Monday, 4 May 2015

असुरासुर की ताजगी  ... चीखे चंठ चटोर

आंदोलनो से निकालने वाले दल कभी अच्छे हो ही नहीं सकते ये ब्रम्ह-वाक्य है कॉंग्रेस, जनता परिवार, दक्षिण के द्रविण पार्टियां, आम आदमी पार्टी आदि आदि। कु. विष का मामला ये साबित करता है कि मामला बिलकुल चरित्रहीनता का है जो आपियों की पहचान शुरू से रही है।

कु. विष-वास का मामला ऐसा है कि हम जब विद्यार्थी जीवन में थे तो एक व्यक्ति ऐसे थे कि उनका नाम ही असुरासुर रख दिया था वैसे ही ये कु. विष-वास वाकई कुविष ही हैं प्राचीन काल की विष कन्याओं से भी ज्यादा खतरनाक ... तमोराजसी तहजीब वाले शहर में युवराज के खिलाफ ताल ठोकते समय श्रीमति कुविष-वास के हिसाब से अगर कुछ गलत हुआ है तो बहुत ही गंदा हुआ इतना गंदा कि गंदगी भी शर्मा जाए ... अगर कुछ गलत नहीं हुआ है और भी गंदा ... पूछो क्यों ??? क्योंकि अब तो पिद्दी भर के आपिए टीवी पर आएंगे और बोलेंगे केजरीवाल सफाई दें ... अभी मामला प्रकृतिक जघन्यता का है इस मामले के बाद अप्राकृतिक जघन्यता  के भी मामले आ सकते हैं ... वैसे भी आपियों ने भयानक मानसिक बीमारी समलैंगिकता का उसी भयानक मानसिकता से भी समर्थन और संघर्ष भी किया है ... आपिए अब तो वाकई आम आदमी के हाथों काटे जाएंगे ... एक अतिमहत्वाकांक्षी अदना सा आपिया बता रहा था "...हमारे तो केजरीवाल ही आदर्श हैं ..." मैंने उससे पूछा "... क्यों कु. विष-वास  ..." आपिया भड़कते हुए बोला "...उसका नाम मत लीजिये मेरे सामने ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "... क्यों भाई ...?" आपिया बोला "... उनकी महत्वाकांक्षा पर संदेह है ..." मैंने उससे पूछा "...मुझे समझ में नहीं आया ..." आपिया बोला "...तोपची चूहा से लड़े ये मूर्खता ही है न ...!" मुझे उसका उत्तर सुन के बहुत अच्छा लगा मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा "... पहली बार मुझे लगा है किसी आपिए के पास बुद्धि है ..." आपिया मुस्कुराने लगा बोला "... आभी आपने देखा ही क्या है ...आगे - आगे देखये होता है क्या ..." मेरा माथा ठनका तो मैंने पूछा "... आगे या गे ..." आपिया चुप हो गया खैर मैंने कहा "... तब तो अब आपियों का शिकार वाकई आम आदमी करेंगे ..." आपिया बोला "... सब लोग नहीं लेकिन कुछ लोग तो कर ही सकते हैं ..." मैंने उससे पूछा "... लेकिन सुबूत ..." आपिया बोला "... सुबूत मतलब सोशल मीडिया ...पहले कुछ शेयर हो जाएगा फिर तो ..." ये कह के आपिया कुटिल मुस्कान से हंसने लगा ... मैंने कहा "... मतलब कुविष अगर सफाई देते हैं तो बुरा ...नहीं देते हैं तो बुरा हो ही रहा है ..." आपिया बोला "... ये पॉलिटिक्स है अब हम अपने नेती-नेता को राजनीति सिखाएगे ..." मैंने पूछा "...क्यों भाई ऐसा क्या हुआ ..." आपिया बोला "...जिनको हमने अपनी जिंदगी दांव पर लगा कर जिताया वो लाखों रुपया महीना बिना काम के पीट रहा है ..." मैंने उससे कहा "...मतलब आप भी अपना हिस्सा चाहते हैं ..."  आपिया बोला "... 8 लाख रुपया महीना में से कम से कम अपना 50 हजार महीना बनाता ही है ... "  मैंने उससे कहा "... ये है असली राजनीति ...." आपिया गुस्सा दिखाते हुए चला गया .... 

No comments:

Post a Comment