Thursday, 11 June 2015

जरबन लहरे दक्खिन, पच्छू लंगोट लहराय

सिक-उल्लू-रिस्ट और पुतरू हाहाकार (पत्रकार) अपना पैजामा वैसे ही मोदी लहर से संभाल ही नहीं पा रहे थे और फिर उनकी लंगोटी तो पाकिस्तान में शुरू से ही गिरवी रखी पड़ी है। जब भारतीय सेना ने म्यामार अपनी ताकत दिखाई तब पाकिस्तान सफ़ेद झण्डा दिखने के बजाय सिक-उल्लू-रिस्टों  की लंगोटी हवा में लहराने लगा। अपनी इज्जत का फ़लूदा बनते देख देश भर के मय सिक-उल्लू-रिस्ट भारत सरकार और मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जब पुतरूओं ने हाहाकार मचाया तो खाँटी भाई सहित सभी सिक-उल्लू-रिस्टों को बड़ी राहत मिली। एक पुतरू हाहाकार (पत्रकार) जो किसी लायक नहीं हुए तो पुतरू हाहाकार बन बैठे, आजकल दिल्ली में बहुत बड़े अखबार के संपादक हैं। संपादक महोदय पाकिस्तानी पुतरू हाहाकारों की हाँ मे हाँ मिलते हुए कहा "...आपरेशन को चुप-चाप अंजाम देना चाहिए था ..." मैंने उनसे कहा "...अंजाम दिये जाने के बाद इसका प्रसारण किया गया ..." संपादक महोदय बोले "...जिस तरीके से इसका प्रचार किया जा रहा है उससे भारत की कूटनीति को गहरा धक्का लगा है ..." मैंने उनसे कहा "...ये आपने कैसे नाप लिया ..?" संपादक बोले "...आप देखिये म्यामार को अपना बयान बदलना पड़ा ..." मैंने उनसे कहा "...ये हार है या जीत है...महोदय हार तो तब होती जब म्यामार ये कहता कि हम आगे से भारत पर कड़ी नजर रखेंगे और ऐसी हिमाकत करने से रोकेंगे ..उल्टे वो भारत का बचाव कर रहा है..." संपादक महोदय खिसिया गए शायद उन्हें अपनी नालायकियत का एहसास हो चला था हिम्मत जुटा के बोले "...इस आपरेशन से चीन अड़ंगा लगा सकता है उसके पास वीटो पवार है ..." मैंने कहा "...तो क्या इससे पहले चीन अपने वीटो पवार का भारत के पक्ष में इस्तेमाल कर रहा था ..." संपादक महोदय करीब-करीब बौखला ही गए लेकिन बौखलाहट छिपते हुए बोले "...ठीक है लेकिन भारत को अमेरिका बनने का ख्वाब नहीं देखना चाहिए ..." मैंने उनसे तपाक से कहा "...जी बिलकुल भारत को अमेरिका बनने का नहीं अमेरिका को पछाड़ने ख्वाब देखना चाहिए ..." संपादक और खिसिया गए "...आपको क्या लगता है भारतीय उपमहाद्वीप में भारत की दादागिरी को पाकिस्तान बर्दाश्त कर लेगा ...?" मैंने उल्टा उनही से पूछा "...आपको पाकिस्तान की इतनी चिंता क्यों है ..." संपादक बोले "...हम सॉफ्ट पावर हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...ये कौन सा पवार होता है भाई ...?" संपादक बोले "...पावर है सॉफ्ट पवार ..." मैंने कहा "...ये बहुत सामान्य सी बुद्धि है पावर हमेशा पावर ही होता है म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) के कारण आपको सॉफ्ट पावर लगता है लेकिन मातृभाषा हिन्दी में जरा कोमल शक्ति बोल के देखिये बहुत बेतुका लगेगा ...शक्ति अपने आप में सम्पूर्ण शब्द है न कोमल न कडा ..." मेरा उत्तर सुन के संपादक महोदय का चेहरा देखने लायक था ...शायद वो फिर अपनी काबलियत का मूल्यांकन करने लगे थे ...उन्होने मुझे चाय तक नहीं पूछी ...!!!

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