लंगोटी से ज़ोर दुम...चुरकी में अंडा
जनता पवार से भात के भावी पामन्ती, कुछ लोगों को ये बहुत अच्छा लग सकता है लेकिन पमन्ती बन्ने के लिए मुलाम सींग आदो ने जनता पवार को एक कर दिया। लोग बताते हैं की शी मुलाम सींग आदों जनता पवार के पा हैं। ऐसे पा हैं जो बच्चों को गलतियों के उनको माफी देने मे कत्तई पीछे नई रत्ता। केजीवाल के रायता फेलाने पर इस महानायक को गुस्सा नई आता। उनके भात के पामन्ती बन्ने से पैहले ई हिस्सेदारी औ मजबूत ओ गई रिसतेदरी मे बादल कर। समधियों की धम्की पूआ भात सुनेगा देक्ते हैं किसकी हिम्मत है इस महानायक को पमन्ती बन्ने से रोक ले। कुछ लोग आपत्ति कत्ते हैं कि "मोगली के जंगल मे ये बिना चड्डी के फूल कैसे खिल गया " भाई देखों जबलपुर मे पूड़ी खाने से कोई पहलवान हुआ है क्या ? ठीक वैसे ही जहांगीर वहां पूड़ी इसलिए खाते थे कि सल्तनत बनी रहे लेकिन वो तो कबकी कबड्डी के खेल में हार चुके थे सिर्फ इसलिए कि जुगाड़ महाविद्यालय से जुगाड़ की डिग्री (इंजीनियरिंग कालेज से बी॰ टेक॰) लेते समय प्रयोगशाला से हाइड्रोजन खतम हो गया था तो इनहोने ही आर्डर दिया था जिसे उन्होने लिखवाया "हाईड्रों-" ...लेकिन जब 3 महीने बाद "-जन" लिखावया तबतक प्रयोग समाप्त हो चुका था। सारा खेल खत्म हो चुका था। इनके आज के "राज-" और 3 महीने बाद की "-नीति" बिहार शब्द को ही सार्थक कर दिया जिसका "बीज ही हारने का है" उसे लोहिया का ललीपाप चूसने वाले भब्ब की सूचना दबाने वालों ने बिहार को उससे जगह पर मोगली के जंगल को स्वयात कर दिया। टीस लिए अंगारों से भरा सीना जब भारत से प्रधानमंत्री से मिलता है तो टीस और असहनीय हो जाती है तो केजरीवाल की खांसी के दमकल का सहारा लेना पड़ता है टीस लिए सीने को ये सब इसलिए बहुत बढ़िया लगा क्योंकि क्यों "खांसी का दमकल" तेल से नहीं "गाली" से चलता है साथ में परसादी के रूप पिछवाड़े लातों मारते हैं। दिल्ली की जनता बिल्कुल न घबराए जल्दी ही बिहार के तर्ज पर दिल्ली भी मोगली के जंगल की तरह स्वायत्त हो आत्मनिर्भर हो जाएगा जो रफ्तार है उससे तो लगता है 5-6 महीने में जनता फिर जंतर पहन के केजरीवाल के खिलाफ मंतर फूंकेगी ... विश्वास नहीं होता तो अपने आस-पास सूंघने की कोशिश कीजिये ... सुलगते गोईठे की खुशबू आ जाएगी ...जो केजरीवाल के लिए किसी मरे मूस की बदबू से कम नहीं है .... जय थाना माता की
जनता पवार से भात के भावी पामन्ती, कुछ लोगों को ये बहुत अच्छा लग सकता है लेकिन पमन्ती बन्ने के लिए मुलाम सींग आदो ने जनता पवार को एक कर दिया। लोग बताते हैं की शी मुलाम सींग आदों जनता पवार के पा हैं। ऐसे पा हैं जो बच्चों को गलतियों के उनको माफी देने मे कत्तई पीछे नई रत्ता। केजीवाल के रायता फेलाने पर इस महानायक को गुस्सा नई आता। उनके भात के पामन्ती बन्ने से पैहले ई हिस्सेदारी औ मजबूत ओ गई रिसतेदरी मे बादल कर। समधियों की धम्की पूआ भात सुनेगा देक्ते हैं किसकी हिम्मत है इस महानायक को पमन्ती बन्ने से रोक ले। कुछ लोग आपत्ति कत्ते हैं कि "मोगली के जंगल मे ये बिना चड्डी के फूल कैसे खिल गया " भाई देखों जबलपुर मे पूड़ी खाने से कोई पहलवान हुआ है क्या ? ठीक वैसे ही जहांगीर वहां पूड़ी इसलिए खाते थे कि सल्तनत बनी रहे लेकिन वो तो कबकी कबड्डी के खेल में हार चुके थे सिर्फ इसलिए कि जुगाड़ महाविद्यालय से जुगाड़ की डिग्री (इंजीनियरिंग कालेज से बी॰ टेक॰) लेते समय प्रयोगशाला से हाइड्रोजन खतम हो गया था तो इनहोने ही आर्डर दिया था जिसे उन्होने लिखवाया "हाईड्रों-" ...लेकिन जब 3 महीने बाद "-जन" लिखावया तबतक प्रयोग समाप्त हो चुका था। सारा खेल खत्म हो चुका था। इनके आज के "राज-" और 3 महीने बाद की "-नीति" बिहार शब्द को ही सार्थक कर दिया जिसका "बीज ही हारने का है" उसे लोहिया का ललीपाप चूसने वाले भब्ब की सूचना दबाने वालों ने बिहार को उससे जगह पर मोगली के जंगल को स्वयात कर दिया। टीस लिए अंगारों से भरा सीना जब भारत से प्रधानमंत्री से मिलता है तो टीस और असहनीय हो जाती है तो केजरीवाल की खांसी के दमकल का सहारा लेना पड़ता है टीस लिए सीने को ये सब इसलिए बहुत बढ़िया लगा क्योंकि क्यों "खांसी का दमकल" तेल से नहीं "गाली" से चलता है साथ में परसादी के रूप पिछवाड़े लातों मारते हैं। दिल्ली की जनता बिल्कुल न घबराए जल्दी ही बिहार के तर्ज पर दिल्ली भी मोगली के जंगल की तरह स्वायत्त हो आत्मनिर्भर हो जाएगा जो रफ्तार है उससे तो लगता है 5-6 महीने में जनता फिर जंतर पहन के केजरीवाल के खिलाफ मंतर फूंकेगी ... विश्वास नहीं होता तो अपने आस-पास सूंघने की कोशिश कीजिये ... सुलगते गोईठे की खुशबू आ जाएगी ...जो केजरीवाल के लिए किसी मरे मूस की बदबू से कम नहीं है .... जय थाना माता की
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