Thursday, 14 May 2015

मांरहि गदहा एण...गदहा खऊर मुसकाय
खाँटी भाई कांग्रेसी लोग गदहा हांक रहे हैं ऐसा गदहा जो फूड पार्क में ही घास चरना चाहता है बड़े जतन से उसके लिए फूड पार्क की व्यवस्था की गई थी। उस गदहे की खासियत है घास खाते हुए तो घास खाते हुए तो दिखता ही है घास न खाते हुए भी घास खाते हुए दिखता है। गदहे को ज़ोर से डांडा मारते हुए खाँटी भाई चिल्लाए "...हमारे गदहे के लिए फूड पार्क तैयार करो ..." मैंने उनसे पूछा "...गदहे के लिए पार्क की क्या जरूरत ...?" खाँटी भाई बोले "... ये हमारी जरूरत है ..." मैंने उनसे कहा "... कैसे जरूरत ...?" खाँटी भाई बोले "...हमारे जैसा कोई नहीं लिहाजा हम हैं यहा के राजकुमार ..." मैंने चुटकी लेते हुए पूछा "...गदहा कबसे राज कुम्हार बन गया ...?" खाँटी भाई चीखते हुए बोले "...राज कुम्हार नहीं राजकुमार .."  मैंने फिर उसी अंदाज में पूछा "...मंगल गिरह-कट्टसे आने के बाद ऐसा अमंगल भी होता है क्या ...? खाँटी भाई बोले "...मैं समझा नहीं ..." मैंने उनको समझाते हुए कहा "...आपके राज-कुम्हार के लिए मिट्टी तो मंगल ग्रह से आती है न ...!" खाँटी भाई बोले "...मंगल और धरती में फर्क है ..." मैंने कहा "...हाँ है तो जैसा अपने गिरह-कट्ट हैं वैसा ही दूसरों को भी समझ रहे हैं ...सूट-बूट वाले जिज्जा जी ...हाय...  " खाँटी भाई से नहीं रहा गया सो आपा खोते हुए बोले "...हम सूट-बूट वाले ..." मैंने उनकी बात बीच मे काटते हुए कहा "... हाँ खद्दर के नीचे गद्दार ही हैं गदहे के नाम पर सब गद्द-गद्द कर रहे थे ..." खाँटी भाई बोले "... हम गद्दार नहीं खुद्दार हैं ..." मैंने कहा "...अच्छा ! अगर ऐसा होता तो गदहे के घास चरने के लिए जो फूड पार्क हथियाए थे उसे वापस कर देते ...? खाँटी भाई लगे  कपार खजुआने खजुआते हुए बोले "...वो क्या हैं कि...." मैंने उनकी बात बीच में काटते हुएकहा "...हाँ कैसे करते आदित्य बिड़ला तो छोटे से बहुत मामूली किसान हैं... उन्ही का हथिया के उन्ही को कैसे दे सकते हैं ..." मैंने आगे बात जारी रखते हुए कहा "...इसीलिए भरी संसद में अपने जैसे ही चोर सभी को घोषित किया गया..." खाँटी भाई बोले "...हमने बिलकुल ठीक काम किया था ..." मैंने कहा "...जमीन सिर्फ गदहे के घास चरने के लिए लिया जाए तो ठीक लेकिन विकास करने के लिए लिया जाए तो ठीक नहीं ..." खाँटी भाई बड़े मासूमियत से बोले "...उनका ऐसा करना हक है ..." मैंने कहा "...अच्छा ! वो प्रकृतिक जन्तु हैं इसलिए इंसान क्या कृत्रिम जन्तु है ... ? गदहे को फूड पार्क चाहिए किसी भी कीमत पर ठीक उसी तर्ज पर जिसके लिए वो गदहा पचीसी पर उतारू है..." खाँटी भाई कुछ बोल नहीं रहे थे ....     

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