नाचे नेनुआं छमछम, सतपुतिया उधम मचाय ...
इधर पार्टी की लाज बचाने ईलाज करा कर दिल्ली में लोटे तो आपिए बड़े खुश हुए लेकिन लेकिन एक बहुत बुद्धिमान आपिए ने मुझसे धमकी देते हुए कहा "...वो लौटे हैं लोटे नहीं ..." तो मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...ठीक है लोटा अपना ही था या सीसो-दिया का दिया हुआ था ...?" इस पर वो बुद्धिमान आपिया कनफ्यूज हो गया और कापार खजुआते हुए भाग गया। उधर गुरु यानी सर्र जी सर्रक लिए इधर चेला का बदहवासी मे छुट्टी मार लिया। सर्र जी ई-लाज के बाद दिल्ली लोटे उधर खाँटी भाई कांग्रेसी के शहजादे की छुट्टी खतम ही नहीं हो रही। मैंने एक खाँटी भाई से पूछा "...शहजादे काम क्या करते हैं जो छुट्टी की जरूरत पड़ गई ...?" खाँटी भाई भड़क गए और गुस्से में बोले "...देखिये वो छुट्टी पर हैं बस ..." मैंने तपाक से पूछा "...किसी की लाज बचानी है ...?" खाँटी भाई थोड़ा और उखड़ गए बोले "...आप हमको मूर्ख मत समझिए..." मैंने कहा "...ठीक है गुरु यानी सर्र जी की ही भांति महामूर्ख ..." खाँटी भाई आपे से बाहर होगे बोले "...केजरीवाल हमारे गुरु नहीं हैं ..." मैंने चुप होने का इशारा करते हुए कहा "...श श श श कहीं किसी ने स्टिंग करके शहजादे तक पहुंचा दिया न तो आप न किसी कार्यकरणी के लायक रहोगे और न ही किसी अफेयर के ..." खाँटी भाई मुस्कुरा के बोले "...अरे नहीं वो ऐसे नहीं हैं ..." मैंने कहा "...सवा साल पहले ही आपके शहजादे सर्र जी के गुरमुख हो चुके हैं ..." खाँटी भाई बोले "...तो ..." मैंने जवाब देते हुए कहा "...तो मने ई कि गुरु का प्रभाव चेला पर तो पड़ेगा ही ..." खाँटी भाई बोले "...मैंने कहा न वो ऐसे नहीं हैं ..." मैंने फिर उसी अंदाज में उनसे पूछा "...फिर सर्र जी बांगलुरु सर्रके तो उधर शहजादे छुट्टी मरने क्यो चले गए ...? खाँटी भाई बोले "...ये एक संयोग भी तो हो सकता है ..." मैंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए उनसे पूछा कहा "...अच्छा ब से बंगलुरु और ब से बैंकाक ...ये भी संयोग है क्या..." खाँटी भाई भी आपियों की तरह कापार खजुआने लगे कुछ बोल नहीं पा रहे थे तो मैंने ही कहा "...देखिये इज्जत वगैरह की बात छोड़िए आपकी जमीन तो आपके शहजादे के गुरु यानी सर्रजी ने हथिया ली ..." खाँटी भाई बीच में ही बात काटते हुए बोले "...इसीलिए तो मामला जमीन अधिग्रहण का ही है ..." मैंने भी टांट कसते हुए कहा "...न सामने शहजादे दिखेंगे और न ही इज्जत खतरे में पड़ेगी..." खाँटी भाई बोले "...देखिये उनको न तो खांसी है और न ही सुगर ..." मैंने प्रतिउत्तर में कहा "...हाँ इसीलिए वो गरजू नहीं हैं शहजादे ने तो यही सीखां है ..." खाँटी भाई आपियों की तरह कापार खजुआने लगे तो मैंने कहा नमस्कार
इधर पार्टी की लाज बचाने ईलाज करा कर दिल्ली में लोटे तो आपिए बड़े खुश हुए लेकिन लेकिन एक बहुत बुद्धिमान आपिए ने मुझसे धमकी देते हुए कहा "...वो लौटे हैं लोटे नहीं ..." तो मैंने उसे उत्तर देते हुए कहा "...ठीक है लोटा अपना ही था या सीसो-दिया का दिया हुआ था ...?" इस पर वो बुद्धिमान आपिया कनफ्यूज हो गया और कापार खजुआते हुए भाग गया। उधर गुरु यानी सर्र जी सर्रक लिए इधर चेला का बदहवासी मे छुट्टी मार लिया। सर्र जी ई-लाज के बाद दिल्ली लोटे उधर खाँटी भाई कांग्रेसी के शहजादे की छुट्टी खतम ही नहीं हो रही। मैंने एक खाँटी भाई से पूछा "...शहजादे काम क्या करते हैं जो छुट्टी की जरूरत पड़ गई ...?" खाँटी भाई भड़क गए और गुस्से में बोले "...देखिये वो छुट्टी पर हैं बस ..." मैंने तपाक से पूछा "...किसी की लाज बचानी है ...?" खाँटी भाई थोड़ा और उखड़ गए बोले "...आप हमको मूर्ख मत समझिए..." मैंने कहा "...ठीक है गुरु यानी सर्र जी की ही भांति महामूर्ख ..." खाँटी भाई आपे से बाहर होगे बोले "...केजरीवाल हमारे गुरु नहीं हैं ..." मैंने चुप होने का इशारा करते हुए कहा "...श श श श कहीं किसी ने स्टिंग करके शहजादे तक पहुंचा दिया न तो आप न किसी कार्यकरणी के लायक रहोगे और न ही किसी अफेयर के ..." खाँटी भाई मुस्कुरा के बोले "...अरे नहीं वो ऐसे नहीं हैं ..." मैंने कहा "...सवा साल पहले ही आपके शहजादे सर्र जी के गुरमुख हो चुके हैं ..." खाँटी भाई बोले "...तो ..." मैंने जवाब देते हुए कहा "...तो मने ई कि गुरु का प्रभाव चेला पर तो पड़ेगा ही ..." खाँटी भाई बोले "...मैंने कहा न वो ऐसे नहीं हैं ..." मैंने फिर उसी अंदाज में उनसे पूछा "...फिर सर्र जी बांगलुरु सर्रके तो उधर शहजादे छुट्टी मरने क्यो चले गए ...? खाँटी भाई बोले "...ये एक संयोग भी तो हो सकता है ..." मैंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए उनसे पूछा कहा "...अच्छा ब से बंगलुरु और ब से बैंकाक ...ये भी संयोग है क्या..." खाँटी भाई भी आपियों की तरह कापार खजुआने लगे कुछ बोल नहीं पा रहे थे तो मैंने ही कहा "...देखिये इज्जत वगैरह की बात छोड़िए आपकी जमीन तो आपके शहजादे के गुरु यानी सर्रजी ने हथिया ली ..." खाँटी भाई बीच में ही बात काटते हुए बोले "...इसीलिए तो मामला जमीन अधिग्रहण का ही है ..." मैंने भी टांट कसते हुए कहा "...न सामने शहजादे दिखेंगे और न ही इज्जत खतरे में पड़ेगी..." खाँटी भाई बोले "...देखिये उनको न तो खांसी है और न ही सुगर ..." मैंने प्रतिउत्तर में कहा "...हाँ इसीलिए वो गरजू नहीं हैं शहजादे ने तो यही सीखां है ..." खाँटी भाई आपियों की तरह कापार खजुआने लगे तो मैंने कहा नमस्कार