Sunday, 11 January 2015

आधा गदहा घोडा हाँके डींग...

कुत्ता पालतू बनने के बाद मालिक के प्रति अराजकता का पूर्णतः त्याग कर देता है। लेकिन सड़क पर गिरोह बना कर हमेशा भोजन की तलाश मे घूमने और फुटपाथ पर लालचवाश स्वाननिद्रा लेने वाले कुत्ते न तो कभी पालतू बनते हैं और ही उन्हें कोई पालतू बनाना चाहता है। उन अराजक कुत्तों को  भौकने पर कोई आपत्ति करता है तो वे उल्टे उसे काटने दौड़ पड़ते हैं ठीक उसी अपने अंदाज में। आखिर कोई मालिक या माई - बाप होता तो ऐसा करते ही नहीं। एक आपिया चिल्लाया "...महात्मा गांधी ने भी खुद को अराजक कहा था ..." मैंने भी उसी अंदाज में उससे पूछा "...बैरिस्टर रहते किया या म्लेच्छों (अंगरेजों) की नौकरी करते हुए किया ...?" आपिया बोला "...उन्होने संघर्ष करते हुए ऐसा कहा था ..." तो मैंने कहा "...तो तुम भी संघर्ष क्यों नहीं करते ..." आपिया बोला अपने सपने साकार करने का अधिकार हमें भी है..." मैंने कहा "...महात्मा गांधी ने भी सपने को साकार किया लेकिन जिसका खाया उसके प्रति कभी अराजक नहीं हुए तो केजरीवाल ऐसा क्यों कर रहे है...?" आपिया बोला "...ये हमारा स्टाइल है ..." मैंने टांट कसते हुए कहा "...अच्छा जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करने की आदत है ..." मूर्ख आपिया बोला "...राजनीति मे सब जायज है ..."  फिर उसी टोन मे उससे पूछा "...केजरीवाल फिर तो मुख्यमंत्री की कुर्सी में 49 छेद भी कर दिये होंगे ..." ये सुनते ही आपिया सकपका गया और बड़े सहमते हुए जवाब दिया "...ये मुझे नहीं पता ..." मैंने उससे कहा "...काहे नहीं पता...?  महात्मा गांधी खुद को अराजक कहे ये पता है...? आपिया बोला "...हाँ गांधी जी की ये बात पता है..." मैंने कहा "...जब तुमको महात्मा गांधी ये बात पता है तो ये बात भी पता होनी चाहिए महात्मा गांधी दिल्ली या गुजरात के मुख्यमंत्री कभी नहीं थे ..." आपिया कनफ्यूज हो कर कपार खजुआने लगा फिर बोला "...फिर तो ....!" मैंने बीच में उसकी बात काटते हुए कहा "...हाँ बिल्कुल अगर अराजक बनने का इतना ही शौक है तो वही करना पड़ेगा ..." आपिए ने पलट कर गुस्से में मुझसे पूछा "...क्या वही करना पड़ेगा ...?" मैंने आराम से उसका उत्तर दिया "...महात्मा गांधी ने कभी चुनाव नहीं लड़ा और न ही लड़ने की इच्छा व्यक्त की ..." आपिए के दिमाग में कुछ नहीं घुसा उसी उपेक्षा के लहजे में उसने कहा "...तो ..." मैंने कहा "...तो मतलब यही कि अराजक बनो या फिर चुनाव लड़ो ...पालतू बनने के बाद मालिक को काटने की कोशिश करोगे तो मालिक सीधे खोपड़ी में गोली मरेगा ..." आपिया सफाई देते हुए बोला "...लेकिन हम ईमानदार लोग हैं ..." मैंने कहा "...तो ईमानदारी से करो न बेईमानी से ईमानदारी दिखाओगे तो ...तो मुश्किल हो जाएगी..." आपिया फिर कनफ्यूज हो गया और कपार खजुआने लगा ...ज़ोर ज़ोर से खजुआने लगा ...  

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