अब क्या कहा जाए ....
जैसे भ्रष्टाचार्यों और चारियों को सबसे पहले मधुमेह जिसे म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) में डाईबिटीज़ कहा जाता है, अपने चपेट में लेता है वैसे ही जब आदमी को ये लगने लगता है कि सारे बाईमान है और उसके पीछे पड़े हैं क्योकि वही एक ईमानदार है, उसके खिलाफ साजिश की जा रही है, उसे कोई काम करने नहीं दे रहा जबकि उसे खुद पता नहीं होता कि उसे कैसे और करना क्या है, उसके अपने खाँटी बेईमान हीरा नजर आते हैं, जब पुलिस न्यायालय के आदेश पर संवैधानिक रूप कार्यवाही करने का फैसला करती है उसे दुनिया सबसे बड़ा अत्याचार नजर आता है, उसे कूँड़े से अचानक प्रेम हो जाता है और सफाई कर्मी तक उसे साजिशकर्ता नजर आते लगते हैं तो एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है ये सब एक बहुत भयानक मानसिक बीमारी है जिसे "पैरानोइया" कहा जाता है, के लक्षण है जो आगे चलकर "पैरानोएड शीजोंफ्रेनिया" में बदल सकता है। वैसे 2-4 साल के बाद यही पैरानोइया "पैरानोएड पर्सनालिटी डिसऑर्डर" में निश्चित रूप से बदल जाएगा संभवतः हो भी चुका हो। एलोपैथी मे वैसे तो किसी भी मानसिक बीमारी का ईलाज नहीं है इस बीमारी का भी कोई ईलाज नहीं उल्टे दवाई खाने से ये बीमारी और भड़क जाती है और आदमी के व्यक्तित्व को ही नष्ट कर देती है। ये मज़ाक नहीं सत्य है, विश्वास न हो तो ये "सिटीजेन कमीशन आन ह्यूमन राइट्स" की ये लिंक देखे ( cchr.org )
ऐसे लोगों की सोचने समझने के क्षमता बिलकुल समाप्त हो जाती है, सारा दिमाग खुद के संदर्भ में ही सोचता है, ऐसे लोग समझते जो वो सोच रहे हैं वही सही है बाकी सब गलत है, ऐसा व्यक्ति कभी सच नहीं बोल सकता। एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसे लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चौकन्ने होते हैं थोड़ी सी भी आहट होने पर चिल्लाने लगते हैं। ये लोग खुद को सभी नियमों कानूनों से बहुत ऊपर तो समझते ही हैं साथ ही खुद को बहुत विशेष भी समझते हैं और उसी प्रकार के आचरण की आशा भी करते हैं यदि कोई इनके आशानुरूप आचरण नहीं करता तो वो साजिशकर्ता हो जाता है।
जैसे भ्रष्टाचार्यों और चारियों को सबसे पहले मधुमेह जिसे म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) में डाईबिटीज़ कहा जाता है, अपने चपेट में लेता है वैसे ही जब आदमी को ये लगने लगता है कि सारे बाईमान है और उसके पीछे पड़े हैं क्योकि वही एक ईमानदार है, उसके खिलाफ साजिश की जा रही है, उसे कोई काम करने नहीं दे रहा जबकि उसे खुद पता नहीं होता कि उसे कैसे और करना क्या है, उसके अपने खाँटी बेईमान हीरा नजर आते हैं, जब पुलिस न्यायालय के आदेश पर संवैधानिक रूप कार्यवाही करने का फैसला करती है उसे दुनिया सबसे बड़ा अत्याचार नजर आता है, उसे कूँड़े से अचानक प्रेम हो जाता है और सफाई कर्मी तक उसे साजिशकर्ता नजर आते लगते हैं तो एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है ये सब एक बहुत भयानक मानसिक बीमारी है जिसे "पैरानोइया" कहा जाता है, के लक्षण है जो आगे चलकर "पैरानोएड शीजोंफ्रेनिया" में बदल सकता है। वैसे 2-4 साल के बाद यही पैरानोइया "पैरानोएड पर्सनालिटी डिसऑर्डर" में निश्चित रूप से बदल जाएगा संभवतः हो भी चुका हो। एलोपैथी मे वैसे तो किसी भी मानसिक बीमारी का ईलाज नहीं है इस बीमारी का भी कोई ईलाज नहीं उल्टे दवाई खाने से ये बीमारी और भड़क जाती है और आदमी के व्यक्तित्व को ही नष्ट कर देती है। ये मज़ाक नहीं सत्य है, विश्वास न हो तो ये "सिटीजेन कमीशन आन ह्यूमन राइट्स" की ये लिंक देखे ( cchr.org )
ऐसे लोगों की सोचने समझने के क्षमता बिलकुल समाप्त हो जाती है, सारा दिमाग खुद के संदर्भ में ही सोचता है, ऐसे लोग समझते जो वो सोच रहे हैं वही सही है बाकी सब गलत है, ऐसा व्यक्ति कभी सच नहीं बोल सकता। एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसे लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चौकन्ने होते हैं थोड़ी सी भी आहट होने पर चिल्लाने लगते हैं। ये लोग खुद को सभी नियमों कानूनों से बहुत ऊपर तो समझते ही हैं साथ ही खुद को बहुत विशेष भी समझते हैं और उसी प्रकार के आचरण की आशा भी करते हैं यदि कोई इनके आशानुरूप आचरण नहीं करता तो वो साजिशकर्ता हो जाता है।
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