Saturday, 10 January 2015

प्रधानमंत्री नरेंद्र और नकलची भागेंद्र

कुतुब मीनार पर लोटा फेकने के शौकीन गब्बर केजरीवाल 12 मई 2014 को बनारस में चुनाव के दिन माथे पर त्रिपुंड लगाए घूम रहे थे तो लंगोट कसे बनारसी लोगों को अच्छा बिल्कुल नहीं लगा था उसी दिन बनारस के लोगों को लग गया था कि गब्बर भले ये कह रहे हों कि लोकसभा का चुनाव हारे या जीते बनारस के लोगों की मरते दम तक सेवा करते रहेंगे लेकिन ये आदमी जल्दी ही लोटा फेंक के भागेगा जैसे दिल्ली से भागा था और हुआ भी वही। और तो और ये वादा गब्बर ने त्रिपुंड माथे पर त्रिपुंड लगा के किया था तब भी लोगों ने विश्वास नहीं किया। आज वही गाजियाबाद का गब्बर दिल्ली में त्रिपुंड की तर्ज पर साफा बांध के घूम रहे हैं ठीक नरेंद्र भाई मोदी की तरह लेकिन धूम है कि मचने का नाम ही नहीं ले रहा। आज रामलीला मैदान में मोदी की जैसी धूम मची गब्बर की खोपड़ी हिल गई और प्रेस कोन्फ्रेंस में साफा की जगह मफ़लर आ गया। एक मूर्ख आपिया चीखते हुए चिल्लाते हुए पता नहीं गब्बर को या किसी और को  नसीहतें दिये जा रहा था तो वहीं उसका पालतू कुत्ता आराम से सोफ़े पर बैठ के लोटा पर पूंछ फेर रहा था। मैंने आपिए से पूछा "...कुछ ज्यादा परेशानी हो गई क्या ...?" आपिया सकपका गया और परेशानी छिपते हुए बोला "...हमे क्यों परेशानी होगी हम तो ईमानदार हैं जी ..." मैंने कहा "...फिर चीख क्यों रहे हो कहीं कुत्ता काट लिया तो ...? आपिया बोला "...वो नहीं काटेगा ..." मैंने आश्चर्य से पूछा "...इतना यकीन कैसे ...?" आपिया उत्तर देते हुए बोला "...इसका फार्मूला तो केवल मेरे पास है किसी और के पास नहीं ...." मैंने गाजोधर को याद किया और बोला "...अच्छा ! मुझे पता है तुम्हारे पास फार्मूला है, तुझे पता है तुम्हारे पास फार्मूला है कुत्तवा को थोड़े न पता है तुम्हारे पास फार्मूला है ..." इस पर मूर्ख आपिया माथा खजुआते हुए बोला "...शायद आपका कहना सही है कुत्ते को मेरा फार्मूला नहीं मालूम..." मैंने उससे पूछा "...आपके विरोधी तो ऐसे नहीं चीखते ..." मूर्ख आपिया बोला "...विरोधियों के पास मुद्दा ही नहीं है ..." मैंने उससे पूछा "...कैसे पता ? लोटा फेंक के पता किए थे क्या ...?" आपिया बोला "...मुद्दा होता तो वही करते ..." मैंने कहा "...लेकिन परेशानी है तभी चीख रहे हो वैसे भी मुद्दा था तभी भीड़ थी आज मैदान खचाखच भरा था ..." इस पर आपिया बिगड़ गया और चीखते हुए फिर बोला "...केजरीवाल को कोई नहीं हरा सकता ..." मैंने आराम से कहा "...कुतुब मीनार पर अकेले हो ?...आराम से ..." आपिया बोला "...हम यहा सत्ता के लिए नहीं राजनीति बदलने आए हैं ..सब हमारी नकल करते हैं ..." मैंने कहा "..त्रिपुंड से साफा तक का नौ नोमिनाशन होते हुए सफर  ...?" आपिया फिर सकपका गया बोला  "...नकल का सवाल ही नहीं ..." मैंने उससे पूछा "...कुतुब मीनार से आवाज आती है..?" इस आपिया फिर गरमा गया बोला "...आप मुद्दे से भटक रहे हैं ..." मैंने पूछा "...तो आप मुद्दे का लोटा लटका रहे हैं...?" आपिया कुछ बोल नहीं रहा था।   

No comments:

Post a Comment