Thursday, 30 July 2015

बिरयानी हैदराबादाँ...लहसुन चोखा मीस

हैदराबाद की अजीब फितरत है मुसलमान वहाँ मुसलमीन हो जाता है। सभी लोग इससे परिचित हैं और ठीक से परिचित हैं। एक मुसलमीन हैदराबादी बता रहे थे "...फाँसा जो याक़ूब मेमनी को हुआ हीं वो अच्छा नाईं जी ..." मैंने उनसे पूछा "....क्यों...?" मुसलमीन हैदराबादी उत्तर देते हुए बोले "...सबकी फाँसा होना जरूरी जीं... नाईं तो याक़ूब मेमनी को भी छोडना जरूरी जीं ..." मैंने उनसे कहा "...सबको फांसी से आपका क्या मतलब जीं...?" मुसलमीन हैदराबादी बोले "...वो सबको जीं जो दँगी में शामिल और कुछ नेताँ के हत्या का आरोपाँ जीं ..." मैंने उनसे पूछा "... जैसे ..." मुसलमीन हैदराबादी बोले "...जैसे राजीव गांधी, इन्दिरा गांधी के कातिलां, माले गाँव मक्का मस्जिद ब्लास्ट, गुजरात और दिल्ली दंगी के आरोपाँ को फासां भी होनी चाहियाँ जी ..." मैंने प्रतिउत्तर में कहा "...आप तो ऐसे कह रहे हैं कि कुक्कुर से पूंछ हिलाने से हाथी अपना सूंढ उठा ले ..." मुसलमीन हैदराबादी मेरे ऊपर खऊरा गए और गुस्से में मुझसे पूछे "...हम आपको क्या लगतां जी ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा "...वही जो आपको समझ में आताँ जी ..." मुसलमीन हैदराबादी का खऊराना कम होने के बजाय और भड़क गया बोले "...बबरा मस्जिद, गुजरात सहित सभी दंगी और कातिलां के आरोपाँ को फाँसाँ देना बहुत जरूरी नई तो ...." मैंने बीच में बात काटते हुए कहा "...नई तो क्या कर लेंगा जी ...?" मुसलमीन हैदराबादी सकपका गए और बोले "...हम कुछ नई करंगा जी वो हम चाहता हईं कि सबके साथ जस्टिस होना जरूरी जी ..." मैंने कहा "...जो आप चाहता हाईं केवल वही जस्टिस कैसे जी ...?" मुसलमीन हैदराबादी बोले "...हम जनता हाई जस्टिस क्या होताँ जी ..." मैंने कहा "...फिर तो सत्र न्यायालय, उच्चन्यालाय और उच्चतम नयायालय को खत्म करके मुसलमीन हैदराबादी को जस्टिस करने का अधिकार सौंप देना चाहिए जी ..." मुसलमीन हैदराबादी अब थोड़ा ठंडा पड़ने लगे थे लेकिन उन्होने मुझसे पूछा "...खलिस याक़ूब मेमनी को फाँसा देने जस्टिस कैसे होता जी ...?" मैंने उत्तर देते हुए कहा ".... ठीक तो है गोधरा कांड, मदनी, इब्राहीम मेमनी, दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील सहित अबू सलेम सहित सभी आरोपियों को भी जल्दी से जल्दी फांसी हो जानी चाहिए..." मुसलमीन हैदराबादी मुसकुराते हुए बोले "...पहले सबको अरेस्टा करना जरूरी तब तो फाँसाँ होङ्गा जी ..." मैंने कहा "...तो क्या आप चाहते हाइन कि सब पकड़े नहीं जाएँ ...?" मुसलमीन हैदराबादी मुसकुराते रहे कुछ नहीं बोले ...मैंने उनका मंतव्य समझ लिया था.... 

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