Friday, 6 February 2015

गोईठा का नून दम, गब्बर करे मनुहार...

रायता में चोखा हींड कर मुंह में दबाए कुतुब मीनार पर चढ़ के चीख-चीख कर स्वाद लेने के लिए पहुंचे तो उसका स्वाद ही गब्बर केजरीवाल को बिगड़ा हुआ मिला। फिर क्या था केजरीवाल लगा थू-थू करने। तभी एक मूर्ख आपिये ने अपना दिमाग दौड़ाते हुए बोला "...बास इसका गोईठा पाथ दो ..." गब्बर केजरीवाल उसी खुन्नस में बोला उस मूर्ख को डांटते हुए बोला "...अबे चुप ...कहीं उस गोईठे से कोई आग सुलगा के हमारी लंका फूँक दिया तो ..." मूर्ख आपिया गब्बर की डांट सुन के सकपकाते हुए चुप हो गया लेकिन फिर बड़ी हिम्मत जुटते हुए गब्बर से पूछा "...लेकिन बास रायता में चोखा मिलने की जरूरत क्या थी ...?" गब्बर बोला "...जरूरत थी क्यों नहीं ...पिछली बार इसी गोईठे के वजह से तो 28 सीटें आईं थी ..." मूर्ख आपिया बोला तो बास आपको फिर बरेली चले जाना चाहिए था ..." गब्बर बोला "...इस बार बरेली का झुमका पहन के लंका में नाचते तो कोई नाच देखने नहीं आता ..." मूर्ख आपिये ने उत्सुकतावश पूछा "...बास नाचने की क्या जरूरत थी नौटंकी कर लेते ..." गब्बर बोला "...उसी नौटंकी के लिए हम जमा मस्जिद गए थे...लेकिन किसे पता था सब गोईठा हो जाएगा ..." ये कहते हुए गब्बर रूआँसा हो गया बोला "...देख अब इस गोईठे से नून निकालना बहुत जरूरी है ..." मूर्ख आपिया तुरंत आदेश का पालन करते हुए नून को गोईठे से अलग करने में जुट गया इसके लिए एसएमएस करके और दर मूर्ख आपियों को भी बुला लिया। नून निकालते हुए एक आपिया दूसरे मूर्ख से बोला "...गुरु इसके पहले भी कभी बास ने नून निकालने की कोशिश की है क्या ..." मूर्ख आपिया कापार खजुआते हुए बोला "...बास को यही करना था तो जमा मस्जिद गए क्यों ..." पहला मूर्ख बोला "...अबे अपना काम कर...तुझे पॉलिटिक्स समझ में नहीं आएगी ..." दूसरा मूर्ख आपिया झल्लाते हुए बोला "... ये ससुरा गोईठे से नून अलग कैसे होगा ...अब इस बास को किसने रायता में चोखा हीड़ने का आइडिया दे दिया ..." पहला मूर्ख आपिया बोला "....गब्बर को इतनी ही अकल होती तो हमको ये दिहाड़ी पर रखके रायता क्यों बंनवा के फैलवाता ...." दूसरा मूर्ख आपिया बोला "...रायता तक तो ठीक था अब ये चोखा ..." पहला मूर्ख बोला "...इसी सब काम के लिए 25000 महीना मिलता है ..." फिर दोनों मूर्ख आपियों को गब्बर ने जबदस्त फटकार लगाई "...नून अलग हुआ या नहीं ..." "...अलग कर रहे हैं बास... " कहते हुए कापार खजुआते हुए अपने काम में बड़े लगन से जुट गए ...

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