भर - भर गीदड़ हुक्का, हुकुम चलावे गांछ...
बड़ी मशहूर और बिलकुल सटीक कहावत है "...जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ भागता है..." कनाट प्लेस पर तम्बू-कनात लागने शुरू हो चुके हैं। एक संवेदनशील नागरिक आश्चर्य से पूछ रहे थे "...गीदड़ की मौत ही तो है तो उसका तमाशा बनाने की क्या जरूरत है ..." मैंने कहा "...क्यों आपको मौत का कुआं देखने में दिक्कत नहीं होती तो ये तो मौत का तमाशा है वो भी गीदड़ का..." नागरिक बोले "...सुना है गीदड़ भभका भी छोडता है ..." मैंने कहा "...तमाशा करने से पहले ऐसी भभकागिरी बहुत जरूरी है ..." नागरिक बोले "...लेकिन ये गीदड़ शेर बनाने के चक्कर में बहुत बड़ा कारनामा कर चुका है ..." मैंने कहा "...हाँ सुनते है हम भी कि कोई दौसा के किसान खेत जोतने के लिए पेड़ पर चढ़ गया था सरे आम भारी दोपहर में ..." नागरिक ने मुझसे आश्चर्य से पूछा "...उसे ये कैसे पता चला पेड़ पर खेत है...?" मैंने कहा "...हाँ मुझे भी आश्चर्य होता है और ये भी समझ में नहीं आता कि झाड़ू से खेत कैसे जोत लिया जाता है ...." नागरिक गीदड़ को झिड़की देते हुए बोले "...ये उसी की गीदड़ की कलाकारी है जैसे पेड़ पर खेत बन जाता है वैसे ही दिल्ली 500 स्कूल, बिना आडिट बिजली आधा पानी पूरा और न जाने क्या - क्या बन जाता हैं ..." मैंने नागरिक से सहज हाव से पूछा "... आस-पास तो कुत्ते हैं नहीं फिर ये गीदड़ मरेगा किसकी मौत ...?" नागरिक बोले "...कुछ लोग-बाग बता रहे थे कि आस-पास के बहुत सारे कुत्ते पहले ही गीदड़ की मौत मर चुके हैं ..." मुझे बहुत आश्चर्य हुआ सो पूछा "...ये कुत्तों का सौभाग्य है दुर्भाग्य ...?" नागरिक बोले "...फिलहाल तो ये शहर है सौभाग्य - दुर्भाग्य से अधिक दारूभाग्य चलता है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो नागरिक से अनुरोधपूर्वक पूछा "...आपके कहने का मतलब मुझे समझ में नहीं आया ...?" नागरिक कहने लगे "... ये जो भीड़ गीदड़ के मौत का तमाशा देखने और थपरी पीटने जुटेगी वो सब दारूभाग्य वाले ही हैं..." मैंने नागरिक से पूछा "...इतना दारू केवल भाग्य जगाने के लिए कहाँ से आएगा इतना दारू ..." नागरिक बोले "...सुनते हैं मुखिया के बीवी के पास 1200 करोड़ की दारू फैक्ट्री है जी ..." मैंने संतुष्टि प्रगट करने वाले अंदाज में कहा "...ओह इसीलिए वो सीधे सामने नहीं आती अब समझ में आया सब दारूभाग्य की महिमा है ..." नागरिक बोले "...मामला भी दरअसल यही है सब 67 को दारू की कंपनी जैसी हजारों करोड़ चाहिए अपना दारूभाग्य जगाने के लिए ..." मैंने संतुष्टि जताते हुए कहा "..आपका कहाँ शत-प्रतिशत सत्य है ..." .
बड़ी मशहूर और बिलकुल सटीक कहावत है "...जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ भागता है..." कनाट प्लेस पर तम्बू-कनात लागने शुरू हो चुके हैं। एक संवेदनशील नागरिक आश्चर्य से पूछ रहे थे "...गीदड़ की मौत ही तो है तो उसका तमाशा बनाने की क्या जरूरत है ..." मैंने कहा "...क्यों आपको मौत का कुआं देखने में दिक्कत नहीं होती तो ये तो मौत का तमाशा है वो भी गीदड़ का..." नागरिक बोले "...सुना है गीदड़ भभका भी छोडता है ..." मैंने कहा "...तमाशा करने से पहले ऐसी भभकागिरी बहुत जरूरी है ..." नागरिक बोले "...लेकिन ये गीदड़ शेर बनाने के चक्कर में बहुत बड़ा कारनामा कर चुका है ..." मैंने कहा "...हाँ सुनते है हम भी कि कोई दौसा के किसान खेत जोतने के लिए पेड़ पर चढ़ गया था सरे आम भारी दोपहर में ..." नागरिक ने मुझसे आश्चर्य से पूछा "...उसे ये कैसे पता चला पेड़ पर खेत है...?" मैंने कहा "...हाँ मुझे भी आश्चर्य होता है और ये भी समझ में नहीं आता कि झाड़ू से खेत कैसे जोत लिया जाता है ...." नागरिक गीदड़ को झिड़की देते हुए बोले "...ये उसी की गीदड़ की कलाकारी है जैसे पेड़ पर खेत बन जाता है वैसे ही दिल्ली 500 स्कूल, बिना आडिट बिजली आधा पानी पूरा और न जाने क्या - क्या बन जाता हैं ..." मैंने नागरिक से सहज हाव से पूछा "... आस-पास तो कुत्ते हैं नहीं फिर ये गीदड़ मरेगा किसकी मौत ...?" नागरिक बोले "...कुछ लोग-बाग बता रहे थे कि आस-पास के बहुत सारे कुत्ते पहले ही गीदड़ की मौत मर चुके हैं ..." मुझे बहुत आश्चर्य हुआ सो पूछा "...ये कुत्तों का सौभाग्य है दुर्भाग्य ...?" नागरिक बोले "...फिलहाल तो ये शहर है सौभाग्य - दुर्भाग्य से अधिक दारूभाग्य चलता है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो नागरिक से अनुरोधपूर्वक पूछा "...आपके कहने का मतलब मुझे समझ में नहीं आया ...?" नागरिक कहने लगे "... ये जो भीड़ गीदड़ के मौत का तमाशा देखने और थपरी पीटने जुटेगी वो सब दारूभाग्य वाले ही हैं..." मैंने नागरिक से पूछा "...इतना दारू केवल भाग्य जगाने के लिए कहाँ से आएगा इतना दारू ..." नागरिक बोले "...सुनते हैं मुखिया के बीवी के पास 1200 करोड़ की दारू फैक्ट्री है जी ..." मैंने संतुष्टि प्रगट करने वाले अंदाज में कहा "...ओह इसीलिए वो सीधे सामने नहीं आती अब समझ में आया सब दारूभाग्य की महिमा है ..." नागरिक बोले "...मामला भी दरअसल यही है सब 67 को दारू की कंपनी जैसी हजारों करोड़ चाहिए अपना दारूभाग्य जगाने के लिए ..." मैंने संतुष्टि जताते हुए कहा "..आपका कहाँ शत-प्रतिशत सत्य है ..." .
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