Tuesday, 30 June 2015

लहक लुआठी लंदन, 84 खाँटी मारे चन्दन...

जीजी ने हँड़िया-पतुकी बहुत बजाया ...लोटा से थरिया पीटा... पूरा का पूरा खाँटी भाई कोंग्रेसी मोहल्ला जीजी की हँड़िया - पतुकी - थरिया-लोटा और न जाने क्या क्या की गड़गड़ाहट से कांप उठा। "लंदन मे लुआठी" फूंका गया ये सोचा के कि कहीं न कहीं तो गोईठा सुलगेगा ही औए जीजा जी की काली करतूतें लुआठी के काले धुएँ के पीछे ढक जाएंगी। लेकिन कमाल ये हो गया कि लुआठी खुद ही जीजी के पीछे पड़ गया लगे हाथ जीजा जी को भी लुआठी का धुआँ सुंघा दिया तो जीजा जी बेहोश होते होते बचे। अब जब ये लग रहा कि "लंदन का लुआठी" खुद को भी फूंकना शुरू कर दिया तो खाँटी भाई लोग धौलपुर हवेली की हवा से आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। मैंने एक खाँटी भाई कोंग्रेसी जो बहुत गुस्से मे थे से पूछा तो बताने लगे "...हम इस्तीफा ले कर रहेंगे ..." मैंने कहा "...अब न तो ये भाजपाई सीताराम केसरी हैं और खाँटी भाई लोग राजमा-ता ..." खाँटी भाई और गुस्से में आ गए बोले "...ये सीताराम केसरी का नहीं राहुल जी का जमाना है ..." मैंने उनको उत्तर देते हुए कहा "... इसीलिए हँड़िया - पतुकी - थरिया-लोटा-हंडा-परात समेत सभी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं ..." खाँटी भाई ने पलट कर मुझसे पूछा "...अपनी आवाज बुलंद करना कहाँ गलत है ...?" मैंने उनको उत्तर देने के बजाय पलट कर पूछा "... जीजा जी जीजी के नाम पर लुआठी 'लंदन मे लुआठी' फूंकना कहाँ तक सही है..." खाँटी भाई बोले "...ललित से साँठ-गांठ एक भ्रष्टाचार का मुद्दा है ..." मैंने उनसे कहा "...लेकिन लुआठी से गठबंधन तो बहुत आपका बहुत पुराना है ...." खाँटी भाई बोले "....हम तो चाहते हैं की भ्रष्टाचार उजागर हो ...उससे पहले आरोपी इस्तीफा दें..." मैंने उनसे कहा "...इससे किसको इंकार है ये तो तभी संभव है जब भ्रष्टाचारी खुद न्यायाधिकरण के क्षेत्र मे हो ..."   खाँटी भाई बोले "...ये कोई जरूरी नहीं है ..." मैंने उनसे पूछा "...क्यों ...?" खाँटी भाई बोले "....कार्यवाही से अधिक इस्तीफा जरूरी है ..." मैंने कहा "...जीजी और जीजा मय लुआठी खाँटी ...." खाँटी भाई तमतमाते हुए बीच में बात काटते हुए बोले "...हमारा मामला और है जीजी और जीजा निर्दोष हैं ..." मैंने पूछा "...आपको कैसे पता ? लगता शिमला में जीजी से सेब बहुत खिलाया है खाँटी भाईयों को ..." खाँटी भाई बोले "...नहीं नहीं ऐसा नहीं है ..लेकिन शिमला की तरह धौलपुर भी नकली है ...." मैंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा "... जैसे लंदन का लुआठी 64 नहीं तो 46 ललित कलाओं मे माहिर है ही लिहाजा खाँटी भाई लोग लुआठी को जेब में रख के घूमेंगे यकीन नहीं होता ..." खाँटी भाई धमकी देते हुए बोले  "...जीजी और जीजा को कुछ भी हुआ तो देश में अब नौ दो ग्यारह नहीं आठ चार बारह  मच जाएगा ..." मैंने पूछा "...आठ चार बारह मतलब ..." खाँटी उत्तर देते बोले "...आठ चार मतलब 84..." आश्चर्य से मेरा मुँह खुला का खुला रह गया ....

Saturday, 27 June 2015

लतीफा ललित कॉंग्रेस जान लटकी....

हमारे खाँटी भाई कोंग्रेसी लोगों को न तो गदहा हाँकने आता है है और तीताराम केतरी से धोती से कुछ ढकना ही आता है ...वैसे दूसरों की इज्जत छीन कर अपनो इज्जत ढकना खाँटी भाई कोंग्रेसी लोगों की पुरानी आदत है लेकिन उन्हें क्या पता गैर की इज्जत से मज़म्मत को छोड़िए उल्टे अपनी ही इज्जत खतरे में पड जाती है। दिग्गी और बकलोल बबुआ जैसे खाँटी भाई जिस गधे को हाँकते हैं उल्टे वही इनको दुलत्ती मारना शुरू कर देता है। एक दूसरे खाँटी भाई बता रहे थे "...नहीं हो सकता कभी नहीं हमारी अध्यक्ष सोनिया जी बहुत समझदार हैं ..." मैंने उन्हें सफाई देते हुए कहा "...मैंने तो उनकी समझदारी पर आपत्ति नहीं की...वैसे ललित गदहे ने तो उल्टे खाँटी भाईयों को कायदे से दुलत्ती मारना शुरू कर दिया है ..." खाँटी भाई असहज हो गए बोले "...हम इस्तीफा ले कर रहेंगे ..." मैंने तपाक से पूछा  "..दुलत्ती खाने वालों में किसका ? राजीव शुक्ला, शशि थरूर, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, या आधी-पूरी कॉंग्रेस ..वैसे वाड्रा जो जेल मे ही रहेंगे जैसे दिग्गी के सन्यास की अवधि बढ़ती ही जा रही है . ?" खाँटी भाई तैश मे बोले "...फिलहाल वसुंधरा राजे और सुषमा जी इस्तीफा दें ..." मैंने कहा "...वैसे ललित दुलत्ती के बाद इस्तीफा मांगना लतीफा ही है ..." खाँटी भाई उखड़ गए बोले "...ये कोई लतीफा नहीं है ..." मैंने कहा "...ललित का लतीफा सुनते-सुनाते कॉंग्रेस के तोते को ही ललित ने दुलत्ती मार दिया..." खाँटी भाई और उखड़ गए, बोले "....राहुल-प्रियंका और सोनिया जी काँग्रेस के तोता नहीं हैं ...." मैंने आराम से उनसे प्रतिप्रश्न किया "...फिर खाँटी भाई कोंग्रेसियों की जान तो उन्हीं मे क्यों बसती है... ?" खाँटी भाई ने जवाब देते हुए कहा "...जान तो हैं पर तोता नहीं ..." मैंने कहा "...हाँ तोता तो पिंजरे बंद होता है वो तो कुत्तारोची, एंडरसाँड, दाऊद यहाँ तक कि खुद ललित की तरह आजाद हैं वैसे माई-धिया देश के बाहर मैदान होने गए हैं या मैदान मारने ...?" खाँटी भाई बोले " ...लेकिन भ्रष्ट लोगों को तो इस्तीफा दे ही देना चाहिए ...?" मैंने कहा "...इससे कौन इंकार कर रहा है सिवाय केजरीवाल और मूर्ख आपियों के, भ्रष्टाचार साबित तो कीजिये अदालत में कौन रोका है ...?"  खाँटी भाई तैश मे बोले "...हमारे लोगों का अदालत से पहले ही इस्तीफा देने का इतिहास रहा है ...?" मैंने मज़ाक उड़ाते हुए कहा "...यही तो खाँटी भाई और आपिए मोदी सरकार को अपने जैसा ही साबित करने पर उतारू हैं लेकिन ललित-लतीफे पर इस्तीफा ...ये भी एक लतीफा ही है ..." खाँटी भाई बोले "... ये भ्रष्टों की सरकार है ..." मैंने भी पलट कर पूछा "....क्या यूपीए और आपियों जैसी ...?" खाँटी भाई चुप हो गए किसी भाई को फोन लगाने लगे ...मैंने कहा नमस्कार 

Thursday, 25 June 2015

कटहर पर कांव-कांव, लीची आम पाहुनाय ....

इशरत के ताऊ और टोपोरियत का झण्डा बुलंद करते करते आलम ये है कटहर पर जवानी न्योछवार हो रही है। एक तो बेऊर जेल का बदहवासी ऐसी कि पड़ोसी जब लोटा ले के मैदान जाए तो लोटा का पानी सूख जाए...लगे हाथ जब उसी पानी से भीग जाए तो कहते हैं "...तिहाड़ जेल मे डलवा देंगे ..."। पता चला इशरत के पापा ऐसा और ताऊ दोनों मिल के ऐसा रखवाली करेंगे कि लोटा तो बहुत दूर की बात है लीची आम का पानी भी नहीं झुराने पाएगा। कटहर का बात छोड़िए वो तो ऐसा है कि अब जब तक उसपर बैठेंगे नहीं काम नहीं चलने वाला। बहुत लोगों ने राय दी कि लीची का मोह त्याग दीजिये उसका कांटा भी कटहर जैसा नहीं होता लेकिन मजा तो मजा है बेऊर से कम मजा नहीं। एक ठो चमचा चिल्लाया "...लालू जी अभी भी नेता हैं..." मैंने उनसे पूछा  "...लालू जी नेता हैं तो फिर टीस किस बात की है ...?" चमचा जी बोले "...कोई टीस नहीं है बस सांप्रदायिक ताकतों के हमारी जंग है ..." मैंने उनसे कहा "...तो जंग में जेल में बंद करना जरूरी है सांप्रदायिक ताकतों को ...?"  चमचा जी बोले "....हमारी राजनीति का यही उद्देश्य है ..." मैंने उनसे कहा "...लगता है आम, लीची खा कर और कटहर पर बैठकर लालू जी ताकत बढ़ा रहे हैं...." चमचा जी बोले "...अब हमको ताकने की जरूरत नहीं है...." मैंने उन पर तंज़ कसते हुए पूछा "...ताकेंगे नहीं तो ताकत कैसे बढ़ेगा ...बिना टीस के हूक नहीं उठती..." चमचा जी आराम से उत्तर देते हुए बोले ",,,नितीश जी हमारे नेता होगे बिहार में ..." मैंने कहा "...अभी तो आप लालू जी का नाम ले रहे थे ...लागता है टीस बहुत गहरी है ..." चमचा जी बोले "...लालू जी बहुत बड़े नेता हैं..." मैंने भी टांट कसते हुए कह दिया "...नितीश मुख्यमंत्री और लालू प्रधान मंत्री ...वाकई कटहर पर बैठने से बहुत ताकत आती है ..." चमचा जी को समझ में नहीं आया वो बोले "...लालू जी को कोआ बहुत पसंद है ..." मैंने उनसे कहा "...हाँ वो तो लगता ही है उसी कोआ के लिए तो मारामारी है ..." चमचा जी बोले "...हम सौहार्द्र की राजनीति करते हैं एक विधायक को हमने गिरफ्तार कर लिया ..." मैंने उनसे कहा "...बहुत बहुत बधाई लगता है लालू जी पीएम बनकर सांप्रदायिक ताकतों को तिहाड़ मे बंद कर ही देंगे ...." चमचा जी बोले "...बस आप देखते रहिए बिहार चुनाव के लालू जी का प्रधानमंत्री बनना निश्चित है ..." मैंने आपको बहुत बहुत बधाई ...चमचा जी खुश हो गए।  

Friday, 19 June 2015

अब क्या कहा जाए ....

जैसे भ्रष्टाचार्यों और चारियों को सबसे पहले मधुमेह जिसे म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) में डाईबिटीज़ कहा जाता है, अपने चपेट में लेता है वैसे ही जब आदमी को ये लगने लगता है कि सारे बाईमान है और उसके पीछे पड़े हैं क्योकि वही एक ईमानदार है, उसके खिलाफ साजिश की जा रही है, उसे कोई काम करने नहीं दे रहा जबकि उसे खुद पता नहीं होता कि उसे कैसे और करना क्या है, उसके अपने खाँटी बेईमान हीरा नजर आते हैं, जब पुलिस न्यायालय के आदेश पर संवैधानिक रूप कार्यवाही करने का फैसला करती है उसे दुनिया सबसे बड़ा अत्याचार नजर आता है, उसे कूँड़े से अचानक प्रेम हो जाता है और सफाई कर्मी तक उसे साजिशकर्ता नजर आते लगते हैं तो एक्सपर्ट्स का स्पष्ट मानना है ये सब एक बहुत भयानक मानसिक बीमारी है जिसे "पैरानोइया" कहा जाता है, के लक्षण है जो आगे चलकर "पैरानोएड शीजोंफ्रेनिया" में बदल सकता है। वैसे 2-4 साल के बाद यही पैरानोइया "पैरानोएड पर्सनालिटी डिसऑर्डर" में निश्चित रूप से बदल जाएगा संभवतः हो भी चुका हो।  एलोपैथी मे वैसे तो किसी भी मानसिक बीमारी का ईलाज नहीं है इस बीमारी का भी कोई ईलाज नहीं उल्टे दवाई खाने से ये बीमारी और भड़क जाती है और आदमी के व्यक्तित्व को ही नष्ट कर देती है। ये मज़ाक नहीं सत्य है, विश्वास न हो तो ये "सिटीजेन कमीशन आन ह्यूमन राइट्स" की ये लिंक देखे ( cchr.org )

ऐसे लोगों की सोचने समझने के क्षमता बिलकुल समाप्त हो जाती है, सारा दिमाग खुद के संदर्भ में ही सोचता है, ऐसे लोग समझते जो वो सोच रहे हैं वही सही है बाकी सब गलत है, ऐसा व्यक्ति कभी सच नहीं बोल सकता। एक्सपर्ट बताते हैं कि ऐसे लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चौकन्ने होते हैं थोड़ी सी भी आहट होने पर चिल्लाने लगते हैं। ये लोग खुद को सभी नियमों कानूनों से बहुत ऊपर तो समझते ही हैं साथ ही खुद को बहुत विशेष भी समझते हैं और उसी प्रकार के आचरण की आशा भी करते हैं यदि कोई इनके आशानुरूप आचरण नहीं करता तो वो साजिशकर्ता हो जाता है। 

Thursday, 18 June 2015

चूल्हा चरम केजरी, चौकी गरम धुआँ बिहान....

ये गब्बर केजरीवाल ही हैं जो चाय पीने के बजाय पहले पानी पीते हैं, चायपत्ती घोंटते है फिर दूध पी कर चूल्हे पर गैस  जला के बैठ जाते हैं। किसी बकलोल आपिए ने मुझे टोका कि चीनी छूट रहा है तो मैंने उनसे कहा "...ईमानदार व्यक्ति वैसे बहुत कम बीमार पड़ता है लेकिन यदि उसे मधुमेह है तो स्थिति बहुत खतरनाक है ..." आपिए को समझ मे नहीं आया उसने पूछा "...आपका मतलब ...?"  मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...जब आदमी घूसख़ोरी आदि से भ्रष्टाचार करता है न तो सबसे पहले उसे डाइबिटीज़ ही चांपता है..." आपिया बोला "...मैं नहीं मानता ..." मैंने उससे कहा "...ये मेरा नहीं इंटरनेशनल स्तर के एक "एडवांस ईमोशनल एक्सपर्ट" का कहना है जो अपने तरह का अनूठा और ठोस निष्कर्ष है ...भ्रष्टाचारियों के सबसे पहले डाइबिटीज़ के चपेट में आने पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हैं..." आपिया  बोला "...क्या कारण है..." मैंने उससे कहा "...एक्सपर्ट बता रहे थे कि भ्रष्टाचार को छिपाने का भयानक तनाव, अत्यधिक चौकन्नापन जिसमे भूख बहुत लगती है जिससे तनाव कम हो सके और तीसरा धन के प्रति बढ़ते लालच के कारण समय और भावनाओं का भयानक कुप्रबंधन ये तीनों मिल के भ्रष्टाचारी को मात्र कुछ ही सप्ताह में मधुमेह के गाल में ढकेल देते है..." आपिया बोला "...मतलब हमारे सर्र जी ईमानदार नहीं है... " मैंने आपिए को उत्तर दिया "...ईमानदार होते तो डाईबिटीज़ तो बिलकुल नहीं होती ..." आपिया बोला "...तो सर्र जी जेल में सड़ेंगे ..." मैंने उससे कहा "...तुझे तो खुश होना चाहिए ..." आपिया ने पूछा "...क्यों...?" मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...तेरा मुख्यमंत्री बनना तय है ..." आपिया शर्माने लगा तो मैंने कहा "...जैसे जलते गैस पर केजरीवाल के बैठने से कुछ नहीं फ़ुंका तेरा भी कुछ नहीं फुंकेगा...बस जलते गैस चूल्हे पे बैठ जा चाय अपने आप बन जाएगी ..."  आपिया बोला "...कुमार विष-वास जिंदा नहीं छोड़ेगा ..." मैंने उसे आश्चर्य से समझाते हुए कहा "...सारी महिला आपिए जिंदा तो हैं तू कैसे मर जाएगा  ...?" आपिया अपना आपा खोने लगा बोला "...अब आपको मैं कैसे समझाऊँ ..." मैंने उसे सांत्वना देते हुए कहा "....इसीलिए मेरा कहना है केजरीवाल स्टाईल में चाय पिया कर ...न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी ..."  आपिया बोला "...आजकल दो चैनलों न्यूज़ 24 और NDTV पर केजरीवाल का एड़ बहुत आ रहा है ..." मैंने उससे कहा "...वो इसीलिए आ रहा है कि अब तेरा मुख्यमंत्री बनना तय है ..." आपिये आशंका जताते हुए कहा "...लेकिन जनता ..." मैंने उससे कहा "...तू-मर के विरोध में कितनी जनता आई थी ? केवल 26 लोग ...ये लिटमास टेस्ट था दिल्ली की जनता में केजरीवाल के प्रति भरोसे का ... जो अब खत्म हो चुका है ...केजरीवाल समेत जब 23 विधायक गिरफ्तार होंगे तो केवल उनके घर वाले ही विरोध करेंगे बाकी जनता तो थूकेगी ..." आपिए को विश्वास हो गया ... खुश हो कर बोला "...पाँच साल, मुंगेरी लाल ...." मैंने कहा नमस्कार 

Tuesday, 16 June 2015

पिल्ला चुम चुम चीं, गदहा धाँय-धाँय

कुत्तारोची से हराम का मीट चांपने वाले खाँटी भाई कोंग्रेसी लोगों को ये कभी नहीं सुहाएगा कि कोई यूं ही उनके सामने से लोटा ले के निकल जाए, लोटा उल्टा करके उस पर लहसुन झुरवाने की बात तो बड़े दूर की है। एक खाँटी भाई अपने बकलोल आपियों को अपने काँख में दबाए घूम रहे हैं। कोई बता रहा था कि केजरीवाल इस सामय लाल चल रहे हैं। बड़े अरमानों से तू-मर को पाला था बहुत ज-तन कर रहे थे और कुछ लोगों से करवा भी रहे थे इसीलिए सबसे पहले कोई तू-मर के लिए कोई जिंदा कूदा था तो वो विष-वास ही था धरना-धरान पर उतारू हो गया था, लोगों को पूरा विश्वास है अभी और 2-3 दर्जन दुर्जन तू-मरो को पुलिस असली डिक्री से नवाजेगी। केजरीवाल के बारे में तो मेरा शुरू से मानना रहा है ये आदमी स्वतंत्र भारत का सबसे भ्रष्ट इंसान है। इसने भ्रष्टाचार को चरम पर पहुंचा रखा है बस उसी को छिपाने के लिए अपने चहेते अधिको को तैनात करना इसकी मजबूरी बनती जा रही है लेकिन मोदी हैं कि न खा हैं और न खाने दे रहे हैं यही खुन्नस है गब्बर केजरीवाल की। वरना बिहार, यूपी और यूके के पुलिस से भ्रष्टाचार रुकेगा ? एक आपिया बता रहा था कि केजरीवाल को तो मज़ाक बनना भी नहीं आता। दरअसल चोरकटई पर कैसे लीपापोती करके खुद बचाया जाए ये बिहार, यूपी और यूके पुलिस से बढ़िया कोई पुलिस नहीं जानती ये बखूबी केजरीवाल जानते है मामला बस यही है निजी सचिव का करनाम उजागर हो ही गया आखिर ...चर्चा ये भी है केजरीवाल सारे भ्रष्टों को फोकट में थोड़े न बचा रहे होंगे।
खैर, ये तो खाँटी भाई हैं भोपाल के गैस से भोकाल छोडते लाज नहीं आ रही वरना चुल्लू जो उन्होने ने राजमा-ता और बकलोल बबुआ के पार शुरू से गिरवी रखी है वो कबकी सक्रिय हो चुकी होती। एक खाँटी चुल्लूधारी से मैंने पूछा "...ये चुल्लू कहाँ से ..." खाँटी भाई घबरा गए फिर भी बोले "...केजरीवाल की इतनी हिम्मत नहीं हमे लटका दे..." मैंने खाँटी भाई से पूछा "... चुल्लू का उपयोग मुक्ति के बजाय मुंह छुपाने के लिए क्यों नहीं करते ....??   खाँटी भाई उत्तर देते हुए बोले "...इसीलिए राजमा-ता हम लोगों का मार्ग दर्शन करती रहती हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...डिग्गी का भी ...?" ये सुनते ही खाँटी भाई आग बबूला हो गए  ....जिंदाबाद ....जिंदाबाद के नारे लगाने लगाने... लगे चीखने लगे आस-पास आपिए मंडराने लगे तो मैंने भी वहाँ से खिसक लेना उचित समझा।   

Thursday, 11 June 2015

जरबन लहरे दक्खिन, पच्छू लंगोट लहराय

सिक-उल्लू-रिस्ट और पुतरू हाहाकार (पत्रकार) अपना पैजामा वैसे ही मोदी लहर से संभाल ही नहीं पा रहे थे और फिर उनकी लंगोटी तो पाकिस्तान में शुरू से ही गिरवी रखी पड़ी है। जब भारतीय सेना ने म्यामार अपनी ताकत दिखाई तब पाकिस्तान सफ़ेद झण्डा दिखने के बजाय सिक-उल्लू-रिस्टों  की लंगोटी हवा में लहराने लगा। अपनी इज्जत का फ़लूदा बनते देख देश भर के मय सिक-उल्लू-रिस्ट भारत सरकार और मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जब पुतरूओं ने हाहाकार मचाया तो खाँटी भाई सहित सभी सिक-उल्लू-रिस्टों को बड़ी राहत मिली। एक पुतरू हाहाकार (पत्रकार) जो किसी लायक नहीं हुए तो पुतरू हाहाकार बन बैठे, आजकल दिल्ली में बहुत बड़े अखबार के संपादक हैं। संपादक महोदय पाकिस्तानी पुतरू हाहाकारों की हाँ मे हाँ मिलते हुए कहा "...आपरेशन को चुप-चाप अंजाम देना चाहिए था ..." मैंने उनसे कहा "...अंजाम दिये जाने के बाद इसका प्रसारण किया गया ..." संपादक महोदय बोले "...जिस तरीके से इसका प्रचार किया जा रहा है उससे भारत की कूटनीति को गहरा धक्का लगा है ..." मैंने उनसे कहा "...ये आपने कैसे नाप लिया ..?" संपादक बोले "...आप देखिये म्यामार को अपना बयान बदलना पड़ा ..." मैंने उनसे कहा "...ये हार है या जीत है...महोदय हार तो तब होती जब म्यामार ये कहता कि हम आगे से भारत पर कड़ी नजर रखेंगे और ऐसी हिमाकत करने से रोकेंगे ..उल्टे वो भारत का बचाव कर रहा है..." संपादक महोदय खिसिया गए शायद उन्हें अपनी नालायकियत का एहसास हो चला था हिम्मत जुटा के बोले "...इस आपरेशन से चीन अड़ंगा लगा सकता है उसके पास वीटो पवार है ..." मैंने कहा "...तो क्या इससे पहले चीन अपने वीटो पवार का भारत के पक्ष में इस्तेमाल कर रहा था ..." संपादक महोदय करीब-करीब बौखला ही गए लेकिन बौखलाहट छिपते हुए बोले "...ठीक है लेकिन भारत को अमेरिका बनने का ख्वाब नहीं देखना चाहिए ..." मैंने उनसे तपाक से कहा "...जी बिलकुल भारत को अमेरिका बनने का नहीं अमेरिका को पछाड़ने ख्वाब देखना चाहिए ..." संपादक और खिसिया गए "...आपको क्या लगता है भारतीय उपमहाद्वीप में भारत की दादागिरी को पाकिस्तान बर्दाश्त कर लेगा ...?" मैंने उल्टा उनही से पूछा "...आपको पाकिस्तान की इतनी चिंता क्यों है ..." संपादक बोले "...हम सॉफ्ट पावर हैं ..." मैंने उनसे पूछा "...ये कौन सा पवार होता है भाई ...?" संपादक बोले "...पावर है सॉफ्ट पवार ..." मैंने कहा "...ये बहुत सामान्य सी बुद्धि है पावर हमेशा पावर ही होता है म्लेच्छ बोली (अंगरेजी) के कारण आपको सॉफ्ट पावर लगता है लेकिन मातृभाषा हिन्दी में जरा कोमल शक्ति बोल के देखिये बहुत बेतुका लगेगा ...शक्ति अपने आप में सम्पूर्ण शब्द है न कोमल न कडा ..." मेरा उत्तर सुन के संपादक महोदय का चेहरा देखने लायक था ...शायद वो फिर अपनी काबलियत का मूल्यांकन करने लगे थे ...उन्होने मुझे चाय तक नहीं पूछी ...!!!

Wednesday, 10 June 2015

आपिया नोचे बाल, बोले तू मर तू मर

दिल्ली में अब मरे मूसों ने बास मारना शुरू कर दिया है एक आपिया चीखते हुए दावा कर रहा था "...हमे 67 सीटें जीती हैं ये ऐतिहासिक मैनडेट है ..." मैंने उससे जोर से डांटते हुए पूछा "..चुप..इसका क्या मतलब मरे चूहे बास मारना छोड़ देंगे ...." आपिया बोला "...एक हम ही हैं जो घमंड नहीं करते ...बाकी सब तो ..." मैंने कहा "...ओह तो तुझे घमंड न करने का घमंड हो गया है ..." आपिया फिर चीखा "...किसी ने भी अभी तक दिल्ली में इतनी सीटें नहीं जीती थीं ..." मैंने कहा "...खैरात की जीत पर मातम मनाने के बजाय तू सीना जोरी कर रहा है ..." आपिया बोला "...ये खैरात की जीत नहीं है ..." मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...रेकॉर्ड उठा के देख ले केजरीवाल, सोसोदिया आदि को उतने ही वोट मिले हैं जीतने पिछली बार मिले थे ..." आपिया चुप हो गया तो मैंने फिर उसे कहा "...सीनाजोरी बंद कर और चुपचाप तो-मर की तरह जेल में सड़ने की तैयारी कर ..." आपिया बोला "...ये सब चाल है साजिश है ..." मैंने उससे कहा "...बिलकुल उसी तरह की जिस तरह की चाल का गजेंद्र सिंह शिकार हुआ था ..." आपिया फिर चीखा "...वो एक आत्महत्या थी, एक हादसा था ..." मैंने कहा "...तो-मर की आत्महत्या पर केजरीवाल चहके नहीं क्यों ...?" आपिया बोला "...वो दुखी चिंतित हैं ..." मैंने कहा "...उनके चिंता का कारण यही है न भारतीय सेना ने म्यामार में घुस कर दुश्मनों का सफाया कर दिया..." आपिया बोला "...लेकिन दिल्ली म्यामर नहीं है ..." मैंने कहा "...पूरे 41 विधायक जेल जाने की योग्यता रखते है... " आपिया आश्चर्य से पूछा "... बाकी 2 और कौन ...?" मैने कहा "...गब्बर केजरीवाल और मनी-श सीसोदिया..." आपिया बोला "...वो मनी-श नहीं मनीष हैं ..." मैंने उससे कहा "...सुना है उनका कबीर भी अरबपति था और फिर 10-10 करोड़ के मकान केवल साल भर के अंदर-अंदर बिना किसी रोजगार के ..?" आपिया बोला "... ये सब साजिश है ..." मैंने उसे समझाते हुए कहा "...इसीलिए आपिए अपनी बुद्धि के लिए बदनाम हैं ..."  आपिये ने पूछा "...आपके कहने का मतलब क्या है ...?" मैंने कहा "...गजेंद्र सिंह का भूत जरूर कुछ न कुछ गुल खिलाएगा ..." आपिया बोला "...किसी में इतनी हिम्मत नहीं है जो केजरीवाल को हाथ लगा दे ..." मैंने हँसते हुए कहा "...यही दावा तो-मर के संदर्भ में भी कहा जा रहा था ..." आपिया बात खत्म होते होते चला गया।