Sunday, 24 May 2015

भर - भर गीदड़ हुक्का, हुकुम चलावे गांछ...

बड़ी मशहूर और बिलकुल सटीक कहावत है "...जब गीदड़ की मौत आती है तो वो शहर की तरफ भागता है..." कनाट प्लेस पर तम्बू-कनात लागने शुरू हो चुके हैं। एक संवेदनशील नागरिक आश्चर्य से पूछ रहे थे "...गीदड़ की मौत ही तो है तो उसका तमाशा बनाने की क्या जरूरत है ..." मैंने कहा "...क्यों आपको मौत का कुआं देखने में दिक्कत नहीं होती तो ये तो मौत का तमाशा है वो भी गीदड़ का..." नागरिक बोले "...सुना है गीदड़ भभका भी छोडता है ..." मैंने कहा "...तमाशा करने से पहले ऐसी भभकागिरी बहुत जरूरी है ..." नागरिक बोले "...लेकिन ये गीदड़ शेर बनाने के चक्कर में बहुत बड़ा कारनामा कर चुका है ..." मैंने कहा "...हाँ सुनते है हम भी कि कोई दौसा के किसान खेत जोतने के लिए पेड़ पर चढ़ गया था सरे आम भारी दोपहर में ..." नागरिक ने मुझसे आश्चर्य से पूछा "...उसे ये कैसे पता चला पेड़ पर खेत है...?" मैंने कहा "...हाँ मुझे भी आश्चर्य होता है और ये भी समझ में नहीं आता कि झाड़ू से खेत कैसे जोत लिया जाता है ...." नागरिक गीदड़ को झिड़की देते हुए बोले "...ये उसी की गीदड़ की कलाकारी है जैसे पेड़ पर खेत बन जाता है वैसे ही दिल्ली 500 स्कूल, बिना आडिट बिजली आधा पानी पूरा और न जाने क्या - क्या बन जाता हैं ..." मैंने नागरिक से सहज हाव से पूछा "... आस-पास तो कुत्ते हैं नहीं फिर ये गीदड़ मरेगा किसकी मौत ...?" नागरिक बोले "...कुछ लोग-बाग बता रहे थे कि आस-पास के बहुत सारे कुत्ते पहले ही गीदड़ की मौत मर चुके हैं ..." मुझे बहुत आश्चर्य हुआ सो पूछा "...ये कुत्तों का सौभाग्य है दुर्भाग्य ...?" नागरिक बोले "...फिलहाल तो ये शहर है सौभाग्य - दुर्भाग्य से अधिक दारूभाग्य चलता है ..." मुझे समझ में नहीं आया तो नागरिक से अनुरोधपूर्वक पूछा "...आपके कहने का मतलब मुझे समझ में नहीं आया ...?" नागरिक कहने लगे "... ये जो भीड़ गीदड़ के मौत का तमाशा देखने और थपरी पीटने जुटेगी वो सब दारूभाग्य वाले ही हैं..." मैंने नागरिक से पूछा "...इतना दारू केवल भाग्य जगाने के लिए कहाँ से आएगा इतना दारू ..." नागरिक बोले "...सुनते हैं मुखिया के बीवी के पास 1200 करोड़ की दारू फैक्ट्री है जी ..." मैंने संतुष्टि प्रगट करने वाले अंदाज में कहा "...ओह इसीलिए वो सीधे सामने नहीं आती अब समझ में आया सब दारूभाग्य की महिमा है ..." नागरिक बोले "...मामला भी दरअसल यही है सब 67 को दारू की कंपनी जैसी हजारों करोड़ चाहिए अपना दारूभाग्य जगाने के लिए ..." मैंने संतुष्टि जताते हुए कहा "..आपका कहाँ शत-प्रतिशत सत्य है ..." .         

Thursday, 21 May 2015

देख प्रधान आपिया ..गायब गदहा सींग....????

प्रधानमंत्री 6 दिनों की विदेश यात्रा पर क्या चले गए दिल्ली में गदहों ने अपने सर पर सींग उगा लिए और लगे डराने। प्रधानमंत्री के वापस लौटते ही गदहों ने अपने सर पर सींग गायब कर लिया। एक आपिया गदहा चिल्ला रहा था "...ये सब तख़्ता पलटने का प्रयास है ..." मैंने उससे पूछा "...चिल्लाने से तख्त भारी होता है क्या ..?" आपिया बोला "...दिल्ली में जो कुछ भी हो रहा है वो ठीक नहीं है ..." मैंने कहा "...ये कोई नई बात तो है नहीं दिल्ली में गदहों का होना ही बहुत बुरा है..." आपिया मुझसे पूछा "...आपके कहने का मतलब हमारा होना ही ठीक नहीं है ..." मैंने कहा "...इसीलिए नौकरशाहों ने आपके लिए सद्बुद्धि की कमाना की है ..." आपिया ये सुन के असहज हो गया लेकिन थोड़ी देर बाद सामान्य होते हुए बोला "...हम हैं तो सबकी बुद्धि ठिकाने आ गई है ..." मैंने कहा "...वो तो प्रधानमंत्री के वापस आते ही दिख रहा है ..." आपिया बोला "...हमने सबेरे की मीटिंग के लिए सबसे कह दिया था कि कानून पढ़ के आईएगा ..." मैंने उससे कहा "...ये नियम आपियों पर लागू क्यों नहीं होते ..." आपिया बोला "...अरे हमारे पास 67 सीटें हैं ..." मैंने तंज़ कसते हुए कहा "...तो क्या इसीलिए भटिंडा में गैस छोड़िएगा ...?" आपिया बोला "...ये भटिंडा नहीं है ..." मैंने कहा "...अरे वाह आपको तो पता है कि भटिंडा नहीं है ...वाकई बुद्धिमान हो गए हैं आपिए ..." आपिया अपनी तारीफ सुन के खुश हो कर हंसने लगा बोला "...हमने ट्रांसफर पोस्टिंग इंडस्ट्री की काली कमाई पर रोक लगा दी ..." मैंने पलट कर तपाक से पूछा "...तो फिर अपने ही सुझाए नाम पर आपत्ति यानी बवाल क्यों  ...?" आपिया मेरा सवाल सुन के असहज हो गया उसकी बोलती बंद हो गई तो मैंने बोला "...इसीलिए न कि दिल्ली में इस इंडस्ट्री को आपिये शुरू करना चाहते थे ..." आपिया बोला "...ऐसा बिलकुल नहीं है ..." मैंने कहा "...फिर आपनी ही पसंद पर आपत्ति किस लिए ... पैसा नहीं मिला इसीलिए न.... ?" आपिया ये सुन के एकदम सकपका गया .फिर भी सफाई देते हुए बोला "...हमने दिल्ली में भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है ..." मैंने उससे पूछा "...ये केजरीवाल के सरकारी आईआरएस अधिका के समय जैसा चल रहा है .." आपिया बोला "...ऐसा नहीं है ..." मैंने कहा "...जैसे उस केजरीवाल के उस सरकारी कार्यकाल के दौरान देश में भ्रष्टाचार नहीं था वैसा ही आज भी है ..." आपिया बोला "...हमने उसे इंडस्ट्री को रोक दिया उसी का पेट में दर्द है ..." मैंने तंज़ कसते हुए कहा "...दर उनको है कब्जियत आपियों को हो गई... भाई वाह !" आपिया चुपचाप खिसक लिया 15 लाख की गरीब रथ कार का दरवाजा बंद करके ....     

Monday, 18 May 2015

पुनि-पुनि खोखा पुनि-पुनि धोखा ... मचावे जंग

वैसे तो परंपरा है सर पर कफन बांध के चलाने की लेकिन देखिये आपिए सर पर लंगोट बांध के चीखते हुए चल रहे हैं। कुछ लोगों को आपत्ति है तो आपिए बोल रहे हैं अपनी इज्जत के बाजाय दूसरों की इज्जत का हवाला दे रहे हैं। मैंने एक आपिए से पूछा तो चीखने लगा, बोला "...ये सब संवैधानिक नहीं है ..." मैंने उससे पलट के पूछा "...तो इसका मतलब सर लंगोटी बांध के घूमोगे ...?" आपीय बुद्धिमत्ता वाला तर्क देते हुए बोला "...ताकत बाजुओं में नहीं दिमाग में होती है ..." उसका तर्क सुन के मुझे अच्छा लगा सो मैंने हँसते हुए कहा "...हाँ वो तो है लेकिन एक समस्या है ..." आपिया बोला "...क्या ...?" मैंने कहा "...इज्जत का ठेका किसी और को कैसे दोगे ..." आपिया बोला "...इसमे कोई समस्या नहीं बहुत से लोग हैं और लाइन में लगे हैं..." मैंने कहा "...मुन्ना हज़ारे की स्कॉर्पियो जो 12 लाख की थी 9 लाख में बिकी है जिसे नीलामी कहा जा रहा है ..." आपिया तुनक कर बोला "...उससे हमको क्या ..." मैंने कहा "...मुन्ना हज़ारे खुद को भी उसी मूल्य पर नहीं बेच पा रहे हैं ..." आपिया असहज होने लगा लेकिन खुद को संभालते हुए बोला "...हम सस्ती राजनीति नहीं करते ..." मैंने उसपर सवाल करते हुए कहा "...तो फिर दिल्ली में LG और सैमसंग की लड़ाई में कितने अरब डालर का निवेश हुआ है ...?" आपिया बोला "...वो लड़ाई पैसो की नहीं संवैधानिक अधिकार की है ..." मैंने टिप्पणी करते हुए कहा "... मतलब इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है ...!" आपिया अपनी पीठ ठोकते हुए बोला "...हम इतिहास दोहराते नहीं रचते हैं ..." मैंने कहा "...वैसे ऐसे ऐसे इतिहास बहुत रचे जाते हैं और 2014 लोकसभा चुनाव में भी आपियों ने इतिहास रचा ही था  ..." ये सुन के आपिया बहुत असहज हो गया बोला "...फिर भी हम दिल्ली का चुनाव जीते बहुत शानो- शौकत से जीते ..." मैंने इस पूछ "...तो इसलिए एलजी-सैमसंग की लड़ाई बढ़ती ही जा रही है..." आपिया बोला "...वो हमको काम ही नहीं करने दिया जा रहा है ..." मैंने कहा "...ये आपको पता भी है कि काम होगा कैसे ...!"   आपिया बोला "...इसीलिए हम ज़ोर लगा रहे हैं ..." मैंने कहा "...हाँ इतिहास रचने और दोहराने के लिए सर पे लंगोटी बांधना जरूरी है ..." मैंने आगे उससे पूछा "... वैसे इस बार वास्तव में दिल्ली वाले चाहते हैं कि आप 49 दिन वाला इतिहास दोहराएँ ... दिल्ली की जनता बहुत दुआएं देगी..." आपिया कपार खजुआने लगा तो मैंने कहा नमस्कार।

Saturday, 16 May 2015

घंटाल हिलावे घंटा, चमाचम चेला चंठ ....

गुरु जब घंटाल बन जाए तो चेला चीनी हो ही जाता है। वैसे घंटाल भी अपना महत्व रखता ही है लेकिन यहा तो गुरु तो जिंदा लोगों को लटका देने पर उतारू है लिहाजा गोरू-बछरू से भी गया गुजरा हो चुका है ऐसे में चेला की बांछे खिल गई हैं ज़िम्मेदारी भी बढ़ गई  ...चेला अस चंठ हो गया है कि बिना बताए छुट्टी मारने थाईलैंड चला गया था लेकिन गज़ब हो गया था खाँटी भाई लोग अपने ककून में  बड़े सुकून से थे लेकिन दिखने के खाँटी बता रहे थे "...56 दिन गायब नहीं थे ..." मैंने उनसे कहा था "...56 दिन में 56 इंच का सीना नहीं हो जाता ..." खाँटी भाई बोले "...गुरु जब घंटाल हो गया तो ज़िम्मेदारी बढ़ गई..." मैंने कहा "...2013 मे गुरमुख होने से अब तक यमुना में बहुत भैंसें डुबकी लगा चुकी हैं..." खाँटी भाई रूआँसा होकर बोले "...जब गुरुए घंटाल निकाल गया और अपने ही लोगों की सवारी करने पर उतारू है तो क्या कहा जाए ...." मैंने कहा "...  गुरु को काहे दोष देते हैं..." खाँटी भाई बोले "...उससे हम लोग इसीलिए  गुरमुख हुए थे कि काम चल जाएगा लेकिन उसके लिए तो दिल्ली ही बहुत भरी पड़ रही है लगता नहीं है कि रह पाएगा ..." मेरी जिज्ञासा जागी पूछा "...तो ...?" खाँटी भाई ने उत्तर दिया "...ये सब अपनी ही टांग तोड़ने पर उतारू हैं ...सब के सब लाईन से जेल में सड़ेंगे ..." मैंने उसमे जोड़ते हुए कहा "...सुना है उसमे से कुछ फांसी पर भी लटकेंगे...?" खाँटी भाई बोले "...कुछ नहीं बहुत से ..." मैंने कहा "...तब तो और भी मुश्किल हो जाएगी ..." खाँटी भाई बोले "...घबराईए नहीं हम मोदी जी को जवाब देंगे ..." मैंने उन्हें आराम से पूछा "...सूट - बूट पहन के ...?" खाँटी भाई असहज हो गए बोले "...हम सूट- बूट वाले नहीं हैं ..." मैंने तपाक से पूछा "...तो जलाने को माउंट बेटेन उधार में सूट-बूट देते थे ... और पेरिस माउंट बेटेन के चपरासी का सूट-बूट धुलने के लिए जाता था ..." खाँटी भाई ने पूछा "...जलाने कौन ...?" मैंने आराम से कहा "...पहले प्रधान मंत्री ...और कौन..." खाँटी भाई बोले "...लेकिन वो चोर नहीं थे ..." मैंने उसी पर पूछा "... मैंने तो नहीं कहा आपके ही युवराज लोगों को अपने नाना और पापा जैसा समझ रहे हैं ..." खाँटी भाई बोले "... वो सही नहीं हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्या ...?" खाँटी भाई घबरा गए और सुधार करते हुए बोले '...मेरा मतलब वो सही हैं ..." मैंने कहा "...तब ठीक है... जमीन अधिग्रहण जैसा दुरपयोग काँग्रेस से ने किया वैसा ही सबको बता रही है देखो सब मेरे जैसे ही चोर हैं ..." खाँटी भाई चुप हो गए थोड़ी देर बार केजरीवाल के खिलाफ बुदबुदाते हुए चले गए ...

Thursday, 14 May 2015

मांरहि गदहा एण...गदहा खऊर मुसकाय
खाँटी भाई कांग्रेसी लोग गदहा हांक रहे हैं ऐसा गदहा जो फूड पार्क में ही घास चरना चाहता है बड़े जतन से उसके लिए फूड पार्क की व्यवस्था की गई थी। उस गदहे की खासियत है घास खाते हुए तो घास खाते हुए तो दिखता ही है घास न खाते हुए भी घास खाते हुए दिखता है। गदहे को ज़ोर से डांडा मारते हुए खाँटी भाई चिल्लाए "...हमारे गदहे के लिए फूड पार्क तैयार करो ..." मैंने उनसे पूछा "...गदहे के लिए पार्क की क्या जरूरत ...?" खाँटी भाई बोले "... ये हमारी जरूरत है ..." मैंने उनसे कहा "... कैसे जरूरत ...?" खाँटी भाई बोले "...हमारे जैसा कोई नहीं लिहाजा हम हैं यहा के राजकुमार ..." मैंने चुटकी लेते हुए पूछा "...गदहा कबसे राज कुम्हार बन गया ...?" खाँटी भाई चीखते हुए बोले "...राज कुम्हार नहीं राजकुमार .."  मैंने फिर उसी अंदाज में पूछा "...मंगल गिरह-कट्टसे आने के बाद ऐसा अमंगल भी होता है क्या ...? खाँटी भाई बोले "...मैं समझा नहीं ..." मैंने उनको समझाते हुए कहा "...आपके राज-कुम्हार के लिए मिट्टी तो मंगल ग्रह से आती है न ...!" खाँटी भाई बोले "...मंगल और धरती में फर्क है ..." मैंने कहा "...हाँ है तो जैसा अपने गिरह-कट्ट हैं वैसा ही दूसरों को भी समझ रहे हैं ...सूट-बूट वाले जिज्जा जी ...हाय...  " खाँटी भाई से नहीं रहा गया सो आपा खोते हुए बोले "...हम सूट-बूट वाले ..." मैंने उनकी बात बीच मे काटते हुए कहा "... हाँ खद्दर के नीचे गद्दार ही हैं गदहे के नाम पर सब गद्द-गद्द कर रहे थे ..." खाँटी भाई बोले "... हम गद्दार नहीं खुद्दार हैं ..." मैंने कहा "...अच्छा ! अगर ऐसा होता तो गदहे के घास चरने के लिए जो फूड पार्क हथियाए थे उसे वापस कर देते ...? खाँटी भाई लगे  कपार खजुआने खजुआते हुए बोले "...वो क्या हैं कि...." मैंने उनकी बात बीच में काटते हुएकहा "...हाँ कैसे करते आदित्य बिड़ला तो छोटे से बहुत मामूली किसान हैं... उन्ही का हथिया के उन्ही को कैसे दे सकते हैं ..." मैंने आगे बात जारी रखते हुए कहा "...इसीलिए भरी संसद में अपने जैसे ही चोर सभी को घोषित किया गया..." खाँटी भाई बोले "...हमने बिलकुल ठीक काम किया था ..." मैंने कहा "...जमीन सिर्फ गदहे के घास चरने के लिए लिया जाए तो ठीक लेकिन विकास करने के लिए लिया जाए तो ठीक नहीं ..." खाँटी भाई बड़े मासूमियत से बोले "...उनका ऐसा करना हक है ..." मैंने कहा "...अच्छा ! वो प्रकृतिक जन्तु हैं इसलिए इंसान क्या कृत्रिम जन्तु है ... ? गदहे को फूड पार्क चाहिए किसी भी कीमत पर ठीक उसी तर्ज पर जिसके लिए वो गदहा पचीसी पर उतारू है..." खाँटी भाई कुछ बोल नहीं रहे थे ....     

Monday, 4 May 2015

असुरासुर की ताजगी  ... चीखे चंठ चटोर

आंदोलनो से निकालने वाले दल कभी अच्छे हो ही नहीं सकते ये ब्रम्ह-वाक्य है कॉंग्रेस, जनता परिवार, दक्षिण के द्रविण पार्टियां, आम आदमी पार्टी आदि आदि। कु. विष का मामला ये साबित करता है कि मामला बिलकुल चरित्रहीनता का है जो आपियों की पहचान शुरू से रही है।

कु. विष-वास का मामला ऐसा है कि हम जब विद्यार्थी जीवन में थे तो एक व्यक्ति ऐसे थे कि उनका नाम ही असुरासुर रख दिया था वैसे ही ये कु. विष-वास वाकई कुविष ही हैं प्राचीन काल की विष कन्याओं से भी ज्यादा खतरनाक ... तमोराजसी तहजीब वाले शहर में युवराज के खिलाफ ताल ठोकते समय श्रीमति कुविष-वास के हिसाब से अगर कुछ गलत हुआ है तो बहुत ही गंदा हुआ इतना गंदा कि गंदगी भी शर्मा जाए ... अगर कुछ गलत नहीं हुआ है और भी गंदा ... पूछो क्यों ??? क्योंकि अब तो पिद्दी भर के आपिए टीवी पर आएंगे और बोलेंगे केजरीवाल सफाई दें ... अभी मामला प्रकृतिक जघन्यता का है इस मामले के बाद अप्राकृतिक जघन्यता  के भी मामले आ सकते हैं ... वैसे भी आपियों ने भयानक मानसिक बीमारी समलैंगिकता का उसी भयानक मानसिकता से भी समर्थन और संघर्ष भी किया है ... आपिए अब तो वाकई आम आदमी के हाथों काटे जाएंगे ... एक अतिमहत्वाकांक्षी अदना सा आपिया बता रहा था "...हमारे तो केजरीवाल ही आदर्श हैं ..." मैंने उससे पूछा "... क्यों कु. विष-वास  ..." आपिया भड़कते हुए बोला "...उसका नाम मत लीजिये मेरे सामने ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "... क्यों भाई ...?" आपिया बोला "... उनकी महत्वाकांक्षा पर संदेह है ..." मैंने उससे पूछा "...मुझे समझ में नहीं आया ..." आपिया बोला "...तोपची चूहा से लड़े ये मूर्खता ही है न ...!" मुझे उसका उत्तर सुन के बहुत अच्छा लगा मैंने उसकी तारीफ करते हुए कहा "... पहली बार मुझे लगा है किसी आपिए के पास बुद्धि है ..." आपिया मुस्कुराने लगा बोला "... आभी आपने देखा ही क्या है ...आगे - आगे देखये होता है क्या ..." मेरा माथा ठनका तो मैंने पूछा "... आगे या गे ..." आपिया चुप हो गया खैर मैंने कहा "... तब तो अब आपियों का शिकार वाकई आम आदमी करेंगे ..." आपिया बोला "... सब लोग नहीं लेकिन कुछ लोग तो कर ही सकते हैं ..." मैंने उससे पूछा "... लेकिन सुबूत ..." आपिया बोला "... सुबूत मतलब सोशल मीडिया ...पहले कुछ शेयर हो जाएगा फिर तो ..." ये कह के आपिया कुटिल मुस्कान से हंसने लगा ... मैंने कहा "... मतलब कुविष अगर सफाई देते हैं तो बुरा ...नहीं देते हैं तो बुरा हो ही रहा है ..." आपिया बोला "... ये पॉलिटिक्स है अब हम अपने नेती-नेता को राजनीति सिखाएगे ..." मैंने पूछा "...क्यों भाई ऐसा क्या हुआ ..." आपिया बोला "...जिनको हमने अपनी जिंदगी दांव पर लगा कर जिताया वो लाखों रुपया महीना बिना काम के पीट रहा है ..." मैंने उससे कहा "...मतलब आप भी अपना हिस्सा चाहते हैं ..."  आपिया बोला "... 8 लाख रुपया महीना में से कम से कम अपना 50 हजार महीना बनाता ही है ... "  मैंने उससे कहा "... ये है असली राजनीति ...." आपिया गुस्सा दिखाते हुए चला गया ....