव जीतने के बाद मुलायम सिंह यादव, ममता बनर्जी और नितीश-लालू राजनीति से सन्यास ले लेंगे ? यदि आप ऐसा सोचते हैं तो बिलकुल गलत हैं वास्तव मे सन्यास मे कॉंग्रेस जाएगी लेकिन जनता परिवार के लोग हिन्दुत्व की ओर मुड़ जाएंगे। मुस्लिम परस्ती को हमेशा के लिए ये लोग त्याग देंगे। काँग्रेस का कोमल हिंदुत्ववादी होना राजनीतिक सन्यास से बचने का ही एक उपक्रम है जो कहीं से भी उसे फायदा पहुंचाता नहीं दिख रहा है।
इसीलिए बिहार विधान सभा चुनाव भारतीय राजनीति के लिए एक बार फिर सबसे महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। वैसे भी ममता बनर्जी, लालू-नितीश, मुलायम सिंह यादव सहित अन्य सिक-उल्लूरिस्टों के लिए मुस्लिम परस्त सेकुलरिज़्म कोई सैद्धान्तिक आधार न हो कर बस सत्ता हथियाने का एक हथकंडा मात्र है। यदि उनको इससे सत्ता मिलती दिखाई नहीं देगी तो मुस्लिम परस्त सेकुलरिज़्म का चोला एक झटके मे उतार कर कट्टर हिन्दुत्व का चोला पहनने में वो थोड़ी भी देरी नहीं करेंगे। वो इतने कट्टर हिन्दूवादी हो सकते सकते हैं कि संभवतः विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल जैसे संगठन को भी बहुत पीछे छोड़ दें।
नेपाल का पुनः हिन्दू राष्ट्र की ओर लौटना महज एक संयोग नहीं है। जरा सोचिए कितने गाजे-बाजे के साथ नेपाल ने अपने आप को सेकुलर देश घोषित किया था लेकिन अचानक क्या हो गया कि उसे पुनः हिन्दू राष्ट्र की ओर लौटना पड़ रहा है। ये भी कोई गूढ और बहुर गहरे अध्ययन का विषय नहीं बल्कि सामान्य बुद्धि के हल्के उपयोग से ही स्पष्ट होने वाला बेहद आसान सा विषय है। ऐसा विषय जिसका असर न सिर्फ बिहार विधान सभा चुनाव पड़ने वाला है बल्कि उस माध्यम से भारतीय राजनीति भी हमेशा के लिए बदलने भी जा रही है। तो स्वागत के लिए तैयार हो जाईए उस सुखद परिवर्तन का जिसकी अगुवाई बिहार करने के लिए बिलकुल तैयार है।