घंटाल हिलावे घंटा, चमाचम चेला चंठ ....
गुरु जब घंटाल बन जाए तो चेला चीनी हो ही जाता है। वैसे घंटाल भी अपना महत्व रखता ही है लेकिन यहा तो गुरु तो जिंदा लोगों को लटका देने पर उतारू है लिहाजा गोरू-बछरू से भी गया गुजरा हो चुका है ऐसे में चेला की बांछे खिल गई हैं ज़िम्मेदारी भी बढ़ गई ...चेला अस चंठ हो गया है कि बिना बताए छुट्टी मारने थाईलैंड चला गया था लेकिन गज़ब हो गया था खाँटी भाई लोग अपने ककून में बड़े सुकून से थे लेकिन दिखने के खाँटी बता रहे थे "...56 दिन गायब नहीं थे ..." मैंने उनसे कहा था "...56 दिन में 56 इंच का सीना नहीं हो जाता ..." खाँटी भाई बोले "...गुरु जब घंटाल हो गया तो ज़िम्मेदारी बढ़ गई..." मैंने कहा "...2013 मे गुरमुख होने से अब तक यमुना में बहुत भैंसें डुबकी लगा चुकी हैं..." खाँटी भाई रूआँसा होकर बोले "...जब गुरुए घंटाल निकाल गया और अपने ही लोगों की सवारी करने पर उतारू है तो क्या कहा जाए ...." मैंने कहा "... गुरु को काहे दोष देते हैं..." खाँटी भाई बोले "...उससे हम लोग इसीलिए गुरमुख हुए थे कि काम चल जाएगा लेकिन उसके लिए तो दिल्ली ही बहुत भरी पड़ रही है लगता नहीं है कि रह पाएगा ..." मेरी जिज्ञासा जागी पूछा "...तो ...?" खाँटी भाई ने उत्तर दिया "...ये सब अपनी ही टांग तोड़ने पर उतारू हैं ...सब के सब लाईन से जेल में सड़ेंगे ..." मैंने उसमे जोड़ते हुए कहा "...सुना है उसमे से कुछ फांसी पर भी लटकेंगे...?" खाँटी भाई बोले "...कुछ नहीं बहुत से ..." मैंने कहा "...तब तो और भी मुश्किल हो जाएगी ..." खाँटी भाई बोले "...घबराईए नहीं हम मोदी जी को जवाब देंगे ..." मैंने उन्हें आराम से पूछा "...सूट - बूट पहन के ...?" खाँटी भाई असहज हो गए बोले "...हम सूट- बूट वाले नहीं हैं ..." मैंने तपाक से पूछा "...तो जलाने को माउंट बेटेन उधार में सूट-बूट देते थे ... और पेरिस माउंट बेटेन के चपरासी का सूट-बूट धुलने के लिए जाता था ..." खाँटी भाई ने पूछा "...जलाने कौन ...?" मैंने आराम से कहा "...पहले प्रधान मंत्री ...और कौन..." खाँटी भाई बोले "...लेकिन वो चोर नहीं थे ..." मैंने उसी पर पूछा "... मैंने तो नहीं कहा आपके ही युवराज लोगों को अपने नाना और पापा जैसा समझ रहे हैं ..." खाँटी भाई बोले "... वो सही नहीं हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या ...?" खाँटी भाई घबरा गए और सुधार करते हुए बोले '...मेरा मतलब वो सही हैं ..." मैंने कहा "...तब ठीक है... जमीन अधिग्रहण जैसा दुरपयोग काँग्रेस से ने किया वैसा ही सबको बता रही है देखो सब मेरे जैसे ही चोर हैं ..." खाँटी भाई चुप हो गए थोड़ी देर बार केजरीवाल के खिलाफ बुदबुदाते हुए चले गए ...
गुरु जब घंटाल बन जाए तो चेला चीनी हो ही जाता है। वैसे घंटाल भी अपना महत्व रखता ही है लेकिन यहा तो गुरु तो जिंदा लोगों को लटका देने पर उतारू है लिहाजा गोरू-बछरू से भी गया गुजरा हो चुका है ऐसे में चेला की बांछे खिल गई हैं ज़िम्मेदारी भी बढ़ गई ...चेला अस चंठ हो गया है कि बिना बताए छुट्टी मारने थाईलैंड चला गया था लेकिन गज़ब हो गया था खाँटी भाई लोग अपने ककून में बड़े सुकून से थे लेकिन दिखने के खाँटी बता रहे थे "...56 दिन गायब नहीं थे ..." मैंने उनसे कहा था "...56 दिन में 56 इंच का सीना नहीं हो जाता ..." खाँटी भाई बोले "...गुरु जब घंटाल हो गया तो ज़िम्मेदारी बढ़ गई..." मैंने कहा "...2013 मे गुरमुख होने से अब तक यमुना में बहुत भैंसें डुबकी लगा चुकी हैं..." खाँटी भाई रूआँसा होकर बोले "...जब गुरुए घंटाल निकाल गया और अपने ही लोगों की सवारी करने पर उतारू है तो क्या कहा जाए ...." मैंने कहा "... गुरु को काहे दोष देते हैं..." खाँटी भाई बोले "...उससे हम लोग इसीलिए गुरमुख हुए थे कि काम चल जाएगा लेकिन उसके लिए तो दिल्ली ही बहुत भरी पड़ रही है लगता नहीं है कि रह पाएगा ..." मेरी जिज्ञासा जागी पूछा "...तो ...?" खाँटी भाई ने उत्तर दिया "...ये सब अपनी ही टांग तोड़ने पर उतारू हैं ...सब के सब लाईन से जेल में सड़ेंगे ..." मैंने उसमे जोड़ते हुए कहा "...सुना है उसमे से कुछ फांसी पर भी लटकेंगे...?" खाँटी भाई बोले "...कुछ नहीं बहुत से ..." मैंने कहा "...तब तो और भी मुश्किल हो जाएगी ..." खाँटी भाई बोले "...घबराईए नहीं हम मोदी जी को जवाब देंगे ..." मैंने उन्हें आराम से पूछा "...सूट - बूट पहन के ...?" खाँटी भाई असहज हो गए बोले "...हम सूट- बूट वाले नहीं हैं ..." मैंने तपाक से पूछा "...तो जलाने को माउंट बेटेन उधार में सूट-बूट देते थे ... और पेरिस माउंट बेटेन के चपरासी का सूट-बूट धुलने के लिए जाता था ..." खाँटी भाई ने पूछा "...जलाने कौन ...?" मैंने आराम से कहा "...पहले प्रधान मंत्री ...और कौन..." खाँटी भाई बोले "...लेकिन वो चोर नहीं थे ..." मैंने उसी पर पूछा "... मैंने तो नहीं कहा आपके ही युवराज लोगों को अपने नाना और पापा जैसा समझ रहे हैं ..." खाँटी भाई बोले "... वो सही नहीं हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या ...?" खाँटी भाई घबरा गए और सुधार करते हुए बोले '...मेरा मतलब वो सही हैं ..." मैंने कहा "...तब ठीक है... जमीन अधिग्रहण जैसा दुरपयोग काँग्रेस से ने किया वैसा ही सबको बता रही है देखो सब मेरे जैसे ही चोर हैं ..." खाँटी भाई चुप हो गए थोड़ी देर बार केजरीवाल के खिलाफ बुदबुदाते हुए चले गए ...
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