लहक लुआठी लंदन, 84 खाँटी मारे चन्दन...
जीजी ने हँड़िया-पतुकी बहुत बजाया ...लोटा से थरिया पीटा... पूरा का पूरा खाँटी भाई कोंग्रेसी मोहल्ला जीजी की हँड़िया - पतुकी - थरिया-लोटा और न जाने क्या क्या की गड़गड़ाहट से कांप उठा। "लंदन मे लुआठी" फूंका गया ये सोचा के कि कहीं न कहीं तो गोईठा सुलगेगा ही औए जीजा जी की काली करतूतें लुआठी के काले धुएँ के पीछे ढक जाएंगी। लेकिन कमाल ये हो गया कि लुआठी खुद ही जीजी के पीछे पड़ गया लगे हाथ जीजा जी को भी लुआठी का धुआँ सुंघा दिया तो जीजा जी बेहोश होते होते बचे। अब जब ये लग रहा कि "लंदन का लुआठी" खुद को भी फूंकना शुरू कर दिया तो खाँटी भाई लोग धौलपुर हवेली की हवा से आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने एक खाँटी भाई कोंग्रेसी जो बहुत गुस्से मे थे से पूछा तो बताने लगे "...हम इस्तीफा ले कर रहेंगे ..." मैंने कहा "...अब न तो ये भाजपाई सीताराम केसरी हैं और खाँटी भाई लोग राजमा-ता ..." खाँटी भाई और गुस्से में आ गए बोले "...ये सीताराम केसरी का नहीं राहुल जी का जमाना है ..." मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "... इसीलिए हँड़िया - पतुकी - थरिया-लोटा-हंडा-परात समेत सभी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं ..." खाँटी भाई ने पलट कर मुझसे पूछा "...अपनी आवाज बुलंद करना कहाँ गलत है ...?" मैंने उनको उत्तर देने के बजाय पलट कर पूछा "... जीजा जी जीजी के नाम पर लुआठी 'लंदन मे लुआठी' फूंकना कहाँ तक सही है..." खाँटी भाई बोले "...ललित से साँठ-गांठ एक भ्रष्टाचार का मुद्दा है ..." मैंने उनसे कहा "...लेकिन लुआठी से गठबंधन तो बहुत आपका बहुत पुराना है ...." खाँटी भाई बोले "....हम तो चाहते हैं की भ्रष्टाचार उजागर हो ...उससे पहले आरोपी इस्तीफा दें..." मैंने उनसे कहा "...इससे किसको इंकार है ये तो तभी संभव है जब भ्रष्टाचारी खुद न्यायाधिकरण के क्षेत्र मे हो ..." खाँटी भाई बोले "...ये कोई जरूरी नहीं है ..." मैंने उनसे पूछा "...क्यों ...?" खाँटी भाई बोले "....कार्यवाही से अधिक इस्तीफा जरूरी है ..." मैंने कहा "...जीजी और जीजा मय लुआठी खाँटी ...." खाँटी भाई तमतमाते हुए बीच में बात काटते हुए बोले "...हमारा मामला और है जीजी और जीजा निर्दोष हैं ..." मैंने पूछा "...आपको कैसे पता ? लगता शिमला में जीजी से सेब बहुत खिलाया है खाँटी भाईयों को ..." खाँटी भाई बोले "...नहीं नहीं ऐसा नहीं है ..लेकिन शिमला की तरह धौलपुर भी नकली है ...." मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा "... जैसे लंदन का लुआठी 64 नहीं तो 46 ललित कलाओं मे माहिर है ही लिहाजा खाँटी भाई लोग लुआठी को जेब में रख के घूमेंगे यकीन नहीं होता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले "...जीजी और जीजा को कुछ भी हुआ तो देश में अब नौ दो ग्यारह नहीं आठ चार बारह मच जाएगा ..." मैंने पूछा "...आठ चार बारह मतलब ..." खाँटी उत्तर देते बोले "...आठ चार मतलब 84..." आश्चर्य से मेरा मुँह खुला का खुला रह गया ....
जीजी ने हँड़िया-पतुकी बहुत बजाया ...लोटा से थरिया पीटा... पूरा का पूरा खाँटी भाई कोंग्रेसी मोहल्ला जीजी की हँड़िया - पतुकी - थरिया-लोटा और न जाने क्या क्या की गड़गड़ाहट से कांप उठा। "लंदन मे लुआठी" फूंका गया ये सोचा के कि कहीं न कहीं तो गोईठा सुलगेगा ही औए जीजा जी की काली करतूतें लुआठी के काले धुएँ के पीछे ढक जाएंगी। लेकिन कमाल ये हो गया कि लुआठी खुद ही जीजी के पीछे पड़ गया लगे हाथ जीजा जी को भी लुआठी का धुआँ सुंघा दिया तो जीजा जी बेहोश होते होते बचे। अब जब ये लग रहा कि "लंदन का लुआठी" खुद को भी फूंकना शुरू कर दिया तो खाँटी भाई लोग धौलपुर हवेली की हवा से आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने एक खाँटी भाई कोंग्रेसी जो बहुत गुस्से मे थे से पूछा तो बताने लगे "...हम इस्तीफा ले कर रहेंगे ..." मैंने कहा "...अब न तो ये भाजपाई सीताराम केसरी हैं और खाँटी भाई लोग राजमा-ता ..." खाँटी भाई और गुस्से में आ गए बोले "...ये सीताराम केसरी का नहीं राहुल जी का जमाना है ..." मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "... इसीलिए हँड़िया - पतुकी - थरिया-लोटा-हंडा-परात समेत सभी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं ..." खाँटी भाई ने पलट कर मुझसे पूछा "...अपनी आवाज बुलंद करना कहाँ गलत है ...?" मैंने उनको उत्तर देने के बजाय पलट कर पूछा "... जीजा जी जीजी के नाम पर लुआठी 'लंदन मे लुआठी' फूंकना कहाँ तक सही है..." खाँटी भाई बोले "...ललित से साँठ-गांठ एक भ्रष्टाचार का मुद्दा है ..." मैंने उनसे कहा "...लेकिन लुआठी से गठबंधन तो बहुत आपका बहुत पुराना है ...." खाँटी भाई बोले "....हम तो चाहते हैं की भ्रष्टाचार उजागर हो ...उससे पहले आरोपी इस्तीफा दें..." मैंने उनसे कहा "...इससे किसको इंकार है ये तो तभी संभव है जब भ्रष्टाचारी खुद न्यायाधिकरण के क्षेत्र मे हो ..." खाँटी भाई बोले "...ये कोई जरूरी नहीं है ..." मैंने उनसे पूछा "...क्यों ...?" खाँटी भाई बोले "....कार्यवाही से अधिक इस्तीफा जरूरी है ..." मैंने कहा "...जीजी और जीजा मय लुआठी खाँटी ...." खाँटी भाई तमतमाते हुए बीच में बात काटते हुए बोले "...हमारा मामला और है जीजी और जीजा निर्दोष हैं ..." मैंने पूछा "...आपको कैसे पता ? लगता शिमला में जीजी से सेब बहुत खिलाया है खाँटी भाईयों को ..." खाँटी भाई बोले "...नहीं नहीं ऐसा नहीं है ..लेकिन शिमला की तरह धौलपुर भी नकली है ...." मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा "... जैसे लंदन का लुआठी 64 नहीं तो 46 ललित कलाओं मे माहिर है ही लिहाजा खाँटी भाई लोग लुआठी को जेब में रख के घूमेंगे यकीन नहीं होता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले "...जीजी और जीजा को कुछ भी हुआ तो देश में अब नौ दो ग्यारह नहीं आठ चार बारह मच जाएगा ..." मैंने पूछा "...आठ चार बारह मतलब ..." खाँटी उत्तर देते बोले "...आठ चार मतलब 84..." आश्चर्य से मेरा मुँह खुला का खुला रह गया ....
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