चुनाव में गब्बर की नाव ...
एक बार गब्बर केजरीवाल से किसी बच्चे (वो बच्चे जिसकी वो कसम नहीं खाए थे ) ने पूछा था कि अंकल लुंगी को अगरेजी में क्या कहते हैं तो केजरीवाल उसका उत्तर उसी तरह नहीं दे पाए थे जैसे भ्रष्टाचार, जनलोकपाल, स्वराज्य (शायद सुराज) पर नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन ये बात उनके मन मे उसी तरह बैठ गई थी जैसे शीला दीक्षित, कलमाड़ी, ए राजा आदि का भ्रष्टाचार उनके मन में हमेशा के लिए बैठ गया था। उनकी श्रीमती जी ने भी गब्बर को बहुत नहीं समझाया तो पड़ोसियों बहुत आश्चर्य हुआ आखिर ये कैसा पति है जो अपने मन में कितने ही महाभ्रष्टों को बैठा लिया है और ये कैसी पत्नी है कि पति को समझाती नहीं। लेकिन जिस किसी ने भी गब्बर केजरीवाल को समझाने की कोशिश की गब्बर ने उसे लात मार के खदेड़ दिया सिवाय कुछ लोगों के जैसे योगेंदर चचा सलीम। कुछ लोग तो बताते हैं कि गब्बर ने सलीम चचा का गोडवे धो के छान लिए थे और जब वही छेना जब पीए हैं तो तब सलीम चचा के जान मे जान आया है और गब्बर के गले लगे हैं।
कुछ गुणगानी अपिए कहते हैं इस बार की ठंडी में गब्बर को ठंड नहीं लग रही है लेकिन मफ़लर तो केवल इसलिए है कि कुछ गले में फंसा हुआ है जिसे दिखना खतरनाक हो सकता है लिहाजा मफ़लर जरूरी है। लेकिन माता जी हैं कि पुत्रमोह माता प्रवृत्ति है लिहाजा शीला जी ने अपने पुत्र को आशीर्वाद देते हुए कह डाला कि बुरे वक्त में काँग्रेस का साथ मिलेगा ठीक वैसे ही जैसे गांधारी ने दुर्योधन को आशीर्वाद दिया था। यही फंसरी है जो इस बार गले में फंसा है और सर्दी बहुत कम लग रही है। वैसे महाभारत में इसका वर्णन है कि गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन को नग्नवस्था में बुलाया था आशीर्वाद देकर शरीर को वज्र जैसा कठोर बनाने के लिए लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने चालबाजी से दुर्योधन को नग्नता से बचा कर कमर का हिस्सा वज्र होने से रोक दिया और वो कमजोर रह गया। एक आपिया बता रहा था माता जी के लिए गब्बर ने बहुत कुछ किया है ब्याज सहित किया है उनका भ्रष्टाचार तो अपने मफ़लर में छिपाया ही है उनके चमचों का भी भ्रष्टाचार अपने में समेट लिया है इसीलिए दू गो स्वेटर पहनना पड़ता है गब्बर केजरीवाल को।
चुनाव के समय पैसे की बहुत जरूरत होती है लिहाजा केजरीवाल जूता नहीं पहनते मोजा पर सेंडिल पहनते हैं गुणगानी आपिए बताते हैं कि गब्बर जूता किराए पर चलाते हैं इससे भी कुछ करोड़ पैसा मिल जाता है जिससे उनके चुनाव आलीशान खर्चा निकलता है कुछ लोग सोच रहे होंगे कि जूता भाड़े पर लेता कौन है तो गुणगानी आपिए बताते है कि वही लोग जो 12 रूपिया में 12 करोड़ काला का सफ़ेद बनाना चाहते हैं लेकिन गब्बर का सर्टिफिकेट उनको ईमानदार बनाने का दावा करता है तो भ्रम ही सत्य है गब्बर केजरीवाल भी किसी का नाम है।
एक बार गब्बर केजरीवाल से किसी बच्चे (वो बच्चे जिसकी वो कसम नहीं खाए थे ) ने पूछा था कि अंकल लुंगी को अगरेजी में क्या कहते हैं तो केजरीवाल उसका उत्तर उसी तरह नहीं दे पाए थे जैसे भ्रष्टाचार, जनलोकपाल, स्वराज्य (शायद सुराज) पर नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन ये बात उनके मन मे उसी तरह बैठ गई थी जैसे शीला दीक्षित, कलमाड़ी, ए राजा आदि का भ्रष्टाचार उनके मन में हमेशा के लिए बैठ गया था। उनकी श्रीमती जी ने भी गब्बर को बहुत नहीं समझाया तो पड़ोसियों बहुत आश्चर्य हुआ आखिर ये कैसा पति है जो अपने मन में कितने ही महाभ्रष्टों को बैठा लिया है और ये कैसी पत्नी है कि पति को समझाती नहीं। लेकिन जिस किसी ने भी गब्बर केजरीवाल को समझाने की कोशिश की गब्बर ने उसे लात मार के खदेड़ दिया सिवाय कुछ लोगों के जैसे योगेंदर चचा सलीम। कुछ लोग तो बताते हैं कि गब्बर ने सलीम चचा का गोडवे धो के छान लिए थे और जब वही छेना जब पीए हैं तो तब सलीम चचा के जान मे जान आया है और गब्बर के गले लगे हैं।
कुछ गुणगानी अपिए कहते हैं इस बार की ठंडी में गब्बर को ठंड नहीं लग रही है लेकिन मफ़लर तो केवल इसलिए है कि कुछ गले में फंसा हुआ है जिसे दिखना खतरनाक हो सकता है लिहाजा मफ़लर जरूरी है। लेकिन माता जी हैं कि पुत्रमोह माता प्रवृत्ति है लिहाजा शीला जी ने अपने पुत्र को आशीर्वाद देते हुए कह डाला कि बुरे वक्त में काँग्रेस का साथ मिलेगा ठीक वैसे ही जैसे गांधारी ने दुर्योधन को आशीर्वाद दिया था। यही फंसरी है जो इस बार गले में फंसा है और सर्दी बहुत कम लग रही है। वैसे महाभारत में इसका वर्णन है कि गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन को नग्नवस्था में बुलाया था आशीर्वाद देकर शरीर को वज्र जैसा कठोर बनाने के लिए लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने चालबाजी से दुर्योधन को नग्नता से बचा कर कमर का हिस्सा वज्र होने से रोक दिया और वो कमजोर रह गया। एक आपिया बता रहा था माता जी के लिए गब्बर ने बहुत कुछ किया है ब्याज सहित किया है उनका भ्रष्टाचार तो अपने मफ़लर में छिपाया ही है उनके चमचों का भी भ्रष्टाचार अपने में समेट लिया है इसीलिए दू गो स्वेटर पहनना पड़ता है गब्बर केजरीवाल को।
चुनाव के समय पैसे की बहुत जरूरत होती है लिहाजा केजरीवाल जूता नहीं पहनते मोजा पर सेंडिल पहनते हैं गुणगानी आपिए बताते हैं कि गब्बर जूता किराए पर चलाते हैं इससे भी कुछ करोड़ पैसा मिल जाता है जिससे उनके चुनाव आलीशान खर्चा निकलता है कुछ लोग सोच रहे होंगे कि जूता भाड़े पर लेता कौन है तो गुणगानी आपिए बताते है कि वही लोग जो 12 रूपिया में 12 करोड़ काला का सफ़ेद बनाना चाहते हैं लेकिन गब्बर का सर्टिफिकेट उनको ईमानदार बनाने का दावा करता है तो भ्रम ही सत्य है गब्बर केजरीवाल भी किसी का नाम है।
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