Tuesday, 9 December 2014

हालांकि ये इतना संवेदनशील विषय है कि मेरी लिखने की इच्छा बिलकुल नहीं थी लेकिन मूर्ख आपिए और उनका महामूर्ख बास की हरकतों ने लिखने पर विवश कर दिया है ...

यूं ही नहीं आपियों को मूर्ख और जरीवाल को महामूर्ख कहा जाता है ...

कभी मूर्ख आपियों ने अपने महामूर्ख बास जरीवाल के इशारे इस मुद्दे पर मोमबत्ती-मार्च निकाल कर लोगों को अप्रैल-फूल बनाने का प्रयास किया है कि जो पियक्कड़ नशे में धुत हो कर सड़क पर ऐश फरमाते हैं उनका सब कुछ क्यों लुट जाता है ? उसका जेब में रखा रुपया - पैसा सब कुछ लूट लिया जाता और वो धुत नशे में सड़क के किनारे पड़ा रहता है ...दिल्ली में ये नजारा आम है ...टैक्सी में यात्रा करने वाली लड़की यदि शाम से देर रात तक नशा नहीं कर रही होती तो दिल्ली के आम जनता की पूरी सहानुभूति उसके साथ होती। लेकिन अपराध तो अपराध है जो नहीं होना चाहिए लेकिन पुलिस काम अपराध के पहले नहीं बाद में शुरू होता है और उसने पूरी मुस्तैदी दिखते हुए अपराधी को पकड़ लिया। एक आपिया चिल्ला रहा था "...दिल्ली में महिलाएं दारू पीने के बाद भी सुरक्षित नहीं हैं ..." मैंने उससे कहा "...तो गब्बर केजरीवाल के घर जा कर हल्ला करो ..." इस पर मूर्ख आपिया सकपका गया बोला "...नहीं हम यहीं हल्ला बोलेंगे..." मैंने उससे पूछा "...क्यों ??? अपराधी तो पकड़ा जा चुका है ...! " मूर्ख आपिया बोला "...तो क्या हुआ हमे लगता है जो कुछ हुआ उसके लिए सरकार दोषी है ..." मैंने कहा "...अगर सरकार दोषी है तो इसके लिए महामूर्ख केजरीवाल को फांसी पर लटका देना चाहिए ..." ये सुनते ही मूर्ख आपिया भड़क गया और गुस्से में बोला "...दोष है सरकार का तो फांसी पर केजरीवाल क्यों लटकेंगे ...?" मैंने आराम से उत्तर देते हुए कहा "... क्योंकि कभी केजरीवाल पियक्कड़ों की लूट के खिलाफ कभी आवाज नहीं उठाई और इसीलिए इस तरह के अपराध बढ़ रहे हैं जिसके लिए सीधे महामूर्ख केजरीवाल जिम्मेदार है ...समझे मूर्खाधिराज ..." इसपर वो मूर्ख आपिया ज़ोर-ज़ोर से अपना कपार खजुआने लगा बहुत देर तक खजुआने के बाद सफाई देते हुए बोला "...कॉंग्रेस वाले भी तो धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं ..." मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...जैसा गुरु वैसा चेला ...पीए दारू मारे ढेला ..." आपिया फिर कनफ्यूज़ हो गया और मुझसे पूछा "...आपके कहने का क्या मतलब है ...?" मैंने उसका उत्तर देते हुए कहा "...मतलब यही कि दारू में ढेलाबाजी और नारेबाजी दोनों का कोई मतलब नहीं ...?" "...लेकिन इस घटना के लिए सरकार जिम्मेदार है ..." उसने फिर वही रट लगाई तो मैंने उसे डांटते हुए कहा "...तो क्या टैक्सी में उसके साथ कोई पुलिस वाला आता या होममिनिस्टर को आना चाहिए था मूर्ख कहीं के ...?  इस पर मूर्ख आपिया टोपी उतार कर कपार खजुआते हुए चुप हो गया....    

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