देख प्रधान आपिया ..गायब गदहा सींग....????
प्रधानमंत्री 6 दिनों की विदेश यात्रा पर क्या चले गए दिल्ली में गदहों ने अपने सर पर सींग उगा लिए और लगे डराने। प्रधानमंत्री के वापस लौटते ही गदहों ने अपने सर पर सींग गायब कर लिया। एक आपिया गदहा चिल्ला रहा था "...ये सब तख़्ता पलटने का प्रयास है ..." मैंने उससे पूछा "...चिल्लाने से तख्त भारी होता है क्या ..?" आपिया बोला "...दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है वो ठीक नहीं है ..." मैंने कहा "...ये कोई नई बात तो है नहीं दिल्ली में गदहों का होना ही बहुत बुरा है..." आपिया मुझसे पूछा "...आपके कहने का मतलब हमारा होना ही ठीक नहीं है ..." मैंने कहा "...इसीलिए नौकरशाहों ने आपके लिए सद्बुद्धि की कमाना की है ..." आपिया ये सुन के असहज हो गया लेकिन थोड़ी देर बाद सामान्य होते हुए बोला "...हम हैं तो सबकी बुद्धि ठिकाने आ गई है ..." मैंने कहा "...वो तो प्रधानमंत्री के वापस आते ही दिख रहा है ..." आपिया बोला "...हमने सबेरे की मीटिंग के लिए सबसे कह दिया था कि कानून पढ़ के आईएगा ..." मैंने उससे कहा "...ये नियम आपियों पर लागू क्यों नहीं होते ..." आपिया बोला "...अरे हमारे पास 67 सीटें हैं ..." मैंने तंज़ कसते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए भटिंडा में गैस छोड़िएगा ...?" आपिया बोला "...ये भटिंडा नहीं है ..." मैंने कहा "...अरे वाह आपको तो पता है कि भटिंडा नहीं है ...वाकई बुद्धिमान हो गए हैं आपिए ..." आपिया अपनी तारीफ सुन के खुश हो कर हंसने लगा बोला "...हमने ट्रांसफर पोस्टिंग इंडस्ट्री की काली कमाई पर रोक लगा दी ..." मैंने पलट कर तपाक से पूछा "...तो फिर अपने ही सुझाए नाम पर आपत्ति यानी बवाल क्यों ...?" आपिया मेरा सवाल सुन के असहज हो गया उसकी बोलती बंद हो गई तो मैंने बोला "...इसीलिए न कि दिल्ली में इस इंडस्ट्री को आपिये शुरू करना चाहते थे ..." आपिया बोला "...ऐसा बिलकुल नहीं है ..." मैंने कहा "...फिर आपनी ही पसंद पर आपत्ति किस लिए ... पैसा नहीं मिला इसीलिए न.... ?" आपिया ये सुन के एकदम सकपका गया .फिर भी सफाई देते हुए बोला "...हमने दिल्ली में भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है ..." मैंने उससे पूछा "...ये केजरीवाल के सरकारी आईआरएस अधिका के समय जैसा चल रहा है .." आपिया बोला "...ऐसा नहीं है ..." मैंने कहा "...जैसे उस केजरीवाल के उस सरकारी कार्यकाल के दौरान देश में भ्रष्टाचार नहीं था वैसा ही आज भी है ..." आपिया बोला "...हमने उसे इंडस्ट्री को रोक दिया उसी का पेट में दर्द है ..." मैंने तंज़ कसते हुए कहा "...दर उनको है कब्जियत आपियों को हो गई... भाई वाह !" आपिया चुपचाप खिसक लिया 15 लाख की गरीब रथ कार का दरवाजा बंद करके ....
प्रधानमंत्री 6 दिनों की विदेश यात्रा पर क्या चले गए दिल्ली में गदहों ने अपने सर पर सींग उगा लिए और लगे डराने। प्रधानमंत्री के वापस लौटते ही गदहों ने अपने सर पर सींग गायब कर लिया। एक आपिया गदहा चिल्ला रहा था "...ये सब तख़्ता पलटने का प्रयास है ..." मैंने उससे पूछा "...चिल्लाने से तख्त भारी होता है क्या ..?" आपिया बोला "...दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है वो ठीक नहीं है ..." मैंने कहा "...ये कोई नई बात तो है नहीं दिल्ली में गदहों का होना ही बहुत बुरा है..." आपिया मुझसे पूछा "...आपके कहने का मतलब हमारा होना ही ठीक नहीं है ..." मैंने कहा "...इसीलिए नौकरशाहों ने आपके लिए सद्बुद्धि की कमाना की है ..." आपिया ये सुन के असहज हो गया लेकिन थोड़ी देर बाद सामान्य होते हुए बोला "...हम हैं तो सबकी बुद्धि ठिकाने आ गई है ..." मैंने कहा "...वो तो प्रधानमंत्री के वापस आते ही दिख रहा है ..." आपिया बोला "...हमने सबेरे की मीटिंग के लिए सबसे कह दिया था कि कानून पढ़ के आईएगा ..." मैंने उससे कहा "...ये नियम आपियों पर लागू क्यों नहीं होते ..." आपिया बोला "...अरे हमारे पास 67 सीटें हैं ..." मैंने तंज़ कसते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए भटिंडा में गैस छोड़िएगा ...?" आपिया बोला "...ये भटिंडा नहीं है ..." मैंने कहा "...अरे वाह आपको तो पता है कि भटिंडा नहीं है ...वाकई बुद्धिमान हो गए हैं आपिए ..." आपिया अपनी तारीफ सुन के खुश हो कर हंसने लगा बोला "...हमने ट्रांसफर पोस्टिंग इंडस्ट्री की काली कमाई पर रोक लगा दी ..." मैंने पलट कर तपाक से पूछा "...तो फिर अपने ही सुझाए नाम पर आपत्ति यानी बवाल क्यों ...?" आपिया मेरा सवाल सुन के असहज हो गया उसकी बोलती बंद हो गई तो मैंने बोला "...इसीलिए न कि दिल्ली में इस इंडस्ट्री को आपिये शुरू करना चाहते थे ..." आपिया बोला "...ऐसा बिलकुल नहीं है ..." मैंने कहा "...फिर आपनी ही पसंद पर आपत्ति किस लिए ... पैसा नहीं मिला इसीलिए न.... ?" आपिया ये सुन के एकदम सकपका गया .फिर भी सफाई देते हुए बोला "...हमने दिल्ली में भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है ..." मैंने उससे पूछा "...ये केजरीवाल के सरकारी आईआरएस अधिका के समय जैसा चल रहा है .." आपिया बोला "...ऐसा नहीं है ..." मैंने कहा "...जैसे उस केजरीवाल के उस सरकारी कार्यकाल के दौरान देश में भ्रष्टाचार नहीं था वैसा ही आज भी है ..." आपिया बोला "...हमने उसे इंडस्ट्री को रोक दिया उसी का पेट में दर्द है ..." मैंने तंज़ कसते हुए कहा "...दर उनको है कब्जियत आपियों को हो गई... भाई वाह !" आपिया चुपचाप खिसक लिया 15 लाख की गरीब रथ कार का दरवाजा बंद करके ....
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