Sunday, 5 July 2015

गतांक से आगे ....
केजरी कहाँ फिसड्डी, जब...... 

....मैंने बुद्धिमान से पूछा "...कुविष तो बिलकुल सफाचट्ट है न दाढ़ी न मूंछ...फिर भी ऐसा कैसे ..." बुद्धिमान जी ने उत्तर दिया  "....वो केजरी के मूंछों का महात्म्य है जो दिखता है वो होता नहीं और जो है वो दिखता नहीं ..." मैंने जिज्ञासावश पूछा "...इसका मतलब ये है कि कुविष की मूंछों का उपयोग केजरी भी कर रहे हैं ...?" बुद्धिमान बड़ी सहजता से बोले "...नकली को असली, हंडा को तसली और गोईठा को मुस्ली बनाना केजरी के बाएँ हाथ खेल है तो कुविष का डंक और केजरी की कुटाई मिठास तो घोल ही सकती है ..." मैंने जिज्ञासा शांत नहीं हुई सो पूछा "...कुविष तो सफाचट्ट है ...? बुद्धिमान जी ने उत्तर दिया "...बच्चा तुम इतनी बुद्धिमान हो फिर भी छोटी सी बात तुम्हें समंझ में नहीं आ रही तो सुनो जंतर पर मंतर फूंकने 22 अप्रैल को जब सब जमा हुए थे तो गजेन्द्र की दाढ़ी मूंछ दोनों थी अर्थात वो संत प्रकृति का भोला भाला व्यक्ति था लेकिन उसने जो कुछ भी किया उसके लिए किसकी आवाज सुनाई पड़ रही थी ...?" मुझे समझ आ गया साथ ही घोर आश्चर्य भी हुआ मैंने सहमति जताते हुए कहा "...मतलब यदि कुविष की मूंछे होती तो वो संत केजरी गिरोह के झांसे में फँसता ही नहीं ..." मैंने आगे जोड़ते हुए कहा "...मनी-श सुसाइडिया, केजरी और संसि तीनों की मूंछे हैं ...इसीलिए ये सब कुविष को विष का फुहार फेंकने के लिए आगे कर देते हैं ...आपने सही कहा बुद्धिमान जी ! जो दिखता है वो होता नहीं और जो है वो दिखता नहीं ..." मैंने उनसे आगे पूछा "...मूंछों को लोग सम्मान से जोड़ लेते हैं ऐसा क्यों ...?" बुद्धिमान बोले "...लोग मूंछों को सम्मान से नहीं अपने अहंकार से जोड़ते हैं ...जैसे कुछ मांसाहारी पालतू जानवर सम्मान में पुंछ ऊपर करके चलते हैं लेकिन ठीक किसी अन्य क्षेत्र में अहंकार की लड़ाई में जब कमजोर पड़ता है तो उसकी पूंछ नीचे होकर पेट से चिपक जाती हैं ..." बुद्धिमान जी का उत्तर लाजवाब और गज़ब का तार्किक था मैंने कहा "...अब समझ में मुझे आया कि महिलाओं की दाढ़ी और मूंछ क्यों नहीं होती क्यों कि वो अहंकार के बेहूदे चक्कर में नहीं पड़तीं ...और इसीलिए महिलाओं के नाम के आगे अभी कुछ ही दिन पहले तक देवी स्वतः लगता था ...लेकिन अब तो राक्षसी आधुनिकतावाद है ..." मैंने बुद्धिमान जी से कहा "...मतलब पूंछ और मूंछ के भाव-भंगिमा में व्यक्ति की स्थिति का पूरी तरह अंदाजा लगाया जा सकता है ..." बुद्धिमान जी बोले "...बच्चा पूरी तरह सटीक अंदाजा लगाने के लिए उसके मंडली को भी देखना पड़ेगा क्योंकि पूंछ पर तो मस्तिष्क की स्थिति का नियंत्रण होता है लेकिन मूंछ पर व्यक्तित्व-मनोभाव के स्थाईकारक का प्रभाव होता है लिहाजा व्यक्ति के संगत का भी अध्ययन जरूरी है ..." मैंने उनसे कहा "...आपका शोध लाजवाब है तो आप जरा दिल्ली और अन्ना हज़ारे की मनः स्थिति पर प्रकाश डालने की कृपा करेंगे ...?" बुद्धिमान जी बोले "...एक के तो सीने पर तो मूंग दारा जा रहा है और दूसरे ने शान से अपनी **** ऊपर करके टोयोटा इनोवा उपहार में ले रहा है ..." मुझे उनकी बातों बहुत आनंद आ रहा था लेकिन समय की पाबंदी के कारण मैंने बुद्धिमान जी को कहा "...प्रणाम ..."   

No comments:

Post a Comment