Saturday, 21 February 2015

मुन्ना मुगरी ठेकुआ ...चाभे ममता गब्बर संठ

तरकुल के पेड़ पर चढ़ के भैंस को अंडा मारना मुन्ना हज़ारे के लिए उतना कठिन नहीं रहा ...लोग-बाग बताते हैं कि अब उन्हीं के गाँव में हाथी साईकिल की सवारी करने लगी है। मुन्ना हज़ारे भी कम कमाल के नहीं है एक बार कुत्ता भी शरद ऋतु में तरकुल पर चढ़के लगा भौकने तो लंबा-चौड़ा घोटाला हो गया बड़े-बड़े सूरमा तेल नापने जा चुके हैं। ये वही शरद ऋतु वाला घोटाला है जिसके लिए मुन्ना हजारे ने अपना आपा खो दिया और अपनी अद्भुत ममता बरसाने लगे थे। याद है इसी रामलीला मैदान पर मुन्ना हज़ारे को बड़ी ममता से लोटा ले के मैदान होने आना था लेकिन आईबे नहीं किए थे। एक आपिया उस समय भी चिल्लाया था "...मुन्ना हज़ारे की जय हो ..." तभी गब्बर जरीवाल ने पिस्तौल निकाल के अपने ही कनपटी पर लगा लिया था। भाई उस समय तो स्वक्षता अभियान तो था नहीं फिर पता नहीं क्यों मुन्ना हज़ारे को क्या परेशानी हो गई थी। बाद में उन्हीं मुन्ना हज़ारे ने कोलकाता का रोशो गुल्ला खाने से भी परहेज नहीं किया भले ही ये सुनने में आया था कि हवाई चप्पल बड़ी ममतामयी लगी थी। आजकल आपिए अपनी ललचाई भूरी नजरों से पूरी ताकत से मुन्ना हज़ारे की बाट जोह रहे हैं। एक जमाना था जब मुन्ना हज़ारे ने इसी गब्बर जरीवाल को लालची, ठग, धोखैत, सट्टा का भुख्खड़ और न जाने क्या क्या उल्टा-सीधा कहा था आपिया लोग कापार खजुआते हुए बताते हैं कि वो सब झूठ था। भाई अगर वो सब झूठ था तो अब क्या सब सही हो रहा है ? एक बड़े आपिया बता रहे थे "...ये सब सत्य और ईमानदारी का खेल है ..." मैंने उनसे पूछा "...मुन्ना हजारे उस समय झूठे थे या अब ...?" ये प्रश्न सुनते ही आपिया भड़क गया और गुस्से में बोला "...वो मुन्ना हज़ारे नहीं हैं ..." मैंने भी तैश में बोला "...तो मैं क्या करूँ एमबीबीएस तो गब्बर की ममता ने ही कराया है न  ..."  आपिया अपना आपा खोने लगा बड़े गुस्से में पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ..." मैंने उससे समझाते हुए कहा "...भाई देख सट्टा से पैसा पैसा से सट्टा ..." आपिया और भड़क गया बोला "...सट्टा नहीं सत्ता बोलिए ..." मैंने शांति से कहा "...अच्छा भाई सट्टा नहीं सत्ता...ये बोलते हुए किसे नारा खोला था...मैंने नारा बोला है नाड़ा नहीं... समझा ..!." आपिया बोला "...अब इस नारे में कोई दम नहीं ..." मैंने उससे पूछा "...मुन्ना हज़ारे शरद ऋतु के चिट फ़ंड वाला पैसा ..." ये सुनते ही जैसे पगला ही गया और बात कटते हुए बोला "...आपके कहने का मतलब है दिल्ली चुनाव शारदा घोटाले का पैसा लगा है ...?" मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...नहीं मैंने नहीं कहा जैसे मुन्ना हज़ारे को कोलकाता का रोशों गुल्ला बहुत पसंद है ...गब्बर को भी सोन्देश बहुत भाता रहा है ...बस बात इतनी सी है..." आपिया फिर अपने कापार में चारो उंगली लगा के मगन हो गया ...मैंने कहा नमस्कार....      

Friday, 20 February 2015

चोखा चटनी आपिया ... वाई-फाई फोकट नून...

फ्री वाई-फ़ाई का जबर्दस्त फायदा अतुल अंजान ने उठा के भाग लिया तो आपिए सकते में हैं। एक आपिया बता रहा था इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। मैंने उससे पूछा कैसा फर्क ".. जीतते ही सर्रर्र जी घोषणा कर दी थी ..." मैंने उससे पूछा "...कैसी घोषणा ...?" आपिया बोला "...सर्र जी ने कहा था उनको बहुत डर लग रहा है ..." मैने उससे पूछा "...तो कितने अतुल अंजाने हैं आपियों में ..." आपिया बोला "...जो अनजाने नहीं थे वो तो ईमानदारी से भाजपा में चले गए ...जो बचे हैं उनपर भरोसा करना मुश्किल है ..." मैंने आग में घी डालते हुए कहा "...मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है जी ..." आपिया बोला "...सर्रर्र जी पहले से डाउट था ...डिग्गी के समय से ही ..." मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा "...अच्छा ...! लगता है आपके सर्रर्र जी अपने वाई-फ़ाई को शर्माने का हुकुम जारी कर रखे हैं स्ट्रिक्ट मोड मे ..." आपिया भड़क गया बोला "...सर्रर्र जी ऐसा नहीं कर सकते ..." मैंने चुटकी लेते हुए कहा "...काहे गुरु मुफ्त के सिग्नल के फिराक में हो ..." आपिया शर्माने लगा बहुत शर्माने के बाद धीरे से बोला "...आपिए मेरे पीछे पड़े हैं ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...तू भी सर्वीलान्स पर है ...?" आपिया भावुक हो गया "...डिग्गी के समय से ही ये कॅम्पेन चल रहा है ...वाई-फाई कब्जियाने की ..." मैंने कहा "...इसीलिए 15 लाख सीसीटीवी लगाने की बात थी ...ताकि आपियों की वाई-फ़ाई सुरक्षित रहे ...!" आपिया अनुरोध करते हुए बोला "...हम पर आप शक मत कीजियेगा ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...क्यों कहीं तू कोंग्रेसी तो नहीं ...?" आपिया मुझसे चुप रहने का ज़ोर - ज़ोर से इशारा करते हुआ कहा "...चुप रहिए चुप रहिए ..." मैंने कहा "...लेकिन चुनाव जीतने के बाद भी आपके सर्रर्र जी ने तो बड़े ताव में कहा था कि बहुत बहुत शर्माती हैं सामने नहीं आती...  " आपिया बोला "...आनंद प्रधान जी भी ऐसा दावा..." मैंने आपिए से बीच में बात काटते हुए कहा "... तो तू क्या चाहता है कि तेरे सर्रर्र जी अपने फ्री वाई-वाई का सिग्नल खाँटी भाई कॉंग्रेसियों, सांपियों, बसांपियों, राजदियों, जूदियों आदि सभी महाभ्रष्टाचारियों के लिए ओपेंन कर दें ..?" आपिया बोला "...लेकिन पत्रकारों की भी ईज्जत है ...आखिर सर्रर्र जी भी तो महाभ्रष्टाचारी हैं ..." मैंने उससे पूछा "...आपिए -कॉंग्रेस- महाभ्रष्टाचार और फोकट वाई-फ़ाई से ईज्जत का क्या लेना देना ..."  आपिया फिर मेरा मुंह ताकने ताकते हुए अपना कपार खजूआने लगा ...खजुआता ही रहा ...मैंने भी वहाँ से फूट लिया ...

Wednesday, 18 February 2015

माले मुफ्त ...गरीबी गरमा-गरम

गरीबों की जिंदगी "मुफ्त " में नीलाम करने पर उतारू कुछ लोगों ने जब गधे को हवाई जहाज बता के गरीबों को लंगड़ी मारने लगे गरीब बोला "...सरकार जिंदगी की कुछ तो कीमत लगाओ ..." रामलीला मैदान मे शपथ के बाद गरीब को उत्तर दिया "...मुफ्त और हराम के बाद कीमत तो वही लगेगी जो हजम करोगे ..." गरीब बोला "...सरकार हमने कब मुफ्त में मांगा था ...जो हमारी जिंदगी मुफ्त में हराम किए हो ..." महामूर्ख सर्रर्र जी के बकलोल चमचे ने उत्तर दिया "...तुम गरीब हो ये कभी मत भूलना ..." गरीब ने पलट के पूछा "...काहे साहब ...?"  बकलोल चमचे ने पलट के बोला "...गरीब तो गरीब ही रहेगा ..." गरीब बोला '...क्यों साहब अदानी मजदूर से अरबपति बन सकता है तो हम क्यों नहीं ..." सर्रर्र जी के बकलोल चमचे को उत्तर देते नहीं बना तो महामूर्ख सर्रर्र जी  ने खुद मोर्चा संभाला "...देख भाई पहले तो हम मूर्ख नहीं हैं दूसरे तू गरीब है ये हमेशा याद रख ..." गरीब तैश मे आ गया और बोला "...साहब हम ...." गरीब की बीच बात काटते हुए बकलोल चमचे ने कहा "...तू गरीब है तो तुझे तो तेरा हक तो मुफ्तखोरी पर ही है ..." सर्रर्र जे तेजी से निकल कर भागने लगे तो गरेबों ने घेर लिया बोला "...आप मूर्ख हो या महामूर्ख हमको इससे हमको कोई मतलब नहीं ..." सर्रर्र जी का पारा चढ़ने लगा साथ में सुगर लेवल भी लेकिन बोले "...कोई नसीब वाला ही तेरा नसीब बना सकता है ...हम तो ठहरे बदनसीब लिहाजा लोगों बदनसीब ही बनना होगा ..." गरीबों को कुछ समझ में नहीं आया बोला "...मतलब हम सभी मुफ्त में मारे जाएंगे ...!" सर्रर्र जी अपना कपार खजुआते हुए बोले "...हम तो मुफ्तवादी हैं जी ...हम लोगों मुफ्तखोर गरीब ही बनाएँगे जी ..और जिंदगी भी मुफ्त मे नीलम करेंगे..." गरीबों ने कहा "...काले धन का काला चंदा अमीरों ने दिया तो हमने भी पसीने की कमाई दी ..."  महामूर्ख....रर्र जी बोले "...बिलकुल दिया है जी इसीलिए तुम मुफ्त की श्रेणी मे ही रहोगे और बाकी लोगो को भी उसी स्तर पर लाना हमारा धर्म है ...."  गरीबों ने पूछा "...तो क्या हम कभी भी अडानी-अंबानी नहीं बन सकते ...?" महामूर्ख सर्रर्र जी बोले "...हमने  इसीलिए मुफ्तवाद शुरू किया ...मुफ्त खाओ गरीब बनो बने रहो मुझे मुफ्त में अपना वोट देते रहो..." गरीबों ने सर्रर्र जी को टांग लिया फिर पूछा "...पहले बताओ कुछ तो बताओ कुछ तो कीमत लगाओ हमारी हमारे जिंदगी की ..." सर्रर्र जी ने अपनी बाहें फैला दी बोले "...आ गले लग जा ..." गरीब पीछे भागने लगे "...हमे मुफ्त में नीलाम नहीं होना ...मुफ्त में मरना भी नहीं ...." सर्रर्र जी लोटे में मुफ्त का पानी लेने का अनुरोध मुफ्त में करते रहे ...उनका लोटा मुफ्त में नीलाम भी नहीं हो रहा था ...पानी पता किस लिए और किसके चुल्लू का इंतजार कर रहा है मुफ्त में ...

Sunday, 15 February 2015

खाजे खोंपड़ आपिया ...फोड़ा दर्प फकीर

आपिया चिल्लाया "...हम मूर्ख नहीं हैं ..." मैंने भी उसी टोन में उससे कहा "...तो इसमे चिल्लाने वाली बात क्या है ..." आपिया बोला "...क्यों नहीं है ..." मैंने उससे पूछा "...कुक्कुर के पोंछ पर मोमबत्ती फूँक के मैच देखा क्या ..." आपिया बोला "...पाकिस्तान वाले टीवी फोड़ रहे हैं ..." मैंने कहा "...इसी टीवी पर पाकिस्तानियों ने केजरीवाल को जीतते देखा था और मारे खुशी के मिठाई बांटी थी..." आपिया बोला "...केजरीवाल की जीत एक अंतर्राष्ट्रीय खुशी है ..." मैंने कहा "...तब तो लोकसभा चुनाव परिणाम पर भी पाकिस्तानिए अपना टीवी फोड़े होंगे ..." आपिया बोला "...केजरीवाल की हार एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश है ...सब मिले हुए हैं जी ..."  मैंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए उससे पूछा "...ये तो गज़ब हो गया अब पाकिस्तानिए केजरीवाल की खुशी कैसे देखेंगे ...?" आपिया बोला "...इसीलिए तो सर जी को नवाज शरीफ ने बात करने के लिए बुलाया ..." मैंने उसे टोकते हुए कहा "...बुलाया नहीं है न्योता दिया है बुखारी की तरह ..." आपिया अपना कपार खजुआते हुए बोला "...न्योता और बुलावा मे फर्क है क्या ...?" मैंने उससे कहा "...अभी तो तू चिल्ला रहा था कि हम मूर्ख नहीं हैं ..." आपिया बोला "...आप यकीन कीजिये भारत की पाकिस्तान पर जीत मोदी-लहर के कारण नहीं हुई ..." मैंने उससे तपाक से पलट कर पूछा "...तुझे कैसे पता ...?" आपिया बोला "...सर जी ने शपथ ग्रहण समारोह में शुभकामना दी थी ..." मैंने उससे कहा "...तो इससे ये कहाँ साबित होता है भारतीय टीम मोदी-लहर के कारण नहीं जीती ..." आपिया लगा अपना दिमाग दौड़ाने बहुत दौड़ाने के बाद बोला "...दिल्ली मे हमारी सरकार बनी है इसीलिए मोदी लहर के कारण नहीं  ..."  मैंने कहा "...अच्छा  तो केजरीवाल लहर के कारण पाकिस्तान हार गया ...?" मेरे इस प्रश्न पर आपिया सकपका गया थोड़ी देर बाद बोला "...सर जी नवाज शरीफ के न्योते पर उनसे बात करेंगे हम मुद्दे को सुलझा लेंगे ..." मैंने कहा "...उस पर तो प्रधानमंत्री जी अधिकृत है ..." आपिया बोला "....लेकिन न्योता तो सर जी को मिला है ..." मैंने उससे पूछा "...इसीलिए आपके सरजी ने भारत की जीत पर ट्वीट करके अपनी खुशी नहीं जताई...?" आपिया बोला "...सरजी को फालतू काम करने की आदत नहीं ..." मैंने उससे कहा "...इसीलिए सीएम बनने के बावजूद कोई ज़िम्मेदारी नहीं लिया ..." आपिया बोला "...सरजी नवाज शरीफ के न्योते का बहुत सम्मान करते हैं और हम मुद्दे को सुलझा लेंगे ..." मैंने उससे पूछा "...कुक्कुर के पुंछ में मोमबत्ती फूँकने से जिन्न भागते हैं या आते हैं ...?" आपिया उत्तर देने के बजाय अपना कपार खजुआने लगा ...मैंने कहा नमस्कार 

Thursday, 12 February 2015

चौखट जान फंसरी...गाना गए कजरी ????

चलो भाई मान लिया कि केजरीवाल झूठ नहीं बोलते लिहाजा वो जो कुछ भी कहेंगे सच कहेंगे और सच के सिवा कुछ नहीं कहेंगे। उन्होने दिल्ली विधान सभा चुनावों की मतगणना के ठीक पहले ट्वीट किया था "...उनके पास इस बात के सुबूत हैं कि ईवीएम की माइक्रोचिप बदली गई है उनके किसी वालण्टीयर ने भाजपा के वोटों से भरे हुए  माइक्रोचिप बदलते हुए किसी व्यक्ति का विडियो बनाया है जो उनके पास है ..." अब केजरीवाल कह रहे हैं तो सच ही होगा उनके पास वो विडियो भी निश्चित रूप से होगा लिहाजा जांच तो हो ही जानी चाहिए जांच इसलिए भी जरूरी है इस सुनामी में भी केजरीवाल की जीत का अंतर बढने के बजाय लगभग पिछले चुनाव जितना ही सामान्य है किसी भी आपिए ने रिकार्ड जीत हासिल नहीं की और न ही किसी भाजपाई की जमानत जब्त हुई है। अबतक का ये इतिहास रहा है कि जब किसी की लहर चलती है उस पार्टी के नेता और कुछ लोग रिकार्ड मतों से जीतते हैं पिछले दिल्ली विधान सभा चुनाव में भी दो रिकार्ड जीत भाजपा विधायकों के ही नाम है लेकिन इस बार किसी भी आपिए ने रिकार्ड जीत हासिल नहीं की है। आप याद कीजिये वीपी सिंह के समय जनता दल लहर में खुद वीपी सिंह और रमविलास पासवान ने रिकार्ड मतों से जीत हासिल थी। इस बार लोकसभा चुनावों में खुद मोदी जी ने बदोदरा से रिकार्ड जीत हासिल की और वाराणसी से भी उनकी जीत वाराणसी के लिए ऐतिहासिक और सबसे बड़ी जीतों मे से जीत है।

परिणाम तो केजरीवाल की उम्मीद के खिलाफ है ही इसीलिए उन्होने चुनाव जीतते ही कहा था "... हमें बहुत डर लग रहा है..."। सारे एक्ज़िट पोल आपियों को जीता हुआ दिखा रहे थे लेकिन टीवी पर बहसों में आपियों के चेहरे से हवाईया उडी हुई थीं आलम ये था कि चुनाव जीतने के बाद भी एक आपिया नेता से एंकर को कहना पड़ा "...अरे अब तो आप मुस्कुराईए आपने शानदार जीत अर्जित की है ..." ठीक इसके उलट भाजपईयों के चेहरे पर न तो कोई शिकन है और न ही कोई दुख का भाव। तो फिर केजरीवाल और आपिए चुनाव जीतने के बाद भी इतने डरे हुए क्यों हैं ? उसी डर का एक आलम ये भी मनीष सिसोदिया उपमुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं जबकि एक ही पार्टी की सरकार है और प्रचंड बहुमत की सरकार है। ये उपमुख्यमंत्री का पद कब और किसलिए होता है ये सभी को पता है।

क्या दिल्ली में वास्तव में भाजपा इतनी कमजोर है दिल्ली में कि मात्र तीन सीट तक सिमट जाए और किसी की जमानत तक जब्त न हो ? भाजपा की हार में अस्वाभाविक रूप से एकरूपता है जो चुनावी इतिहास में न सिर्फ अनोखा है बल्कि अप्राकृतिक और अस्वाभाविक भी है। वैसे जो भी सरकार केंद्र मे होती आईबी से भी सर्वेक्षण कराती है इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी वीपी सिंह, नरसिम्हा राव मनमोहन सिंह सभी ने कराया इसी आधार पर प्रियंका गांधी ने लोक सभा चुनावों में ऑफ दी रिकार्ड कहा था कि जमीनी हालत कॉंग्रेस के लिए बहुत बुरे हैं। आईबी का सर्वेक्षण आज तक कभी भी गलत नहीं हुआ है उसे तो ये भी पता होता है कौन किसको वोट देगा या देता है। इस बार आईबी ने साफ कहा था भाजपा 45 सी 50 सीटे मिलेंगी वही आपिए 14 सीट से अधिक नहीं बढ़ पाएंगे हालात ये भी थे कि केजरीवाल और मनीष सीसोदिया तक चुनाव हार रहे थे लेकिन उन्हें भाजपा ने जानबूझ कर जिता दिया। शायद किसी ने गौर किया कि नहीं मतदान केन्द्रों पर भाजपा कार्यकर्ता गए ही नहीं और तो और प्रचंड भाजपा समर्थकों से भी आम आदमी पार्टी को जिताने की अपील की गई जिनहोने बड़ी मुश्किल से माना और बड़े बेमन से आपियों को वोट किया और यही वोटों का अंतर 57 विधान सभा क्षेत्रों में है।

एक महीना पहले बाबी नक़वी का अंतर्राष्ट्रीय अखबार गल्फ न्यूज़ में छपा लेख अपनी जगह है, 2-4 महीने बाद ही केजरीवाल का भ्रष्टाचार के आरोप में क्या होगा तब उनकी जगह उपमुख्यमंत्री मनीष सीसोदिया होंगे वो सब अलग बात है बात यहाँ ये है कि अब केजरीवाल न चाहते हुए भी मोदी विरोधी भ्रष्टचारी क्लब में शामिल हो चुके हैं ममता, लालू, नितीश, मुलायम, मायावती, जयललिता, करुणानिधि, सीपीआई, सीपीएम आदि के साथ हो चुके हैं और उनकी हैसियत अब इंकार करने है ही नहीं क्योंकि इन लोगों ने न सिर्फ मानव संसाधन के रूप मे अपने कार्यकर्ताओं का सहयोग किया बल्कि बहुत बड़ा आर्थिक सहयोग भी दिया है और ऊपर से प्रचड़ जीत लिहाजा केजरीवाल अब कहीं भाग भी नहीं सकते। सारे के सारे भ्रष्टाचारी अब केजरीवाल को आगे रख कर पीछे से राजनीति करेंगे और केजरीवाल कुछ नहीं कर सकते उल्टे केजरीवाल की ईमानदारी के ढोंग का फायदा ये सारे भ्रष्टाचारी खुल के उठाएंगे यही कारण है कि श्री शांति भूषण ने केजरीवाल को बधाई नहीं दी। केजरीवाल ने टिकट भी उन दागी और संभावित दागी लोगों को दिया गया जिन्हें ये भ्रष्टाचारी- मोदी विरोधी चाहते थे। आज केजरीवाल भी गैर भाजपवाद का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

यकीन मानिए केजरीवाल भाग जाना चाहते हैं इसीलिए शपथ ग्रहण से पहले ही वो टकराव का रास्ता अख़्तियार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने से पहले ही धरना-प्रदर्शन की आहटें सुनाई देने लगी हैं। आज प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के बाद केजरीवाल की क्या स्थिति है आप समझ सकते हैं।      

Friday, 6 February 2015

गोईठा का नून दम, गब्बर करे मनुहार...

रायता में चोखा हींड कर मुंह में दबाए कुतुब मीनार पर चढ़ के चीख-चीख कर स्वाद लेने के लिए पहुंचे तो उसका स्वाद ही गब्बर केजरीवाल को बिगड़ा हुआ मिला। फिर क्या था केजरीवाल लगा थू-थू करने। तभी एक मूर्ख आपिये ने अपना दिमाग दौड़ाते हुए बोला "...बास इसका गोईठा पाथ दो ..." गब्बर केजरीवाल उसी खुन्नस में बोला उस मूर्ख को डांटते हुए बोला "...अबे चुप ...कहीं उस गोईठे से कोई आग सुलगा के हमारी लंका फूँक दिया तो ..." मूर्ख आपिया गब्बर की डांट सुन के सकपकाते हुए चुप हो गया लेकिन फिर बड़ी हिम्मत जुटते हुए गब्बर से पूछा "...लेकिन बास रायता में चोखा मिलने की जरूरत क्या थी ...?" गब्बर बोला "...जरूरत थी क्यों नहीं ...पिछली बार इसी गोईठे के वजह से तो 28 सीटें आईं थी ..." मूर्ख आपिया बोला तो बास आपको फिर बरेली चले जाना चाहिए था ..." गब्बर बोला "...इस बार बरेली का झुमका पहन के लंका में नाचते तो कोई नाच देखने नहीं आता ..." मूर्ख आपिये ने उत्सुकतावश पूछा "...बास नाचने की क्या जरूरत थी नौटंकी कर लेते ..." गब्बर बोला "...उसी नौटंकी के लिए हम जमा मस्जिद गए थे...लेकिन किसे पता था सब गोईठा हो जाएगा ..." ये कहते हुए गब्बर रूआँसा हो गया बोला "...देख अब इस गोईठे से नून निकालना बहुत जरूरी है ..." मूर्ख आपिया तुरंत आदेश का पालन करते हुए नून को गोईठे से अलग करने में जुट गया इसके लिए एसएमएस करके और दर मूर्ख आपियों को भी बुला लिया। नून निकालते हुए एक आपिया दूसरे मूर्ख से बोला "...गुरु इसके पहले भी कभी बास ने नून निकालने की कोशिश की है क्या ..." मूर्ख आपिया कापार खजुआते हुए बोला "...बास को यही करना था तो जमा मस्जिद गए क्यों ..." पहला मूर्ख बोला "...अबे अपना काम कर...तुझे पॉलिटिक्स समझ में नहीं आएगी ..." दूसरा मूर्ख आपिया झल्लाते हुए बोला "... ये ससुरा गोईठे से नून अलग कैसे होगा ...अब इस बास को किसने रायता में चोखा हीड़ने का आइडिया दे दिया ..." पहला मूर्ख आपिया बोला "....गब्बर को इतनी ही अकल होती तो हमको ये दिहाड़ी पर रखके रायता क्यों बंनवा के फैलवाता ...." दूसरा मूर्ख आपिया बोला "...रायता तक तो ठीक था अब ये चोखा ..." पहला मूर्ख बोला "...इसी सब काम के लिए 25000 महीना मिलता है ..." फिर दोनों मूर्ख आपियों को गब्बर ने जबदस्त फटकार लगाई "...नून अलग हुआ या नहीं ..." "...अलग कर रहे हैं बास... " कहते हुए कापार खजुआते हुए अपने काम में बड़े लगन से जुट गए ...

Wednesday, 4 February 2015

वो कहाँ है ...?

"मेरी तरह" सबसे सटीक विश्लेषण के आधार पर चुनाव का आकलन करने वाली सर्वे एजेंसी "चाणक्य" के सर्वे का कोई आता -पता नहीं इस बार दिल्ली विधान सभा चुनाव में। केवल इसी एजेंसी ने "मेरी तरह" लोकसभा चुनावों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिया था बाकी किसी ने भी नहीं। आश्चर्य जनक रूप से इस बार न्यूज़ 24 ने "चाणक्य" के बजाय बोगस ISOME की सेवाएँ ली। चाणक्य को छोड़ कर सभी एजेंसियों के सर्वेक्षण वैसे ही होते हैं जैसे कोई सियार शेर को शिकार करने का तरीका बतावे और आला दर्जे की बोगस हैं इसीलिए इनके सर्वेक्षण के सफलता की दर 5% से भी कम है और ये 95% से अधिक बार बिलकुल असफल रही हैं। मैंने नेट पर भी बहुत खोजा लेकिन किसी भी "अनसोशल" मीडिया (प्रेस टीवी रेडियो आदि ) ने चाणक्य की सेवाएँ नहीं लीं जो अपने आप में  "अनसोशल मीडिया" की भूमिका पर बहुत बड़ा और गंभीर संदेह उत्पन्न करता है। ये एक ऐसा तथ्य है जिससे ये स्पष्ट होता है "अनसोशल मीडिया " दिल्ली की जनता का दिल्ली की जनता से बहुत बड़ा तथ्य छिपा रही है।

"चाणक्य" के मैदान में न होने से एक तथ्य तो स्पष्ट तौर पर उभरता है कि दिल्ली विधान सभा चुनाव का सारा खेल किसी खास व्यक्ति के पक्ष में जबरदस्ती करने का प्रयास किया जा रहा है जिसने अपने आप को "नकारा" के खिताब से बचने के लिए "भगोड़ा" का लबादा ओढ़ रखा है। वैसे मेरे अपने आकलन के अनुसार तो "अनसोशल मीडिया" के हिसाब से कोई माहौल दिल्ली में कहीं भी नहीं दिखता और संभवतः आम जनता को भी आश्चर्यचकित है ऐसे "बेहूदे-अवैज्ञानिक-कृत्रिम ओपीनियन पोल" को देख कर।

आप जरा गौर करें -
1 किसी भी सर्वे एजेंसी के पास कुख्यात और विख्यात में अंतर करने के विधि नहीं है या उनके पास ऐसा कोई एक्सपर्ट है ही नहीं।
2 प्रश्नावली भी ऐसी होती है जिसे कक्षा 5 में पढ़ने वाला एक बैक बेंचर छत्र भी बना सकता है बिलकुल बायस्ड और सतही।
3 उत्तरदाता यदि झूठा आंकड़ा दे तो उसका विश्लेषण इनके एक्सपर्ट कर ही नहीं सकते लिहाजा हमेशा ये गलत साबित होते हैं।